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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21/06/24
24/06/2024

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21/06/24

** # #*_ *अनुलोम विलोम* _* # #**  अनुलोम का अर्थ होता है सीधा और विलोम का अर्थ है उल्टा यहां पर सीधा का अर्थ है नसीका का...
19/05/2021

** # #*_ *अनुलोम विलोम* _* # #**
अनुलोम का अर्थ होता है सीधा और विलोम का अर्थ है उल्टा यहां पर सीधा का अर्थ है नसीका का दाहिना क्षेत्र और उल्टे का अर्थ है नसीका का बायाँ क्षेत्र अर्थात अनुलोम विलोम प्राणायाम में नाक के दाएं छिद्र से सांस खींचते हैं और नाक के बाएं छिद्र से सांस बाहर निकालते हैं इसी तरह यदि नाक के बाएं छिद्र से सांस खींचते हैं तो नाक के दाहिने छिद्र से सांस को बाहर निकालते हैं अनुलोम विलोम प्राणायाम को *नाड़ी शोधन प्राणायाम* भी कहते हैं इसके नियमित अभ्यास से शरीर की समस्त नाड़ियों का शोधन होता है यानी वे स्वच्छ व निरोग बनी रहती हैं।
*विधि* --
इस आसन को करने के लिए सबसे उचित समय सुबह खाली पेट होता है जमीन पर पद्मासन या सिद्धासन या वज्रासन में से किसी भी आसान की स्थिति में बैठ जाएं (इसमें पद्मासन सबसे उत्तम माना जाता है)
बाएं हाथ को घुटने पर टिका कर इस हाथ से चिन मुद्रा बना लें दाहिने हाथ के अंगूठे से दाहिने नथुने को बंद करें और बाएं नथुने से धीरे धीरे सांस छोड़ें अब दाहिने नथुने से सांस लेकर इसे बाएं नथुने से धीरे धीरे छोड़े इस प्रकार एक चक्र पूर्ण हुआ।

प्रतिदिन 10 मिनट तक इसका अभ्यास सुबह या शाम खाली पेट कर सकते हैं सुबह 5 से 10 बार इसका अभ्यास नियमित रूप से करना चाहिए।

अनुलोम विलोम प्राणायाम में हम शुद्ध वायु भीतर लेते हैं और दूषित वायु बाहर निकालते हैं इससे रक्त की शुद्धि होती है।
*अनुलोम विलोम के लाभ*
1.सर्दी-जुकाम,खांसी,दामा की शिकायतों से काफी हद तक बचाव होता है फेफड़े शक्तिशाली होते हैं
2.पूरे शरीर मे शुद्ध ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाता है।
3.हृदय बलवान होता है।
4.पाचन तंत्र को दुरुस्त होता है।
5.सभी प्रकार की एलर्जी जड़ से खत्म हो जाती है
6. डायबिटीज पूरी तरह मिट जाती है।
7.साइनस की समस्या ठीक हो जाती है।
8.सभी प्रकार के चर्म रोग मिट जाते हैं
9.याददाश्त बढ़ती है।
10.उच्च रक्त चाप ओर निम्न रक्त चाप की समस्या में लाभ होता है।
*सावधानियाँ*
1.श्वास क्रिया ध्वनिरहित होनी चाहिए।
2.दोनों नासिका छिद्रों से बराबर लय बनाते हुऐ श्वांस लें।
3.सीना कम ज्यादा न फुलाएं।
4.खाली पेट ही प्राणायाम करें। भोजन करने के बाद 4 से 5 घंटे के अंतराल से करें।
# #$स्वस्थ रहें मस्त रहें$ # #
योग प्रशिक्षक-सोना अवस्थी*
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 # #*नाड़ी शोधन प्राणायाम* # #  यहां नाड़ी शोधन का तात्पर्य नाड़ियों के शुद्धिकरण से है शरीर की तंत्रिका प्रणाली में किस...
19/05/2021

