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*दीपोत्सव श्रृंखला के पावन पर्व गोवर्धन पूजा की समूचे विश्व को हार्दिक बधाई एवं अनन्त शुभकामनायें 🙏🏻😍* कान्हा बजरंगबली क...
22/10/2025

*दीपोत्सव श्रृंखला के पावन पर्व गोवर्धन पूजा की समूचे विश्व को हार्दिक बधाई एवं अनन्त शुभकामनायें 🙏🏻😍*
कान्हा बजरंगबली का मान धरे,
त्रेता में दिये वचन को पूर्ण किये।
प्रभु ने रख कनिष्ठा पर गोवर्धन,
देवराज इंद्र का गर्व चूर्ण किये।
आज,
दीपोत्सव पर्व का चतुर्थ दिवस है जो कि दीपावली के उपरांत गोवर्धन व गौ माता के पूजन दिवस के रूप में मनाया जाता है,जो अन्नकूट के नाम से भी प्रसिद्ध हैं। इस त्यौहार का भारतीय लोकजीवन में बहुत महत्व है। इस पर्व में प्रकृति के साथ मानव का सीधा सम्बन्ध जुड़ा हुआ है। इस पर्व की अपनी मान्यता और लोककथा है। गोवर्धन पूजा में गोधन अर्थात गायों की पूजा की जाती है। शास्त्रों में बताया गया है कि गाय उसी प्रकार पवित्र होती है जैसे नदियों में गङ्गा माँ। गाय को देवी लक्ष्मी का स्वरूप भी कहा गया है। देवी लक्ष्मी जिस प्रकार सुख समृद्धि प्रदान करती हैं उसी प्रकार गौ माता भी अपने दूध से स्वास्थ्य रूपी धन प्रदान करती हैं। इनका बछड़ा खेतों में अनाज उगाता है। ऐसे गौ सम्पूर्ण मानव जाति के लिए पूजनीय व वंदनीय है। गौ माता के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए ही आज के दिन गोर्वधन पूजा की जाती है और इसके प्रतीक के रूप में गाय की।
एक प्रसँग यह भी मिलता है, कि
जब भगवान कृष्ण ने ब्रजवासियों को मूसलधार वर्षा से बचाने के लिए सात दिन तक गोवर्धन पर्वत को अपनी सबसे छोटी उँगली पर उठाकर रखा और गोप-गोपिकाएँ उसकी छाया में सुखपूर्वक रहे। सातवें दिन भगवान ने गोवर्धन को नीचे रखा और प्रतिवर्ष गोवर्धन पूजा करके अन्नकूट उत्सव मनाने की आज्ञा दी। तभी से यह उत्सव अन्नकूट के नाम से भी मनाया जाता है।
इसी उपलक्ष्य पर कबीर साहेब जी अपनी वाणी में कहते है:
गोवर्धन कृष्ण जी उठाया, द्रोणागिरि हनुमंत।
शेष नाग सब सृष्टी उठाई, इनमें को भगवंत।।

कान्हा बजरंगबली का मान धरे,
त्रेता में दिये वचन को पूर्ण किये।
प्रभु ने रख कनिष्ठा पर गोवर्धन,
देवराज इंद्र का गर्व चूर्ण किये।

- हरिओम "अर्पण"
❤️

विघ्नहर्ता प्रभु श्री गणेश जी और धन की देवी माँ लक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रही इसी सुभेक्षा... के साथ समूचे विश्व को दीपोत...
20/10/2025

विघ्नहर्ता प्रभु श्री गणेश जी और धन की देवी माँ लक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रही इसी सुभेक्षा... के साथ समूचे विश्व को दीपोत्सव पर्व की दीपत्मयी शुभकामनाएँ.. 🙏🏻🪔🙏🏻

इसी अवसर पर प्रस्तुत है गीत....

