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*श्रीसारस्वत पञ्चाङ्ग™----------®**👉पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण ...
03/02/2026

*श्रीसारस्वत पञ्चाङ्ग™----------®*

*👉पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण करते थे। पंचांग को नित्य पढ़ने और सुनने से देवताओं की कृपा, कुंडली के ग्रहो के शुभ फल मिलते है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फल की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना और पढ़ना चाहिए।*

*🐚🌺📜आज का पञ्चाङ्ग📜🌺🐚*

🔅 आज का दिनाँक 03 फरवरी 2026
🔅 दिन - मंगलवार
🔅 विक्रम संवत - 𝟐𝟎𝟖𝟐
🔅 शाकः संवत - 𝟏𝟗𝟒𝟕
🔅 संवत्सर नाम - सिद्धार्थी
🔅 अयन - उत्तरायण
🔅 ऋतु - शिशिर
🔅 मास - फाल्गुन
🔅 पक्ष - कृष्णपक्ष
🔅 तिथि - द्वितीया
🔅 नक्षत्र - मघा
🔅 योग - शोभन
🔅 दिशाशूल - उत्तर दिशा मे
🔅 सूर्योदय - 07:23 मिनट पर
🔅 सूर्यास्त - 18:18 मिनट पर
🔅 चंद्रोदय - 19:54 मिनट पर
🔅 चंद्रास्त - 08:19 मिनट पर
🔅 राहुकाल - 15:35 - 16:57 अशुभ
🔅 अभिजित -12:29 -13:16 शुभ
🔅 तिथि विशेष - गण्डमूल योग
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*🔱⚜ भाग्योदय के लिए क्या करें⚜🔱*

*👉सुखी वैवाहिक जीवन के लिए करनी चाहिए भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा::------------*

*🌻हिंदू धर्म में भगवान शिव को देवों का देव काहा जाता है सब सृष्टि की संरचना हुई तो देवों के देव महादेव उसके पहले से उपस्थित थे भारतीय संस्कृति में शिव के अर्धनारीश्वर रूप का भी उल्लेख है। जब शिव की पूजा की जाती है तो जीवन में सुख अनुभूति होती है। सारे क्लेश मिट जाते हैं। लोगों का आपसी द्वंद्व लड़ाई समाप्त हो जाता है और इसीलिए विवाह रूपी बंधन के सबसे उत्तम उदाहरण शिव और पार्वती हैं। कहा जाता है कि यदि क्लेश से निजात पाना हो तो भगवान शिव की पूजा अर्चना करते रहना चाहिए।*

*1. आजकल के भागदौड़ भरे जीवन में दांपत्य जीवन में कई प्रकार के क्लेशों की घटनाएं होती रहती हैं। यदि ऋषि-मुनियों की मानें तो भगवान शिव और माता पार्वती की संपूर्ण विश्व की नियंता है इनकी पूजा करने से दंपत्ति की बीच का कलर तुरंत समाप्त हो जाता है।*

*2. शिव पूजन के लिए जगतपिता ब्रह्मा ने ऋषियों को एक विधि बताई थी जिसके अनुसार व्यक्ति को ब्रह्म मुहूर्त में उठना चाहिए तथा जगदंबा माता पार्वती और शिव का नित्य स्मरण करना चाहिए। इससे वैवाहिक जीवन में कोई बाधा या विघ्न नहीं पड़ेगा तथा सुख और शांति का प्रभाव जीवन में सदैव बना रहेगा।*

*3. शिवलिंग का जलाभिषेक करना भी इस कार्य में काफी लाभदायक सिद्ध होता है।*

*4. इसके साथ ही व्यक्ति को जय शिव जय शिव मैया पार्वती का जाप करना चाहिए इससे दंपति जीवन परिवार और संबंधों में मिठास बनी रहती है।*

*5. सोमवार के दिन महिलाओं को शिव तथा पार्वती को खीर का भोग लगाना चाहिए। इससे उनका सौभाग्य और सुहाग सदैव बने रहते हैं।*

*6. इसी के साथ पत्नियों को अपने पति के जन्म नक्षत्र के दिन दान करना चाहिए इससे उसकी आयु में बहुत वृद्धि होती है।*

*7. इसके साथ ही अर्धनारीश्वर स्तोत्र के पाठ से तलाक की स्थिति टल जाती है।*

*8. गौरी शंकर रुद्राक्ष धारण करने से जीवन में आई रिश्तों की दरारें भर जाती हैं।*

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*👉नोट~~~~ आज शोभन योग में सब्जियों का दान करना शुभफलदायी है।*
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*श्रीसारस्वत पञ्चाङ्ग™----------®**👉पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण ...
02/02/2026

*श्रीसारस्वत पञ्चाङ्ग™----------®*

*👉पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण करते थे। पंचांग को नित्य पढ़ने और सुनने से देवताओं की कृपा, कुंडली के ग्रहो के शुभ फल मिलते है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फल की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना और पढ़ना चाहिए।*

*🐚🌺📜आज का पञ्चाङ्ग📜🌺🐚*

🔅 आज का दिनाँक 02 फरवरी 2026
🔅 दिन - सोमवार
🔅 विक्रम संवत - 𝟐𝟎𝟖𝟐
🔅 शाकः संवत - 𝟏𝟗𝟒𝟕
🔅 संवत्सर नाम - सिद्धार्थी
🔅 अयन - उत्तरायण
🔅 ऋतु - शिशिर
🔅 मास - फाल्गुन
🔅 पक्ष - कृष्णपक्ष
🔅 तिथि - प्रतिपदा
🔅 नक्षत्र - अश्लेषा
🔅 योग - सौभाग्य
🔅 दिशाशूल - पूर्व दिशा मे
🔅 सूर्योदय - 07:24 मिनट पर
🔅 सूर्यास्त - 18:18 मिनट पर
🔅 चंद्रोदय - 18:51 मिनट पर
🔅 चंद्रास्त - 07:42 मिनट पर
🔅 राहुकाल - 08:45 - 10:07 अशुभ
🔅 अभिजित -12:29 -13:16 शुभ
🔅 तिथि विशेष - गण्डमूल योग
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*🔱⚜ भाग्योदय के लिए क्या करें⚜🔱*

