30/01/2026
आयुष ग्राम (ट्रस्ट) चित्रकूट ने डायलेसिस, बाईपास सर्जरी और स्ट्रेचर से उठा दिया!!
मेरे बाबा जी श्री लक्ष्मी नारायण मिश्र, रिटायर्ड प्रिन्सिपल, उम्र ७४ साल, वह भी अंग्रेजी अस्पतालों के इलाज के चलते अपाहिज, अपंग हो गये थे, बिस्तर ही एक मात्र सहारा था, ऐसे में हम कैसे जूझे रहे थे आज समझ सकते हैं। उन्हें सबसे पहले २०११ में सुगर हुआ, अंग्रेजी डॉक्टरों को दिखाया, बस वहीं से शुरू हो गयीं दवाइयाँ और बीमारियाँ।
सुगर कंट्रोल न हो पाने के कारण अंग्रेजी डॉक्टरों ने इंसुलिन लगवाना शुरू करवा दिया, जनवरी २०२० में २७-२७ यूनिट इंसुलिन सुबह-शाम लगने लगा।
एक दिन अचानक श्वास फूलने लगी, हम लोग लखनऊ लाहरी मेडिकल कॉलेज ले गये, वहाँ पर एंजियोग्राफी और खून की जाँच हुयी, तीन ब्लॉकेज बताये 70%, 70%, 90% और किडनी की खराबी बतायी गयी और बाईपास सर्जरी की सलाह दी। वहाँ से मैं बाबा जी को मेदान्ता लखनऊ ले गया। वहाँ पर एंजियोग्राफी छोड़कर फिर से सभी जाँचें हुयीं और क्रिटनीन बढ़ा होने के कारण कुछ दिन बाद ही बाईपास सर्जरी की सलाह दी। मेदान्ता में बाबा जी को २१ दिन भर्ती रखा गया लेकिन कोई आराम नहीं मिला और लीवर में समस्या होने लगी, मेदान्ता की दवा चलती रही। अब बाबा जी बिल्कुल बिस्तर से लग गये, भूख मिट गयी, १ डायलेसिस भी कर दी गयी, कोई आराम न होने के कारण मैं घर ले गया, घर पर ही दवायें खिलाने लगे फिर एक दिन ज्यादा समस्या होने लगी तो मैं फिर से मेदान्ता लखनऊ लेकर गया, वहाँ पर फिर से जाँचें करवायी गयीं और १२ दिन भर्ती रखा गया, लेकिन कुछ भी आराम नहीं हुआ, वे बिस्तर से लगे रहे। मेदान्ता का रोज का खर्च ३० हजार रुपये था और लाकडाउन के कारण मैं बाबा जी को घर ले आया।
तभी मुझे एक रिश्तेदार द्वारा आयुष ग्राम (ट्रस्ट) चिकित्सालय, चित्रकूट के बारे में पता चला। मैं १९ जुलाई २०२० को आयुष ग्राम चित्रकूट पहुँचा, पर्चा बना, फिर नम्बर आने पर ओपीडी में डॉ. वाजपेयी जी के पास बुलाया गया, उन्होंने सभी रिपोर्ट्स देखीं और बोले कि आप लोग बिल्कुल परेशान न हों यहाँ २१ दिन इन्हें रखेंगे आप स्ट्रेचर में लादकर लाये है न हम इन्हें चलाकर भेजेंगे और न ही डायलेसिस की जरूरत पड़ेगी और न ही बाईपास सर्जरी की।
हम आयुष ग्राम चिकित्सालय, चित्रकूट में रुक गये चिकित्सा शुरू हुयी जैसा डॉ. वाजपेयी जी ने कहा था वैसा ही हुआ, बाबा जी को यहाँ ७ दिन में लाभ मिलने लगा, जो २-३ माह से बिल्कुल बिस्तर पर थे वे ७ दिन में चलने लगे, अपनी पंचकर्मशाला तक खुद जाने लगे। न ही कोई डायलेसिस की जरूरत पड़ी और न ही बाईपास सर्जरी की और न ही एक भी दिन इंसुलिन की जरूरत पड़ी, सिर्फ सुगर की अंग्रेजी दवा ले रहे थे, वह भी अब ३ दिन से बन्द है और इस समय पेट अच्छा साफ होने लगा, भूख भी अच्छी लगने लगी और मैने यहाँ आकर देखा कि अंग्रेजी चिकित्सा से कई गुना ताकतदार आयुष चिकित्सा है। पर अच्छा डॉक्टर मिले, अच्छा आयुष चिकित्सा संस्थान मिले।
आयुष ग्राम ट्रस्ट प्रभु श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूटधाम में स्थित है, इतना बड़ा आयुष संस्थान मैंने देखा नहीं था, यहाँ १ भी बेड खाली नहीं रहता। हार्ट, किडनी के सभी केस अंग्रेजी अस्पतालों से लौटे और हम यहाँ ठीक होते देखते रहे।
मैं और मेरा परिवार बहुत खुश है कि बाबा जी को केवल बाईपास सर्जरी और डायलेसिस से ही नहीं बचा लिया बल्कि उन्हें ७ दिन में स्ट्रेचर से उठा दिया और चला दिया। उन्हें अपाहिज की जिन्दगी जीने से बचा लिया। चलते समय आयुष ग्राम (ट्रस्ट) चिकित्सालय के डॉ. साहब ने कहा कि देखो! बाबा जी को बोनस की जिन्दगी मिली है, आप इन्हें सहेज कर रखें, एक्टिव रखें, खान-पान ठीक रखें। बस! सब चकाचक रहेगा। मैं चाहता हूँ कि हमारे इस लाभ की जानकारी सब तक पहुँचे और लोग ऐसे आयुष संस्थान का लाभ उठायें। मैं तो कह सकता हूँ कि एलोपैथ से केवल केस बिगड़ रहे हैं पर उन अस्पतालों की इतनी चमक-दमक है कि हम जैसे वहाँ फंस जाते हैं और जिन्दगी तबाह कर लेते हैं।
- आलोक कुमार मिश्र, लक्ष्मी नारायण मिश्र, फत्तेपुर (लाखुन), खीरी (उ.प्र.) २१२७२२
(साभार - चिकित्सा पल्लव : अगस्त 2020)