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*श्रीसारस्वत पञ्चाङ्ग™----------®**👉पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण ...
07/12/2025

*श्रीसारस्वत पञ्चाङ्ग™----------®*

*👉पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण करते थे। पंचांग को नित्य पढ़ने और सुनने से देवताओं की कृपा, कुंडली के ग्रहो के शुभ फल मिलते है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फल की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना और पढ़ना चाहिए।*

*🐚🌺📜आज का पञ्चाङ्ग📜🌺🐚*

🔅 आज का दिनाँक 07 दिसम्बर 2025
🔅 दिन - रविवार
🔅 विक्रम संवत - 2082
🔅 शाकः संवत - 1947
🔅 संवत्सर नाम - सिद्धार्थी
🔅 अयन - दक्षिणायन
🔅 ऋतु - हेमंत
🔅 मास - पौष
🔅 पक्ष - कृष्णपक्ष
🔅 तिथि - तृतीया
🔅 नक्षत्र - पुनर्वसु
🔅 योग - शुक्ल
🔅 दिशाशूल - पश्चिम दिशा मे
🔅 सूर्योदय - 07:15 मिनट पर
🔅 सूर्यास्त - 17:41 मिनट पर
🔅 चंद्रोदय - 20:13 मिनट पर
🔅 चंद्रास्त - 09:47 मिनट पर
🔅 राहुकाल - 16:23 - 17:41 अशुभ
🔅 अभिजित -12:06 -12:54 शुभ
🔅 तिथिविशेष - सर्वार्थसिद्धि योग, रवि पुष्य योग, संकट चतुर्थी व्रत
*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*--*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-***

*🔱⚜ भाग्योदय के लिए क्या करें⚜🔱*

*👉बटुक एवं काल भैरव कार्य सिद्धि एवं शत्रु नाशक प्रयोग:-------*

*।।श्री काल-भैरवाय नमः।।*

*🌻भगवान भैरव की महिमा अनेक शास्त्रों में मिलती है। भैरव जहाँ शिव के गण के रूप में जाने जाते हैं, वहीं वे दुर्गा के अनुचारी माने गए हैं। भैरव की सवारी कुत्ता है। चमेली फूल प्रिय होने के कारण उपासना में इसका विशेष महत्व है। साथ ही भैरव रात्रि के देवता माने जाते हैं और इनकी आराधना का खास समय भी मध्य रात्रि में 12 से 3 बजे का माना जाता है।*

*🌻धर्मग्रन्थों के अनुशीलन से यह तथ्य विदित होता है कि भगवान शंकर के कालभैरव-स्वरूपका आविर्भाव मार्गशीर्ष मास के कृष्णपक्ष की प्रदोषकाल-व्यापिनीअष्टमी में हुआ था, अत:यह तिथि कालभैरवाष्टमी के नाम से विख्यात हो गई। इस दिन भैरव-मंदिरों में विशेष पूजन और श्रृंगार बडे धूमधाम से होता है। भैरवनाथके भक्त कालभैरवाष्टमी के व्रत को अत्यन्त श्रद्धा के साथ रखते हैं। मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी से प्रारम्भ करके प्रत्येक मास के कृष्णपक्ष की प्रदोष-व्यापिनी अष्टमी के दिन कालभैरवकी पूजा, दर्शन तथा व्रत करने से भीषण संकट दूर होते हैं और कार्य-सिद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। पंचांगों में इस अष्टमी को कालाष्टमी के नाम से प्रकाशित किया जाता है।*

*🌻ज्योतिषशास्त्र की बहुचíचत पुस्तक लाल किताब के अनुसार शनि के प्रकोप का शमन भैरव की आराधना से होता है। भैरवनाथके व्रत एवं दर्शन-पूजन से शनि की पीडा का निवारण होगा। कालभैरवकी अनुकम्पा की कामना रखने वाले उनके भक्त तथा शनि की साढेसाती, ढैय्या अथवा शनि की अशुभ दशा से पीडित व्यक्ति इस कालभैरवाष्टमीसे प्रारम्भ करके वर्षपर्यन्तप्रत्येक कालाष्टमीको व्रत , भैरवनाथकी उपासना करें।*

*🌻कालाष्टमीमें दिन भर उपवास रखकर सायं सूर्यास्त के उपरान्त प्रदोषकालमें भैरवनाथकी पूजा करके प्रसाद को भोजन के रूप में ग्रहण किया जाता है।*

*🌻मन्त्रविद्याकी एक प्राचीन हस्तलिखित पाण्डुलिपि से महाकाल भैरव का यह मंत्र मिला है-*

*ॐ हं षं नं गं कं सं खं महाकालभैरवाय नम:।*

*👉इस मंत्र का 21हजार बार जप करने से बडी से बडी विपत्ति दूर हो जाती है।।*

*🌻साधक भैरव जी के वाहन श्वान (कुत्ते) को नित्य कुछ खिलाने के बाद ही भोजन करे।*

*👉साम्बसदाशिवकी अष्टमूíतयोंमें रुद्र अग्नि तत्व के अधिष्ठाता हैं। जिस तरह अग्नि तत्त्‍‌व के सभी गुण रुद्र में समाहित हैं, उसी प्रकार भैरवनाथभी अग्नि के समान तेजस्वी हैं। भैरवजीकलियुग के जाग्रत देवता हैं। भक्ति-भाव से इनका स्मरण करने मात्र से समस्याएं दूर होती हैं।*

*★इनका आश्रय ले लेने पर भक्त निर्भय हो जाता है। भैरवनाथअपने शरणागत की सदैव रक्षा करते हैं।*

*★सामान्य व्यक्ति भक्ति भाव से इनकी पूजा कर इनकी कृपा प्राप्त कर सकता है, किंतु इनकी साधना के लियर पहले इनकी दीक्षा लें उसके बाद ही साधना करें।*

*👉क्योंकि भैरव जयंती के दिन श्री भैरव जी का प्राकट्य हुआ था इसलिए इनका बाल स्वरुप भी अति पूजनीय और अति शीघ्र फल देने वाला है।*

*👉सर्वकार्य सिद्धि हेतु बटुक प्रयोग:--------*

*★इनकी प्रसन्नता हेतु इनके कवच, मन्त्र का जप और अष्टोत्तरशत नाम का पाठ अति फलदायी है।*

*★सर्वप्रथम कवच पाठ करें फिर 1 माला मन्त्र और उसके बाद अष्टोत्तरशतनाम के 21 सम्पुटित पाठ फिर पुनः 1 माला मन्त्र और क्षमा प्रार्थना एवं बलि दें।*

*★यदि ये प्रयोग 41 दिन तक कर लिया जाये तो व्यक्ति का असम्भव लगने वाला कठिन से कठिन कार्य भी श्री बटुक भैरव की कृपा से अति शीघ्र सिद्ध हो जाता है।*

