Shri shukla ayurveda

Shri shukla ayurveda आयुर्वेदिक चिकित्सा केंद्र

।। वीराँगना तेल ।।लकवा, गठियावात, संधिवात, हड्डी का बढ़ना, जोड़ों का दर्द, चोट, मोच, सूजन, कंपवात, अकड़न, नसों का दर्द, ...
24/01/2024

।। वीराँगना तेल ।।
लकवा, गठियावात, संधिवात, हड्डी का बढ़ना, जोड़ों का दर्द, चोट, मोच, सूजन, कंपवात, अकड़न, नसों का दर्द, शरीर पर उभरने वाली गांठे, स्पॉन्डिलाइटिस, मांसपेशियों में ऐंठन, हाथ पैरों में झुनझुनी आना इत्यादि के लिए अत्यंत गुणकारी आयुर्वेदिक तेल ।

।। जीवन मलेरिया मुक्त बनाने का रामवाण नुस्खा।।सामग्री 400 मिलीलीटर देसी गाय का दूध और अकोना अर्थात आक की दो गीली सफेद का...
12/05/2023

।। जीवन मलेरिया मुक्त बनाने का रामवाण नुस्खा।।
सामग्री 400 मिलीलीटर देसी गाय का दूध और अकोना अर्थात आक की दो गीली सफेद काड़ी जो लगभग एक 1 फिट लंबी हो दूध को पात्र में डालकर धीमी आग पर पकावें । पकाते समय आक की दोनों लकड़ी चलाते जाएं अन्य चम्मच आदि का उपयोग ना करें जब दूध फटेगा इस फटे दूध का मावा अर्थात खोवा बन जाने पर एक स्वस्थ व्यक्ति को खिलावे यह स्वस्थ व्यक्ति की मलेरिया प्रतिरोधी क्षमता बढ़ा देगा उसे कभी भी मलेरिया नहीं होगा केवल एक बार ही खाना है मलेरिया रोगी को ना देवे उसे पूर्ण स्वस्थ होने पर ही देवें दूध फटने पर स्वाद में अंतर नहीं आता है यदि किसी व्यक्ति को (अपवाद) इसके सेवन से दस्त लग जावे या मलेरिया हो जावे तो उसे स्वस्थ होने पर पुनः सेवन कर लेना चाहिए मलेरिया ग्रस्त क्षेत्रों में इसका सेवन अत्यंत लाभ दायक रहेगा ।

softrex powder कब्ज, गैस, अपचन, अजीर्ण, पेट फूलना, डकारे आना, उदर कृमी नाशक, पेट पर बढ़ने वाली चर्बी को कम करता है, जठराग...
28/06/2022

softrex powder
कब्ज, गैस, अपचन, अजीर्ण, पेट फूलना, डकारे आना, उदर कृमी नाशक, पेट पर बढ़ने वाली चर्बी को कम करता है, जठराग्नि को प्रदीप्त करने वाला अद्भुत आम पाचक मृदुविरेचक योग ।

24/05/2022
।। आयुर्वेद अमृत है इसे अपनाइये ।।
04/06/2020

।। आयुर्वेद अमृत है इसे अपनाइये ।।

14/01/2020

"आयुर्वेद में विटामिन्स,प्रोटीन्स,कैलोरीज़ नहीं होती"
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फिर क्या होता है?????
रस(षट् रस) और प्रकृति का अनूठा और सरल विज्ञानं

षट्(छः) रसों का रोचक संसार

ऋषियों ने आयुर्वेद को साधारण जनमानस का विज्ञानं बनाया, ऐसा विज्ञानं जो बिलकुल सरल हो,सस्ता हो और सर्वसुलभ हो। आयुर्वेद विज्ञानं में कैलोरीज,विटामिन्स,महँगी लैबोरेट्रीज,जटिल अवैज्ञानिक डायग्नोज़ जैसी जटिलताएं नहीं हैं।
किन्तु हमने आयुर्वेद की सरलता को भुलाकर पश्चिम से आयी जटिलताओं को अपना लिया है।
पोषण की ही बात करें तो भारतियों ने षटरस जैसे सरल विज्ञानं को भुलाकर ना समझ में आने वाले ,ना परिणाम देने वाले कैलोरी,कार्बोहायड्रेट,विटामिन्स की जटिलताओं को अपना लिया है।

