प्रो. वैद्य राकेश कुमार

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प्रो. वैद्य राकेश कुमार युक्तिव्यपाश्रय (Ayurvedic) सत्त्वावजय (Spiritual) दैवव्यपाश्रय (Medical Palmist-astrologer) चिकित्सक

21/02/2025

Acne

21/02/2025

Acne/pimples

21/02/2025

Dandruff

21/02/2025

गृघ्रसी/Sciatica

21/02/2025

युवानपिडिका/मुखदूषिका/Acne vulgaris/pimples

21/02/2025

एककुष्ठ रोग / सोरायसिस

21/02/2025

सफेद दाग/Leucoderma/Vitiligo

------------------------------------------------------PUVA (Psoralen + UV-A) therapy  ( सफेद दाग एवं सोरायसिस का इलाज )आ...
19/01/2023

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PUVA (Psoralen + UV-A) therapy
( सफेद दाग एवं सोरायसिस का इलाज )
आयुर्वेद चिकित्सा सिद्धान्त की एक नकल
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हजारो साल पहले आयुर्वेद में श्वेत कुष्ठ के इलाज हेतु बाकुची चूर्ण (psoralia corylifera) का local application एवं मुखसेवन का जिक्र किया गया है उसके बाद धूपसेवन का भी प्रयोग बताया गया है।
इसी सिद्धान्त की नकल आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की PUVA therapy है।

1. धर्मसेवी कदुष्णेन वारिणा वागुजीं पिबेत्। ( भैषज्य रत्नावली 53/56 )
अर्थात् धर्मसेवी (धूपसेवन करते हुए) बाकुची ( psoralia corylifera ) चूर्ण का सेवन किञ्चित् उष्ण जल के साथ करें।

2. मूलकबीजावल्गुजलेपः पिष्टो गवां मूत्रे
( चरक संहिता कुष्ठ चिकित्सा 7/169 )
तं पूर्वानुमान सुस्निग्धो यथाबलं सूर्यपादसंतापम् । ( चरक कुष्ठ चिकित्सा 7/ 163 )

अर्थात् स्नेहन और विरेचन के पश्चात धूपसेवन करे। बाकुची चूर्ण लेप करें ।

Psoralea corylifolia (Babchi) is an important plant in the Indian Ayurveda. The seeds of this plant contain a variety of coumarins including .

http://en.m.wikipedia.org/wiki/Psoralea_corylifolia

@ MODERN SCIENCE

is a psoralen + UVA ( ultraviolet A ) treatment for eczema, psoriasis, graft-versus-host disease, vitiligo, mycosis fungoides, large-plaque parapsoriasis and cutaneous T-cell lymphoma.
The psoralen is applied or taken orally to sensitize the skin, then the skin is exposed to UVA.

LINK :----- http://en.m.wikipedia.org/wiki/PUVA_therapy

Procedure :---

Psoralens are photosensitizing agents found in plants. Psoralens are taken systemically or can be applied directly to the skin. The psoralens allow a relatively lower dose of UVA to be used. When they are combined with exposure to UVA in PUVA, they are highly effective at clearing psoriasis and vitiligo.
Like UVB light treatments, the reason remains unclear, though investigators speculate there may be similar effects on cell turnover and the skin's immune response.

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Ultraviolet (UV) light is electromagnetic radiation with a wavelength shorter than that of visible light, but longer than X-rays, that is, in the range between approximately 400 nm and 10 nm
The Sun emits ultraviolet radiation at all wavelengths, including the extreme ultraviolet where it crosses into X-rays at 10 nm.

http://en.m.wikipedia.org/wiki/Ultraviolet

जय आयुर्वेद, जय पुरातन विज्ञान ।

Psoralea corylifolia (Babchi) is a plant used in Indian and Chinese traditional medicine. The seeds of this plant contain a variety of coumarins, including psoralen.

प्रतिदिन क्या क्या नही करना चाहिये ???•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••Avoidable Diet & life style (अहितकर आहार-...
02/12/2022