*★श्री वटुक भैरव अष्टोत्तर शतनाम का विशेष महत्व है। इसके 21 पाठ मन्त्र सहित विधि सहित कोई नित्य करें तो ये सिद्ध हो जाता है और फिर जाग्रत रूप से कार्य करता है।रोग दोष आधी व्याधि का नाश करता है।इससे अभिमन्त्रित भस्म जल किसी रोगी पर छिड़कने से रोग दूर हो जाता है किसी पर कोई ऊपरी बाधा हो तो वो दूर हो जाती है।बहुत ही अच्छा और कृपा करने वाला है।कलियुग में अन्य देवता तो समय आने पर फल देते है पर भगवान वटुक भैरव जिस दिन से इन्हें पूजो उसी दिन से अपना प्रभाव दिखाने लगते है।*

*🌻बटुक भैरव रक्षार्थ है और देवी के पुत्र स्वरूप है।*

*👉तांत्रोक्त भैरव कवच:-----*

*ॐ सहस्त्रारे महाचक्रे कर्पूरधवले गुरुः |*
*पातु मां बटुको देवो भैरवः सर्वकर्मसु ||*
*पूर्वस्यामसितांगो मां दिशि रक्षतु सर्वदा |*
*आग्नेयां च रुरुः पातु दक्षिणे चण्ड भैरवः ||*
*नैॠत्यां क्रोधनः पातु उन्मत्तः पातु पश्चिमे |*
*वायव्यां मां कपाली च नित्यं पायात् सुरेश्वरः ||*
*भीषणो भैरवः पातु उत्तरास्यां तु सर्वदा |*
*संहार भैरवः पायादीशान्यां च महेश्वरः ||*
*ऊर्ध्वं पातु विधाता च पाताले नन्दको विभुः |*
*सद्योजातस्तु मां पायात् सर्वतो देवसेवितः ||*
*रामदेवो वनान्ते च वने घोरस्तथावतु |*
*जले तत्पुरुषः पातु स्थले ईशान एव च ||*
*डाकिनी पुत्रकः पातु पुत्रान् में सर्वतः प्रभुः |*
*हाकिनी पुत्रकः पातु दारास्तु लाकिनी सुतः ||*
*पातु शाकिनिका पुत्रः सैन्यं वै कालभैरवः |*
*मालिनी पुत्रकः पातु पशूनश्वान् गंजास्तथा ||*
*महाकालोऽवतु क्षेत्रं श्रियं मे सर्वतो गिरा |*
*वाद्यम् वाद्यप्रियः पातु भैरवो नित्यसम्पदा ||*

*★इस आनंददायक कवच का प्रतिदिन पाठ करने से प्रत्येक विपत्ति में सुरक्षा प्राप्त होती है| यदि योग्य गुरु के निर्देशन में इस कवच का अनुष्ठान सम्पन्न किया जाए तो साधक सर्वत्र विजयी होकर यश, मान, ऐश्वर्य, धन, धान्य आदि से पूर्ण होकर सुखमय जीवन व्यतीत करता है|*

*👉बटुक भैरव मूल मन्त्र:------*

*ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ।*

*👉भैरव अष्टोत्तरशत नाम स्तोत्र:-------*

*व ध्यान –वन्दे बालं स्फटिक-सदृशम्, कुन्तलोल्लासि-वक्त्रम्।दिव्याकल्पैर्नव-मणि-मयैः, किंकिणी-नूपुराढ्यैः॥दीप्ताकारं विशद-वदनं, सुप्रसन्नं त्रि-नेत्रम्।हस्ताब्जाभ्यां बटुकमनिशं, शूल -दण्डौ दधानम्॥*

*★अर्थात् भगवान् श्री बटुक-भैरव बालक रुपी हैं। उनकी देह-कान्ति स्फटिक की तरह है। घुँघराले केशों से उनका चेहरा प्रदीप्त है। उनकी कमर और चरणों में नव मणियों के अलंकार जैसे किंकिणी, नूपुर आदि विभूषित हैं। वे उज्जवल रुपवाले, भव्य मुखवाले, प्रसन्न-चित्त और त्रिनेत्र-युक्त हैं। कमल के समान सुन्दर दोनों हाथों में वे शूल औरदण्ड धारण किए हुए हैं।*

*👉भगवान श्री बटुक- भैरव के इस सात्विक ध्यान से सभी प्रकार की अप-मृत्यु का नाश होता है, आपदाओं का निवारण होता है, आयु की वृद्धि होती है, आरोग्य और मुक्ति-पद लाभ होता है।*

*👉मानसिक पूजन करे :–*

*ॐ लं पृथ्वी-तत्त्वात्मकं गन्धं श्रीमद् आपदुद्धारण-बटुक-भेरव-प्रीतये समर्पयामि नमः।*
*ॐ हं आकाश-तत्त्वात्मकं पुष्पं श्रीमद् आपदुद्धारण-बटुक-भेरव-प्रीतये समर्पयामि नमः।*
*ॐ यं वायु-तत्त्वात्मकं धूपं श्रीमद् आपदुद्धारण-बटुक-भेरव-प्रीतये घ्रापयामि नमः।*
*ॐ रं अग्नि-तत्त्वात्मकं दीपं श्रीमद् आपदुद्धारण-बटुक-भेरव-प्रीतये निवेदयामि नमः।*
*ॐ सं सर्व-तत्त्वात्मकं ताम्बूलं श्रीमद् आपदुद्धारण-बटुक-भेरव-प्रीतये समर्पयामि नमः।*

