05/03/2026
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हमने एक ऐसे महान चिकित्सक को खो दिया, जिनका नाम भले ही हर व्यक्ति न जानता हो, लेकिन उनका योगदान दुनिया भर के करोड़ों लोगों की सांसों की सुरक्षा से जुड़ा है — डॉ. शेषागिरी राव मल्लमपति (Dr. Seshagiri Rao Mallampati), एक प्रतिभाशाली तेलुगु एनेस्थीसियोलॉजिस्ट।
साल 1975 में, एक सामान्य सीज़ेरियन (Caesarean) ऑपरेशन के दौरान डॉ. मल्लमपति को एक अप्रत्याशित स्थिति का सामना करना पड़ा। मरीज का एयरवे (श्वास मार्ग) अनुमान से अधिक कठिन निकला।
हालांकि उनकी कुशलता से माँ और बच्चा दोनों सुरक्षित रहे, लेकिन यह घटना उनके मन में गहराई से बैठ गई। उन्होंने महसूस किया कि एनेस्थीसिया के दौरान सबसे बड़ा जोखिम “डिफिकल्ट एयरवे” यानी कठिन श्वास मार्ग होता है। अगर पहले से इसका सही अनुमान न हो, तो यह जानलेवा साबित हो सकता है।
उस एक घटना ने उनके भीतर एक मिशन जगा दिया — एनेस्थीसिया को और अधिक सुरक्षित बनाना। अगले कई वर्षों तक उन्होंने गहन अध्ययन और शोध किया।
उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि क्या किसी साधारण तरीके से ऑपरेशन से पहले ही यह अनुमान लगाया जा सकता है कि मरीज का एयरवे कठिन होगा या नहीं।
लगातार शोध के बाद, वर्ष 1985 में उन्होंने एक क्रांतिकारी और बेहद सरल परीक्षण प्रस्तुत किया, जिसे आज दुनिया “मल्लमपति स्कोर” (Mallampati Score) के नाम से जानती है।
यह एक गैर-आक्रामक (Non-Invasive) टेस्ट है, जिसमें मरीज को मुंह खोलकर जीभ बाहर निकालने के लिए कहा जाता है। डॉक्टर मुंह के अंदर दिखने वाले हिस्सों — जैसे सॉफ्ट पैलेट, यूवुला और टॉन्सिल क्षेत्र — के आधार पर एयरवे की कठिनाई का अनुमान लगाते हैं।
मल्लमपति स्कोर को चार श्रेणियों (Class I से Class IV) में बांटा गया।
• Class I में पूरा गला साफ दिखाई देता है — आसान एयरवे।
• Class IV में गले का बहुत कम हिस्सा दिखाई देता है — संभावित कठिन एयरवे।
इस सरल निरीक्षण ने एनेस्थीसिया की दुनिया में क्रांति ला दी। अब सर्जरी से पहले ही डॉक्टर संभावित जोखिम का अनुमान लगा सकते थे और आवश्यक तैयारी कर सकते थे। इससे आपातकालीन स्थितियों में होने वाली जटिलताओं और मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई।
हैदराबाद के छोटे क्लीनिकों से लेकर अमेरिका और यूरोप के विश्व-प्रसिद्ध अस्पतालों तक, मल्लमपति स्कोर को अपनाया गया। आज यह टेस्ट मेडिकल शिक्षा का अनिवार्य हिस्सा है
और दुनिया भर में हर एनेस्थीसियोलॉजिस्ट इसे सीखता और उपयोग करता है। करोड़ों सर्जरी के दौरान यह साधारण सा परीक्षण चुपचाप मरीजों की जान बचा रहा है।
डॉ. मल्लमपति का जीवन हमें सिखाता है कि असली नायक वही होते हैं, जो बिना शोर किए मानवता की सेवा करते हैं। उन्होंने कोई बड़ा अभियान नहीं चलाया, न ही प्रसिद्धि की चाह रखी। उन्होंने सिर्फ एक समस्या को गंभीरता से लिया और उसका समाधान खोजा — और वही समाधान लाखों जिंदगियों की ढाल बन गया।
आज जब हम उन्हें याद करते हैं, तो यह समझते हैं कि चिकित्सा जगत में उनका योगदान अमूल्य है। उनका आविष्कार सिर्फ एक टेस्ट नहीं, बल्कि सुरक्षा का प्रतीक है।
डॉ. शेषागिरी राव मल्लमपति — एक ऐसा नाम, जिसने साबित किया कि कभी-कभी एक साधारण निरीक्षण भी इतिहास बदल सकता है।
जय हिंद 🇮🇳🇮🇳
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