मन से अपने सारे द्वेष मिटाएँ हम,
घर घर खुशियों के दीप जलाएँ हम।
हर घर में खुशियों के दीप जलाएँ हम।

यह माटी है अपनी हम सभी पुत्र इसके
सब मिलकर फिर तो कुछ फ़र्ज़ निभाएँ हम।
हिन्दू मस्जिद में हो मुस्लिम मन्दिर में,
दीवाली ऐसी इस बार मनाएँ हम।
जिसमें सारी दुनिया हमको साथ दिखे,
कोई ऐसी भी तस्वीर बनाएँ हम।
मन से अपने सारे द्वेष.....................

धन, दौलत का है यह लालच - विष छोड़े,
निज स्वार्थ मोह के सारे बन्धन तोड़े।
हाथों में लेकर दीप यहाँ उल्फ़त के,
सबसे दिल का बस प्यारा रिश्ता जोड़े।
आँखों में तुम्हारें गया है ये जो पड़,
पहले आँखों से वो अज्ञान हटाएँ हम।
मन से अपने सारे द्वेष........................

नव ज्योति नवल प्रकाश संचित हो जाये,
जो जाकर देवों को अर्पित हो जाये।
कोई ऐसा दीपक हमको मिल जाये,
जिससे सारा जग प्रज्ज्वलित हो जाये।
पहले जाकर हम सब पर स्नेह लुटाएँ,
फिर घर में खुशियों के दीप - जलाएँ हम।
मन से अपने सारे द्वेष.........................

- हरिओम "अर्पण"

Kavi Hariom Mahore
✍🏻 Hariom Mahore
कवि हरिओम माहोरे




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✍🏻

आज, दीपोत्सव पर्व का प्रथम दिवस है। दिवाली के पूर्व मनाया जाने वाला वह पर्व जो धन की प्राप्ति और उसके संवर्धन का उत्सव ह...
18/10/2025

आज,
दीपोत्सव पर्व का प्रथम दिवस है। दिवाली के पूर्व मनाया जाने वाला वह पर्व जो धन की प्राप्ति और उसके संवर्धन का उत्सव है। लोक मान्यता है कि आज ही के दिन समुद्र मंथन के दौरान माँ लक्ष्मी और श्रीविष्णु के अंशावतार के रूप में भगवान धन्वंतरि कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को सांयकाल में अपने हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे इस मान्यता के मूल में स्वास्थ्य को सर्वोत्तम धन के रूप में पूज्य माना गया है। और स्वास्थ्य ही वह साधन है जो हमें जीवन के समस्त सुखों के उपभोग योग्य बनाता है इसलिए स्वास्थ्य संरक्षक अमृत-प्राप्ति का यह पावन पर्व धन-तेरस के रूप में मनाया जाता है। जीवन के सबसे बड़े धन की प्राप्ति का हेतु “अमृत” के प्रथम-वाहक भगवान धन्वंतरि और सुख समृद्धि की प्रदाय माँ लक्ष्मी की कृपा आप सभी पर सदा बनी रहे। ईश्वर आपके कनिष्ठ-वरिष्ठ, इष्ट-मित्र, परिवार-कुटुंब-समाज और समूचे विश्व को उत्तम स्वास्थ्य के सानिध्य में धन-धान्य से पूरित रखें। 🙏🏻😍





हाथ  माँ   आप  मेरा   सदा  थामना, नौ दिवस माँ पूजन, राम की साधना। पूर्ण हो  माँ मेरी  आज रावण विजय, पास सीता  हो मेरे  ब...
02/10/2025

हाथ  माँ   आप  मेरा   सदा  थामना, 
नौ दिवस माँ पूजन, राम की साधना। 
पूर्ण हो  माँ मेरी  आज रावण विजय, 
पास सीता  हो मेरे  बस यही कामना। 

✍🏻 हरिओम माहोरे

आदौ राम तपोवनादि गमनं, हत्वा मृगं कांचनम्।
वैदीहीहरणं जटायुमरणं, सुग्रीवसंभाषणम्।।
बालीनिर्दलनं समुद्रतरणं, लंकापुरीदाहनम्।
पश्चाद् रावण कुम्भकर्ण हननम्, एतद्धि रामायणम्।।

