Ayush Gram Chikitsalay - Chitrakoot Dham

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आयुष ग्राम चिकित्सालय।।आयुष ग्राम ट्रस्ट
सूरजकुंड रोड (आयुष ग्राम मार्ग), चित्रकूट, उ०प्र० 210205, 50 शैय्या (beded) युक्त, उत्तर भारत का संपूर्ण पंचकर्म थेरेपी से सुसज्जित सुपर स्पेशलिटी आयुर्वेद हॉस्पिटल।

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इक्षु (ईख)Saccharum officinarumइक्षवो रक्तपित्तघ्नां बल्या वृष्या कफप्रदाः। स्वादुपाकरसाः स्निग्धाः गुरवो मूत्रलाः हिमाः...
28/03/2026

इक्षु (ईख)
Saccharum officinarum

इक्षवो रक्तपित्तघ्नां बल्या वृष्या कफप्रदाः।
स्वादुपाकरसाः स्निग्धाः गुरवो मूत्रलाः हिमाः।। (भा.प्र.)

इक्षु (गन्ना) रक्तपित्तघ्न तथा बल्य और वृष्य है यह कफ को बढ़ाने वाला है। यह स्वाद में मधुर, रस में स्निग्ध गुरु तथा मूत्रल है और शीत भी।

इसकी अनेक प्रकार की जातियाँ होती हैं । भावप्रकाश निघण्टु के अनुसार इसमें 13 प्रकार की जातियाँ पायी जाती हैं। यह बल्य और बृंहण है। यह ज्यादातर दौर्बल्य और कृशता में प्रयुक्त किया जाता है। यह बस्तिशोधक भी है। इसका लैटिन नाम सैकरम ऑफिसिनेरम (Sac- charum officinarum) है। यह ग्रामिनी (Gramineae-यव) कुल की वनस्पति है। यह कई प्रकार के नामों से जानी जाती है । जैसे- इक्षु, पुण्ड्रक, दीर्घच्छद (लम्बे पत्ते होने के कारण ) भूरिरस ( पूरा रस भरा हुआ) असिपत्र (तलवार की भाँति पत्ते होने के कारण) मधुतृण (ऐसा तृण जो मीठा है) गुडमूल (गुड़ की उत्पत्ति करने वाला) इसके अलावा यह कई प्रकार के प्रादेशिक नामों से जाना जाता है।

हिन्दी - इक्षु, पुण्डिया, पोण्डा, ईख, गन्ना, आँख।
बंगला - इक्षु, आक, गन्ना।
मराठी - आओस, कब्बी।
गुजराती - शेरडी, नैशाकर।
तमिल - पुण्ड्रम, कारुम्बु, कन्नाल।
तेलगू - चेरुकु, अरुकनूपूला, रुनुगा, इंजू ।
अरबी - कसबुस्सुक्कर ।
फारसी - नैशकर।
अंग्रेजी - शुगरकेन (Sugarcane)।

गण वर्गीकरण -
सुश्रुत तृणपञ्चमूल
भावप्रकाश निघण्टु इक्षु वर्ग
कैकेयदेव निघण्टु औषधि वर्ग

स्वरूप - ईख का क्षुप सर्वप्रसिद्ध है क्योंकि यह भारत वर्ष में फसल के रूप में पैदा होती है। इसका काण्ड लगभग 3 मीटर लम्बा स्थूल एवं ग्रन्थियुक्त होता है। इसके पत्ते लम्बे पतले चपटे 3-4 फिट लम्बे, 2- 3 इंच चौड़े होते हैं, पत्तों के किनारे अत्यन्त तीक्ष्ण होते हैं। इसके पुष्पों का गुच्छा बड़ा और अनेक शाखायुक्त होता है। वर्षा में पुष्प होते हैं। यह बहुवर्षायु पौधा होता है।

उत्पत्ति स्थान - यह भारत के उष्ण प्रदेशों तथा उत्तर प्रदेश में ज्यादा पाया जाता है।