*ॐ भैरवो भूत-नाथश्च, भूतात्मा भूत-भावनः।*
*क्षेत्रज्ञः क्षेत्र-पालश्च, क्षेत्रदः क्षत्रियो विराट् ॥*
*श्मशान-वासी मांसाशी, खर्पराशी स्मरान्त-कृत्।*
*रक्तपः पानपः सिद्धः, सिद्धिदः सिद्धि-सेवितः॥*
*कंकालः कालः-शमनः, कला-काष्ठा-तनुः कविः।*
*त्रि-नेत्रो बहु-नेत्रश्च, तथा पिंगल-लोचनः॥*
*शूल-पाणिः खड्ग-पाणिः, कंकाली धूम्र-लोचनः।*
*अभीरुर्भैरवी-नाथो, भूतपो योगिनी – पतिः॥*
*धनदोऽधन-हारी च, धन-वान् प्रतिभागवान्।*
*नागहारो नागकेशो, व्योमकेशः कपाल-भृत्॥*
*कालः कपालमाली च, कमनीयः कलानिधिः।*
*त्रि-नेत्रो ज्वलन्नेत्रस्त्रि-शिखी च त्रि-लोक-भृत्॥*
*त्रिवृत्त-तनयो डिम्भः शान्तः शान्त-जन-प्रिय।*
*बटुको बटु-वेषश्च, खट्वांग -वर – धारकः॥*
*भूताध्यक्षः पशुपतिर्भिक्षुकः परिचारकः।*
*धूर्तो दिगम्बरः शौरिर्हरिणः पाण्डु – लोचनः॥*
*प्रशान्तः शान्तिदः शुद्धः शंकर-प्रिय-बान्धवः।*
*"अष्ट -मूर्तिर्निधीशश्च, ज्ञान- चक्षुस्तपो-मयः॥*
*अष्टाधारः षडाधारः, सर्प-युक्तः शिखी-सखः।*
*भूधरो भूधराधीशो, भूपतिर्भूधरात्मजः॥*
*कपाल-धारी मुण्डी च , नाग- यज्ञोपवीत-वान्।*
*जृम्भणो मोहनः स्तम्भी, मारणः क्षोभणस्तथा॥*
*शुद्द – नीलाञ्जन – प्रख्य – देहः मुण्ड -विभूषणः।*
*बलि-भुग्बलि-भुङ्- नाथो, बालोबाल – पराक्रम॥*
*सर्वापत् – तारणो दुर्गो, दुष्ट- भूत- निषेवितः।*
*कामीकला-निधिःकान्तः, कामिनी वश-कृद्वशी॥*
*जगद्-रक्षा-करोऽनन्तो, माया – मन्त्रौषधी -मयः।*
*सर्व-सिद्धि-प्रदो वैद्यः, प्रभ – विष्णुरितीव हि॥*

*॥फल-श्रुति॥*

*अष्टोत्तर-शतं नाम्नां, भैरवस्य महात्मनः।*
*मया ते कथितं देवि, रहस्य सर्व-कामदम्॥*
*य इदं पठते स्तोत्रं, नामाष्ट – शतमुत्तमम्।*
*न तस्य दुरितं किञ्चिन्न च भूत-भयं तथा॥*
*न शत्रुभ्यो भयंकिञ्चित्, प्राप्नुयान्मानवः क्वचिद्।*
*पातकेभ्यो भयं नैव, पठेत् स्तोत्रमतः सुधीः॥*
*मारी-भये राज-भये, तथा चौ राग्निजे भये।*
*औत्पातिके भये चैव, तथा दुःस्वप्नज भये॥*
*बन्धने च महाघोरे, पठेत् स्तोत्रमनन्य-धीः।*
*सर्वं प्रशममायाति, भयं भैरव – कीर्तनात्॥*

*॥ क्षमा-प्रार्थना ॥*

*आवाहन न जानामि, न जानामि विसर्जनम्।*
*पूजा-कर्म न जानामि, क्षमस्व परमेश्वर॥*
*मन्त्र-हीनं क्रिया-हीनं, भक्ति-हीनं सुरेश्वर।*
*मया यत्-पूजितं देव परिपूर्णं तदस्तु मे॥*

*👉श्री बटुक-बलि-मन्त्रः—*

*🌻घर के बाहर दरवाजे के बायीं ओर दो लौंग तथा गुड़ की डली रखें । निम्न तीनों में से किसी एक मन्त्र २१ का उच्चारण करें, आपके घर के विघ्न बाधा और उपद्रव शांत होंगे।*

*१. ॥ॐ ॐ ॐ एह्येहि देवी-पुत्र, श्री मदापद्धुद्धारण-बटुक-भैरव-नाथ, सर्व-विघ्नान् नाशय नाशय, इमं स्तोत्र-पाठ-पूजनं सफलं कुरु कुरु सर्वोपचार-सहितं बलि मिमं गृह्ण गृह्ण स्वाहा, एष बलिर्वं बटुक-भैरवाय नमः॥*

*२. ॥ॐ ह्रीं वं एह्येहि देवी-पुत्र, श्री मदापद्धुद्धारक-बटुक-भैरव-नाथ कपिल-जटा-भारभासुर ज्वलत्पिंगल-नेत्र सर्व-कार्य-साधक मद्-दत्तमिमं यथोपनीतं बलिं गृह्ण् मम् कर्माणि साधय साधय सर्वमनोरथान् पूरय पूरय सर्वशत्रून् संहारय ते नमः वं ह्रीं ॐ॥*

*३. ॥ॐ बलि-दानेन सन्तुष्टो, बटुकः सर्व-सिद्धिदः रक्षां करोतु मे नित्यं, भूत-वेताल-सेवितः॥*

*★पाठ से पहले एक माला वटुक मन्त्र की सभी पाठो के बाद एक माला वटुक भैरव की अनिवार्य है, ॐ के बाद ह्रीं लगाकर करें।*

*👉प्रत्येक पाठ के पहले और बाद में वटुक भैरव मन्त्र का सम्पुट लगाये।*

*🌻तेल का दीपक के सामने पाठ करे।और वहीँ एक लड्डू या गुड़ रख ले पूजा होने पर पूजा समर्पण करे और उसके बाद उस लड्डू को घर से बाहर रख आये या कोई कुत्ता मिले उसे खिला दे कोई न मिले तो चौराहे पर रख दे। ये बलिद्रव्य होता है।*

*🌻आसन से उठने से पहले आसन के नीचे की भूमि मस्तक से लगाये फिर आसन से उठे ऐसा न करने पर पूजा का आधा फल इंद्र ले लेता है।*

*1. शत्रु नाश् उपाय :*

*🌻मित्रों, काफी मित्रों ने पूछा की आज यानि भैरव अष्टमी पर क्या करें तो ये प्रयोग आप आज शाम अपने घर या भैरव मंदिर में कर सकते हैं।*

*1-यदि आप भी अपने शत्रुओं से परेशान हैं तो आज शाम ये उपाए करें और अपने शत्रुओं से मुक्ति पायें।*

*🌻एक सफ़ेद कागज़ पर भैरव मंत्र जपते हुए काजल से शत्रु या शत्रुओं के नाम लिखें और उनसे मुक्त करने की प्रार्थना करते हुए एक छोटी सी शहद की शीशी जो की किसी भी कंपनी की मिल जाएगी में ये कागज़ मोड़ के डुबो दें व् ढक्कन बंद कर किसी भी भैरव मंदिर या शनि मंदिर में गाड़ दें। यदि संभव न हो तो किसी पीपल के नीचे भी गाड़ सकते हैं। कुछ दिनों में शत्रु स्वयं कष्ट में होगा और आपको छोड़ देगा।*

*👉मंत्र जप पूरी प्रक्रिया के दौरान करते रहना होगा। अर्थात नाम लिखने से लेकर गाड़ने तक।*

*👉मंत्र:*

*ॐ क्षौं क्षौं भैरवाय स्वाहा।*
*ॐ न्यायागाम्याय शुद्धाय योगिध्येयाय ते नम:।*
*नम: कमलाकांतय कलवृद्धाय ते नम:।*