*👉भगवान शिव ने कैसे छुड़ाया भस्मासुर से अपना पीछा::-------------*

*🌻शंकर भगवान और राक्षस राज भस्मासुर की प्रसिद्ध कथा सभी को मालूम है कि कैसे उग्र तप के बल पर उसने शिव से यह वरदान मांग लिया कि जिसके भी सिर पर हाथ रखे, वह भस्म हो जाए। शिव ने तथास्तु तो कह दिया, लेकिन वे संभावित अनिष्ट को भी भांप गए। भस्मासुर ने अपना पहला प्रयोग शिव पर ही आजमाना चाहा। तब विष्णु को मोहिनी रूप धरकर भस्मासुर को रिझाने के लिए सामने आना पड़ा। भस्मासुर अपने ही जाल में फंसकर भस्म हो गया। उसे मिला वरदान स्वयं उसी के लिए अभिशाप बन गया। अपने तप से वह शिवत्व का गुण भी प्राप्त कर सकता था, लेकिन कुप्रवृत्ति के वश में आ गया। यह जीवन का एक अनुभूत सत्य है कि भीतर यदि शिव प्रकट नहीं हैं तो अपनी ही शक्ति अपने विनाश का कारण बन जाती है। वरदान भी अभिशाप बनकर जीवन को जला डालता है। शिवत्व के अभाव में मनुष्य को यदि शक्ति प्राप्त हो भी गई तो वह अपने तथा दूसरों के अमंगल की ही हेतु बनती है। आज की सबसे बड़ी जरूरत यह है कि हम प्रबुद्ध और समाज-जीवी होने का ढिंढोरा पीटने के बजाए पहले भस्मासुर वाली मानसिकता को खत्म करें। रात-दिन घट रही कारगुजारियों के कारण मनुष्यता पर लगने वाले दाग को धोने के साथ-साथ आनंद और शांति का माहौल कायम करें। हर विपरीत परिस्थिति में अपने आप से सहृदय होकर अवश्य पूछें कि हमें क्या करना चाहिए। यह तय मानिए कि जो जवाब आएगा, वह आपको भी चकित कर देगा। हमें वह दृष्टि चाहिए जो शिवत्व को सोए से जगा सके और हमें स्वतंत्रचेता बना सके। स्वतंत्रता की खोज आदिम समय से हो रही है। अध्यात्म की ज्योति का प्रकटन इसी खोज से हुआ है। यदि आदमी स्वतंत्र है तो दूसरे तंत्र की आवश्यकता ही नहीं है। यदि अपना तंत्र नहीं है तो दूसरा कोई न कोई तंत्र अराजकता और अनुशासनहीनता का भ्रम फैलाकर आपको नियंत्रित करने आएगा ही। इसलिए अध्यात्म एक दृष्टि देता है कि मनुष्य को खुद बदलना चाहिए। अगर वह स्वयं को बदल ले तो संसार को भी बदलने का साहस कर सकता है। ऐसी हालत में समग्र व्यवस्थाएं भी अपने आप रूपांतरित होकर मनुष्यता के पक्ष में खड़ी दिखाई देने लगेंगी। लेकिन इसके लिए हमें संयम को साथ लेकर चलना होगा।*

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*👉नोट~~~~ आज सौभाग्य योग में सिंदूर का दान करना शुभफलदायी है।*
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*श्रीसारस्वत पञ्चाङ्ग™----------®**👉पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण ...
01/02/2026

*श्रीसारस्वत पञ्चाङ्ग™----------®*

*👉पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण करते थे। पंचांग को नित्य पढ़ने और सुनने से देवताओं की कृपा, कुंडली के ग्रहो के शुभ फल मिलते है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फल की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना और पढ़ना चाहिए।*

*🐚🌺📜आज का पञ्चाङ्ग📜🌺🐚*

🔅 आज का दिनाँक 01 फरवरी 2026
🔅 दिन - रविवार
🔅 विक्रम संवत - 𝟐𝟎𝟖𝟐
🔅 शाकः संवत - 𝟏𝟗𝟒𝟕
🔅 संवत्सर नाम - सिद्धार्थी
🔅 अयन - उत्तरायण
🔅 ऋतु - शिशिर
🔅 मास - माघ
🔅 पक्ष - शुक्लपक्ष
🔅 तिथि - पूर्णिमा
🔅 नक्षत्र - पुष्य
🔅 योग - प्रीती
🔅 दिशाशूल - पश्चिम दिशा मे
🔅 सूर्योदय - 07:24 मिनट पर
🔅 सूर्यास्त - 18:17 मिनट पर
🔅 चंद्रोदय - 17:44 मिनट पर
🔅 चंद्रास्त - 00:00 मिनट पर
🔅 राहुकाल - 16:55 - 18:17 अशुभ
🔅 अभिजित -12:29 -13:16 शुभ
🔅 तिथि विशेष - रविपुष्य योग , सर्वार्थसिद्धि योग, ललिता जयंती , गुरु रविदास जयंती ,
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*🔱⚜ भाग्योदय के लिए क्या करें⚜🔱*

*👉खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए 7 सरल उपाय::------------*

*🌻विवाह दो व्यक्तियों के बीच का एक अनूठा संगम होता है और यदि इस संगम में शांति और सुख की छाया सदैव बनी रहे तो यह संगम जीवन में खुशहाली लेकर के आता है। ज्योतिष के अनुसार ऐसे कई उपाय होते हैं जो बड़े ही सरल और आसानी से कई कठिनाइयों का निवारण करने में मदद करते हैं और खुशहाल जीवन की ओर दांपत्य जीवन को अग्रसर करते हैं। आइए जानते हैं किस प्रकार जीवन में शांति और सुख का प्रभाव कुछ सरल उपायों के द्वारा किया जा सकता है।*

*1. यदि पत्नी रात को एक चुटकी सिन्दूर अपने पति के सिर की ओर रखे और सुबह उठने से पहले (बिस्तर से उतरने से पूर्व) सिंदूर को मांग में भरे तो पति-पत्नी का जीवन सुखी बना रहेगा।*

*2. यदि स्त्रियाँ अपने हाथ में पीले रंग की चूड़ी पहन के रखे तो भी दंपति जीवन सुखी रहेगा।*