दशहरा का अर्थ है दस बुराईयाँ-
 काम, क्रोध, मोह,लोभ,मद,मत्सर,स्वार्थ, अन्याय, 
अमनुजता, बुराई पर विजय का त्योहार है विजय दशमी। 
तामसिकता पर सात्विकता की विजय का यह पवित्र पर्व आप सभी के जीवन में भी सत्य की समस्त शुभ संभावनाओं को साकार होने की सामर्थ्य दे। शुभ विजयदशमी ! ❤️🙏🏻
अधर्म पर धर्म की विजय और असत्य पर सत्य की विजय के प्रतीक पावन पर्व विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ।

- हरिओम "अर्पण"

सर्व शुभ  सिद्धियों  की हो माँ स्वामिनी, अर्धनारेश्वर     की        हो    अर्धांगनी। सर्व शुभ सिद्धि दी  ब्रम्ह शिव विष्...
01/10/2025

सर्व शुभ  सिद्धियों  की हो माँ स्वामिनी, 
अर्धनारेश्वर     की        हो    अर्धांगनी। 
सर्व शुभ सिद्धि दी  ब्रम्ह शिव विष्णु को, 
सिद्धिदात्री  हो   माँ    आप   वरदायनी। 

✍🏻 हरिओम "अर्पण"

सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमसुरैरपि | 
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी ||

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता। 
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।

नवरात्रि का यह नौवम् दिवस मॉं "सिद्धिदात्री" की उपासना का दिन है। आज की अधिष्ठात्री मॉं "सिद्धिदात्री" हैं। नवदुर्गा में माँ "सिद्धिदात्री " का आशय माँ सिद्धि दात्री के बारे अनेक कथा प्रसंग प्राप्त होते हैं। जिसमें दुर्गा सप्तशती के कुछ प्रसंग माँ सिद्धि दात्री के विषय में है। क्योंकि इन्हीं के द्वारा ही व्यक्ति को सिद्धि, बुद्धि व सुख-शांति की प्राप्ति होगी। और घर का क्लेश दूर होता है। पारिवार में प्रेम भाव का उदय होता है। अर्थात् यह देवी ही सर्वमय हैं, जिसे एक कथानक में देवी स्वतः ही स्वीकार किया है कि -इस संसार में मेरे सिवा दूसरी कौन है? देख, ये मेरी ही विभूतियाँ हैं, अतः मुझमें ही प्रवेश कर रही हैं। तदनन्तर ब्रह्माणी आदि समस्त देवियाँ अम्बिका देवी के शरीर में लीन हो गयीं। उस समय केवल अम्बिका देवी ही रह गयीं। देवी बोली- मैं अपनी ऐश्वर्य शक्ति से अनेक रूपों में यहाँ उपस्थित हुई थी। उन सब रूपों को मैंने समेट लिया। अब अकेली ही युद्ध में खड़ी हूँ। तुम भी स्थिर हो जाओ। तदनन्तर देवी और शुम्भ दोनों में सब देवताओं तथा दानवों के देखते-देखते भयंकर युद्ध छिड़ गया।। ऋषि कहते हैं – तब समस्त दैत्यों के राजा शुम्भ को अपनी ओर आते देख देवी ने त्रिशूल से उसकी छाती छेदकर उसे पृथ्वी पर गिरा दिया। देवी के शूल की धार से घायल होने पर उसके प्राण-पखेरू उड़ गये और वह समुद्रों, द्वीपों तथा पर्वतों सहित समूची पृथ्वी को कॅपाता हुआ भूमि पर गिर पड़ा।। तदनन्तर उस दुरात्मा के मारे जाने पर सम्पूर्ण जगत् प्रसन्न एवं पूर्ण स्वस्थ हो गया तथा आकाश स्वच्छ दिखायी देने लगा। पहले जो उत्पात सूचक मेघ और उल्कापात होते थे, वे सब शान्त हो गये तथा उस दैत्य के मारे जाने पर नदियां भी ठीक मार्ग से बहने लगीं।
और जब हमारा ब्रह्मांड एक गहरे शून्य से ज्यादा कुछ नहीं था। वह अँधेरे से भरा हुआ था और जीवन का कोई नामोनिशान नहीं था। तब देवी कुष्मांडा ने अपनी मुस्कान की चमक से ब्रह्मांड की रचना की थी और जीवन रचना के लिए त्रिमूर्ति का निर्माण किया जिसमें भगवान ब्रम्हा को सृष्टि की रचना सौंपी गई, भगवान विष्णु जीविका के ऊर्जा बने और भगवान शिव को विनाश