*👉2.शत्रुओं से छुटकारा पाने हेतु एक लघु प्रयोग:-*

*🌻इस प्रयोग से एक बार से ही शत्रु शांत हो जाता है और परेशान करना छोड़ देता है पर यदि जल्दी न सुधरे तो पांच बार तक प्रयोग कर सकते हैं।*

*★ये प्रयोग शनी, राहु एवं केतु ग्रह पीड़ित लोगों के लिए भी बहुत फायदेमंद है।*

*★इसके लिए किसी भी मंगलवार या शनिवार को भैरवजी के मंदिर जाएँ और उनके सामने एक आटे का चौमुखा दीपक जलाएं। दीपक की बत्तियों को रोली से लाल रंग लें। फिर शत्रु या शत्रुओं को याद करते हुए एक चुटकी पीली सरसों दीपक में डाल दें। फिर निम्न श्लोक से उनका ध्यान कर 21बार निम्न मन्त्र का जप करते हुए एक चुटकी काले उड़द के दाने दिए में डाले। फिर एक चुटकी लाल सिंदूर दिए के तेल के ऊपर इस तरह डालें जैसे शत्रु के मुंह पर डाल रहे हों। फिर 5 लौंग ले प्रत्येक पर 21 21 जप करते हुए शत्रुओं का नाम याद कर एक एक कर दिए में ऐसे डालें जैसे तेल में नहीं किसी ठोस चीज़ में गाड़ रहे हों। इसमें लौंग के फूल वाला हिस्सा ऊपर रहेगा।*

*★फिर इनसे छुटकारा दिलाने की प्रार्थना करते हुए प्रणाम कर घर लौट आएं।*

*👉ध्यान :-*

*ध्यायेन्नीलाद्रिकान्तम शशिश्कलधरम मुण्डमालं महेशम्।*
*दिग्वस्त्रं पिंगकेशं डमरुमथ सृणिं खडगपाशाभयानि।।*
*नागं घण्टाकपालं करसरसिरुहै र्बिभ्रतं भीमद्रष्टम।*
*दिव्यकल्पम त्रिनेत्रं मणिमयविलसद किंकिणी नुपुराढ्यम।।*

*★मन्त्र:-*

*ॐ ह्रीं भैरवाय वं वं वं ह्रां क्ष्रौं नमः।*

*★यदि भैरव मन्दिर न हो तो शनि मन्दिर में भी ये प्रयोग कर सकते हैं।*

*★दोनों न हों तो पूरी क्रिया घर में दक्षिण मुखी बैठ कर भैरव जी का पूजन कर उनके समक्ष कर लें और दीपक मध्य रात्रि में किसी चौराहे पर रख आएं। चौराहे पर भी ये प्रयोग कर सकते हैं। परन्तु याद रहे चौराहे पर करेंगे तो कोई देखे न वरना कोई टोक सकता है जादू टोना करने वाला भी समझ सकता है। चौराहें पर करें तो चुपचाप बिना पीछे देखे घर लौट आएं हाथ मुंह धोकर ही किसी से बात करें।*

*★यदि एक बार में शत्रु पूर्णतः शांत न हो तो 5 बार तक एक एक हफ्ते बाद कर सकते हैं।*

*🌻उक्त प्रयोग शत्रु के उच्चाटन हेतु भी कर सकते हैं पर उसमे बत्ती मदार के कपास की बनेगी और दीपक शत्रु के मुख्य द्वार के सामने जलाना होगा।*

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*👉नोट~~~~ आज शुक्ल योग में वस्त्रों का दान करना शुभफलदायी है।*
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*✍ पंचागकर्ता~~~इन्द्रकृष्ण भारद्वाज(बीकानेर)*

*मोबाइल नम्बर ---- +919314147672 9214247672*j

*Email. --- Astroojhaji@gmail.com*
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*यह पंचांगबीकानेर की अक्षांश रेखांश परआधारित है।*
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*श्रीसारस्वत पञ्चाङ्ग™----------®**👉पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण ...
06/12/2025

*श्रीसारस्वत पञ्चाङ्ग™----------®*

*👉पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण करते थे। पंचांग को नित्य पढ़ने और सुनने से देवताओं की कृपा, कुंडली के ग्रहो के शुभ फल मिलते है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फल की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना और पढ़ना चाहिए।*

*🐚🌺📜आज का पञ्चाङ्ग📜🌺🐚*

🔅 आज का दिनाँक 06 दिसम्बर 2025
🔅 दिन - शनिवार
🔅 विक्रम संवत - 2082
🔅 शाकः संवत - 1947
🔅 संवत्सर नाम - सिद्धार्थी
🔅 अयन - दक्षिणायन
🔅 ऋतु - हेमंत
🔅 मास - पौष
🔅 पक्ष - कृष्णपक्ष
🔅 तिथि - द्वितीया
🔅 नक्षत्र - मृगशिरा
🔅 योग - शुभ
🔅 दिशाशूल - पूर्व दिशा मे
🔅 सूर्योदय - 07:15 मिनट पर
🔅 सूर्यास्त - 17:41 मिनट पर
🔅 चंद्रोदय - 19:02 मिनट पर
🔅 चंद्रास्त - 08:46 मिनट पर
🔅 राहुकाल - 09:51 - 11:09 अशुभ
🔅 अभिजित -12:06 -12:54 शुभ
🔅 तिथिविशेष - द्विपुष्कर योग
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*🔱⚜ भाग्योदय के लिए क्या करें⚜🔱*

*👉जानिए राजकुमारी मीराबाई कैसे बनीं कृष्ण की दीवानी और उनसे जुड़ी अन्य ज़रूरी बातें::----------*

*🌻श्री कृष्ण को जगत गुरु के नाम से जाना जाता हैं। जब भी भगवान श्री कृष्ण का जिक्र होता हैं उनके भक्तों के विषय में भी जिरह होती हैं। भगवान श्री कृष्ण ने द्वापर युग में अवतार लिया था लेकिन भगवान की सबसे अनन्य भक्त मानी जाती हैं मीराबाई आपको बता दें कि मीराबाई कलयुग में एक समाज सुधारक एवं संत थीं। मीराबाई जी ने अपने काल में एक उदाहरण के रूप में सामने आई , उन्होंने समाज के सभी कुरीतियों के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद की थी। आध्यात्मिक जगत में मीरा बाई ने अलग ही ऊंचाई को प्राप्त किया था। माधव की सबसे प्रिय भक्त मीरा बाई जी के जन्म के विषय में यूँ तो कोई पुख़्ता प्रमाण नहीं हैं कि उनका जन्म कब हुआ था, लेकिन मान्यताओं के अनुसार सन 1448 के आस पास माना जाता हैं कि मीरा बाई जी का जन्म हुआ था। अश्विन माह की शरद पूर्णिमा की तिथि को मीराबाई की जयंती की रूप में हर साल मनाया जाता हैं। इस वर्ष शरद पूर्णिमा 20 अक्टूबर को मनाई जायेगी। ऐसा कहा जाता हैं कि मीराबाई जी का जन्म एक राजघराने में हुआ था। राजकुमारी मीरा अपने बालपन से ही श्री कृष्ण के भक्ति के रंग में रंग गई थीं। आइये जानतें हैं इस लेख के माध्यम से राजकुमारी मीरा से समाज सुधारिका एवं भगवान श्री कृष्ण की भक्त मीराबाई जी बनने तक का सफर.!*