# #*नाड़ी शोधन प्राणायाम* # #
यहां नाड़ी शोधन का तात्पर्य नाड़ियों के शुद्धिकरण से है शरीर की तंत्रिका प्रणाली में किसी भी प्रकार का विरोध उत्पन्न होने से तरह-तरह के शारीरिक व्यवधान उत्पन्न होते हैं योग से संबंधित हमारे कई ग्रंथों में नाड़ियों के शुद्धिकरण हेतु प्राणायाम का वर्णन किया गया है जैसे शिव संहिता हठयोग प्रदीपिका घेरंड संहिता आदि।
पूरी क्रिया की सफलता का श्रेय आपकी एकाग्रता और सजगता को जाता है परंतु नाड़ी शोधन प्राणायाम का विशेष ख्याल रखा जाए तो बाकी के प्राणायाम से ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाया जा सकता है प्राणायाम का लाभ तो हमें शुरू से ही मिलने लगता है।
हमे इसमें दृढ़ निश्चय की आवश्यकता होती है इसकी ऊर्जाओ को अति संवेदनशीलता,एकाग्रता और सूक्ष्मता के साथ श्वास-प्रश्वास को स्थिरता प्रदान करने या अनुशासित करने के लिए प्रवाहित करना होता है। ताकि श्वास,प्राण और मस्तिष्क को आध्यात्मिक बनाया जा सके।
सभी प्राणायाम में नाड़ी शोधन प्राणायाम सबसे अधिक संवेदनशील जटिल और सूक्ष्म है
#$स्वस्थ रहें मस्त रहें$ #
योग प्रशिक्षक-सोना अवस्थी

18/05/2021

🏃 # #*योग करें निरोग रहें* # #🧎🏻
वर्तमान वैश्विक महामारी से स्वयं और अपने परिवार को सुरक्षित रखने के लिये श्वास संबंधी प्राणायाम को रोज करने की नितांत आवश्यकता है
प्रतिदिन कुछ समय स्वयं को स्वस्थ रखने के लिए दीजिये।
जिस तरह से हमने मास्क को अपनी जीवन शैली में शामिल किया है उसी तरह हम योग को भी शामिल करें।
# # #$ #$ # # #

 #योगासन:  #कुर्सी  #योगाकुर्सी योगा, योगा का ही एक प्रकार है जो कि कुर्सी पर बैठ कर किया जाता है। कुर्सी योगा कई घंटों ...
22/04/2020

#योगासन: #कुर्सी #योगा

कुर्सी योगा, योगा का ही एक प्रकार है जो कि कुर्सी पर बैठ कर किया जाता है। कुर्सी योगा कई घंटों तक ऑफिस में बैठकर काम करने वालों के लिए बहुत ही उपयोगी है।

कुर्सी योगा करने का तरीका –

हाथ और भुजाओं के लिए -

- सबसे पहले कुर्सी पर सीधे होकर बैठ जाइए। उसके बाद सांस को अंदर खींचते हुए अपने कानों की सीध में हाथों को आगे की ओर ले जाकर कसकर पकड लीजिए।

- अपने कंधों को एक दूसरे की विपरीत दिशा में दबाव दीजिए। दबाव इतना हो कि आपके कंधों और सीने में खिंचाव महसूस हो।

- इस क्रिया को कम से कम 5 बार दोहराईए। यह ध्यान रहे कि सांसों को गहराई से अंदर-बाहर कीजिए।

फायदा –

- हाथों को आराम मिलता है। गर्दन का दर्द समाप्त होता है।

- सिर, गले और हाथों में खून का संचार बढता है।

- इससे कंप्यूटर पर लगातार काम करने वालों की उंगली को राहत मिलती है।

पसली में खिंचाव (साइड स्ट्रेच) के लिए -

- कुर्सी पर सीधे बैठकर, सबसे पहले अपने दाहिने हाथ को सिर के ऊपर की तरफ ले जाइए।

- आराम से गहरी सांस लीजिए।

- बाएं हाथ को कमर पर रखकर दबाव डालिए।

- सांसों को बाहर करते हुए दाहिने हाथ को बाएं हाथ की तरफ ले जाइए।

- इस स्थिति में 3 से 5 बार गहरी सांस लीजिए। उसके बाद सामान्य स्थिति में आ जाइए।

- अगर दाहिने पसली में दर्द है तो यही क्रिया बाएं हाथ से कीजिए।

फायदा -

- इस क्रिया से सीना, कंधा, रीढ की हड्डी को आराम मिलता है।

- यह योगा तंत्रिका तंत्र को उत्तेजित करता है, जिससे शरीर में ऊर्जा का संचार होता है।

