26/06/2022
आयुर्वेद क्या है?
आयुर्वेद (Ayurved in Hindi) विश्व की सबसे पुरानी चिकित्सा प्रणालियों में से एक है, जिसका शाब्दिक अर्थ है “जीवन का ज्ञान”। इसका जन्म लगभग 3 हजार वर्ष पहले भारत में ही हुआ था। इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा भी एक पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली के रूप में स्वीकार किया गया है। आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति (Ayurvedic medicine) की तुलना कभी भी मॉडर्न मेडिसिन सिस्टम से नहीं की जा सकती है, क्योंकि इनका शरीर पर काम करने का तरीका एक-दूसरे से काफी अलग रहा है। जहां एलोपैथिक दवाएं रोग से लड़ने के लिए डिजाइन की जाती हैं, वहीं आयुर्वेदिक औषधियां रोग के विरुद्ध शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाती हैं, ताकि आपका शरीर खुद उस रोग से लड़ सके। आयुर्वेदिक चिकित्सा के अनुसार शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए शरीर, मन व आत्मा (स्वभाव) का एक सही संतुलन रखना जरूरी होता है और जब यह संतुलन बिगड़ जाता है तो हम बीमार पड़ जाते हैं। जैसा कि हम आपको ऊपर बता चुके हैं, आयुर्वेदिक चिकित्सा कई हजार साल पुरानी है। इसीलिए, आज भी इसमें किसी रोग का उपचार या उसकी रोकथाम करने के लिए हर्बल दवाओं के साथ-साथ विशेष प्रकार के योगासन, व्यायाम और आहार बदलाव आदि की भी मदद ली जाती है।
आयुर्वेद के मूल सिद्धांत क्या हैं?
आयुर्वेद के सिद्धातों (Ayurveda principles in hindi) के अनुसार हमारा शरीर मुख्य तीन तत्वों से मिलकर बना है, जिन्हें दोष, धातु और मल कहा जाता है। इन तत्वों के बारे में पूरी जानकारी दी गई है, जो कुछ इस प्रकार है - दोष (Dosha) - आयुर्वेदिक साहित्यों के अनुसार मानव शरीर दोषों के मिलकर बना है, जिन्हें वात, पित और कफ दोष कहा जाता है। ये तीनों दोष प्रकृति के मूल पांच तत्वों अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी और आकाश से मिलकर बने होते हैं। प्रत्येक दोष में इन मूल 5 तत्वों में से कोई 2 तत्व होते हैं और उन्हीं तत्वों के आधार पर शारीरिक कार्य प्रक्रिया निर्धारित होती है। जिन्हें बारे में निम्न टेबल में बताया गया है -
दोष → गुण ↓वातपितकफकिस तत्व का प्रतिनिधित्व करता है?वायु व आकाशअग्नि व जलपृथ्वी व जलकिन शारीरिक कार्यों को नियंत्रित करता है?श्वसन प्रक्रिया, हृदय की धड़कनें और मांसपेशियों व जोड़ों की कार्य प्रक्रियाचयापचय, पाचन, त्वचा का रंग और बुद्धिशारीरिक संरचना और प्रतिरक्षा प्रणालीकिन