प्रतिदिन क्या क्या नही करना चाहिये ???
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Avoidable Diet & life style (अहितकर आहार-विहार)
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♥ अम्लीय (acidic), ज्यादा नमक (प्रतिदिन आधा चम्मच से अधिक), कटु (सोंठ, मरीच) रस एवं क्षार (Soda) वाला भोजन
♥ सूखा साग, मांस (non-veg), तिल, तिलकल्क, चावल का आटा (चिला, फरा)
♥ विरुढ (अंकुरित धान्य), नया शूकधान्य (यव, गेंहू, धान), नया शमीधान्य (छीमी वाले मटर, उडद, मूंग)
♥ विरुद्ध (दूध के साथ नमकीन/खट्टा), असात्म्य, रुखा, क्षार, अभिष्यन्दी (दही) वाला भोजन
♥ क्लिन्न (चिपचिपा), गुरु (पचने मे भारी), बासी-दुर्गन्धित भोजन
♥ विषमाशन (भोजन का समय fix ना होना), अध्यशन (खाने के तुरन्त बाद फिर से कुछ खाना) करना
♥ दिन मे सोना, मैथुन (S*x), शराब (alcoholic drink) का प्रतिदिन सेवन
♥ विषम रुप (छोड़ छोड़ कर) मे या मात्रा से अधिक व्यायाम (exercise) करना। ... अभी Gym में कई लोगों के मृत्यु का समाचार देखे होंगे।
♥ भय (fear), क्रोध (anger), शोक, लोभ और अत्यधिक परिश्रम (workload) करना
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♥ सर्वे शरीरदोषा भवन्ति ग्राम्याहारादम्ललवणकटुक क्षारशुष्कशाक मांसतिलपललपिष्टान्नभोजिनां ... रोगाणामधिष्ठानभूतो न सर्वमायुरवाप्नोति
(चरक चिकित्सा रसायनाध्याय द्वितीय पाद/३)
श्लोक के शेष अंश को photo में पढ़े …
अर्थात् ऐसा व्यक्ति रोगों का आश्रय हो जाने से अपनी पूर्ण आयु का उपयोग नही कर पाता।
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इसलिये उपरोक्त आहार-विहार (diet & lifestyle) का पूर्ण त्याग कर देना चाहिये।
प्रो. वैद्य राकेश कुमार

प्रतिदिन स्नान से पूर्व अभ्यंग (massage) क्यों ?आयुर्वेदीय दिनचर्या एवं विज्ञान अनुसार स्नान-विधि !•••••••••••••••••••••...
02/12/2022

प्रतिदिन स्नान से पूर्व अभ्यंग (massage) क्यों ?
आयुर्वेदीय दिनचर्या एवं विज्ञान अनुसार स्नान-विधि !
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आधुनिक रिसर्च मे बताया गया है कि प्रतिदिन स्नान करने से त्वचा के तैलीयांश (चिकनाहट) की कमी होने से त्वचा रुक्ष/रुखी हो जाती है, जिससे त्वचा मे धब्बे और शरीर मे दर्द होता है …
आयुर्वेद मे स्नान से पूर्व अभ्यंग (massage) की दिनचर्या बतायी गयी है, इससे त्वचा की चिकनाहट बनी रहती है, ये दिनचर्या पूर्णतः वैज्ञानिक निकली …
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आयुर्वेदिक अभ्यंग-स्नान-वात-त्वचा का संबंध समझे :
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आयुर्वेद में वात के स्थान निम्न बताये गये है :
पक्वाशयकटिसक्थिश्रोत्रास्थि स्पर्शनेन्द्रियम्। … अर्थात् पक्वाशय (large intestine), कटि (कमर), कान, अस्थि, स्पर्शेन्द्रिय (त्वचा) आदि…
ठंड़ी मे शीत एवं प्रतिदिन स्नान से चमड़ी की चिकनाहट कम होने से रूखापन बढ़ता है … और रुखापन से वात (शरीर मे दर्द, चमड़ी रोग) बढता है …
प्रतिदिन स्नान करने से पहले अभ्यंग (oil massage) नही करते है, तो शरीर मे चकत्ते या शरीर के वातस्थानो (त्वचा, कमर, joints, ears आदि) मे दर्द होंगे।
इसलिये इन स्थानों पर वातनाशक सर्वश्रेष्ठ द्रव्य (तैल) का आभ्यान्तर (internal) या बाह्य (external) प्रयोग जरुर करना चाहिये।
यहीं बात अब आधुनिक research मे सामने आया है, जिसे हजारों साल पहले आयुर्वेद ने बता दिया था।
प्रो. वैद्य राकेश कुमार

आपको जानकर हैरानी होगी कि हर रोज नहाना भी हमारी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है बीते दिनों हुए एक रिसर्च में कहा गया ह...

 #माजूफल    •••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••* उत्पत्ति स्थान :  ग्रीस, एशिया माइनर, सीरिया, ईरान ...
02/12/2022

#माजूफल
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* उत्पत्ति स्थान : ग्रीस, एशिया माइनर, सीरिया, ईरान आदि ... चिरकाल से भारत में इसका आयात हुआ है ...

* पर्याय : मायाफल, माजू, मायफल, मायुं, Magic nuts, Gall tree आदि ...