रीढ की हड्डी में खिंचाव के लिए -

- कुर्सी पर सीधे होकर बैठ जाइए। अब अपने दाहिने पैर को बाएं पैर के ऊपर रख लीजिए।

- अब अपने बाएं हाथ को बाएं पैर के घुटने के नीचे रख लीजिए।

- गहरी सांस लेते हुए अपने बांए हाथ को सिर पर रखिए।

- अब सिर को दाहिनी भुजा की तरफ दबाइए। इस क्रिया को दाहिने हाथ से भी कीजिए।

- 3 से 5 बार इस क्रिया को दोहराइए।

फायदा -

- इस योगा को करने से रीढ की हड्डी का दर्द और तनाव समाप्त होता है।

- यह योगा तंत्रिका तंत्र को आराम देता है।

कुर्सी योगा करने के कई फायदे हैं। इस आसन को कम समय और काम के साथ शरीर को तनाव और दर्द से छुटकारा देने के लिए किसी भी वक्त किया जा सकता है। ऑफिस में ज्यादा देर तक बैठकर काम करने वालों के लिए इस आसन का अभ्यास करना बहुत ही फायदेमंद होता है।
💐सोना अवस्थी(योगशिक्षक)💐

आज का  #योगासन:  #भ्रामरी  #प्राणायाम मन को शांत कर तनाव और अवसाद दूर करने में बहुत फायदेमंद आसन है भ्रामरी प्राणायाम। भ...
22/04/2020

आज का #योगासन: #भ्रामरी #प्राणायाम

मन को शांत कर तनाव और अवसाद दूर करने में बहुत फायदेमंद आसन है भ्रामरी प्राणायाम। भ्रामरी प्राणायाम करते समय भ्रमर अर्थात भंवरे जैसी गुंजन होती है, इसी कारण इसे भ्रामरी प्राणायाम कहते हैं। भ्रामरी प्राणायाम से जहां मन शांत होता है वहीं इसके नियमित अभ्यास से और भी बहुत से लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं। इसे सही तरीके से करने की विधि और इससे होने वाले लाभ के बारे में हम आपको इस लेख में बताते हैं।

कैसे करें यह आसन

भ्रामरी प्राणायाम करने के लिए #सुखासन, #सिद्धासन या #पद्मासन में बैठकर सबसे पहले दोनों होथों की अंगुलियों में से अनामिका अंगुली से नाक के दोनों छिद्रों को हल्का सा दबाकर रखें। फिर तर्जनी को पाल पर, मध्यमा को आंखों पर, सबसे छोटी अंगुली को होठ पर और अंगुठे से दोनों कानों के छिद्रों का बंद कर दीजिए।

फिर सांस को धीमी गति से गहरा खींचकर अंदर कुछ देर रोककर रखें और फिर उसे धीरे-धीरे आवाज करते हुए नाक के दोनों छिद्रों से निकालें। सांस छोड़ते वक्त अनामिका अंगुली से नाक के छिद्रों को हल्का सा दबाएं जिससे कंपन उत्पन्न होगा। जोर से पूरक करते समय भंवरी जैसी आवाज और फिर रेचक करते समय भी भंवरी जैसी आवाज उत्पन्न होनी चाहिए। पूरक का अर्थ सांस अंदर लेना और रेचक का अर्थ सांस बाहर छोड़ना।
इस आसन के फायदे

भ्रामरी प्राणायाम करने से मन शांत होता है और तनाव दूर होता है। इस ध्वनि के कारण मन इस ध्वनि के साथ बंध सा जाता है, जिससे मन की चंचलता समाप्त होकर एकाग्रता बढ़ने लगती है। यह मस्तिष्क के अन्य रोगों में भी लाभदायक है। इसके अलावा यदि किसी योग शिक्षक से इसकी प्रक्रिया ठीक से सीखकर करते हैं तो इससे हृदय और फेफड़े मजबूत बनते हैं। उच्च-रक्तचाप सामान्य होता है। हकलाहट तथा तुतलाहट भी इसके नियमित अभ्यास से दूर होती है। इससे पर्किन्सन, लकवा, इत्यादि स्नायुओं से संबंधी सभी रोगों में भी लाभ पाया जा सकता है।

बरतें थोड़ी सावधानी

भ्रामरी प्राणायाम को लेटकर नहीं किया जाता है। नाक या कानों में किसी प्रकार का संक्रमण होने कि स्थिति में यह अभ्यास ना करें। नहीं तो संक्रमण बढ़ सकता है।

भ्रामरी प्राणायाम को शांत माहौल में ही करें, ताकि आप निकलने वाली आवाज हो आसानी से महसूस कर सकें।

