24/05/2018
विधान सभा चुनावों में राजनैतिक दलों के घोषणा पत्रों में बच्चो के मुद्दों पर विमर्श
चाइल्ड राइट्स ऑब्जर्वेटरी मध्य प्रदेश ने आज प्रदेश के बिभिन्न राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों की एक बैठक आयोजित की जिसमे बच्चों के मुद्दों को अगामी विधान सभा चुनाव के घोषणा पत्रों में शामिल करने पर व्यापक विचार विमर्श हुआ. कार्यक्रम के प्रारंभ में चाइल्ड राइट्स ऑब्जर्वेटरी की अध्यक्ष श्रीमती निर्मला बुच ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि बच्चों के मुद्दों को राजनैतिक दलों, सरकार और समाज की प्राथमिकताओं में लाना आवश्यक है और आज का यह कार्यक्रम इसी बात को ध्यान में रखते हुए आयोजित किया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि आज के कार्यक्रम में प्राप्त सुझावों को संगृहित कर सभी राजनैतिक दलों को घोषणा पत्र में शामिल करने के लिए भेजा जाएगा और राजनैतिक दल इस सम्बन्ध में जो सहयोग चाहेगें वह चाइल्ड राइट्स ऑब्जर्वेटरी द्वारा दिया जाएगा. चुनाब के पश्च्यात हम सब मिलकर बच्चों से जुड़े मुद्दों की माइक्रो और मेक्रो लेवल पर निगरानी करेगें ताकि किये गए वादों का सफल क्रियान्वयन हो और प्रदेश बच्चों के संधर्भ में बहतर बने.
कार्यक्रम के प्रारंभ में यूनिसेफ के शिक्षा विशेषज्ञ, श्री एफ.ए जामी ने प्रदेश की प्रारंभिक शिक्षा पर केन्द्रित एक प्रस्तुतीकरण करते हुए बताया कि शिक्षा के क्षेत्र में काफी काम होने के बावजूद अभी शिक्षकों की कमी, उनके प्रशिक्षण, एकल शिक्षक स्कूल और उन्हें गैर-शिक्षकीय कार्यों में लगाये जाने जैसी समस्याएं हैं जिन पर काम किया जाना जरूरी है. यूनिसेफ की स्वास्थ विशेषज्ञ डॉ. वंदना भाटिया ने प्रदेश में स्वास्थ के मुद्दों पर चर्चा करते हुए बताया कि प्रदेश में जन्म से एक माह के अन्दर 32 प्रति हजार नवजात शिशुओं और जन्म से एक बर्ष के अन्दर 47 प्रति हजार शिशुओं की मौत हो जाती है. डॉक्टर भाटिया ने यह भी वताया कि जन्म से एक घंटे के अन्दर नवजात शिशु को माँ का दूध मिलने और सम्पूर्ण टीकाकरण में सुधार के लिए और भी अधिक प्रयास ज़रूरी हैं साथ ही नवजात शिशु म्रत्यु दर पर नियंत्रण के लिए मातृ सुरक्षा देखभाल भी आवश्यक है. यह ऐसे मुद्दे हैं जिन पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है. यूनिसेफ के संचार विशेषज्ञ श्री अनिल गुलाटी ने कहा कि इस बार राजनैतिक दलो चुनाब में बच्चों के मुद्दों पर वोट मांगे.
विशेषज्ञों के प्रस्तुतीकरण के पश्चात् बिभिन्न राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों ने चुनाब घोषणा पत्रों में शामिल किये जाने के लिए अपने सुझाब दिए. भारतीय जनता पार्टी की और से स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री श्री दीपक जोशी ने कहा कि सरकार ने शिक्षा और स्वास्थ की दिशा में उल्लेखनीय काम किये हैं जिससे इनसे सम्बंधित संकेतांक बहतर हुए हैं श्री जोशी ने आश्वस्त किया की इस कार्यक्रम के माध्यम से जो सुझाब मिलेगें उन्हें बीजेपी के घोषण पत्र में शामिल करेंगे. लोकतान्त्रिक समाजवादी दल के श्री रघु ठाकुर ने कहा कि सभी बर्गों के लोगों को एक ही सामान शिक्षा मिलना चाहिए.
काँग्रेस पार्टी के और से पुर्व मंत्री श्री राजा पटेरिया ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ से बडा कोई व्यपार नहीं है. इन क्षेत्रों में निजीकरण पर सख्ती से रोक लगाई जाए. सी.पी.आई के सचिव श्री शेलेन्द्र शैली ने सुझाब दिया कि शिक्षा और स्वास्थ का बजट बढ़ाया जाए और रिक्त पद भरें जाएँ. सी.पी.आई.एम के श्री बादल सरोज ने कहा कि बच्चों के नाम पर वोट नहीं मांगे जाते हैं, बच्चों को चुनाबी एजेंडा में लाने और उस पर पालन करने की आवश्यकता है. आम आदमी पार्टी की प्रतिनिधि सुश्री चितरूपा पालित ने कहा कि बालिकाओं के स्कूल दूर होने के कारण बालिकाएं पढ़ने नहीं जाती, उन्होंने इस बात पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश के कई हिस्सों में बेटियों को पैदा ही नहीं होने दिया जा रहा है.इस बारे में चेतना लाना भी हमारी जिम्मेदारी होना चाहिए. काँग्रेस की और से पूर्व विधायक श्री पी. सी शर्मा, काँग्रेस की प्रवक्ता सुश्री संगीता शर्मा और भाजपा के श्री अनिल सोमित्र ने भी सुझाब दिए. कार्यक्रम में भोपाल के सामाजिक संगठनों की और से श्रीमती अंजली नरोहना,श्रीमती उपासना बेहर, श्री राकेश दीवान और श्री राजेन्द्र कोठारी ने बच्चों से जुड़े मुद्दों पर सुझाब दिए.
सभी राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों ने आश्वस्त किया कि वे आज की बैठक में बच्चों के मुद्दों विशेषकर नवजात शिशु देखभाल, शिशु एवं बाल मृत्यु, बाल विवाह,शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षकों की उपलब्धता, बच्चों की सुरक्षा और स्वछता आदि पर जो सुझाब प्राप्त होंगे उन्हें चुनावी घोषण पत्र में शामिल करेगें.