Ayush Gram Chikitsalay - Chitrakoot Dham

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आयुष ग्राम चिकित्सालय।।आयुष ग्राम ट्रस्ट
सूरजकुंड रोड (आयुष ग्राम मार्ग), चित्रकूट, उ०प्र० 210205, 50 शैय्या (beded) युक्त, उत्तर भारत का संपूर्ण पंचकर्म थेरेपी से सुसज्जित सुपर स्पेशलिटी आयुर्वेद हॉस्पिटल।

31/01/2026

झलकियां 77वें गणतंत्र दिवस की।

31/01/2026

डायलिसिस से बच गईं विभा सिंह।

मेरे पिता की डायलेसिस छूटी किडनी काम करने लगी!!हम लोग किसान हैं। मेरे पिता जी को २ माह पहले अचानक कुछ भी खाने यहाँ तक कि...
31/01/2026

मेरे पिता की डायलेसिस छूटी किडनी काम करने लगी!!

हम लोग किसान हैं। मेरे पिता जी को २ माह पहले अचानक कुछ भी खाने यहाँ तक कि पानी पीने तक से उल्टियाँ हो जाती थीं। १५ दिनों तक ऐसा ही चलता रहा, गाँव से उल्टियाँ की अंग्रेजी दवायें खाते रहे लेकिन कोई आराम नहीं मिला। फिर मैं उन्हें बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) में ले गया, वहाँ पर डॉक्टरों ने सारी जाँचें करवायीं, जाँच में यूरिया, क्रिटनीन बढ़ा आया, डॉक्टरों ने किडनी की समस्या बतायी।

बीचयू से २ माह तक अंग्रेजी दवायें चलीं, लेकिन कोई आराम न होने पर मैंने अपने यहाँ सोनभद्र के एक हॉस्पिटल में ले गये उन्होंने ६ बार डायलेसिस की और दवायें दीं जब डायलेसिस होती तो कुछ दिन आराम रहता कुछ दिन बाद फिर से पहले जैसे ही समस्या होने लगती थी। डॉक्टर ने पूरी लाइफ डायलेसिस करवाते रहने को कहा।

तभी मुझे मेरे ही एक रिश्तेदार के द्वारा आयुष ग्राम (ट्रस्ट), चित्रकूटधाम के चिकित्सालय का पता चला। मैं उन्हें १ अगस्त २०२० को लेकर आयुष ग्राम चिकित्सालय, चित्रकूट पहुँचा। मेरा रजिस्ट्रेशन हुआ, फिर मेरा नम्बर आने पर डॉक्टर वाजपेयी जी के पास बुलाया गया। उन्होंने सारी समस्यायें पूछीं और कुछ जाँचें करवायीं, फिर जाँच आने के बाद उन्होंने कहा आप बिल्कुल परेशान न हों मैं डायलेसिस छुड़वाने का प्रयास करता हूँ, इसके लिए आपको २ से ३ सप्ताह तक यहाँ रहकर पंचकर्म चिकित्सा करवानी पड़ेगी, मैं पिता जी को लेकर आयुष ग्राम चित्रकूट में भर्ती हो गया, इतना बड़ा आयुर्वेद का हॉस्पिटल, नर्सें, डॉक्टर सब।

भर्ती होने के बाद समय से खाने का, दवाओं का और पंचकर्म थैरेपी का पूर्ण ध्यान दिया गया, जिस समय मैं पिता जी को लेकर आया था उस समय पेट में सूजन, भूख बिल्कुल नहीं लग रही थी, नींद कम आ रही थी, कभी-कभी उल्टियाँ भी हो जाती थीं, यूरिन (पेशाब) में जलन, पेशाब कम होती थी, कमजोरी बहुत थी और पूरे शरीर में सूजन आ जाती थी।

लेकिन १५ दिनों के पंचकर्म चिकित्सा और दवाओं से मेरे पिता जी को ९०³ से ज्यादा आराम मिल गया, भूख भी बहुत अच्छी लगने लगी, पेशाब भी ठीक होने लगी, नींद भी आने लगी, उल्टियाँ तो बिल्कुल ही नहीं हुयीं, पेट में भी आराम हो गया, डायलेसिस की जरूरत ही नहीं पड़ी।