आइये इस लेख के माध्यम से षटरस की अनूठी दुनिया में प्रवेश करें।

महर्षि वाग्भट्ट अष्टांग ह्रदय सूत्रस्थान प्रथम अध्याय में छः रसों की जानकारी देते हुए लिखते हैं
" रसा: स्वादुम्ललवणतिक्तोषणकषायका: ।
षडू द्रव्यमाश्रितास्ते तु यथापूर्वे बलावहा: ।। २१।।

अर्थात पंचमहाभूतों से बने पान्चभौतिक द्रव्यों में रहने वाले छः रस(स्वाद) ही हैं,ना इनसे कम और ना ही अधिक।
१. स्वादु यानि मीठा( जैसे गुड़,घी,खांड,बूरा,बादाम इत्यादि)
२. अम्ल यानि खट्टा(जैसे इमली,निम्बू,करौंदा,दही इत्यादि)
३. लवण यानि नमकीन(जैसे सेंधा नमक,काला नमक इत्यादि)
४. तिक्त यानि कड़वा(जैसे नीम,चिरायता,गिलोय इत्यादि)
५. कटुक यानि तीखा(जैसे मिर्च,हींग,तुलसी इत्यादि)
६. कषाय यानि कसैला(जैसे हरड़,बहेड़ा,पान,सौंफ इत्यादि)
इसी सूत्र में वाग्भट्ट जी कहते हैं उपरोक्त छः रस क्रम से बल में हीन होते जाते हैं अर्थात संपूर्ण छः रसों में स्वादु(मीठा) सबसे अधिक बल देने वाला है,उससे कम अम्ल(खट्टा),उससे कम लवण(नमकीन),उससे कम तिक्त(कड़वा) ,उससे कम कटुक(तीखा/उष्ण) और सबसे कम बल कषाय(कसैला) रस देने वाला है।