रासायनिक संगठन - ग्वैनिन, फ्रक्टोस, गैलेक्टोस, पोटेशियम सेकरेन्स, स्केफटोसाइड, ईख में शर्करा, जल, पिच्छिल द्रव्य, राल, वसा, अलब्युमिन, लोह, प्रोटीन, एमीनो एसिड, साइट्रिक एसिड तथा कैल्शियम ऑक्जलेट पाया जाता है।

रस पंचक
रस - मधुर गुण गुरु स्निग्ध
वीर्य - शीत
विपाक - मधुर

दोष कर्म - वातपित्त शामक, कफवर्धक। किन्तु गन्ने का रस अत्यन्त शीत होने के वात को भी बढ़ाता है।

कर्म - मूत्रल, संतर्पण, दाह प्रशमन, तृष्णाहर, रक्तपित्त शामक, हृद्य, बल्य, बृंहण, श्रमनाशक, वृष्य, स्तन्यजनन, श्लेष्मनिःसारक, सारक, कृमिजनन।

रोगघ्नता - मूत्रकृच्छ्र, मूत्रविकार, वृक्करोग, शुक्रदौर्बल्य, स्तन्यक्षय, दौर्बल्य, क्षत, कासश्वास, कामला, विबन्ध, वातपित्त रोग।

प्रयोज्यांग- मूलस्वरस, शर्करा,
मात्रा -
स्वरस - 20-40 मि.लि.
मूलक्वाथ - 50-100 मि.लि.
विशिष्टयोग- तृणपञ्चमूल क्वाथ

रोगानुसार प्रयोग -

👉 नाक से खून गिरना- कई लोगों को गरमी में नाक से खून गिरने की समस्या होती है। ऐसे लोगों को खाली पेट 1 गन्ना चूसना चाहिए। यदि गन्ने का रस पीना हो तो थोड़ा सोंठ और सेन्धा नमक मिलाकर ही सेवन करना चाहिये । नाक फूटने की बीमारी में ईख का रस 4-4 बूंद नाक में नित्य डालना चाहिए । बहुत लाभ होता है।

👉 हाथ पैरों के दाह (जलन) में - शरीर में उष्णता और वायु के बढ़ जाने से हाथ पैरों में जलन होने पर ईक्षु रस बहुत ही लाभप्रद है । ऐसी अवस्था में 50-50 मि.लि. इक्षु रस में 4-4 पत्ती पुदीना और 5 कालीमिर्च पीसकर मिलाकर खाली पेट सुबह-शाम सेवन करें। गरम और उष्ण खान-पान और रहन-सहन का निषेध करें। यह प्रयोग मधुमेहियों के लिए नहीं है ।

👉 अम्लपित्त में - इक्षुरस बहुत लाभप्रद है। इक्षु रस 40 मि.लि., सेन्धानमक 500 मि.ग्रा. तथा भुना जीरा चूर्ण 1 ग्राम मिलाकर भोजन के बाद 40 दिन तक सेवन करने से अम्लपित्त रोग मिट जाता।

👉 कब्ज में - कब्ज को मिटाने में भी ईख की औषधीय भूमिका है । जिन्हें कब्ज की शिकायत हो उन्हें प्रातः खाली पेट ईख चूसना चाहिए। 1-2 माह के इस प्रयोग से पुराना से पुराना कब्ज टूटने लगता है। कब्ज में मशीन से निकाला रस कम लाभ करता है पर गन्ने का रस चूसना विशेष लाभप्रद है।

दुर्बलता और कुपोषण में - गन्ने का रस 50 मि.लि., सोंठ चूर्ण आधा ग्राम और विदारीकन्द चूर्ण 3 ग्राम मिलाकर खाली पेट दिन में 2 बार कुछ दिन लगातार सेवन करने से दुर्बलता मिटती है, धातुयें पुष्ट होती है और ऊर्जा मिलती है।

👉 माताओं में दूध की कमी - कुछ माताओं के स्तनों में दूध कम उतरता है। ऐसे में गन्ने का रस 50 मि.लि., शतावरी चूर्ण 5 ग्राम, सोंठ, जीरा और पिप्पली 1-1 ग्राम मिलाकर सुबह-शाम खाली पेट सेवन करने से कुछ ही दिन में स्तनों में दूध उतरने लगता है। यह प्रयोग 2-3 माह या इससे अधिक दिनों तक भी किया जा सकता है।