सबसे अच्छी बात तो यह कि मेरे पिता जी डायलेसिस से बच गये और मेरी अंग्रेजी दवायें भी सभी बन्द हो गयीं। आज १५ दिनों के बाद जब रक्त जाँच करवायी तो यूरिया ४०.५ एमजी/डीएल, क्रिटनीन १.५ एमजी/डीएल, सोडियम, पोटेसियम, वैâल्शियम सब नार्मल आया। जिसे देखकर सब लोग खुश हो गये और राहत की साँस ली।

इस प्रकार दो सप्ताह के बाद १ माह की दवायें देकर, पूरा परहेज-नियम बताकर डिस्चार्ज किया जा रहा है।

- श्रवण कुमार पिता श्री रामप्रीत, ग्राम- दीघुल, (बघाडू), थाना- दुद्धी, जिला- सोनभद्र (उ.प्र.)

(साभार - चिकित्सा पल्लव : अगस्त 2020)

31/01/2026

पंद्रह साल से माइग्रेन। डॉक्टर कहते थे कभी ठीक ही नहीं होगा....!

30/01/2026

रोग की सही पहचान और चिकित्सा।

30/01/2026

गणतंत्र दिवस परेड की झलकियां।

30/01/2026

क्या हुआ? जब ओपीडी में एक लड़का गुरु जी की फोटो खींचने लगा!

आयुष ग्राम (ट्रस्ट) चित्रकूट ने डायलेसिस, बाईपास सर्जरी और स्ट्रेचर से उठा दिया!!  मेरे बाबा जी श्री लक्ष्मी नारायण मिश्...
30/01/2026

आयुष ग्राम (ट्रस्ट) चित्रकूट ने डायलेसिस, बाईपास सर्जरी और स्ट्रेचर से उठा दिया!!

मेरे बाबा जी श्री लक्ष्मी नारायण मिश्र, रिटायर्ड प्रिन्सिपल, उम्र ७४ साल, वह भी अंग्रेजी अस्पतालों के इलाज के चलते अपाहिज, अपंग हो गये थे, बिस्तर ही एक मात्र सहारा था, ऐसे में हम कैसे जूझे रहे थे आज समझ सकते हैं। उन्हें सबसे पहले २०११ में सुगर हुआ, अंग्रेजी डॉक्टरों को दिखाया, बस वहीं से शुरू हो गयीं दवाइयाँ और बीमारियाँ।

सुगर कंट्रोल न हो पाने के कारण अंग्रेजी डॉक्टरों ने इंसुलिन लगवाना शुरू करवा दिया, जनवरी २०२० में २७-२७ यूनिट इंसुलिन सुबह-शाम लगने लगा।

एक दिन अचानक श्वास फूलने लगी, हम लोग लखनऊ लाहरी मेडिकल कॉलेज ले गये, वहाँ पर एंजियोग्राफी और खून की जाँच हुयी, तीन ब्लॉकेज बताये 70%, 70%, 90% और किडनी की खराबी बतायी गयी और बाईपास सर्जरी की सलाह दी। वहाँ से मैं बाबा जी को मेदान्ता लखनऊ ले गया। वहाँ पर एंजियोग्राफी छोड़कर फिर से सभी जाँचें हुयीं और क्रिटनीन बढ़ा होने के कारण कुछ दिन बाद ही बाईपास सर्जरी की सलाह दी। मेदान्ता में बाबा जी को २१ दिन भर्ती रखा गया लेकिन कोई आराम नहीं मिला और लीवर में समस्या होने लगी, मेदान्ता की दवा चलती रही। अब बाबा जी बिल्कुल बिस्तर से लग गये, भूख मिट गयी, १ डायलेसिस भी कर दी गयी, कोई आराम न होने के कारण मैं घर ले गया, घर पर ही दवायें खिलाने लगे फिर एक दिन ज्यादा समस्या होने लगी तो मैं फिर से मेदान्ता लखनऊ लेकर गया, वहाँ पर फिर से जाँचें करवायी गयीं और १२ दिन भर्ती रखा गया, लेकिन कुछ भी आराम नहीं हुआ, वे बिस्तर से लगे रहे। मेदान्ता का रोज का खर्च ३० हजार रुपये था और लाकडाउन के कारण मैं बाबा जी को घर ले आया।