*3. विदाई के वक्त यदि एक लोटे पानी में चुटकी भर हल्दी, एक का सिक्का व गंगाजल डालकर दुल्हन के सर से ग्यारह बार उसार कर उसके आगे रख दिया जाय तो उसके जीवन में सदैव शांति बनी रहेगी।*

*4. विवाह के चार दिन पूर्व हल्दी की सात गांठ। थोड़ा सा केसर, गुड़, चने की दाल और पीतल के सिक्के को एक पीले वस्त्र में बांधना चाहिए और कन्या को इस वस्त्र को अपने ससुराल की दिशा की ओर उछाल देना चाहिए। इससे दांपत्य जीवन में सुख और शांति सदैव बनी रहती है।*

*5. स्त्रियों को किसी और को दान करने के दौरान सामग्री में लाल सिंदूर चने की दाल, इत्र की शीशी रखनी चाहिए। इससे उसके पति की आयु में इज़ाफ़ा होता है।*

*6. स्त्रियों को प्रतिदिन दुर्गा चालीसा का पाठ करना चाहिए और उनके नाम का जाप करना चाहिए इससे स्त्री के परिवार में खुशहाली और शांति का प्रवाह होता है तथा नकारात्मकता दूर रहती है।*

*7. पत्नियों को प्रतिदिन केले के वृक्ष का पूजन करना चाहिए तथा किसी बड़ी बुजुर्ग महिला का आशीष प्रतिदिन लेना चाहिए। इससे ससुराल के संबंधों में शांति और सुख का प्रवाह होता है।*

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*👉नोट~~~~ आज प्रीती योग में तेल का दान करना शुभफलदायी है।*
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*श्रीसारस्वत पञ्चाङ्ग™----------®**👉पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण ...
16/01/2026

*श्रीसारस्वत पञ्चाङ्ग™----------®*

*👉पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण करते थे। पंचांग को नित्य पढ़ने और सुनने से देवताओं की कृपा, कुंडली के ग्रहो के शुभ फल मिलते है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फल की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना और पढ़ना चाहिए।*

*🐚🌺📜आज का पञ्चाङ्ग📜🌺🐚*

🔅 आज का दिनाँक 16 जनवरी 2026
🔅 दिन - शुक्रवार
🔅 विक्रम संवत - 𝟐𝟎𝟖𝟐
🔅 शाकः संवत - 𝟏𝟗𝟒𝟕
🔅 संवत्सर नाम - सिद्धार्थी
🔅 अयन - उत्तरायण
🔅 ऋतु - शिशिर
🔅 मास - माघ
🔅 पक्ष - कृष्णपक्ष
🔅 तिथि - त्रयोदशी
🔅 नक्षत्र - मूला
🔅 योग - ध्रुव
🔅 दिशाशूल - पश्चिम दिशा मे
🔅 सूर्योदय - 07:29 मिनट पर
🔅 सूर्यास्त - 18:04 मिनट पर
🔅 चंद्रोदय - 06:26 मिनट पर
🔅 चंद्रास्त - 15:43 मिनट पर
🔅 राहुकाल - 11:27 - 12:47 अशुभ
🔅 अभिजित -12:25 -13:12 शुभ
🔅 तिथि विशेष - गाण्डमूल योग, प्रदोष व्रत
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*🔱⚜ भाग्योदय के लिए क्या करें⚜🔱*

*👉ज्योतिष शास्त्र में विवाह से पूर्व युगल के लिए कुंडली मिलान जरुरी क्यों::-----------*

*🌻गुण मिलान कुंडली मिलान का एक हिस्सा है जो दुल्हन और दूल्हे की जन्मकुंडली के आधार पर किया जाता है। इसे “अष्टकूट मिलान” भी कहा जाता है क्योंकि यह गुण के आठ पहलुओं को दर्शाता है। आठ "कूट" या पहलू हैं: -*

*🌻वर्ना / वरण / जाति: यह एक लड़के और लड़की की आध्यात्मिकता की तुलना उनके अहम स्तरों के साथ करने के लिए किया जाता है। इस पहलू के अंतर्गत चार श्रेणियां हैं- ब्राह्मण (उच्चतम), क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र (नीच)।*

*🌻वास्य / वश्य: यह कूट दो व्यक्तियों के बीच पारस्परिक आकर्षण को मापता है। यह हमें यह भी बताता है कि शादी में किसका नियंत्रण होगा । इस श्रेणी के अंतर्गत वर्गीकरण हैं- मानव / नारा (मानव), वँखर (शेर जैसे जानवर), चटसपद (हिरण जैसे छोटे जानवर), जलचर (समुद्री जानवर), कीता / कीट (कीड़े)।*

*🌻तारा / दीना: इस कूट का उपयोग दंपति के भाग्य और जन्म नक्षत्र अनुकूलता को खोजने के लिए किया जाता है। कुल में, 27 जन्म सितारे हैं।*

*🌻योनी: यह आपसी प्रेम को मापने के लिए प्रयोग किया जाता है जो एक जोड़े के पास होता है। यह यौन संगतता और अंतरंगता स्तर को निर्धारित करने में भी मदद करता है जो उनके पास होने की संभावना है। इस कूट के अंतर्गत 14 पशु वर्गीकरण हैं, जैसे कि घोड़ा, हाथी, भेड़, सांप, कुत्ता, बिल्ली, चूहा, गाय, भैंस, बाघ, हिरण, बंदर, शेर, आम।*

*🌻ग्रहा मैत्री / रासादीपति: यह कूट युगल के चन्द्रमा संकेत संगतता का प्रतिनिधित्व करता है। हमें प्रकृति और मित्रता और स्नेह का स्तर भी बताता है जो उनके पास होगा। उनकी मानसिक और सहज अनुकूलता को भी इस पहलू से मापा जाता है।*

*🌻गण: यह कूट व्यवहार और स्वभाव को मापने के लिए है और इसे 3 श्रेणियों - देव (भगवान), मानव (मानव) और असुर (दानव) में विभाजित किया गया है।*

*🌻राशी या भकूट: इसका उपयोग लड़के और लड़की के बीच भावनात्मक अनुकूलता को खोजने के लिए किया जाता है।*

*🌻नाड़ी: नाडी कूट स्वास्थ्य और जीन से जुड़ी है। आदि नाडी ,मध्य नाडी , अन्त्य नाडी।*