* स्वरुप : माजूफल के पेड़ पर जब cynips galloe tinctorioe नामक मक्खी छेद करके अपने अण्डे रखती है ... तब वृक्ष की उत्तेजना से छिद्र से निकला हुआ वृक्षरस उन अंडो को चातो ओर से घेर लेता है ... तब gall अस्तित्व मे आता है ... इसी gall के अंदर से अण्डे रुपान्तर करते हुये पंखों वाली मक्खी बनकर छिद्र करते हुये बाहर निकल जाते है ... वृक्षरस से बने उसी मक्खीगृह को `माजूफल' कहते है ...

* गुणवत्ता : मक्खी निकलने से पहले एकत्र किया हुआ माजूफल उत्तम होता है ... यही काले रंग का होता है ... मक्खी निकलने से छिद्र हुआ माजूफल, सफेद एवं गुण मे न्यून होता है ...इसमे tannic acid 50-70% & Gallic acid 3% होता है ..

* मात्रा : 250 mg से 1 gm तक

* गुण एवं उपयोग : कषाय, शीतवीर्य, कटुविपाक, कफ-पित्त नाशक
• मायाफलं वातहरं कटूष्णकम् ।
शैथिन्यसंकोचककेशकाष्णर्यकरम्।।
• शोणितस्त्रुतिहृत् हन्ति मुखदन्तगतान् गदान्।
श्वेतप्रदरमर्शांसि योनिकन्दं सुदारुणम् ।।
• अतीसारं महाघोरं ग्रहणीं सप्रवाहिकाम् ।
१. श्वेतप्रदर (योनिस्त्राव/Leukorrhea) : चूर्ण का मुखसेवन एवं इसके फांट (चाय की तरह उबला हुआ) की उत्तरबस्ति
२. गुदभ्रंश, गुदव्रण एवं योनिभ्रंश : शुभ्रा (फिटकिरी)+ अन्य के साथ पोट्टली बना गुद/योनिधारण, फांट की बस्ति/उत्तरबस्ति
३. रक्तस्त्राव युक्त व्रण (घाव) : शुभ्रा + अन्य के साथ internal & external
४. गलग्रन्थिप्रदाह (Tonsillitis): फांट/काढ़ा बनाकर फिटकिरी + टंकण डालकर कुल्ला कराना/ या कर्पूरधारा के साथ लेप लगाना
५. दंतरोग : दांतों को मजबूत करना, मसूड़ों से खून बहने, बदबू आने में एवं दन्त मंजनों मे ...
६. वृषणवृद्धि/अंडवृद्धि : अश्वगंधा के साथ जल मे घिसकर गरम-लेप
७. आमातिसार, रक्तातिसार, नाक से खून गिरने मे, घावो एवं बवासीर के मस्सो के लिये मलहम बनाने मे

वैज्ञानिक शोध (Research) संबंधित लिंक :
https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/?term=Quercus+infectoria

माजूफल से संबंधित अनेक योग/मलहम हरिशंकर आयुर्वेद औषधालय (https://www.facebook.com/HarishankarAyurvedaAushdhalaya/) मे उपलब्ध है ...
इससे संबंधित अन्य अनुभव या जानकारी वैद्यगणों सहित आप भी साझा कर सकते है ...
प्रो. वैद्य राकेश कुमार

`घर-घर का वैद्य' अमृतधारा/कर्पूरधारा/आरोग्यधारा•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••अमृतधारा बनाने की ...
02/12/2022

`घर-घर का वैद्य' अमृतधारा/कर्पूरधारा/आरोग्यधारा
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अमृतधारा बनाने की विधि :
एक साफ शीशी में देशी कपूर 10 ग्राम, अजवायन के फूल(सत) 10 ग्राम तथा पोदीना/पिपरमिन्ट के फूल(सत) 10 ग्राम बारी-बारी से हल्का पावडर करके डालते जाये। इन तीनों के मिलते ही मिश्रण तुरन्त ही तरल रूप मे आकर अमृतधारा बन जाता है।
इस मिश्रण मे कई वैद्य अलग से 2 ग्राम लौंग का तेल भी मिलाते है, जिससे अमृतधारा और ज्यादा प्रभावी बन जाता है।

1. नई दुनिया, रायपुर, रविवार 28 अप्रैल 2019
https://naiduniaepaper.jagran.com/mpaper/28-apr-2019-49-edition-Bhilai-Page-1.html

2. आज की जनधारा दैनिक

3. हरिभूमि, 1 मई, रायपुर-इस्पात भूमि
https://www.haribhoomi.com/full-page-pdf/epaper/raipur-ispat-bhumi/2019-05-01/raipur-ispat-bhoomi/1353
प्रो. वैद्य राकेश कुमार

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