भावार्थ: अगर आप किसी विवाह में भोजन करने जा रहे हैं तो कैलोरीज सिद्धान्त को एक तरफ रखकर षट रस सिद्धान्त अनुसार सबसे पहले सबसे बलकारक रस यानी मीठा खाना चाहिए क्योंकि तीव्र अग्नि(भूख) में सबसे पहले सबसे भारी वस्तु खाना ही वैज्ञानिक कर्म है,जबकि आजकल हम सबसे बलकारक रस यानी मीठे को सबसे बाद या अंत में खाते हैं जिससे अपच,गैस,एसिडिटी होती है और यही अधपचा भोजन आम दोष बनकर डायबिटीज जैसे घोर जटिल रोग पैदा करता है। इसलिए डायबिटीज से बचना है तो मीठा भोजन में सबसे पहले खाओ।
फिर विवाह में अगर गोल गप्पे या नींबू वाला जलजीरा है जो खट्टा रस का प्रतिनिधत्व करते हैं उसे खाना या पीना चाहिए, उसके उपरांत इसी क्रम से दाल-रोटी-चावल खाना चाहिए।और सबसे अंत में सबसे कम बलकारक कषाय(कसैला) रस वाला पान,सौंफ या हरड़ खाना एकदम वैज्ञानिक कर्म है।
अगर भोजन को षट रस अनुसार इसी क्रम में खाया जाय तो कभी अपच,एसिडिटी नहीं होगी और भोजन जीर्ण होकर शरीर की सप्त धातुओं का पोषण करते हुए ,कोई आमदोष(अंग्रेजी में कहें तो खराब कोलेस्ट्रॉल,ट्राईग्लिसराइड्स इत्यादि विष) ना बनाते हुए शरीर का पोषण करेगा।
महर्षि वाग्भट्ट प्रतिदिन ऋतू अनुसार समस्त छः रस युक्त भोजन करने को कहते हैं बस ऋतू अध्याय अनुसार कुछ रस अधिक और कुछ रस कम खाने होंगे।जैसे शरद ऋतू में पित्त का प्रकोप होता है इसलिए पित्त का क्षमन करने वाले तीन रस(स्वादु,तिक्त,कषाय) हितकारी रस हैं इसलिए इन तीन रसों में व्याप्त विटामिन्स ही शरीर को पचेंगे जबकि इसके उलट पित्तवर्धक(अम्ल,लवण और कटुक) रस में व्याप्त विटामिन्स शरीर में दोष ही पैदा करेंगे अर्थात शरद ऋतू में विटामिन सी ,जो खट्टे रस में व्याप्त है शरीर में पित्त वृद्धि करके दोष ही पैदा करेगा। जबकि शीत ऋतू में खट्टा रस(अमला,संतरा में व्याप्त) शरीर के लिए गुणकारी होकर विटामिन सी को पचाकर शरीर का पोषण करेगा।
इसलिए विटामिन्स,कार्बोहाइड्रेट्स के घनचक्कर से निकलकर षट रस की रोचक और सरल दुनिया में प्रवेश करिये जनाब।
इस षट रस विज्ञानं में किसी लैब की आवश्यकता नहीं है क्योंकि यह छः रस आपकी जीभ सरलता से बता देती है जबकि कैलोरीज,विटामिन्स लैब्स में नापकर भी भोजन के पचने की कोई गारंटी नहीं है।इसलिए हमें और पूरी दुनिया को कैलोरीज,विटामिन्स की दुनिया से निकालकर आयुर्वेद के षट रस विज्ञानं पर आना ही होगा ।

17/10/2019

#सीताफल
सीताफल एक ऐसा फल है जो सर्दी के मौसम में बाजारों में मिलता है । सीताफल को इंग्लिश में कस्टर्ड एप्पल कहते है और शरीफा नाम से भी ये फल जाना जाता है । सीताफल ये अनगिनत औषधियों में शामिल है ये फल पकी हुई अवस्था में बहार से सख्त और अंदर से नरम और बहुत ही मीठा होता है । इसका अंदर का क्रीम सफ़ेद रंग का और मलाईदार होता है । इसके बीज काले रंग के होते है । मार्किट में आजकल सीताफल की बासुंदी शेक और आइसक्रीम भी मिलते है । यह हमारे सेहत के लिए बहुत ही अच्छा होता है । इसमें विटामिन होता है इसके अलावा इसमें नियासिन विटामिन ए राइबोफ्लेविन थियामिन ये तत्व होते है इसके इस्तेमाल से हमें आयरन कैल्शियम मॅग्नीज़ मैग्नेशियम पोटैशियम और फोस्फरस मिलते है । खास बात यह है कि सीता फल में आयरन अधिक मात्रा में होता है । इसके अन्दर मौजूद पोटैशियम और मैग्नेशियम ह्रदय के लिए बहोत ही अच्छा होता है मैग्नेशियम शरीर में पानी की कमी नहीं होने देता इसके फाइबर की प्रचुर मात्रा से ब्लड प्रेशर अच्छा रहता है । इससे कोलेस्ट्रॉल भी कम होता है । इसमें विटामिन और आयरन खून की कमी को दूर करके हीमोग्लोबिन बढ़ता है ।

*सीताफल का लाभ नम्बर एक* :-
अगर आपको कब्ज की समस्या हो तो सीता फल से ये दूर हो सकती है । सीता फल में पर्याप्त मात्रा में कॉपर तथा फायबर होते होते हैं जो मल को नरम करके कब्ज की समस्या को मिटा सकते है । इसके उपयोग से पाचन तंत्र भी मजबूत होता है ।

