27/12/2021
There is one life (Post-3)
हमने हे़ल्थ की बात की करते जायेंगे ....ठीक है| पर यह हे़ल्थ होती क्या है? हम बात WHO (World Health Organization) थोड़ी सी करेंगे- विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार- Health is "a state of complete physical, mental and social well-being and not merely the absence of disease and infirmity". मतलब कि ऐसी अवस्था जहाँ किसी भी सूरत में शरीर और मन में कोई समस्या नहीं हो और समाज में लोगों के बीच सामाजिक रूप से आचरण करे तो वह स्वस्थ है |
आयुर्वेद के अनुसार स्वास्थ्य की परिभाषा
आयुर्वेद मे स्वस्थ व्यक्ति की परिभाषा इस प्रकार बताई है-
समदोषः समाग्निश्च समधातु मलक्रियाः।प्रसन्नात्मेन्द्रियमनाः स्वस्थः इत्यभिधीयते ॥
( जिस व्यक्ति के दोष (वात, कफ और पित्त) समान हों, अग्नि सम हो, सात धातुयें भी सम हों, तथा मल भी सम हो, शरीर की सभी क्रियायें समान क्रिया करें, इसके अलावा मन, सभी इंद्रियाँ तथा आत्मा प्रसन्न हो, वह मनुस्य स्वस्थ कहलाता है )।
यहाँ 'सम' का अर्थ 'संतुलित' ( न बहुत अधिक न बहुत कम) है।
इसके हिसाब से तो दुनिया में कोई भी ठीक नहीं है | यह बात अलग है कि किसी भी चीज कि परिभाषा आइडियल ही बनाई जाती है|
बड़ा सवाल यह है कि अब आम आदमी क्या करे-
तो सुनिए और अपने आप से पूछिए- हाँ अपने आप से पूछना बड़ा आवश्यक है|
क्या आप स्वस्थ हैं? पूछो किसी और से नहीं अपने आप से पूछो- आपको पूछना पड़ेगा...जिस अगली पीढ़ी के लिए भागदौड चल रही है ना, उस पर बोझ बन जाओगे यदि हे़ल्थ ठीक नहीं रही तो......
यदि सीधा सीधा दिख रहा है कि बीमार हो तो अलग बात है ......मतलब डायबिटीज है, हायपर टेंसन है, लीवर कि समस्या है, घुटनों का दर्द है | फिर तो देखो थोडा दवाओं के साथ ही बात बनेगी|
पर जो सीधे तौर पर बीमार नहीं है| मुगालते में ज्यादा रहते है|
दोस्तों यह सामान्य सी बात है पर याद दिलाना जरुरी है – जीवन का हमारा हर प्रयास आनंद के लिए होता है | पर स्वास्थ्य कि कीमत पर कुछ क्षणिक आनंद आता है तो वह आपके काम का कम होगा डॉक्टरों की जेबें भरने के लिए ज्यादा होगा | स्वास्थ्य कोई नसीब की बात नहीं है, प्रयास करना पड़ता है इसे भी पाने के लिए – रुक जाओ थम जाओ और सोचो स्वास्थ्य के बारें में|
“अंगुलियां बेचकर अंगूठी कमाना कोई समझदारी नहीं है “ अंगूठी तो अंगुली में ही आनंद देती है|
नींद बेचकर कुछ पा भी रहे हो ......तो क्या पाना |
यह सम्भव है कि आप स्वयं को स्वस्थ समझते हों, क्योंकि आपका शारीरिक रचनातन्त्र ठीक ढंग से कार्य करता है, फिर भी आप विकृति की अवस्था में हो सकते हैं अगर आप असन्तुष्ट हों, शीघ्र क्रोधित हो जाते हों, चिड़चिड़ापन या बेचैनी महसूस करते हों, गहरी नींद न ले पाते हों, आसानी से फारिग न हो पाते हों, उबासियाँ बहुत आती हों, या लगातार हिचकियाँ आती हो, इत्यादि।