30/08/2025
🗓️ गणेश चतुर्थी का चौथा दिन (सप्तमी तिथि) – विशेष महत्व:
गणेश चतुर्थी के पर्व का चौथा दिन यानी सप्तमी तिथि को भगवान गणेश की पूजा विशेष रूप से उनके "विघ्नहर्ता" और "मंगलमूर्ति" स्वरूप में की जाती है। यह दिन भक्तों के लिए मनोकामना पूर्ति, विघ्नों की समाप्ति और संकल्प सिद्धि के लिए अत्यंत फलदायक माना जाता है।
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🙏 इस दिन के प्रमुख देवता (Deity of 4th Day):
🔱 भगवान गणेश (विघ्नहर्ता रूप)
इस दिन उन्हें संकटमोचन, विघ्न विनाशक, और मंगलकारी रूप में पूजा जाता है।
यह दिन खासतौर पर उन भक्तों के लिए फलदायक होता है जो जीवन में किसी विशेष बाधा या संकट से गुजर रहे हों जैसे कोर्ट कैस, लम्बी बीमारी आदि.
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🌟 चौथे दिन की विशेष पूजा विधि (Special Puja Vidhi):
1. स्नान व शुद्धिकरण के बाद पूजा स्थल को सजाएं।
2. गणेश जी को ताजे फूल, विशेषकर गेंदे के फूल और दूर्वा घास अर्पित करें।
3. लड्डू या मोदक, नारियल, और फल अर्पित करें।
4. गणेश सहस्रनाम या गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करें।
5. गणेश जी के 108 नामों का जप करें।
6. विशेष रूप से "ॐ विघ्ननाशाय नमः" मंत्र का 108 बार जप करें।
7. आरती करें – "जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा..."
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🍲 विशेष भोग (Naivedya):
मोदक (गणेश जी का प्रिय)
तिल-गुड़ के लड्डू
केले, नारियल, और मौसमी फल
पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी, शक्कर)
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🎉 अन्य विशेषताएं:
कई भक्त गणपति को सात प्रकार के अनाज (सप्तधान्य) भी अर्पित करते हैं, जो समृद्धि और कृषि-उन्नति का प्रतीक है।
बच्चे और युवा इस दिन गणपति से शिक्षा एवं बुद्धि के मार्ग मे आने वाले विघ्न दूर करने की कामना करते हैं।
#अनन्तनाथज्योतिषविशेषज्ञ