👉 खाँसी में - सूखी खाँसी में डेढ़ फिट गन्ने को तोड़कर आग में भूनकर दिन में 2-3 बार चूसें। इससे छाती में सूख गया जमा श्लेष्मा ढीला होकर निकलने लगता है।

👉 पेशाब की जलन में -
1️⃣ इक्षु रस बहुत ही लाभप्रद है। गर्मी के कारण तथा रक्त में अम्लीयता बढ़ जाने तथा संक्रमण हो जाने से पेशाब में जलन होने लगती है । गन्ने का रस 50-50 मि.लि. उसमें 4 चुटकी फिटकरी का चूर्ण मिलाकर पीने से पेशाब खुलकर उतरता है और जलन मिटती है।

2️⃣ इक्षु का रस 50 मि.लि. में जीरा चूर्ण 1 ग्राम और खाने का सोड़ा 2 चुटकी मिलाकर सेवन करने से पेशाब की जलन और कड़क मिटती है तथा पेशाब खुलकर उतरता है।

3️⃣ ईख की ताजी जड़ 20 ग्राम को कूटकर 300 मि.ली. पानी में पकायें जब 50 मि.ली. बचे तब उतारकर छानकर ठण्डाकर पी लें। इससे पेशाब की जलन मिट जाती है।

👉 कामला में - ईख का रस बहुत ही लाभप्रद है । ईख के टुकड़े कर रात में छत पर रख दें सुबह शौचादि से निवृत्त होकर खाली पेट भरपेट ईख का रस चूसें। इस प्रयोग से किसी-किसी को 1-2 दिन पेशाब में पीलापन बढ़ता है और 4-5 दिन कामला ठीक हो जाता है।

👉 गुर्दे के रोग में - ईख के मूल 20 ग्रा. का क्वाथ विधि से क्वाथ करें फिर इस क्वाथ को अनुपान के रूप में या अकेले सेवन कराने से गुर्दे के रोगी को लाभ होता है।

👉 खूनी बवासीर में -
1️⃣ ईख का रस 40-50 मि.लि. में 500 मि.ग्रा. खाने का चूना मिलाकर सुबह-शाम खाली पेट नित्य सेवन करने से खूनी बवासीर ठीक हो जाती है।

2️⃣ ईख रस 40-50 मि.लि. में एक मुट्ठी किशमिश रात में भिगो ये किशमिश सुबह नाश्ते में सेवन करने से तीसरे दिन से खूनी बवासीर में रक्त आना बन्द हो जाता है।

3️⃣ ईख का रस 50 मि.लि., देशी कत्था 250 मि.ग्रा. और नींबू रस 10 बूँदे मिलाकर स्टील के बर्तन में डालकर रातभर के लिये छत में रख दें (ऊपर से कोई ढक्कन अवश्य रख दें) सुबह खाली पेट नित्य सेवन करें और इसे सेवन करने के बाद 1 घंटा तक कुछ खाये पियें नहीं।

👉 पेट दर्द में - गन्ने का रस 25 मि.लि. को उबालें एक उफान आते ही उसमें 500 मि.लि. अजवायन का चूर्ण डालें और पियें। यह प्रयोग पेट दर्द का नाश करता है ।

👉 रक्तातिसार में - गन्ने का रस 30 मि.लि. और अनार का रस 30 मि.लि. मिलाकर दिन में 2 बार सेवन करने से रक्तातिसार में लाभ होता है।

श्री राम जन्मोत्सव की दिव्य झलकियां 🚩चैत्र शुक्ल नवमी के पावन अवसर पर आयुष ग्राम में भगवान श्रीराम का दिव्य जन्मोत्सव अत...
27/03/2026

श्री राम जन्मोत्सव की दिव्य झलकियां 🚩

चैत्र शुक्ल नवमी के पावन अवसर पर आयुष ग्राम में भगवान श्रीराम का दिव्य जन्मोत्सव अत्यंत श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ सम्पन्न हुआ।