*👉बचपन से ही मीरबाई को लगी कृष्ण से प्रीत:-*

*🌻राजकुमारी मीरा के कृष्ण भक्त बनने के पीछे एक कथा सुनने को मिलती है, जिसके अनुसार बताया जाता हैं कि एक समय की बात है जब उनके पड़ोस में किसी धनवान व्यक्ति के यहां बारात आई थी। उस समय मीराबाई बाल्यकाल की अवस्था में ही थी। सभी स्त्रियां छत पर खड़ी होकर बारात देख रही थीं। मीराबाई भी बारात देखने के लिए छत पर आ गईं बारात को देख मीरा ने अपनी माता से पूछा कि मेरा दूल्हा कौन है इस पर मीराबाई की माता ने उपहास में ही भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति की तरफ इशारा करते हुए कह दिया कि यही तुम्हारे वर हैं, यह बात मीराबाई के बालमन में एक गांठ की तरह समा गई और वे कृष्ण को ही अपना पति मानने लगी।*

*👉मीराबाई का जीवन:-*

*🌻मीराबाई जोधपुर, राजस्थान के मेड़वा राजकुल की राजकुमारी थी। ये अपने पिता रतन सिंह की एकमात्र संतान थी। मीराबाई जब छोटी थीं तो उनकी मां का देहांत हो गया, इसके बाद उनके दादा राव दूदा उन्हें मेड़ता ले आए और यहीं पर उनकी देख-रेख में मीराबाई का पालन-पोषण हुआ। मीराबाई का मन बचपन से ही कृष्ण-भक्ति में रम गया था। राजकुमारी ने अपने बालपन से ही अपने मन को श्री कृष्ण को समर्पित कर दिया था और बचपन से युवावस्था तथा अपना सम्पूर्ण जीवन उन्होंने श्री कृष्ण को अपना सब कुछ मान कर समर्पित कर दिया था। मीराबाई ने कृष्ण को ही अपने पति के रुप में स्वीकार लिया था इसलिए वे विवाह नहीं करना चाहती थी, इसके बाद उनकी इच्छा के विरुद्ध राजकुमार भोजराज के साथ उनका विवाह कर दिया गया।*

*👉पति की मृत्यु के बाद और ज्यादा बढ़ गई मीरा की कृष्ण भक्ति:-*

*🌻मीराबाई के विवाह के कुछ समय बाद ही उनके पति का देहांत हो गया जिसके बाद वे और भी ज्यादा कृष्ण भक्ति में लीन होती चली गईं। मीराबाई को उनके पति के साथ सती करना चाहा लेकिन वे इसके लिए नहीं मानी क्योंकि वे कृष्ण को अपना स्वामी मानती थी। कहा जाता है कि इसी कारण उन्होंने अपना श्रंगार भी नहीं उतारा। ऐसा कहा जाता हैं कि उनके पति का अंतिम संस्कार उनकी अनुपस्तिथि में ही किया गया था।*

*🌻मीराबाई के पति का देहांत होने के बाद उनकी भक्ति दिनों-दिन बढ़ती चली गई। वे मदिर में जाकर इतनी लीन हो जाती थी कि श्रीकृष्ण की मूर्ति के सामने घंटो तक नाचती रहती थी। इसी कारण मीराबाई की कृष्ण भक्ति उनके पति के परिवार को अच्छी नहीं लगती थी। इसलिए उन्हें कई बार मारने का प्रयास भी किया गया कभी विष देकर तो कभी जहरीले सांप के द्वारा। परंतु श्रीकृष्ण की कृपा से मीराबाई को कुछ नहीं हुआ।*

*👉कृष्ण की मूर्ति में समा गई मीराबाई:-*

*🌻मीराबाई के मारने का प्रयास किया, इसके बाद वे वृंदावन और फिर वहां से द्वारिका चली आई। इसके बाद वे साधु-संतो के साथ रहने लगी व कृष्ण की भक्ति में रमी रहीं। मीराबाई की मृत्यु के विषय में कहा जाता है कि उन्होंने जीवन भर भगवान कृष्ण की भक्ति की और अंत समय में भी वे भक्ति करते हुए कृष्ण की मूर्ति में समा गई थी।*

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*👉नोट~~~~ आज शुभ योग में कुमकुम का दान करना शुभफलदायी है।*
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*श्रीसारस्वत पञ्चाङ्ग™----------®**👉पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण ...
05/12/2025

*श्रीसारस्वत पञ्चाङ्ग™----------®*

*👉पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण करते थे। पंचांग को नित्य पढ़ने और सुनने से देवताओं की कृपा, कुंडली के ग्रहो के शुभ फल मिलते है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फल की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना और पढ़ना चाहिए।*

*🐚🌺📜आज का पञ्चाङ्ग📜🌺🐚*

🔅 आज का दिनाँक 05 दिसम्बर 2025
🔅 दिन - शुक्रवार
🔅 विक्रम संवत - 2082
🔅 शाकः संवत - 1947
🔅 संवत्सर नाम - सिद्धार्थी
🔅 अयन - दक्षिणायन
🔅 ऋतु - हेमंत
🔅 मास - पौष
🔅 पक्ष - कृष्णपक्ष
🔅 तिथि - प्रतिपदा
🔅 नक्षत्र - रोहिणी
🔅 योग - सिद्ध
🔅 दिशाशूल - पश्चिम दिशा मे
🔅 सूर्योदय - 07:14 मिनट पर
🔅 सूर्यास्त - 17:41 मिनट पर
🔅 चंद्रोदय - 17:54 मिनट पर
🔅 चंद्रास्त - 07:37 मिनट पर
🔅 राहुकाल - 11:09 - 12:27 अशुभ
🔅 अभिजित -12:06 -12:54 शुभ
🔅 तिथिविशेष - रोहिणी व्रत
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*🔱⚜ भाग्योदय के लिए क्या करें⚜🔱*

*👉कितने प्रकार के होते हैं कालसर्प दोष, इससे मुक्ति के लिए क्यों करवाते है शान्ति? जानिये::------------*