*👉गुण मिलान का महत्व::------*

*🌻अंकों का एक विशिष्ट समूह है जो प्रत्येक कूट के पास होता है, जो कुल 36 बिंदुओं को जोड़ता है। अष्टकूट में कुल 36 गुण मिलान हैं। गुण मिलान से प्राप्त अंकों की कुल संख्या के आधार पर, कुछ भविष्यवाणियों को 18 बिंदुओं के साथ एक मैच बनाया जाता है, जो कि सबसे अधिक हतोत्साहित करने वाला होगा और एक आदर्श युगल नहीं माना जाता है।*

*👉गुना अंक प्राप्त किया::------*

*🌻18 से कम है*
*विवाह के लिए अनुशंसित नहीं*

*🌻18 से 24*
*स्वीकार्य मैच और शादी की सिफारिश की जाती है*

*🌻24 से 32*
*बहुत अच्छा, सफल विवाह*

*🌻32 से 36*
*बेहतरीन मैच*

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*👉नोट~~~~ आज ध्रुव योग में का चंदन करना शुभफलदायी है।*
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15/01/2026

*श्रीसारस्वत पञ्चाङ्ग™----------®*

*👉पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण करते थे। पंचांग को नित्य पढ़ने और सुनने से देवताओं की कृपा, कुंडली के ग्रहो के शुभ फल मिलते है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फल की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना और पढ़ना चाहिए।*

*🐚🌺📜आज का पञ्चाङ्ग📜🌺🐚*

🔅 आज का दिनाँक 15 जनवरी 2026
🔅 दिन - गुरुवार
🔅 विक्रम संवत - 𝟐𝟎𝟖𝟐
🔅 शाकः संवत - 𝟏𝟗𝟒𝟕
🔅 संवत्सर नाम - सिद्धार्थी
🔅 अयन - उत्तरायण
🔅 ऋतु - शिशिर
🔅 मास - माघ
🔅 पक्ष - कृष्णपक्ष
🔅 तिथि - द्वादशी
🔅 नक्षत्र - ज्येष्ठा
🔅 योग - वृद्वि
🔅 दिशाशूल - दक्षिण दिशा मे
🔅 सूर्योदय - 07:29 मिनट पर
🔅 सूर्यास्त - 18:03 मिनट पर
🔅 चंद्रोदय - 29:35 मिनट पर
🔅 चंद्रास्त - 14:52 मिनट पर
🔅 राहुकाल - 14:05 - 15:25 अशुभ
🔅 अभिजित -12:25 -13:12 शुभ
🔅 तिथि विशेष - गाण्डमूल योग, षटतिला एकादशी पारण,
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*🔱⚜ भाग्योदय के लिए क्या करें⚜🔱*

*👉बुध पर्वत पर त्रिशूल का निशान माना जाता है बेहद शुभ::------*

*🌻हस्त शाश्त्र भारत का एक बहुत पुराना एवं प्रचलित शाश्त्र है। यह एक कला है जिसकी मदद से व्यक्ति के भूत भविष्य और वर्तमान को जाना जा सकता है। ज्योतिष ज्ञाता हाथो की उंगलिया उनका रंग और नाख़ून से ही व्यक्ति का भविष्य बता देते है। मानना है की हथेली पर मौजूद पर्वतों से भी बहुत कुछ जानकारी हासिल की जा सकती है। हथेली की उंगलियों के नीचे किसी न किसी ग्रह का स्थान होता है। जिसका मनुष्य के जीवन पर कुछ न कुछ प्रभाव जरूर देखने को मिलता है। यहां हम बताएंगे अनामिका उंगली के नीचे मौजूद बुध पर्वत के बारे में। जिस स्थान से व्यापार, करियर और व्यक्ति के जीवन में प्राप्त होने वाले नाम, यश इत्यादि का पता चलता है।*

*👉देखिए कहीं आपकी हथेली पर तोह नहीं यह निशान:-*

*◆बुध पर्वत पर त्रिभुज का चिह्न होना शुभ माना जाता है।*

*◆इससे व्यक्ति की ख्याति बढ़ती है।*

*◆अगर त्रिकोण का चिह्न बना हो तो ऐसे लोग बुद्धिमान होते हैं।*

*◆साथ ही कला प्रेमी भी होते हैं।*

*◆ऐसे लोग अभिनय के क्षेत्र में ज्यादा नाम कमाते हैं।*

*◆इसी तरह जिन लोगों के बुध पर्वत पर त्रिशूल बना हो तो ऐसे लोगों की आर्थिक स्थिति काफी मजबूत होती है। और जीवन में ये अत्याधिक धन कमाते हैं।*

*◆यह लोग अपने जीवन में सफल होते हैं और इनका समाज में एक अलग ही रूतबा होता है।*

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*👉नोट~~~~ आज वृद्वि योग में ताँबे का दान करना शुभफलदायी है।*
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14/01/2026

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*👉पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण करते थे। पंचांग को नित्य पढ़ने और सुनने से देवताओं की कृपा, कुंडली के ग्रहो के शुभ फल मिलते है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फल की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना और पढ़ना चाहिए।*

*🐚🌺📜आज का पञ्चाङ्ग📜🌺🐚*

🔅 आज का दिनाँक 14 जनवरी 2026
🔅 दिन - बुधवार
🔅 विक्रम संवत - 𝟐𝟎𝟖𝟐
🔅 शाकः संवत - 𝟏𝟗𝟒𝟕
🔅 संवत्सर नाम - सिद्धार्थी
🔅 अयन - दक्षिणायन
🔅 ऋतु - शिशिर
🔅 मास - माघ
🔅 पक्ष - कृष्णपक्ष
🔅 तिथि - एकादशी
🔅 नक्षत्र - अनुराधा
🔅 योग - गण्ड
🔅 दिशाशूल - उत्तर दिशा मे
🔅 सूर्योदय - 07:30 मिनट पर
🔅 सूर्यास्त - 18:02 मिनट पर
🔅 चंद्रोदय - 28:40 मिनट पर
🔅 चंद्रास्त - 14:07 मिनट पर
🔅 राहुकाल - 12:46 - 14:05 अशुभ
🔅 अभिजित -12:24 -13:12 अशुभ
🔅 तिथि विशेष - सर्वार्थसिद्धि योग, अमृतसिद्धि योग, मकर संक्रांति, षटतिला एकादशी , पौगल
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*🔱⚜ भाग्योदय के लिए क्या करें⚜🔱*