तभी मुझे एक रिश्तेदार द्वारा आयुष ग्राम (ट्रस्ट) चिकित्सालय, चित्रकूट के बारे में पता चला। मैं १९ जुलाई २०२० को आयुष ग्राम चित्रकूट पहुँचा, पर्चा बना, फिर नम्बर आने पर ओपीडी में डॉ. वाजपेयी जी के पास बुलाया गया, उन्होंने सभी रिपोर्ट्स देखीं और बोले कि आप लोग बिल्कुल परेशान न हों यहाँ २१ दिन इन्हें रखेंगे आप स्ट्रेचर में लादकर लाये है न हम इन्हें चलाकर भेजेंगे और न ही डायलेसिस की जरूरत पड़ेगी और न ही बाईपास सर्जरी की।

हम आयुष ग्राम चिकित्सालय, चित्रकूट में रुक गये चिकित्सा शुरू हुयी जैसा डॉ. वाजपेयी जी ने कहा था वैसा ही हुआ, बाबा जी को यहाँ ७ दिन में लाभ मिलने लगा, जो २-३ माह से बिल्कुल बिस्तर पर थे वे ७ दिन में चलने लगे, अपनी पंचकर्मशाला तक खुद जाने लगे। न ही कोई डायलेसिस की जरूरत पड़ी और न ही बाईपास सर्जरी की और न ही एक भी दिन इंसुलिन की जरूरत पड़ी, सिर्फ सुगर की अंग्रेजी दवा ले रहे थे, वह भी अब ३ दिन से बन्द है और इस समय पेट अच्छा साफ होने लगा, भूख भी अच्छी लगने लगी और मैने यहाँ आकर देखा कि अंग्रेजी चिकित्सा से कई गुना ताकतदार आयुष चिकित्सा है। पर अच्छा डॉक्टर मिले, अच्छा आयुष चिकित्सा संस्थान मिले।

आयुष ग्राम ट्रस्ट प्रभु श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूटधाम में स्थित है, इतना बड़ा आयुष संस्थान मैंने देखा नहीं था, यहाँ १ भी बेड खाली नहीं रहता। हार्ट, किडनी के सभी केस अंग्रेजी अस्पतालों से लौटे और हम यहाँ ठीक होते देखते रहे।

मैं और मेरा परिवार बहुत खुश है कि बाबा जी को केवल बाईपास सर्जरी और डायलेसिस से ही नहीं बचा लिया बल्कि उन्हें ७ दिन में स्ट्रेचर से उठा दिया और चला दिया। उन्हें अपाहिज की जिन्दगी जीने से बचा लिया। चलते समय आयुष ग्राम (ट्रस्ट) चिकित्सालय के डॉ. साहब ने कहा कि देखो! बाबा जी को बोनस की जिन्दगी मिली है, आप इन्हें सहेज कर रखें, एक्टिव रखें, खान-पान ठीक रखें। बस! सब चकाचक रहेगा। मैं चाहता हूँ कि हमारे इस लाभ की जानकारी सब तक पहुँचे और लोग ऐसे आयुष संस्थान का लाभ उठायें। मैं तो कह सकता हूँ कि एलोपैथ से केवल केस बिगड़ रहे हैं पर उन अस्पतालों की इतनी चमक-दमक है कि हम जैसे वहाँ फंस जाते हैं और जिन्दगी तबाह कर लेते हैं।

- आलोक कुमार मिश्र, लक्ष्मी नारायण मिश्र, फत्तेपुर (लाखुन), खीरी (उ.प्र.) २१२७२२

(साभार - चिकित्सा पल्लव : अगस्त 2020)

30/01/2026

गणतंत्र दिवस के राष्ट्रीय पर्व पर चित्रकूट पुलिस लाइन परेड में पूज्य आचार्य डॉ० मदनगोपाल वाजपेयी गुरु राष्ट्रीय आयु०वि० : भारत सरकार आयुष मंत्रालय एवं संस्थापक आयुष ग्राम न्यास, चित्रकूट की गरिमामय उपस्थिति।

मुखदूषिका (Acne/Pimple) : युवाओं की मुख्य समस्या का आयुर्वेदिक समाधानमुखदूषिका/युवानपीडिका को सामान्य लोक भाषा में मुहास...
29/01/2026