*सीताफल का लाभ नम्बर दो :-*
गर्भवती महिला के लिए सीता फल खाना लाभदायक होता है इससे कमजोरी दूर होती है, उल्टी व जी घबराना ठीक होता है । सुबह की थकान में आराम मिलता है, शिशु के जन्म के बाद सीताफल खाने से ब्रेस्ट दूध में वृद्धि होती है ।

*सीताफल का लाभ नम्बर तीन :-*
यदि आप कमजोर हो या आपको वजन बढ़ाना हो तो सीता फल का भरपूर उपयोग करना चाहिए। इसमें प्राकृतिक शक्कर अच्छी मात्रा में होती है। जो बिना किसी नुकसान के वजन बढ़ाकर व्यक्तित्व आकर्षक दे सकती है । इसके नियमित सेवन से पिचके हुए गाल और कूल्हे पुष्ट होकर सही आकार में आ जाते हैं और व्यक्तित्व में निखार आता है ।

*सीताफल का लाभ नम्बर चार :-*
सीता फल के पेड़ की छाल में पाए जाने वाले टैनिन के कारण इससे दांतों और मसूड़ों को लाभ मिलता है । सीता फल दांत और मसूड़ों के लिए फायदेमंद होता है । इसमें पाया जाने वाला कैल्शियम दांत मजबूत बनाता है।। इसकी छाल को बारीक पीस कर मंजन करने से मसूड़ों और दांत के दर्द में लाभ होता है । यह मुंह की बदबू भी मिटाता है ।

*सीताफल का लाभ नम्बर पाँच :-*
सीता फल में पाए जाने वाले विटामिन ‘ए’, विटामिन ‘सी’, तथा राइबोफ्लेविन के कारण यह आँखों के लिए फायदेमंद होता है। यह नेत्र शक्ति को बढ़ाता है तथा आँखों के रोगों से भी बचाव करता है । जिन लोगों का काम ज्यादा लैपटोप प्रयोग वाला होता है उनके लिये इस फल का नियमित सेवन करना बहुत ही अच्छा लाभकारी रहता है ।

*सीताफल का लाभ नम्बर छः :-*
यह मानसिक शांति देता है तथा डिप्रेशन तनाव आदि को दूर करता है । कच्चे सीताफल के क्रीम खाने से दस्त व पेचिश में आराम आता है। कच्चे क्रीम को सूखा कर भी रख सकते है। जरुरत पड़ने पर इसे भिगो कर खाने पर यह दस्त मिटाने में उपयोगी होता है ।