*👉मकर संक्रान्ति पर अपनी राशि अनुसार कौन सा दान करना रहेगा लाभकारी::---------------*

*☘मकर संक्रांति हिंदुओं के बड़े पर्वों में से एक है। इस साल मकर संक्रांति का त्योहार आज 14 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा। मकर संक्रांति का जितना धार्मिक महत्व है उतना ही वैज्ञानिक महत्व भी बताया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर ही मकर संक्रांति योग बनता है। इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। इस साल 14 जनवरी को दोपहर 03.13 बजे सूर्य उत्तरायण होंगे यानी सूर्य अपनी चाल बदलकर धनु से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य देव जब मकर राशि में आते हैं तो शनि की प्रिय वस्तुओं के दान से भक्तों पर सूर्य की कृपा बरसती है। इस कारण मकर संक्रांति के दिन तिल निर्मित वस्तुओं का दान शनिदेव की विशेष कृपा को घर परिवार में लाता है।*

*★मेष- तिल-गुड़ का दान दें, उच्च पद की प्राप्ति होगी।*

*★वृष- तिल डालकर अर्घ्य दें, बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी।*

*★मिथुन- जल में तिल, दूर्वा तथा पुष्प मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें, ऐश्वर्य प्राप्ति होगी।*

*★कर्क- चावल-मिश्री-तिल का दान दें, कलह-संघर्ष, व्यवधानों पर विराम लगेगा।*

*★सिंह- तिल, गुड़, गेहूं, सोना दान दें, नई उपलब्धि होगी।*

*★कन्या- पुष्प डालकर सूर्य को अर्घ्य दें, शुभ समाचार मिलेगा।*

*★तुला- सफेद चंदन, दुग्ध, चावल दान दें। शत्रु अनुकूल होंगे।*

*★वृश्चिक- जल में कुमकुम, गुड़ दान दें, विदेशी कार्यों से लाभ, विदेश यात्रा होगी।*

*★धनु- जल में हल्दी, केसर, पीले पुष्प तथा मिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें, चारों-ओर विजय होगी।*

*★मकर- तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें, अधिकार प्राप्ति होगी।*

*★कुंभ- तेल-तिल का दान दें, विरोधी परास्त होंगे।*

*★मीन- हल्दी, केसर, पीत पुष्प, तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें, सरसों, केसर का दान दें, सम्मान, यश बढ़ेगा।*

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*👉नोट~~~~ आज गण्ड योग में पीतल का दान करना शुभफलदायी है।*
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*श्रीसारस्वत पञ्चाङ्ग™----------®**👉पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण ...
13/01/2026

*श्रीसारस्वत पञ्चाङ्ग™----------®*

*👉पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण करते थे। पंचांग को नित्य पढ़ने और सुनने से देवताओं की कृपा, कुंडली के ग्रहो के शुभ फल मिलते है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फल की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना और पढ़ना चाहिए।*

*🐚🌺📜आज का पञ्चाङ्ग📜🌺🐚*

🔅 आज का दिनाँक 13 जनवरी 2026
🔅 दिन - मंगलवार
🔅 विक्रम संवत - 𝟐𝟎𝟖𝟐
🔅 शाकः संवत - 𝟏𝟗𝟒𝟕
🔅 संवत्सर नाम - सिद्धार्थी
🔅 अयन - दक्षिणायन
🔅 ऋतु - शिशिर
🔅 मास - माघ
🔅 पक्ष - कृष्णपक्ष
🔅 तिथि - दशमी
🔅 नक्षत्र - विशाखा
🔅 योग - शूल
🔅 दिशाशूल - उत्तर दिशा मे
🔅 सूर्योदय - 07:30 मिनट पर
🔅 सूर्यास्त - 18:01 मिनट पर
🔅 चंद्रोदय - 27:44 मिनट पर
🔅 चंद्रास्त - 13:27 मिनट पर
🔅 राहुकाल - 15:23 - 16:42 अशुभ
🔅 अभिजित -12:24 -13:12 शुभ
🔅 तिथि विशेष -
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*🔱⚜ भाग्योदय के लिए क्या करें⚜🔱*

*👉कुंडली मिलान आवश्यक क्यों ? जानें यह 7 कारण:---------*

*🌻वैदिक ज्योतिष में कुंडली मिलान को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। आइए आपको बताए 7 कारण क्यों कुंडली मिलान है आवश्यक :*

*👉.1 समग्र संगतता के लिए:-----*

*🌻शादी से पहले कुंडली का मिलान करने का एक बड़ा कारण यह समझना है कि दूल्हा और दुल्हन कितने संगत हैं। ज्योतिष के अनुसार, कुल 36 गुण हैं, जो यह निष्कर्ष निकालने के लिए मेल खाती हैं कि दो लोग कितने संगत हैं और उनका जीवन कितना समृद्ध होगा। यह भी इंगित करता है कि उनके व्यक्तिगत ग्रह और भाग्य एक दूसरे को कैसे प्रभावित करेंगे। कुंडली मिलान करके, हम संयुग्म सद्भाव को भी निर्दिष्ट कर सकते हैं। यदि कुंडली में कोई समस्या है, तो ज्योतिष शास्त्र भी विभिन्न उपचार प्रदान करता है।*

*👉.2 वित्तीय स्थिरता और करियर पर प्रभाव:-------*

*🌻जब दो लोग विवाह के पवित्र रिश्ते में एकजुट होते हैं, तो उनके ग्रहों की चाल का न केवल उनके जीवन पर बल्कि एक दूसरे के जीवन पर भी प्रभाव पड़ता है। ज्योतिषों के अनुसार सप्तम गुण इस प्रभाव को इंगित करता है। कुंडली के मिलान से वित्तीय स्थिरता और नौकरी की संभावनाओं पर भी ध्यान केंद्रित होता है।*

*👉.3 संतान के लिए अनुकूलता::-------*

*🌻बच्चों की खुशी और स्वास्थ्य सबसे महत्वपूर्ण होता है। नाडी वैवाहिक जीवन के लिए बहुत ही अहम होती है | एक परिवार को बच्चे के जन्म के बाद ही पूरा माना जाता है, इसलिए माता-पिता शादी के बाद अपने बच्चों के लिए इस खुशी को सुरक्षित करने के लिए बहुत विशेष हैं।*