मुखदूषिका (Acne/Pimple) : युवाओं की मुख्य समस्या का आयुर्वेदिक समाधान

मुखदूषिका/युवानपीडिका को सामान्य लोक भाषा में मुहासे कहा जाता है, जो आजकल युवाओं की मुख्य समस्या है। युवावस्था में ये पीडिकायें होना स्वाभाविक है। यह व्याधि मुख्य रूप से रक्त की दुष्टि (toxins in blood) के कारण उत्पन्न होती है।

व्याधि का नाम (मुखदूषिका/युवानपीडिका) अपने में ही अपने अर्थ व उत्पन्न होने वाली अवस्था को व्यक्त करती है अर्थात् युवा बालक व बालिकाओं के मुखमण्डल में होने वाली पीडिकाओं को ही युवानपीडिका कहते हैं। आयुर्वेद ग्रंथों में इसका वर्णन क्षुद्ररोगों (Minor ailment) के अन्तर्गत किया गया है। मुखदूषिका को Acne Vulgaris माना जा सकता है। आजकल के युवा उनकी त्वचा के प्रति बहुत ही सजग हैं तथा हर युवा अपने व्यक्तित्व को निखारने व त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए अनेक प्रकार के प्रसाधनों (Cosmetic) व औषधियों व क्रीम का प्रयोग करते हैं।

लगभग सभी युवाओं को युवानपीडिकायें (Pimple) होता ही है। यह व्याधि बालक व बालिकाओं दोनों को समान रूप से ग्रस्त करती है तथा Acne के उत्पन्न होने की सामान्य अवस्था १२-१४ वर्ष तथा इसकी प्रवरावस्था १६-१७ वर्ष देखी जाती है। लगभग 90% पिडिकायें स्वयं ही ठीक हो जाती हैं, परन्तु कुछ लोगों में देखा जाता है कि ये पिडिकायें बिना औषधीय प्रयोग के ठीक नहीं हो पाती हैं।

रोग के सामान्य कारणों में युवावस्था में हार्मोन (androgen) का परिवर्तन तथा उनकी अधिकता का होना, तैलीय त्वचा (Oily Skin), विभिन्न प्रकार के जंक फूड का सेवन, आहार का प्रयोग, अलग-अलग प्रकार के प्रसाधन सामग्री (विशेषकर तैलीय बेस्ड कॉस्मेटिक) का प्रयोग इत्यादि तथा मानसिक कारण को भी मुख्य रूप से झ्ग्स्ज्त की उत्पत्ति में कारण माना गया है।

इन सभी व्याधि उत्पत्तिकारक कारणों के सेवन से तथा हार्मोन्स के परिवर्तन से शरीर में विभिन्न उपापचय क्रियायें होती है तथा त्वचा में मेद की अधिकता होती है तथा मुख की स्वेदवह नलिकाओं के द्वारा को अवरुद्ध करते हैं तथा वह बैक्टीरिया के द्वारा दूषित होते हैं तथा वहाँ पर मुखदूषिका के लक्षणों की उत्पत्ति होती है।

व्याधि के सामान्य लक्षणों में विभिन्न पीडिकायें, कील आदि हैं, किन्तु कुछ युवा इन्हें अपने नाखूनों से छेड़ते है जिस कारण इन पीडिकाओं में उपद्रव स्वरूप पीड़ा, रक्तिमा व कभी-कभी पूय भी बन जाता है और व्याधि की गंभीरता बढ़ जाती है। ये पीडिकायें अवस्था बढ़ने के साथ स्वयं ठीक हो जाती है, परन्तु कुछ लोगों में ये देखा गया है कि यदि इन पीड़िकाओं का इलाज न किया जाये तो कभी-कभी चेहरे पर काले दाग व अन्य शारीरिक व मानसिक लक्षणों या व्याधियों को भी उत्पन्न करके पीड़ा पहुँचाते हैं।

आधुनिक विज्ञान के अनुसार इसके लक्षणों की निम्न अवस्थायें बतायी गयी हैं-
¬ प्रथमावस्था - जिसमें कील तथा कुछ पीड़िकायें ज्aज्ल्त होती हैं।
¬ दूसरी अवस्था - इसमें कील उभरी हुयी पीड़िकायें संख्या में कुछ अधिक होती हैं।
¬ तृतीयावस्था - इस अवस्था में पीडिका पूय युक्त हो जाती है।
¬ चतुर्थावस्था - ये व्याधि अत्यन्त प्रवरावस्था है इसमें पूय युक्त पीडिकाओं में रक्तिमा व अत्यन्त पीड़ा होती है तथा पीडिकाओं का आकार भी बढ़ जाता है।

