13/10/2021
पीसीओएस (PCOS/PCOD) क्या है?
पॉलीसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम (Polycystic O***y Syndrome, PCOS) एक ऐसी स्थिति है जिसमें महिलाओं के सेक्स हॉर्मोन्स एस्ट्रोजन (Estrogen) और प्रोजेस्टेरोन (Progesterone) का संतुलन बिगड़ जाता है। इससे अण्डाशयी सिस्ट (Ovarian Cyst)* बन जाती है। पीसीओएस एक महिला के मासिक धर्म चक्र, प्रजनन क्षमता, हृदय की कार्यवाही और रूप-आकार को प्रभावित कर सकता है। पॉलीसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम महिलाओं में होने वाला एक प्रचलित अंत: स्रावी विकार है और आजकल प्रजनन क्षमता में कमी होने के मुख्य कारणों में से एक है।
यह परेशानी मुख्य रूप से 15 से 30 वर्ष की उम्र की महिलाओं में ज़्यादा पाई जा रही है। भारत में लगभग 5 में से 1 महिलाएं पीसीओएस से पीड़ित हैं। फिर भी इस परेशानी के बारे में जागरूकता न के बराबर है और महिलाएं कई वर्षों तक इसका निदान नहीं करवातीं। ये सिस्ट नहीं होतीं बल्कि कई छोटे अंडे होते हैं जो अभी तक परिपक्व (Mature) नहीं हुए और अल्ट्रासाउंड में अंडाशय पर नज़र आते हैं। यदि मरीज़ के शरीर में पर्याप्त हॉर्मोन्स नहीं बनते, तो अंडे परिपक्व नहीं हो पाते। जब तक अंडे विकसित और परिपक्व नहीं होते, तब तक ओवुलेशन (Ovulation; अंडाशय में अंडे बनना) और गर्भधारण नहीं हो सकता।
लक्षण शुरुआत में हलके ही होते हैं, आप में कम से कम लक्षण भी हो सकते हैं और लक्षण अत्यधिक भी हो सकते हैं, सबसे आम लक्षण हैं: मुँहासे वज़न बढ़ना या वज़न घटाने में परेशानी चेहरे और शरीर पर अत्यधिक बाल, अक्सर महिलाओं के चेहरे, पेट, नाभि और पीठ पर मोटे और काले बाल हो जाते हैं, सिर के बाल झड़ना, मासिक धर्म में अनियमितता, प्रजनन क्षमता में परेशानियां, हालांकि यह परेशानियां पीसीओएस के कारण ही हो रहीं हैं, ऐसा आवशयक नहीं है।
पीसीओडी (पीसीओएस) के कारण - पीसीओएस का असल कारण अज्ञात है हालांकि डॉक्टर मानते हैं कि इसमें हॉर्मोनल असंतुलन और आनुवांशिक परेशानियां खास भूमिका निभाते हैं। जिन महिलाओं की माँ या बहन को पीसीओएस की परेशानी रह चुकी है उनमें यह स्थिति विकसित होने की अधिक संभावना होती है।
एण्ड्रोजन (Androgen) हॉर्मोन का अतिउत्पादन भी एक कारक हो सकता है। एण्ड्रोजन एक पुरुष सेक्स हॉर्मोन है जो महिलाओं के शरीर में भी उत्पन्न होता है। पीसीओएस से ग्रस्त महिला में अक्सर सामान्य से ज़्यादा स्तर में एण्ड्रोजन का उत्पादन होता है। यह ओव्यूलेशन (Ovulation) के दौरान अंडे के विकास और रिलीज को प्रभावित कर सकता है। अतिरिक्त इंसुलिन (एक हार्मोन जो शर्करा और स्टार्च को ऊर्जा में बदलने में मदद करता है) अधिक एण्ड्रोजन स्तर का कारण हो सकता है।
पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं में निम्न परेशानियां होने का जोखिम ज़्यादा होता है: प्रजनन क्षमता में कमी (Infertility), हाई बीपी(उच्च रक्तचाप), उच्च कोलेस्ट्रॉल, चिंता और सोते समय सांस लेने में परेशानी (Sleep Apnea, स्लीप एप्निया), एंडोमेट्रियल कैंसर (Endometrial Cancer) दिल का दौरा, मधुमेह, स्तन कैंसर (Breast Cancer, ब्रैस्ट कैंसर)
होम्योपैथी द्वारा PCOS का इलाज संभव है:
होम्योपैथी बीमारी के मूल कारण पर केंद्रित है और हार्मोनल असंतुलन को ठीक करने के लिए काम करता है, ओव्यूलेशन को नियमित करने के साथ-साथ मासिक धर्म को सामान्य करता है। होम्योपैथी एक व्यक्तिगत उपचार है और इसलिए प्रभावी रूप से असर करता है और PCOS के जुड़े लक्षणों का प्रभावी ढंग से इलाज करने में मदद करता है।
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें, डॉ अंजलि मगरैया (BHMS), 46 ओल्ड MLA क्वाटर्स, जवाहर चौक न्यू मार्केट भोपाल, 9039115571