💐सोना अवस्थी (योगशिक्षक)💐

आज का  #योगासन:  #शीतली  #प्राणायाम (गर्मी दूर भगाने के लिए)शीतली प्राणायाम से गर्मी के मौसम में राहत पाई जा सकती है। शी...
22/04/2020

आज का #योगासन: #शीतली #प्राणायाम (गर्मी दूर भगाने के लिए)

शीतली प्राणायाम से गर्मी के मौसम में राहत पाई जा सकती है। शीतली प्राणायाम प्राणायाम ना केवल शीतलता प्रदान करता है बल्कि मन की शांति भी देता है| शरीर को ठंडक पहुंचाने के कारण इसे कूलिंग ब्रीथ कहा जाता है| इस प्राणायाम को सभी #योगासन को करने के बाद सबसे अंत में किया जाना चाहिये क्योंकि ऐसा करने से सभी योगासनों को करने की थकान दूर होकर पूरे शरीर में ठंडक का एहसास होता हैं| इस प्राणायाम से सम्पूर्ण शरीर यंत्र को ठंडक प्राप्त होती है और कान एवं नेत्र को शक्ति मिलती है ।

शीतली प्राणायाम करने से पहले स्नान कर लेना चाहिए। आसन और प्राणायाम के बाद स्नान करना चाहें तो कम से कम आधे घंटे का अंतराल रखें ताकि इस दौरान रक्त का संचार सामान्य हो जाए। यह प्राणायाम हर मौसम में हर जगह आसानी से किया जा सकता है। प्राणायाम का अभ्यास होने के बाद गर्मी के मौसम में इसकी अवधि आवश्यकता अनुसार बढ़ा सकते हैं।

शीतली प्राणायाम की खास बात ये है इसमें आप किसी एक प्रकार की अवस्था में बैठने के लिए बाध्य नहीं होते । दोनों हाथों की अंगुलियों को ज्ञान मुद्रा में दोनों घुटनो पर रखें, आंखें बन्द करें। उसके बाद अपनी जीभ को नली के समान बना लें अर्थात गोल बना लें और मुंह से लम्बी गहरी श्वास आवाज के साथ भरें।

फिर इस नली के माध्यम से ही धीरे-धीरे मुँह से साँस लें। इसके बाद जीभ अंदर करके साँस को धीरे-धीरे नाक के द्वारा बाहर निकालें। हवा नलीनुमा इस ट्यूब से गुजरकर मुँह, तालु और कंठ को ठंडक प्रदान करेगी।याद रहें कि श्वास बाहर निकालने का समय श्वास लेने के समय से ज्यादा हो। यानी जीभ के सहारे श्वास को धीरे-धीरे अंदर लेना भी है और स्वास छोड़ते वक्त श्वास और धीरे से छोड़ना है।

प्राणायाम के समय साँस लयबद्ध और गहरी होना चाहिए। शीतकारी प्राणायाम में मुंह बंद कर दंत पंक्तियों को मिलाकर मुंह से श्वास लेते हैं और नाक से ही श्वास छोड़ते हैं। प्रदूषित जगह में इस प्राणायाम का अभ्यास न करें। कम से कम 10 चक्रों का अभ्यास करें। अभ्यस्त होने पर 5 से 10 मिनट तक अभ्यास करें।

इसके अभ्यास से मानसिक उत्तेजना एवं उदासीनता दोनों दूर हो जाती हैं। मस्तिष्क के स्नायु, नाड़ी संस्थान तथा मन शांत हो जाता है। यह प्राणायाम अनिद्रा, उच्च रक्तचाप, हृदयरोग और अल्सर में रामबाण का काम करता है। चिड़चिड़ापन, बात-बात में क्रोध आना, तनाव तथा गर्म स्वभाव के व्यक्तियों के लिए यह विशेष लाभप्रद है।

जो लोग खाते रहने की आदत से परेशान हैं उन्हें ये प्राणायाम जरूर करना चाहिए क्योंकि ये गैर जरूरी भूख कम करता है। ये प्राणायाम ब्लडप्रेशर कम करता है। एसीडिटी और पेट के अल्सर तक में आराम मिलता है।

प्राणायाम के अभ्यास के बाद शवासन में कुछ देर विश्राम करें। जहाँ तक संभव हो सूर्योदय या सूर्यास्त के समय ही यह प्रणायाम करें। 💐 सोना अवस्थी (योगशिक्षक) 💐

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