*🌻जिस व्यक्ति की जन्मपतित्रिका में राहु' केतु के मध्य सभी ग्रहों का होना कालसर्प योग कहलाता है! अगर ज्योतिषानुसार दोष की व्याख्या करें तो राहु केतु के स्थिति अधिकतर आमने-सामने की होती है और अन्य ग्रह इनके मध्यमें आ जाये तो वह अपना प्रभाव त्यागकर राहु केतु के चूम्बकीय क्षेत्रमें प्रभावित हो जाते है! सर्पदोष निर्माण पूर्वजन्म कृत दोष या पितृदोषके कारण होता है! राशी 12 है और उनके आधार पर 12 लग्न व विविध प्रकारसे देखा जाये तो 288 प्रकारके कालसर्प योगों का निर्माण होता है लिकिन मुख्य रूपसे सर्पदोष 12 प्रकार के होते है!*

*1. अनंत कालसर्प दोष--लग्नमें राहु व सातवें भावमें केतु हो और सभी ग्रह बीच हो! इस योग में जन्में व्यक्ति को मानसिक अशान्ति व वैवाहिक जीवन दुःखमय कष्टमय व्यतीत होता है.!*

*2. कुलिक सर्प योग दुसरे राहु आठवें केतु होने पर योग बनता है इसमें जन्में व्यक्ति को' धन सम्बन्धित' करजदार' शरीर कमजोर व परिजनों से विछोह का दुःख होता है.!*

*3. वासुकि सर्प दोष' राहु तीसरे व केतु नवें भावमें होने पर बनता है! इसमें योगमें जन्में व्यक्ति का वैर-विरोध' नौकरी में अड़चन' मुकदमा व यश पद के लिए संघर्ष की अधिकता.!*

*4. शंखलाल सर्प दोष' चौथे में राहु दशवें केतु होने पर बनता है' इसमें जन्में को माँ का सुख कम' शिक्षा' व्यवसाय व नौकरी में अड़चने.!*

*5. पदम कालसर्प दोष राहु पंचम व केतु एकादश भावमें हो तो बनता है' इस योगमें जन्में जातक' पेट-पैर से परेशान' पत्नी से कष्ट' जुआ-सट्टा' कुमार्गी के कार्योंमें धनका अपव्यय करता है.!*

*6. नाभ सर्प दोष' राहु छठे व केतु बाहरवें भावमें होने पर बनता है' इस योगमें जन्में जातक' कलंक' कुसंग' जेल यात्रा व मुकदमेंबाजी व संघर्षशील रहता है.!*

*7. तक्षक सर्प दोष' राहु सातवें व केतु प्रथम होने पर बनें' इसमें जन्मा जातक का पत्नीसे वैर-विरोध' तलाक व नौकरी में अड़चने' उसका जीवन वनवास जैसा व्यतीत होता है व कदम-कदम पर परेशानियाँ झेलनी पड़ती है.!*

*8. कर्कोट्क' इसमें राहु आठवें व केतु द्वितिया भावमें होते है! इसमें जन्मा जातक' शरीरसे कमजोर' सूखा की बिमारी' आर्थिक तंगी से ग्रसित व मानसिक' शारीरिक कष्ट' अवसाद व तनावों से घिरा रहता है.!*

*9. शंखनाद' राहु नवमें व केतु तीसरे भावमें होने पर! इसमें जन्में जातक' दरिद्र' क्रोधी' परिश्रमी व बार बार स्थान परिवर्तन व अपमान का सामना करना पड़ता है.!*

*10. पातक कालसर्प' राहु दशवें व केतु चौथे भावमें' इसमें जन्में जातक' संतान वियोगि व माता पिता के लिए भारी' एकांतवासी व धर्म विरोधी व समाजमें सम्मान का भी भागी नहीं होता.!*

*11. विशाक्त सर्प दोष' राहु ऐकादश व केतु पंचम भावमें' इसमें जन्मा जातक मंदबुद्धि' उग्र' चोर' लूटेरा बनता है व व्यसनी भी होता है!*

*12. शेषनाग कालसर्प दोष' राहु बाहरवें व केतु छठे भाव में होते है तथा इसमें जन्मा जातक का दाम्पत्य जीवन क्लेश युक्त' शत्रुओं से डर व अपहरण' हत्या का डर रहता है! कालसर्प दोष युक्त जातकके जीवनमें सर्वाधिक परेशानियाँ इन अवस्थाओ में आती है.!*

*👉कालसर्प दोष आपको किस किस समय ज्यादा कष्ट देता है जानिए विस्तार से:-*

*★राहू की महादषा या राहू की प्रत्यांतर दशामें.!*

*★मंगल' सूर्य अथवा शनि की महादशा में.!*

*★जीवन की मध्य आयु' 40 से 45 वर्ष के बीच में.!*

*★जब जब गोचर ग्रह कालसर्प दोष बनता है.!*

*👉कालसर्प दोष के निवारण के लिए शान्ति कैसे करवाए:-*

*🌻कालसर्प की शांति करवाने के लिए किसी विद्वान योग्य ब्राह्मण से आप संपर्क करें उसके द्वारा आप सावन में नाग पंचमी के दिन मासिक शिवरात्रि हर महीने आने वाली प्रदोष में आप कालसर्प दोष की शांति करवा सकते हैं कालसर्प दोष की शांति करवाने के बाद आप सवा लाख महामृत्युंजय का अपने नाम गोत्र से जाप करवाए ताकि आपका कालसर्प दोष कुंडली में जिसका निर्माण हुआ है उससे आपको शांति मिल सके इसके अलावा आपको कुछ उपाय और बता रहा हूं आप इसे भी अपनाएं तो आपको काफी राहत मिलेगी.!*

*◆नहाते समय मुख पूर्व की ओर रखें*

*◆सूर्योदय और सूर्यास्त के समय कुछ ना खाएं, जल ग्रहण कर सकते हैं*

*◆प्रतिदिन शिवजी का जल से अभिषेक करें और बेलपत्र चढ़ाएं*

*◆शिवलिंग पर चांदी का नाग अर्पित करें*

*◆शिवरात्रि पर शिवजी का महाअभिषेक करवाएं*

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*श्रीसारस्वत पञ्चाङ्ग™----------®**👉पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण ...
03/12/2025

*श्रीसारस्वत पञ्चाङ्ग™----------®*

*👉पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण करते थे। पंचांग को नित्य पढ़ने और सुनने से देवताओं की कृपा, कुंडली के ग्रहो के शुभ फल मिलते है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फल की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना और पढ़ना चाहिए।*