घोर  कर   साधना   श्यामवर्णी   हुई, उर  महागौरी  माँ    पाणिकर्णी   हुई। शिव जी  की कृपा से मिला  गौर वर, गौरवर्ण पा शिव...
30/09/2025

घोर कर साधना श्यामवर्णी हुई,
उर महागौरी माँ पाणिकर्णी हुई।
शिव जी की कृपा से मिला गौर वर,
गौरवर्ण पा शिवा माँ "महागौरी" हुई।

पाणिकर्णी - शिव की
वर - वरदान
गौरवर्ण - अत्यंत गौरा स्वरूप

- हरिओम "अर्पण"

मंत्र - ॐ महागौर्ये नमः

श्वेते वृषे समारुढा श्वेताम्बरधरा शुचिः |
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा ||

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

नवरात्रि का यह अष्ठम् दिवस मॉं "महागौरी" की उपासना का दिन है। आज की अधिष्ठात्री "महागौरी" हैं। नवदुर्गा में माँ महागौरी का आशय भगवान शिव की प्राप्ति के लिए इन्होंने कठिन तपस्या की जिससे इनका शरीर श्यामवर्ण हो गया, जब भगवान शिव ने इनको दर्शन दिया, तब उनकी कृपा से इनका शरीर अत्यंत गौर हो गया और परम कृपालु मां महागौरी गौरवर्ण को प्राप्त कर भगवती महागौरी के नाम से संपूर्ण विश्व में विख्यात हुईं। भगवती महागौरी की आराधना सभी मनोवांछित को पूर्ण करने वाली और भक्तों को अभय, रूप व सौंदर्य प्रदान करने वाली है अर्थात शरीर में उत्पन्न नाना प्रकार के विष व्याधियों का अंत कर जीवन को सुख-समृद्धि व आरोग्यता से पूर्ण करती हैं।
अष्ट-प्रकृति की स्वामिनी, आज की आराध्या मॉं महागौरी हम सबकी प्रकृति व प्रवृत्ति को सात्विकता का श्रेष्ठता प्रदान करें ! 🙏🏻❤️


भक्त की  कामना  पूर्ण करणी  हो माँ, मूढ़ की   मूढ़ता   आप  हरणी  हो माँ। आप ही  मातु हो  और गुरु  स्कंद की, "स्कंदमाता" ...
26/09/2025

भक्त की कामना पूर्ण करणी हो माँ,
मूढ़ की मूढ़ता आप हरणी हो माँ।
आप ही मातु हो और गुरु स्कंद की,
"स्कंदमाता" जगत आप तरणी हो माँ।

- हरिओम"अर्पण"

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया |
शुभदाऽस्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी ||

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ स्कंदमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