आधुनिक विज्ञान के अनुसार व्याधि की चिकित्सा में अनेक प्रकार की antibiotics, स्थानिक प्रयोग हेतु विभिन्न लोशन इत्यादि का प्रयोग होता है, जो कि व्याधि को कम करने में सहायक तो होता है, परन्तु इनके प्रयोग से अनेक प्रकार के उपद्रवों (जैसे- त्वचा की शुष्कता आदि) की उत्पत्ति की संभावनायें भी बढ़ जाती हैं।

व्याधि की आयुर्वेदिक चिकित्सा का विशेष वर्णन शास्त्रों में मिलता है जो दो प्रकार से है-
१. शमन (Conservative treatment), २. शोधन (Purification of body)।

२. शोधन चिकित्सा में शरीर से विभिन्न विषैले (toxic) पदार्थों का निर्हरण, वमन (emesis) व विरेचन (purgation) थैरेपी की सहायता से किया जाता है तथा शमन चिकित्सा में तरह-तरह के औषधियों तथा मुख लेप व तेल का बाह्य प्रयोग करते हैं।

हमारे ऋषिकुल आयुर्वेदिक कॉलेज में रोजाना मुखदूषिका के अनेक रोगी देखे जाते हैं तथा उनको कायचिकित्सा के अन्तरंग विभाग में स्नेहपान पश्चात् विरेचन दिया जाता है। इस थैरेपी में रोगी को उसके कोष्ठ के अनुसार एक औषधीय घृत का पान कराया जाता है। सामान्यतया पंचतिक्त घृत का प्रयोग किया जाता है तथा इस घृत से स्नेहन के पश्चात् त्रिवृत्तावलेह से विरेचन दिया जाता है।

प्रथम दिन २५ मि.ली. घृत में सममात्रा उष्ण जल मिलाकर रोगी को प्रात:काल अभुक्त (बिना कुछ भोजनादि किये) पान करवाते हैं तथा उन्हें पूरे दिन उष्ण जल पान व हल्का भोजन करने को कहा जाता है। इसी प्रकार से अगले छ: दिनों (कुल सात दिन) तक घृत की मात्रा प्रत्येक दिन क्रमश: बढ़ाते हुए (२५,५०,७५,१००,१२५,१२५,१७५) मि.ली. स्नेहपान कराया जाता है, तत्पश्चात् आठवें दिन रोगी को आराम करने को कहा जाता है तथा आठवें व नवें दिन कटि प्रदेश से नीचे (जो की वात का स्थान है) तिल तेल से अभ्यंग कराया जाता है, तत्पश्चात् रोगी को विरेचन हेतु एक विरेचन चूर्ण (आरग्वध, कुटकी, त्रिवृत्त सभी २०-२० ग्राम की मात्रा में लेकर क्वाथ अथवा त्रिवृत्तालेह को उष्णोदक) के साथ दिया जाता है। इसके पश्चात् रोगी को विरेचन के लगभग १०-१५ वेग आते हैं तत्पश्चात् रोगी को ३ दिन तक संसर्जन क्रम अत्यंत लघु आहार का सेवन आदि का पालन करने को कहा जाता है तथा इसके बाद संशमन औषधि निम्बादि चूर्ण आदि दी जाती है।
शमन औषधि- आरोग्यवर्द्धिनी वटी, निम्बादि चूर्ण, पंचनिम्बादि चूर्ण, शुद्ध गंधक, रसमाणिकक्य गंधक रसायन, मंजिष्ठादि क्वाथ, महामंजिष्ठादि क्वाथ, सारिवाद्यासव, खदिरारिष्ट आदि का अन्त: प्रयोग एवं लोध्रादि लेप, जातिफलादि लेप, मुखकान्तिकर लेप, सर्षपादि लेप, शाल्मलीकंटक का दुग्ध के साथ लेप, मसूर दाल का दुग्ध से लेप, कुमकुमादि तैल, हरिद्रादि तेल, कनक तेल, मंजिष्ठादि तेल आदि का बाहरी प्रयोग युवानपीडिका चिकित्सा में अत्यन्त लाभकारी है।