*🐚🌺📜आज का पञ्चाङ्ग📜🌺🐚*

🔅 आज का दिनाँक 03 दिसम्बर 2025
🔅 दिन - बुधवार
🔅 विक्रम संवत - 2082
🔅 शाकः संवत - 1947
🔅 संवत्सर नाम - सिद्धार्थी
🔅 अयन - दक्षिणायन
🔅 ऋतु - हेमंत
🔅 मास - मार्गशीर्ष
🔅 पक्ष - शुक्लपक्ष
🔅 तिथि - त्रयोदशी
🔅 नक्षत्र - भरणी
🔅 योग - परिघ
🔅 दिशाशूल - उत्तर दिशा मे
🔅 सूर्योदय - 07:12 मिनट पर
🔅 सूर्यास्त - 17:41 मिनट पर
🔅 चंद्रोदय - 16:00 मिनट पर
🔅 चंद्रास्त - 06:22 मिनट पर
🔅 राहुकाल - 12:27 - 13:45 अशुभ
🔅 अभिजित -12:05 -12:53 अशुभ
🔅 तिथिविशेष - सर्वार्थसिद्धि योग , रवियोग
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*🔱⚜ भाग्योदय के लिए क्या करें⚜🔱*

*👉मंगलवार के दिन हनुमान जी को चढ़ाए उनका यह प्रिय प्रसाद::--------------------*

*🌻हमारा देश एक आस्था प्रधान देश है और धर्म के प्रति रूचि और निष्ठा रखने वालों की यहाँ कोई कमी नहीं है। भगवान की पूजा पाठ आदि में विवश्वास रखने वाले भक्तों की भी लम्बी फेहरिस्त है। लेकिन एक बात तो है की जब कोई इंसान आस्था से भगवान् की भक्ति करता है वो ये भी चाहता है की भगवान् की कृपा उस पर बनी रहे और जीवन दुःख संकटों से दूर रहे। भगवान के प्रसाद को पवित्र चीज माना जाता हैं। ऐसा कहा जाता हैं कि जब भगवान के चरणों में प्रसाद चढ़ाया जाता हैं तो वे उसके अन्दर आशीर्वाद रूपी सकारात्मक उर्जा भर देते हैं। इसके बाद जो भी व्यक्ति इस प्रसाद को खाता हैं उसे लाभ मिलता हैं। जैसा कि आप भी जानते हैं हर भगवान को अलग-अलग प्रसाद चढ़ाया जाता हैं। हनुमान जी को चना और चिरौंजी का प्रसाद बहुत पसंद आता हैं।आप ने ये बात नोटिस की होगी कि हर हनुमान मंदिर में चना और चिरौंजी के प्रसाद को सबसे अधिक मात्रा में चढ़ाया जाता हैं। ऐसा कहा जाता हैं कि चना और चिरौंजी दोनों हनुमान जी की बेहद प्रिय चीजे हैं। ऐसे में इन्हें वे भक्त बहुत पसंद आते हैं जो उनके चरणों में इन दो चीजों को अर्पित करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि चना और चिरौंजी के अलावा एक और ऐसी चीज हैं जो हर हनुमान भक्त को प्रसाद में शामिल करनी चाहिए। ये चीज काफी चमत्कारी मानी जाती हैं। यदि आप ने इसे हमुनाम जी के प्रसाद में शामिल कर दिया तो आपकी मनोकामना शीघ्र पूर्ण होती हैं। जब भी हनुमान जी को चना और चिरौंजी मिलाकर चढ़ाए तो उसमे थोड़ा सा गुड़ भी मिला दे। हनुमान जी को गुड़ काफी पसंद हैं। दरअसल गुड़ की मिठास और स्वाद दोनों ही चिरौंजी से बेहतर होता हैं। ऐसे में इस प्रसाद का स्वाद दुगुना हो जाता हैं। फिर जब आप ये प्रसाद दुसरे लोगो को बाँटते हैं तो इसे खाते ही उनका मन भी प्रसन्न हो जाता हैं। इस तरह प्रसाद में सिर्फ गुड़ मात्र मिला देने से आप कई चेहरो पर मुस्कान ला देते है। यही बात हनुमान जी को भी लुभा जाती हैं और वे आपकी मनोकामना पूर्ण करने के लिए बाध्य हो जाते हैं। वैसे तो आप इस प्रसाद को कभी भी चढ़ा सकते हैं लेकिन यदि आप इसे मंगलवार या शनिवार के दिन चढ़ाएंगे तो आपको इसका लाभ अधिक मिलेगा। साथ ही हो सके तो इस दिन हनुमान जी के नाम का व्रत रख रखे।*

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*👉नोट~~~~ आज परिघ योग में पापड़ का दान करना शुभफलदायी है।*
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*श्रीसारस्वत पञ्चाङ्ग™----------®**👉पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण ...
02/12/2025

*श्रीसारस्वत पञ्चाङ्ग™----------®*

*👉पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण करते थे। पंचांग को नित्य पढ़ने और सुनने से देवताओं की कृपा, कुंडली के ग्रहो के शुभ फल मिलते है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फल की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना और पढ़ना चाहिए।*

*🐚🌺📜आज का पञ्चाङ्ग📜🌺🐚*

🔅 आज का दिनाँक 02 दिसम्बर 2025
🔅 दिन - मंगलवार
🔅 विक्रम संवत - 2082
🔅 शाकः संवत - 1947
🔅 संवत्सर नाम - सिद्धार्थी
🔅 अयन - दक्षिणायन
🔅 ऋतु - हेमंत
🔅 मास - मार्गशीर्ष
🔅 पक्ष - शुक्लपक्ष
🔅 तिथि - द्वादशी
🔅 नक्षत्र - अश्विनी
🔅 योग - वरियान
🔅 दिशाशूल - उत्तर दिशा मे
🔅 सूर्योदय - 07:12 मिनट पर
🔅 सूर्यास्त - 17:41 मिनट पर
🔅 चंद्रोदय - 15:16 मिनट पर
🔅 चंद्रास्त - 29:08 मिनट पर
🔅 राहुकाल - 15:03 - 16:22 अशुभ
🔅 अभिजित -12:05 -12:53 शुभ
🔅 तिथिविशेष - गण्डमूल योग , सर्वार्थसिद्धि योग, अमृतसिद्धि योग, रवियोग , मोक्षदा एकादशी पारण , मत्स्य द्वादशी, प्रदोष व्रत
*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*--*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-***

*🔱⚜ भाग्योदय के लिए क्या करें⚜🔱*

*🌼⚜️हमारे शरीर की तीन नाडियां⚜️🌼*

*🌻हमारे शरीर की तीन मुख्य नाड़ियाँ इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना हैं। ये नाड़ियाँ ऊर्जा के प्रवाह के मार्ग हैं, जो शरीर में प्राण (जीवन ऊर्जा) का संचार करती हैं। इड़ा और पिंगला रीढ़ की हड्डी के दोनों ओर स्थित होती हैं, जबकि सुषुम्ना नाड़ी इनके बीचों-बीच रीढ़ की हड्डी से होकर गुजरती है।*

*🌻इड़ा नाड़ी: यह रीढ़ की बाईं ओर स्थित है। यह चंद्रमा से जुड़ी हुई है और 'तामसिक' (निष्क्रिय) प्रकृति की मानी जाती है।*