नवरात्रि का यह पंचम दिवस मॉं "स्कंदमाता" की उपासना का दिन है। आज की अधिष्ठात्री मॉं स्कंदमाता हैं। नवदुर्गा में माँ स्कंदमाता का आशय -
पुराणों के अनुसार भगवान कार्तिकेय को 'स्कंद' नाम से भी जाना जाता है। एक तारकासुर नामक राक्षस था। जिसका अंत केवल शिव पुत्र के हाथों ही संभव था। तब भगवान स्कंद प्रसिद्ध देवासुर संग्राम में देवताओं के सेनापति बने थे। पुराणों में इन्हें कुमार और शक्ति कहकर इनकी महिमा का वर्णन किया गया है। तब मां पार्वती ने अपने पुत्र स्कंद अर्थात् भगवान कार्तिकेय को युद्ध के लिए प्रशिक्षित करने के लिए स्कंद माता का रूप धारण किया।
स्कंदमाता से युद्ध प्रशिक्षण लेने के पश्चात् भगवान कार्तिकेय ने तारकासुर का अंत किया और माता ने अपने गोद में भगवान स्कंद को लिया। ये इन्हीं भगवान स्कंद की माता होने के कारण माँ दुर्गाजी के इस स्वरूप को स्कंदमाता कहते है
मां अपने पुत्र से बेहद प्रेम करती है।
मॉं स्कंदमाता ज्ञानशक्ति और क्रियाशक्ति की समग्रता के एकल प्रतीक भगवान् कार्तिकेय की जननी हैं। नौ दिवसीय पूजनोत्सव के दौरान हमारी उर्ध्वमुखी चेतना की यह सिद्धिदायिनी यात्रा निर्विघ्न जारी रहे तथा मॉं का यह अलौकिक, मंगलकारी स्वरूप हम सभी श्रद्धालुओं की समस्त सदिच्छाओं को शीघ्र साकार करे। 🙏🏻❤️


हो धरा  और यह  आसमाँ माँ तुम्हीं, हर उपासक का हो  रास्ता  माँ तुम्हीं। हर उपासक कि हो आस्था माँ तुम्हीं। सृष्टि  उत्पन्न...
26/09/2025

हो धरा और यह आसमाँ माँ तुम्हीं,
हर उपासक का हो रास्ता माँ तुम्हीं।
हर उपासक कि हो आस्था माँ तुम्हीं।
सृष्टि उत्पन्न हुई कोख से आपके,
विघ्नहरणी हो "कूष्माण्डा" माँ तुम्हीं।

- हरिओम "अर्पण"

सुरासंपूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे ॥

प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।
तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम् ।।
पंचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।
सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम् ।।

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।'

नवरात्रि का यह चतुर्थ दिवस मॉं "कूष्माण्डा" की उपासना का दिन है। आज की अधिष्ठात्री मॉं कूष्माण्डा हैं। नवदुर्गा मे माँ कूष्माण्डा का आशय उनकी अपनी मंद, हल्की हँसी द्वारा अपने उदर से संपूर्ण ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण एवं संस्कृत भाषा में कूष्माण्डा को कुम्हड़ कहते हैं। बलियों में कुम्हड़े की बलि इन्हें सर्वाधिक प्रिय है। इस कारण से भी इन्हें माँ कूष्माण्डा देवी के रूप में पूजा जाता है।
जब सृष्टि नहीं थी, चारों तरफ अंधकार ही अंधकार था, तब इन्हीं देवी ने अपने ईषत्‌ हास्य से ब्रह्मांड की रचना की, इसीलिए इन्हें सृष्टि की आदिस्वरूपा या आदिशक्ति भी कहा गया है।
इनकी उपासना से भक्तों के समस्त रोग-शोक नष्ट होते आयु, यश, बल और आरोग्य में वृद्धि होती माँ कूष्माण्डा अत्यल्प सेवा और भक्ति से प्रसन्न होने वाली माँ है, मनुष्य सच्चे हृदय से इनकी साधना करें तो यह फिर उसे अत्यन्त सुगमता से परम पद प्रदान करने वाली है।
शक्ति आराधना के चतुर्थ दिवस पर मॉं कूष्माण्डा के चरणों में प्रणाम निवेदित है। देवी मॉं का अनुग्रह हम सबके जीवन को सकारात्मकता, समृद्धि और आरोग्य से परिपूर्ण रखे। 🙏🏻❤️

सौम्य,निर्भय,विक्रम  व्युष्ट वरती है माँ, पाप  बाधाएँ  सब  नष्ट  करती  है  माँ। पूजते  हृदय   से   "चंद्रघंटा"  को  जो, ...
24/09/2025

सौम्य,निर्भय,विक्रम  व्युष्ट वरती है माँ, 
पाप  बाधाएँ  सब  नष्ट  करती  है  माँ। 
पूजते  हृदय   से   "चंद्रघंटा"  को  जो, 
उनके   संपूर्णतः   कष्ट   हरती  है  माँ। 