05/10/2019

#पानी_गये_न_ऊबरे

30/09/2019

दुनिया का सबसे ताकतवर पोषण पूरक आहार है- सहजन (मुनगा)। इसकी जड़ से लेकर फूल, पत्ती, फल्ली, तना, गोंद हर चीज उपयोगी होती है।
आयुर्वेद में सहजन से तीन सौ रोगों का उपचार संभव है। सहजन के पौष्टिक गुणों की तुलना :- विटामिन सी- संतरे से सात गुना अधिक। विटामिन ए- गाजर से चार गुना अधिक। कैलशियम- दूध से चार गुना अधिक। पोटेशियम- केले से तीन गुना अधिक। प्रोटीन- दही की तुलना में तीन गुना अधिक।
स्वास्थ्य के हिसाब से इसकी फली, हरी और सूखी पत्तियों में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, पोटेशियम, आयरन, मैग्नीशियम, विटामिन-ए, सी और बी-काम्प्लेक्स प्रचुर मात्रा में पाई जाते हैं। इनका सेवन कर कई बीमारियों को बढ़ने से रोका जा सकता है, इसका बॉटेनिकल नाम ' मोरिगा ओलिफेरा ' है। हिंदी में इसे सहजना, सुजना, सेंजन और मुनगा नाम से भी जानते हैं, जो लोग इसके बारे में जानते हैं, वे इसका सेवन जरूर करते हैं।
सहजन का फूल पेट और कफ रोगों में, इसकी फली वात व उदरशूल में, पत्ती नेत्ररोग, मोच, साइटिका, गठिया आदि में उपयोगी है। इसकी छाल का सेवन साइटिका, गठिया, लीवर में लाभकारी होता है। सहजन के छाल में शहद मिलाकर पीने से वात और कफ रोग खत्म हो जाते हैं।
सहजन की पत्ती का काढ़ा बनाकर पीने से गठिया, साइटिका, पक्षाघात, वायु विकार में शीघ्र लाभ पहुंचता है। साइटिका के तीव्र वेग में इसकी जड़ का काढ़ा तीव्र गति से चमत्कारी प्रभाव दिखाता है। मोच इत्यादि आने पर सहजन की पत्ती की लुगदी बनाकर सरसों तेल डालकर आंच पर पकाएं और मोच के स्थान पर लगाने से जल्दी ही लाभ मिलने लगता है।
सहजन के फली की सब्जी खाने से पुराने गठिया, जोड़ों के दर्द, वायु संचय, वात रोगों में लाभ होता है। इसके ताजे पत्तों का रस कान में डालने से दर्द ठीक हो जाता है साथ ही इसकी सब्जी खाने से गुर्दे और मूत्राशय की पथरी कटकर निकल जाती है। इसकी जड़ की छाल का काढ़ा सेंधा नमक और हींग डालकर पीने से पित्ताशय की पथरी में लाभ होता है।
सहजन के पत्तों का रस बच्चों के पेट के कीड़े निकालता है और उल्टी-दस्त भी रोकता है। ब्लड प्रेशर और मोटापा कम करने में भी कारगर सहजन का रस सुबह-शाम पीने से हाई ब्लड प्रेशर में लाभ होता है। इसकी पत्तियों के रस के सेवन से मोटापा धीरे-धीरे कम होने लगता है। इसकी छाल के काढ़े से कुल्ला करने पर दांतों के कीड़े नष्ट होते हैं और दर्द में आराम मिलता है।
सहजन के कोमल पत्तों का साग खाने से कब्ज दूर होता है, इसके अलावा इसकी जड़ के काढ़े को सेंधा नमक और हींग के साथ पीने से मिर्गी के दौरों में लाभ होता है। इसकी पत्तियों को पीसकर लगाने से घाव और सूजन ठीक होते हैं।
सहजन के बीज से पानी को काफी हद तक शुद्ध करके पेयजल के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसके बीज को चूर्ण के रूप में पीसकर पानी में मिलाया जाता है। पानी में घुल कर यह एक प्रभावी नेचुरल क्लोरीफिकेशन एजेंट बन जाता है। यह न सिर्फ पानी को बैक्टीरिया रहित बनाता है, बल्कि यह पानी की सांद्रता को भी बढ़ाता है।
कैंसर तथा शरीर के किसी हिस्से में बनी गांठ, फोड़ा आदि में सहजन की जड़ का अजवाइन, हींग और सौंठ के साथ काढ़ा बनाकर पीने का प्रचलन है। यह काढ़ा साइटिका (पैरों में दर्द), जोड़ों में दर्द, लकवा, दमा, सूजन, पथरी आदि में भी लाभकारी है |
सहजन के गोंद को जोड़ों के दर्द तथा दमा आदि रोगों में लाभदायक माना जाता है। आज भी ग्रामीणों की ऐसी मान्यता है कि सहजन के प्रयोग से वायरस से होने वाले रोग, जैसे चेचक आदि के होने का खतरा टल जाता है।