कुछ घरेलू नुस्खे जिनका प्रयोग पीडिकाओं के लिए किया जा सकता है-
¬ रूई को शहद से भिगोकर पीडिका पर लगायें।
¬ जायफल को पीसकर इसे कच्चे दूध में मिलाकर लगायें फिर आधे घण्टे बाद धो लें।
¬ नीम की पत्तियों का पाउडर व हल्दी एक साथ मिलाकर पीडिकाओं पर लगायें।
¬ बर्फ के टुकड़े को कपड़े में लपेटकर मुखदूषिका पर लगायें।
¬ नींबू के रस को मुहासों पर लगायें।

अत: मुखदूषिका कोई बड़ी व्याधि तो नहीं है किन्तु इसका इलाज आधुनिक काल में अत्यंत आवश्यक हो चुका है तथा आयुर्वेदिक चिकित्सा एक सरल व सुरक्षित साधन है जो इस व्याधि को पूर्ण रूप से उपचार करने में सक्षम है।

(साभार - चिकित्सा पल्लव : अगस्त 2020)

 #आयुषग्राम गुरुकुल ने अपनी उत्कृष्ट स्वच्छता, सुव्यवस्थित व्यवस्था एवं उत्तम वातावरण परिवेश के कारण #स्वच्छ_एवं_हरित_वि...
29/01/2026

#आयुषग्राम गुरुकुल ने अपनी उत्कृष्ट स्वच्छता, सुव्यवस्थित व्यवस्था एवं उत्तम वातावरण परिवेश के कारण
#स्वच्छ_एवं_हरित_विद्यालय की श्रेणी में पूरे जनपद में उत्कृष्ट स्थान प्राप्त किया है।
इस उल्लेखनीय उपलब्धि हेतु जिलाधिकारी महोदय द्वारा गुरुकुल प्रधानाचार्य सीमा को #“उत्कृष्ट मान्यता #प्रमाण पत्र” प्रदान किया गया।

  ने दिया प्रमाण पत्र #आयुषग्राम गुरुकुलम्, चित्रकूट को स्वच्छ एवं हरित विद्यालय की जिला स्तरीय उत्कृष्ट मान्यता   भारत ...
29/01/2026

ने दिया प्रमाण पत्र
#आयुषग्राम गुरुकुलम्, चित्रकूट को स्वच्छ एवं हरित विद्यालय की जिला स्तरीय उत्कृष्ट मान्यता

भारत सरकार द्वारा शिक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित स्वच्छ एवं हरित विद्यालय कार्यक्रम (२०२५–२६) के अंतर्गत आयुषग्राम संस्कृत विज्ञान उच्चतर माध्यमिक गुरुकुलम, चित्रकूट को पूरे जनपद के अशासकीय एक मात्र इस विद्यालय को जिला स्तरीय उत्कृष्ट मान्यता प्रमाण-पत्र दिया गया।
यह प्रमाण पत्र जिलाधिकारी चित्रकूट श्री पुलकित गर्ग ने अपने हाथों से विद्यालय के प्रधानाचार्य सीमा को प्रदान किया।
आयुष ग्राम गुरुकुलम् के #संस्थापक/प्रबन्धक गुरुदेव #आचार्य डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी, गुरु : राष्ट्रीय आयुर्वेद वि० भारत सरकार, आयुष मंत्रालय के सतत मार्गदर्शन तथा श्रीमती सीमा प्रधानाचार्य के कर्मठ एवं दूरदर्शी प्रयासों से गुरुकुल में अध्ययनरत विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास तथा वैदिक, आधुनिक एवं आयुर्वेदिक उच्च शिक्षा को सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने हेतु निरंतर उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे हैं।
जल संरक्षण, शौचालय एवं स्वच्छता व्यवस्था, संचालन एवं रख-रखाव, व्यवहार परिवर्तन एवं क्षमता निर्माण, मिशन लाइफ (LiFE) गतिविधियाँ, पर्यावरणीय स्थिरता तथा हरित जीवनशैली जैसे सभी प्रमुख मानकों पर उत्कृष्ट कार्य करते हुए यह उपलब्धि प्राप्त की है।
Ministry of Education

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