वरती - वर, इच्छाओं को पूर्ण करने व देने वाली
विक्रम - पराक्रम , साहस , शूरता , बहादुरी , वीरता
व्युष्ट - प्रकाशयुक्त, 

- हरिओम माहोरे "अर्पण"

पिण्डजप्रवरारुढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता | 
प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता ||

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

नवरात्रि का यह तृतीय दिवस मॉं "चंद्रघंटा" की उपासना का दिन है। आज की अधिष्ठात्री मॉं चंद्रघंटा हैं। नवदुर्गा में माँ चंद्रघंटा का आशय इनके मस्तक में घंटे का आकार के अर्धचंद्र से है,माँ दुर्गा का यह तृतीय स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है भक्त-वत्सल मॉं का यह परम कल्याणकारी स्वरूप आप सबके जीवन को सुख-शांति और समृद्धि से परिपूर्ण करे। 🙏🏻❤️

जीव का  त्याग  वैराग्य  तप  पूर्ण  हो। और फल हम सभी के निकट तूर्ण हो।कामना बस यही  है  माँ "ब्रह्मचारिणी",विश्व  यह  साध...
23/09/2025

जीव का  त्याग  वैराग्य  तप  पूर्ण  हो। 
और फल हम सभी के निकट तूर्ण हो।
कामना बस यही  है  माँ "ब्रह्मचारिणी",
विश्व  यह  साधना   लीन  सम्पूर्ण  हो। 

तूर्ण - शीघ्र, जल्द

- हरिओम "अर्पण"

मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नम:'

दधाना कर पद्माभ्यामक्ष माला कमण्डलु |
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा ||

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

नवरात्रि का यह द्वितीय दिवस मॉं ब्रह्मचारिणी की उपासना का दिन है। नवदुर्गा में ब्रह्मचारिणी का आशय ब्रह्म यानी अनंत में विचरण करने वाली पराशक्ति के उस कृपालु स्वरूप से है जो संपूर्ण ब्रह्मांड की नियंता हैं। माँ दुर्गाजी का यह दूसरा स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनन्तफल देने वाला, मनुष्य में तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि करने वाला और जीवन के कठिन संघर्षों में मन कर्तव्य-पथ की ओर अग्रेषित करने वाला है। मॉं ब्रह्मचारिणी हम सबकी चेतना को धवलता व शुचिता प्रदान करते हुए समूचे विश्व को सात्विकता व सुपथ की ओर प्रेरित करें।

- हरिओम "अर्पण"

आज, संपूर्ण सृष्टि को अपनी सत्ता से संचालित करने वाली स्वामिनी के अर्थ में ‘शक्ति’ और सृष्टि में कोमलता की समस्त संभावना...
22/09/2025

आज,
संपूर्ण सृष्टि को अपनी सत्ता से संचालित करने वाली स्वामिनी के अर्थ में ‘शक्ति’ और सृष्टि में कोमलता की समस्त संभावनाओं को अपने करूणार्द्र अनुग्रह से सदा सिंचित रखने वाली अखंड स्नेह स्त्रोत के रूप में ‘देवी मॉं’ , की अराधना का महापर्व आज से प्रारम्भ हो रहा है।
आप सभी को नवरात्र की हार्दिक शुभकामनाएं🙏 🚩

- हरिओम "अर्पण"

आप सभी को श्री गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएँ!प्रभु प्रथम-पूज्य, गौरी पुत्र, एकदंत, सिद्धि-सदन, गजवदन, विघ्नहरण गणपत...
27/08/2025

आप सभी को श्री गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएँ!

प्रभु प्रथम-पूज्य, गौरी पुत्र, एकदंत, सिद्धि-सदन, गजवदन, विघ्नहरण गणपति जी की कृपा आप सब पर सदैव बनी रहे तथा समूचा विश्व उनके बल बुद्धि रिद्धि सिद्धि प्रदाता व विध्नहर्ता स्वरूप, का अनुशरण कर प्रभु का अनुग्रह अनुभूत करता रहे। 🙏🏻❤








✍🏻

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