सहजन में अधिक मात्रा में ओलिक एसिड होता है, जो कि एक प्रकार का मोनोसैच्युरेटेड फैट है और यह शरीर के लिए अति आवश्यक है। सहजन में विटामिन-सी की मात्रा बहुत होती है। यह शरीर के कई रोगों से लड़ता है। यदि सर्दी की वजह से नाक-कान बंद हो चुके हैं तो, सहजन को पानी में उबालकर उस पानी का भाप लें। इससे जकड़न कम होती है। सहजन में कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है, जिससे हड्डियां मजबूत बनती हैं। इसका जूस गर्भवती को देने की सलाह दी जाती है, इससे डिलवरी में होने वाली समस्या से राहत मिलती है और डिलवरी के बाद भी मां को तकलीफ कम होती है, गर्भवती महिला को इसकी पत्तियों का रस देने से डिलीवरी में आसानी होती है।
सहजन के फली की हरी सब्जी को खाने से बुढ़ापा दूर रहता है इससे आंखों की रोशनी भी अच्छी होती है। सहजन को सूप के रूप में भी पी सकते हैं, इससे शरीर का खून साफ होता है।
सहजन का सूप पीना सबसे अधिक फायदेमंद होता है। इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है। विटामिन सी के अलावा यह बीटा कैरोटीन, प्रोटीन और कई प्रकार के लवणों से भरपूर होता है, यह मैगनीज, मैग्नीशियम, पोटैशियम और फाइबर से भरपूर होते हैं। यह सभी तत्व शरीर के पूर्ण विकास के लिए बहुत जरूरी हैं।
कैसे बनाएं सहजन का सूप? सहजन की फली को कई छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लेते हैं। दो कप पानी लेकर इसे धीमी आंच पर उबलने के लिए रख देते हैं, जब पानी उबलने लगे तो इसमें कटे हुए सहजन की फली के टुकड़े डाल देते हैं, इसमें सहजन की पत्त‍ियां भी मिलाई जा सकती हैं, जब पानी आधा बचे तो सहजन की फलियों के बीच का गूदा निकालकर ऊपरी हिस्सा अलग कर लेते हैं, इसमें थोड़ा सा नमक और काली मिर्च मिलाकर पीना चाहिए।
१. सहजन के सूप के नियमित सेवन से सेक्सुअल हेल्थ बेहतर होती है. सहजन महिला और पुरुष दोनों के लिए समान रूप से फायदेमंद है।
२. सहजन में एंटी-बैक्टीरियल गुण पाया जाता है जो कई तरह के संक्रमण से सुरक्षित रखने में मददगार है. इसके अलावा इसमें मौजूद विटामिन सी इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने का काम करता है।
३. सहजन का सूप पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाने का काम करता है, इसमें मौजूद फाइबर्स कब्ज की समस्या नहीं होने देते हैं।
४. अस्थमा की शिकायत होने पर भी सहजन का सूप पीना फायदेमंद होता है. सर्दी-खांसी और बलगम से छुटकारा पाने के लिए इसका इस्तेमाल घरेलू औषधि के रूप में किया जाता है।
५. सहजन का सूप खून की सफाई करने में भी मददगार है, खून साफ होने की वजह से चेहरे पर भी निखार आता है।
६. डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए भी सहजन के सेवन की सलाह दी जाती है।

29/04/2019

अपील

आज लोगों को लग रहा है कि गर्मी बहुत लग रही है।
पर कब तक AC का सहारा लेंगे, आज हिन्दुस्तान में 150 करोड़ पेड़ की ज़रूरत है।

अभी तो यह शुरुआत हैं। 45 से 49 डिग्री को 55 से 60 होने में देर नहीं लगेगी। अभी से समझकर पौधे लगाने होंगे क्योंकि एक पौधे को बड़ा होने मे 5 से 7 साल लग जाएंगे।
अब बारिश आने वाली हैं दो पेड़ ज़रूर लगाएं
सब कुछ सरकार पर मत छोडिये।
निवेदक :- वैद्य उमेश शुक्ला ,
श्री शुक्ला आयुर्वेद ,छिन्दवाड़ा .

Address

Main Road Gulabara
Chhindwara
480001

Opening Hours

Monday 1pm - 9pm
Tuesday 1pm - 9pm
Wednesday 1pm - 9pm
Thursday 1pm - 9pm
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