*👉.4 मानसिक और शारीरिक संगतता::-------*

*🌻कुंडली मिलान कार्य का उपयोग दोनों भागीदारों की मानसिकता, रुचियों, व्यवहार, स्वभाव और सबसे महत्वपूर्ण रूप से उनके दृष्टिकोण की भविष्यवाणी करने के लिए किया जाता है। यह एक सफल विवाह का मूल आधार है विशेष रूप से इन चुनौतीपूर्ण समय के दौरान जब दुनिया बड़े पैमाने पर आगे बढ़ रही है। मिलान भी दोनों भागीदारों के स्वास्थ्य और कल्याण का मूल्यांकन करता है।*

*👉.5 दशा पर काबू:--------*

*🌻जब एक बच्चा जन्म लेता है, तो सितारों की स्थिति और उसके जन्म का समय उसके भाग्य का फैसला करता है। यह कारक वैज्ञानिक रूप से सिद्ध है और इसलिए प्रत्येक व्यक्ति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। सितारों का समय और स्थान कभी-कभी ऐसा हो सकता है कि वे व्यक्ति के चार्ट में दशा का निर्माण करें, जैसे, मंगल दशा या शनि दशा। इस तरह के दशाओं से शादी के बाद समस्या हो सकती है और कुंडली मिलान की मदद से इसका पता लगाया जा सकता है। एक बार पता चलने के बाद, ज्योतिषी आपको कुछ पूजा करने के लिए मार्गदर्शन कर सकता है या इसके प्रभावों को कम करने के लिए कुछ दिनचर्या का पालन कर सकता है। चरम मामलों में, विवाह उचित नहीं है।*

*👉.6 बेजोड़ और बेमेल कुंडलियों की समस्याओं का समाधान::---*

*🌻विवाह की सफलता और विफलता के लिए कुंडली मिलान एक महत्वपूर्ण पहलू है। लेकिन, कुंडली को छोड़कर हर दूसरे कारक का क्या करना चाहिए जो विवाह में एक संभावना के रूप में सही है? ऐसी परिस्थितियों में, एक सम्मानित और प्रसिद्ध ज्योतिषी से परामर्श करने की सिफारिश की जाती है। दंपतियों की कुंडली में द्वादश और योगों के नकारात्मक और अशुभ प्रभावों को कम करने के लिए कुछ उपाय या समाधान हो सकते हैं जो लागू हो सकते हैं। ज्योतिष में एक विशेष व्यक्ति के साथ गाँठ बाँधने का एक उपाय है, भले ही आपकी कुंडली एक दूसरे के साथ मेल न खा रही हो।*

*👉.7 बेहतर जीवन के लिए विशेष पूजा::--------------*

*🌻एक बार कुंडली मिलान करने के बाद ज्योतिषी सुखी वैवाहिक जीवन के लिए कुछ पूजाओं का सुझाव दे सकते हैं। कभी-कभी, कुंडली के मिलान के बाद पाए जाने वाले दोषों को कुछ पूजाओं को करने के बाद ठीक किया जा सकता है। कुंडली मिलान होने पर भी, एक सफल और समस्या मुक्त विवाहित जीवन के लिए, वर और वधू के सितारों के विस्तृत विश्लेषण के बाद कुछ पूजाओं की सलाह दी जाती है।*

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*श्रीसारस्वत पञ्चाङ्ग™----------®**👉पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण ...
12/01/2026

*श्रीसारस्वत पञ्चाङ्ग™----------®*

*👉पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण करते थे। पंचांग को नित्य पढ़ने और सुनने से देवताओं की कृपा, कुंडली के ग्रहो के शुभ फल मिलते है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फल की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना और पढ़ना चाहिए।*

*🐚🌺📜आज का पञ्चाङ्ग📜🌺🐚*

🔅 आज का दिनाँक 12 जनवरी 2026
🔅 दिन - सोमवार
🔅 विक्रम संवत - 𝟐𝟎𝟖𝟐
🔅 शाकः संवत - 𝟏𝟗𝟒𝟕
🔅 संवत्सर नाम - सिद्धार्थी
🔅 अयन - दक्षिणायन
🔅 ऋतु - शिशिर
🔅 मास - माघ
🔅 पक्ष - कृष्णपक्ष
🔅 तिथि - नवमी
🔅 नक्षत्र - स्वाति
🔅 योग - घृती
🔅 दिशाशूल - पूर्व दिशा मे
🔅 सूर्योदय - 07:30 मिनट पर
🔅 सूर्यास्त - 18:01 मिनट पर
🔅 चंद्रोदय - 26:48 मिनट पर
🔅 चंद्रास्त - 12:52 मिनट पर
🔅 राहुकाल - 08:48 - 10:07 अशुभ
🔅 अभिजित -12:23 -13:11 शुभ
🔅 तिथि विशेष - स्वामी विवेकानंद जयंती, राष्ट्रीय युवा दिवस
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*🔱⚜ भाग्योदय के लिए क्या करें⚜🔱*

*👉महालक्ष्मी को प्रसन्न करने का अद्भुत उपाय – कनकधारा स्तोत्र:-*

*💐कनकधारा स्तोत्र की रचना आदिगुरु शंकराचार्य जी ने की थी। कनकधारा का अर्थ होता है स्वर्ण की धारा, कहते हैं कि इस स्तोत्र के द्वारा माता लक्ष्मी को प्रसन्न करके उन्होंने सोने की वर्षा कराई थी।*

*🌹सिद्ध मंत्र होने के कारण कनकधारा स्तोत्र का पाठ शीघ्र फल देनेवाला और दरिद्रता का नाश करनेवाला है। इसके नित्य पाठ से धन सम्बंधित सभी प्रकार के अवरोध दूर होते हैं और महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।*

*॥ श्री कनकधारा स्तोत्र ॥*

अङ्ग हरेः पुलकभूषणमाश्रयन्ती
भृङ्गाङ्गनेव मुकुलाभरणं तमालम् ।
अङ्गीकृताखिलविभूतिरपाङ्गलीला
माङ्गल्यदास्तु मम मङ्गलदेवतायाः ॥1॥