मध्यान्ह कर्क लग्न के शुभ समय में आयुष विहारी प्रभु श्रीराम का दुग्ध अभिषेक किया गया। इस अवसर पर राम महामंत्र एवं विजय मंत्र का जप, रक्षा स्तोत्र का पाठ तथा विधिपूर्वक नवरात्र व्रत पारण सम्पन्न हुआ।

27/03/2026

श्री राम जन्मोत्सव 🙏🚩

27/03/2026

ऐसा रोगी दुःखी नहीं होता।

रामो विग्रहवान् धर्मः सदाचारः प्रतिष्ठितः।रामो सत्यपराक्रमः॥मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के पावन अवतरण दिवस श्री राम...
27/03/2026

रामो विग्रहवान् धर्मः सदाचारः प्रतिष्ठितः।
रामो सत्यपराक्रमः॥

मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के पावन अवतरण दिवस श्री राम नवमी के शुभ अवसर पर आयुष ग्राम चिकित्सालय, चित्रकूट की ओर से आप सभी को मंगलमय शुभकामनाएं।

चैत्र शुक्ल नवमी के इस पावन अवसर पर आयुष ग्राम में भगवान श्रीराम का दिव्य जन्मोत्सव अत्यंत श्रद्धा एवं भक्ति भाव से मनाया जा रहा है।

मध्यान्ह कर्क लग्न के शुभ समय में आयुष विहारी प्रभु श्रीराम का दुग्ध अभिषेक, राम महामंत्र एवं विजय मंत्र का जप, रक्षा स्तोत्र का पाठ तथा नवरात्र व्रत पारण के पश्चात भंडारा प्रसाद का आयोजन किया जा रहा है।

प्रभु श्रीराम का जीवन हमें सत्य, मर्यादा, सेवा और समर्पण का मार्ग दिखाता है। उनके आदर्शों को अपनाकर हम अपने जीवन को स्वस्थ, संतुलित और सफल बना सकते हैं।

ईश्वर से प्रार्थना है कि यह पावन पर्व आप सभी के जीवन में सुख, शांति, आरोग्य एवं समृद्धि लेकर आए।

— धन्वंतरि पीठ आयुष ग्राम (न्यास) चिकित्सालय, चित्रकूट धाम उ०प्र०

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आयुष ग्राम चिकित्सालय, चित्रकूट में एक भावुक और प्रेरणादायक क्षण देखने को मिला।मरीज रिजा अहमद (14 वर्ष), जो पिछले लगभग 3...
26/03/2026

आयुष ग्राम चिकित्सालय, चित्रकूट में एक भावुक और प्रेरणादायक क्षण देखने को मिला।

मरीज रिजा अहमद (14 वर्ष), जो पिछले लगभग 3 वर्षों से मिर्गी/झटकों (अपस्मार) की समस्या से पीड़ित थीं, बार-बार दौरे आना, शरीर का अकड़ जाना, गिर जाना, आंखों का ऊपर की ओर चले जाना जैसी गंभीर परेशानियों से जूझ रही थीं।

आचार्य डॉ. मदन गोपाल बाजपेई जी के मार्गदर्शन में आयुर्वेदिक उपचार, पंचकर्म चिकित्सा एवं योग-प्राणायाम के माध्यम से उनका सफल उपचार किया गया। आज मरीज पूर्णतः स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी रही हैं।

दिनांक 24 मार्च (मंगलवार) को ओपीडी में फॉलो-अप के दौरान जब वे पुनः आईं, तो उनकी खुशी और आत्मविश्वास देखना हमारे लिए अत्यंत संतोष का विषय रहा।

इस विशेष अवसर पर मरीज की बहन ने गुरु जी का एक सुंदर स्केच बनाकर उन्हें भेंट किया, जो उनके विश्वास, श्रद्धा और आभार का प्रतीक है ❤️

हम आयुष ग्राम चिकित्सालय, चित्रकूट परिवार की ओर से उनके उज्ज्वल और स्वस्थ भविष्य की कामना करते हैं।

25/03/2026

कहां गया हमारा प्राकृतिक जीवन!

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