*🌻पिंगला नाड़ी: यह रीढ़ की दाहिनी ओर स्थित है। यह सूर्य से जुड़ी हुई है और 'राजसिक' (सक्रिय) प्रकृति की मानी जाती है।*

*🌻सुषुम्ना नाड़ी: यह रीढ़ की हड्डी के केंद्र में, सभी सात चक्रों से होकर गुजरती है। जब यह नाड़ी सक्रिय होती है, तो यह शरीर में प्राण के मुक्त प्रवाह को संभव बनाती है और संतुलन लाती है।*

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*👉नोट~~~~ आज वरियान योग में कंबल का दान करना शुभफलदायी है।*
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01/12/2025

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🔅 आज का दिनाँक 01 दिसम्बर 2025
🔅 दिन - सोमवार
🔅 विक्रम संवत - 2082
🔅 शाकः संवत - 1947
🔅 संवत्सर नाम - सिद्धार्थी
🔅 अयन - दक्षिणायन
🔅 ऋतु - हेमंत
🔅 मास - मार्गशीर्ष
🔅 पक्ष - शुक्लपक्ष
🔅 तिथि - एकादशी
🔅 नक्षत्र - रेवती
🔅 योग - व्यतिपात
🔅 दिशाशूल - पूर्व दिशा मे
🔅 सूर्योदय - 07:11 मिनट पर
🔅 सूर्यास्त - 17:41 मिनट पर
🔅 चंद्रोदय - 14:39 मिनट पर
🔅 चंद्रास्त - 27:58 मिनट पर
🔅 राहुकाल - 08:30 - 09:48 अशुभ
🔅 अभिजित -12:05 -12:53 शुभ
🔅 तिथिविशेष - पंचक, गाण्डमूल योग , गीता जयंती, मोक्षदा एकादशी , विश्व एड्स दिवस, गुरुवायुर एकादशी
*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*--*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-***

*🔱⚜ भाग्योदय के लिए क्या करें⚜🔱*

*👉सुख - सम्पति प्राप्ति हेतु जरूर करें यह प्रभावशाली उपाय::--------*

*👉आंवला-*

*🌻किसी भी रूप में थोड़ा सा आंवला हर रोज़ खाते रहे, जीवन भर उच्च रक्तचाप और हार्ट फेल नहीं होगा, मुररबा हो तो पानी से धोकर खांना चाहिए,वात पित्त कफ त्रिदोष संतुलित कर्ता है।*

*👉मेथी दाना:-*

*🌻मेथीदाना पीसकर रख ले,रात काँच के गिलास में डाल दे, और गर्म पानी भर दे, इंसमे त्रिफला भी डाल सकते है, सुबह पीये, कफ और वात नाशक है ,इस से आंव नहीं बनेगी, शुगर कंट्रोल रहेगी और जोड़ो के दर्द नहीं होंगे और पेट ठीक रहेगा, रक्त साफ होगा।*

*👉नेत्र स्नान:-*

*🌻मुंह में पानी का कुल्ला भर कर नेत्र धोये ,ऐसा दिन में तीन बार करे।, जब भी पानी के पास जाए,,मुंह में पानी का कुल्ला भर ले, और नेत्रों पर पानी के छींटे मारे, धोये, मुंह का पानी गर्म ना हो इसलिएबार बार कुल्ला नया भरते रहे।*

*★इससे आरोग्य शक्ति बढ़ती हैं, नेत्र ज्योति ठीक रहती हैं।*

*👉सरसों का तेल:-*

*🌻सर्दियों में हल्का गर्म सरसों तेल और गर्मियों में ठंडा सरसों तेल तीन बूँद दोनों कान में कभी कभी डालते रहे।*

*★इस से कान स्वस्थ रहेंगे।*

*👉निद्रा:-*

*🌻दिन में जब भी विश्राम करे तो दाहिनी करवट ले कर सोएं। और रात में बायीं करवट ले कर सोये।*

*★दाहिनी करवट लेने से बायां स्वर अर्थात चन्द्र नाड़ी चलेगी, और बायीं करवट लेने से दाहिना स्वर अर्थात सूर्य स्वर चलेगा।*

*👉ताम्बे का पानी:-*

*🌻रात को ताम्बे के बर्तन में रखा पानी सुबह उठते बिना कुल्ला किये ही पिए, निरंतर ऐसा करने से आप कई रोगो से बचे रहेंगे। ताम्बे के बर्तन में रखा जल, गंगा जल से भी अधिक शक्तिशाली माना गया हैं।*

*👉सौंठ:-*

*🌻सामान्य बुखार, फ्लू, जुकाम और कफ से बचने के लिए पिसी हुयी आधा चम्मच सौंठ और ज़रा सा गुड एक गिलास पानी में इतना उबाले के आधा पानी रह जाए।*

*★रात को सोने से पहले यह पिए। बदलते मौसम, सर्दी व वर्षा के ,आरम्भ में यह पीना रोगो से बचाता हैं। सौंठ नहीं हो तो अदरक का उपयोग करना चाहिए,*

*👉टाइफाइड:-*

*🌻चुटकी भर दालचीनी की फंकी चाहे अकेले ही, चाहे शहद के साथ दिन में दो बार लेने से टाइफाईड नहीं होता।*

*👉नाक:-*

*🌻रात को सोते समय नित्य सरसों का तेल नाक में लगाये। हर तीसरे दिन दो कली लहसुन रात को भोजन के साथ ले। प्रात: दस तुलसी के पत्ते और पांच काली मिर्च नित्य चबाये।*

*★सर्दी, बुखार, श्वांस रोग नहीं होगा ,नाक स्वस्थ रहेगी।*

*👉मालिश:-*

*🌻स्नान करने से आधा घंटा पहले सर के ऊपरी हिस्से में सरसों के तेल से मालिश करेइस से सर हल्का रहेगा, मस्तिष्क ताज़ा रहेगा।*

*★रात को सोने से पहले पैर के तलवो, नाभि, कान के पीछे और गर्दन पर सरसों के तेल की मालिश कर के सोएं।*

*★निद्रा अच्छी आएगी,मानसिक तनाव दूर होगा।त्वचा मुलायम रहेगी। सप्ताह में एक दिन पूरे शरीर में मालिश ज़रूर करे।*

*👉हरड़:----*

*🌻हर रोज़ एक छोटी हरड़ भोजन के बाद दाँतो तले रखे और इसका रस धीरे धीरे पेट में जाने दे। जब काफी देर बाद ये हरड़ बिलकुल नरम पड़ जाए तो चबा चबा कर निगल ले, इस से आपके बाल कभी सफ़ेद नहीं होंगे, दांत 100 वर्ष तक निरोगी रहेंगे और पेट के रोग नहीं होंगे।*

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Bikaner
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Tuesday 9am - 5pm
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