अर्थ – जैसे भ्रमरी अधखिले कुसुमों से अलंकृत तमाल के पेड़ का आश्रय लेती है, उसी प्रकार जो श्रीहरि के रोमांच से सुशोभित श्रीअंगों पर निरंतर पड़ती रहती है तथा जिसमें सम्पूर्ण ऐश्वर्य का निवास है, वह सम्पूर्ण मंगलों की अधिष्ठात्री देवी भगवती महालक्ष्मी की कटाक्षलीला मेरे लिए मंगलदायिनी हो।

मुग्धा मुहुर्विदधती वदने मुरारेः
प्रेमत्रपाप्रणिहितानि गतागतानि ।
माला दृशोर्मधुकरीव महोत्पले या
सा मे श्रियं दिशतु सागरसम्भवायाः ॥2॥

अर्थ – जैसे भ्रमरी महान कमलदल पर आती-जाती या मँडराती रहती है, उसी प्रकार जो मुरशत्रु श्रीहरि के मुखारविंद की ओर बारंबार प्रेमपूर्वक जाती और लज्जा के कारण लौट आती है, वह समुद्रकन्या लक्ष्मी की मनोहर मुग्ध दृष्टिमाला मुझे धन-सम्पत्ति प्रदान करे।

विश्वामरेन्द्रपदविभ्रमदानदक्ष –
मानन्दहेतुरधिकं मुरविद्विषोऽपि ।
ईषन्निषीदतु मयि क्षणमीक्षणार्ध –
मिन्दीवरोदरसहोदरमिन्दिरायाः ॥3॥

अर्थ – जो सम्पूर्ण देवताओं के अधिपति इन्द्र के पद का वैभव-विलास देने में समर्थ है, मुरारि श्रीहरि को भी अधिकाधिक आनन्द प्रदान करनेवाली है तथा जो नीलकमल के भीतरी भाग के समान मनोहर जान पड़ती है, वह लक्ष्मीजी के अधखुले नयनों की दृष्टि क्षणभर के लिए मुझपर भी थोड़ी सी अवश्य पड़े।

आमीलिताक्षमधिगम्य मुदा मुकुन्द –
मानन्दकन्दमनिमेषमनङ्गतन्त्रम् ।
आकेकरस्थितकनीनिकपक्ष्मनेत्रं
भूत्यै भवेन्मम भुजङ्गशयाङ्गनायाः ॥4॥

अर्थ – शेषशायी भगवान विष्णु की धर्मपत्नी श्रीलक्ष्मीजी का वह नेत्र हमें ऐश्वर्य प्रदान करनेवाला हो, जिसकी पुतली तथा भौं प्रेमवश हो अधखुले, किंतु साथ ही निर्निमेष नयनों से देखनेवाले आनन्दकन्द श्रीमुकुन्द को अपने निकट पाकर कुछ तिरछी हो जाती हैं।

बाह्वन्तरे मधुजितः श्रितकौस्तुभे या
हारावलीव हरिनीलमयी विभाति ।
कामप्रदा भगवतोऽपि कटाक्षमाला
कल्याणमावहतु मे कमलालयायाः ॥5॥

अर्थ – जो भगवान मधुसूदन के कौस्तुभमणि मण्डित वक्षस्थल में इन्द्रनीलमयी हारावली सी सुशोभित होती है तथा उनके भी मन में प्रेम का संचार करनेवाली है, वह कमलकुंजवासिनी कमला की कटाक्षमाला मेरा कल्याण करे।

कालाम्बुदालिललितोरसि कैटभारे –
र्धाराधरे स्फुरति या तडिदङ्गनेव ।
मातुः समस्तजगतां महनीयमूर्ति –
र्भद्राणि मे दिशतु भार्गवनन्दनायाः ॥6॥

अर्थ – जैसे मेघों की घटा में बिजली चमकती है, उसी प्रकार जो कैटभशत्रु श्रीविष्णु के काली मेघमाला के समान श्यामसुन्दर वक्षस्थल पर प्रकाशित होती हैं, जिन्होंने अपने आविर्भाव से भृगुवंश को आनन्दित किया है तथा जो समस्त लोकों की जननी हैं, उन भगवती लक्ष्मी की पूजनीया मूर्ति मुझे कल्याण प्रदान करे।

प्राप्तं पदं प्रथमतः किल यत्प्रभावान्
माङ्गल्यभाजि मधुमाथिनि मन्मथेन।
मय्यापतेत्तदिह मन्थरमीक्षणार्धं
मन्दालसं च मकरालयकन्यकायाः ॥7॥

अर्थ – समुद्रकन्या कमला की वह मन्द, अलस, मन्थर और अर्धोन्मीलित दृष्टि, जिसके प्रभाव से कामदेव ने मंगलमय भगवान मधुसूदन के हृदय में प्रथम बार स्थान प्राप्त किया था, यहाँ मुझपर पड़े।

दद्याद् दयानुपवनो द्रविणाम्बुधारा –
मस्मिन्नकिञ्चनविहङ्गशिशौ विषण्णे।
दुष्कर्मघर्ममपनीय चिराय दूरं
नारायणप्रणयिनीनयनाम्बुवाहः ॥8॥

अर्थ – भगवान नारायण की प्रेयसी लक्ष्मी का नेत्ररूपी मेघ दयारूपी अनुकूल पवन से प्रेरित हो दुष्कर्मरूपी घाम को चिरकाल के लिए दूर हटाकर विषाद में पड़े हुए मुझ दीनरूपी चातक पर धनरूपी जलधारा की वृष्टि करे।

इष्टा विशिष्टमतयोऽपि यया दयार्द्र –
दृष्ट्या त्रिविष्टपपदं सुलभं लभन्ते।
दृष्टिः प्रहृष्टकमलोदरदीप्तिरिष्टां
पुष्टिं कृषीष्ट मम पुष्करविष्टरायाः ॥9॥

अर्थ – विशिष्ट बुद्धिवाले मनुष्य जिनके प्रीतिपात्र होकर उनकी दयादृष्टि के प्रभाव से स्वर्गपद को सहज ही प्राप्त कर लेते हैं, उन्हीं पद्मासना पद्मा की वह विकसित कमल गर्भ के समान कान्तिमती दृष्टि मुझे मनोवांछित पुष्टि प्रदान करे।

गीर्देवतेति गरुडध्वजसुन्दरीति
शाकम्भरीति शशिशेखरवल्लभेति।
सृष्टिस्थितिप्रलयकेलिषु संस्थितायै
तस्यै नमस्त्रिभुवनैकगुरोस्तरुण्यै ॥10॥

अर्थ – जो सृष्टि-लीला के समय ब्रह्मशक्ति के रूप में स्थित होती हैं, पालन-लीला करते समय वैष्णवी शक्ति के रूप में विराजमान होती हैं तथा प्रलय-लीला के काल में रुद्रशक्ति के रूप में अवस्थित होती हैं, उन त्रिभुवन के एक मात्र गुरु भगवान नारायण की नित्ययौवना प्रेयसी श्रीलक्ष्मीजी को नमस्कार है।

श्रुत्यै नमोऽस्तु शुभकर्मफलप्रसूत्यै
रत्यै नमोऽस्तु रमणीयगुणार्णवायै।
शक्त्यै नमोऽस्तु शतपत्रनिकेतनायै
पुष्ट्यै नमोऽस्तु पुरुषोत्तमवल्लभायै ॥11॥

अर्थ – हे माता ! शुभ कर्मों का फल देनेवाली श्रुति के रूप में आपको प्रणाम है। रमणीय गुणों की सिन्धुरूप रति के रूप में आपको नमस्कार है। कमलवन में निवास करनेवाली शक्तिस्वरूपा लक्ष्मी को नमस्कार है तथा पुरुषोत्तमप्रिया पुष्टि को नमस्कार है।

नमोऽस्तु नालीकनिभाननायै
नमोऽस्तु दुग्धोदधिजन्मभूत्यै।
नमोऽस्तु सोमामृतसोदरायै
नमोऽस्तु नारायणवल्लभायै ॥12॥

अर्थ – कमलवदना कमला को नमस्कार है। क्षीरसिन्धु सम्भूता श्रीदेवी को नमस्कार है। चन्द्रमा और सुधा की सगी बहन को नमस्कार है। भगवान नारायण की वल्लभा को नमस्कार है।

सम्पत्कराणि सकलेन्द्रियनन्दनानि
साम्राज्यदानविभवानि सरोरुहाक्षि।
त्वद्वन्दनानि दुरिताहरणोद्यतानि
मामेव मातरनिशं कलयन्तु मान्ये ॥13॥

अर्थ – कमलसदृश नेत्रोंवाली माननीया माँ ! आपके चरणों में की हुई वन्दना सम्पत्ति प्रदान करनेवाली, सम्पूर्ण इन्द्रियों को आनन्द देनेवाली, साम्राज्य देने में समर्थ और सारे पापों को हर लेने के लिए सर्वथा उद्यत है। मुझे आपकी चरणवन्दना का शुभ अवसर सदा प्राप्त होता रहे।

यत्कटाक्षसमुपासनाविधिः
सेवकस्य सकलार्थसम्पदः।
संतनोति वचनाङ्गमानसै –
स्त्वां मुरारिहृदयेश्वरीं भजे ॥14॥

अर्थ – जिनके कृपाकटाक्ष के लिए की हुई उपासना उपासक के लिए सम्पूर्ण मनोरथों और सम्पत्तियों का विस्तार करती है, श्रीहरि की हृदयेश्वरी उन्हीं आप लक्ष्मीदेवी का मैं मन, वाणी और शरीर से भजन करता हूँ।

सरसिजनिलये सरोजहस्ते
धवलतमांशुकगन्धमाल्यशोभे।
भगवति हरिवल्लभे मनोज्ञे
त्रिभुवनभूतिकरि प्रसीद मह्यम् ॥15॥

अर्थ – भगवति हरिप्रिये ! तुम कमलवन में निवास करनेवाली हो, तुम्हारे हाथों में लीलाकमल सुशोभित है। तुम अत्यन्त उज्ज्वल वस्त्र, गन्ध और माला आदि से शोभा पा रही हो। तुम्हारी झाँकी बड़ी मनोरम है। त्रिभुवन का ऐश्वर्य प्रदान करनेवाली देवि ! मुझपर प्रसन्न हो जाओ।

दिग्घस्तिभिः कनककुम्भमुखावसृष्ट –
स्वर्वाहिनीविमलचारुजलप्लुताङ्गीम्।
प्रातर्नमामि जगतां जननीमशेष –
लोकाधिनाथगृहिणीममृताब्धिपुत्रीम् ॥16॥

अर्थ – दिग्गजों द्वारा सुवर्ण कलश के मुख से गिराये गये आकाशगंगा के निर्मल एवं मनोहर जल से जिनके श्रीअंगों का अभिषेक किया जाता है, सम्पूर्ण लोकों के अधीश्वर भगवान विष्णु की गृहिणी और क्षीरसागर की पुत्री उन जगज्जननी लक्ष्मी को मैं प्रातःकाल प्रणाम करता हूँ।

कमले कमलाक्षवल्लभे
त्वं करुणापूरतरङ्गितैरपाङ्‌गैः।
अवलोकय मामकिञ्चनानां
प्रथमं पात्रमकृत्रिमं दयायाः ॥17॥

अर्थ – कमलनयन केशव की कमनीय कामिनी कमले ! मैं अकिंचन ( दीनहीन ) मनुष्यों में अग्रगण्य हूँ, अतएव तुम्हारी कृपा का स्वाभाविक पात्र हूँ। तुम उमड़ती हुई करुणा की बाढ़ की तरल तरंगों के समान कटाक्षों द्वारा मेरी ओर देखो।

स्तुवन्ति ये स्तुतिभिरमूभिरन्वहं
त्रयीमयीं त्रिभुवनमातरं रमाम्।
गुणाधिका गुरुतरभाग्यभागिनो
भवन्ति ते भुवि बुधभाविताशयाः ॥18॥

अर्थ – जो लोग इन स्तुतियों द्वारा प्रतिदिन वेदत्रयीस्वरूपा त्रिभुवनजननी भगवती लक्ष्मी की स्तुति करते हैं, वे इस भूतल पर महान गुणवान और अत्यन्त सौभाग्यशाली होते हैं तथा विद्वान पुरुष भी उनके मनोभाव को जानने के लिए उत्सुक रहते हैं।

॥ इस प्रकार श्रीमत् शंकराचार्य रचित कनकधारा स्तोत्र सम्पूर्ण हुआ ॥

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