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Infinite Solutions Ancient Classical KriyaYoga, Life Problem, Chronic Health Problem, Self-healing Solutions. Bhutashuddhi, Chakra healing and Balance.

Self-healing Through Psycho Neurobic Techniques, Kriya yoga for Ultimate Experience of life, Ancient classical Yoga - The Ultimate Fitness. Raise All four levels of life-Body, Mind, Emotions and Energy in perfect tune with the Cosmic geometry.(An Experience of beyond physical boundary)

♾️ मन की शक्ति अतीत है|       महान संतों द्वारा किए गए चमत्कार हमारे लिए चमत्कार हो सकते हैं, लेकिन उनके लिए नहीं। जब आप...
22/02/2024

♾️ मन की शक्ति अतीत है|



महान संतों द्वारा किए गए चमत्कार हमारे लिए चमत्कार हो सकते हैं, लेकिन उनके लिए नहीं। जब आप जानते हैं कि मन वह शक्ति है जो इस ब्रह्मांड को बनाती है, तो आप कुछ भी नहीं कर सकते हैं।



लेकिन पहले "अद्भुत" चीजें करने की कोशिश न करें



मन सब कुछ है; लेकिन जब तक आप नहीं सीखते कि इसकी शक्ति का उपयोग कैसे करना है, तब तक "क्योंकि सब मन है, मैं इस चट्टान से कूद जाऊंगा और सब ठीक हो जाएगा" का तर्क करना मूर्खपन है।



लेकिन जो कुछ भी आप मन को सच्चे रूप से प्रभावित कर सकते हैं, वह आप कर सकते हैं



सब कुछ मन से बनाया गया है, और इसे मन द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है। जैसे ही आप मानसिक शक्ति को और बढ़ाते हैं, आप आखिरकार कुछ भी कर सकेंगे।



महान लोगों ने इसका प्रदर्शन किया है



यीशु ने बीमारों को ठीक किया, मरे हुए को जगाया, पानी को शराब में बदला। कृष्ण ने पूरे पहाड़ को उठाया और उसे अपने भक्तों के ऊपर लटका दिया ताकि वे एक विनाशकारी तूफान से सुरक्षित रह सकें।



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Everyone

21/02/2024

दूसरा दरवाजा (Part-2)
भावनात्मक स्वास्थ्य और आत्म-अभ्यास**

परिचय

🌿 आध्यात्मिक विकास के दृष्टिकोण से, दूसरा दरवाजा अपने भावनात्मक स्वास्थ्य और आत्म-अभ्यास की समझ की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

भावनात्मक स्वास्थ्य का महत्व

💖 यह दरवाजा भावनात्मक स्वास्थ्य की महत्वपूर्णता पर बल देता है, जो मानसिक और आध्यात्मिक समृद्धि के लिए अत्यंत आवश्यक है। भावनाएं हमारे जीवन में रंग भरती हैं, हमें वास्तविक आनंद की दिशा में मार्गदर्शन करती हैं।

आत्म-अभ्यास पर मार्गदर्शन

🧘‍♂️ इस दरवाजे में प्रवेश से साधकों को आत्म-अभ्यास की महत्वपूर्णता और मार्गदर्शन की साझा होती है। ओशो के उपदेशों का अनुसरण करके, व्यक्ति अपनी आत्मा के साथ एकीकृत होकर अपने सत्यिक स्वरूप की पहचान कर सकता है।

🌐 यह दरवाजा हमें यह सिखाता है कि अपनी भावनाओं को समझकर और आत्म-अभ्यास से जुड़कर हम संबंधों को सही तरीके से साझा कर सकते हैं। सही आत्म-अभ्यास और साझागी से हम अपने जीवन को समृद्धि और आत्मिक आत्मता की दिशा में मोड़ सकते हैं।

साझा अनुभव और उदारता

💬 इस दरवाजे का अनुसरण करने से हम समझ सकते हैं कि अपने भावनात्मक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए, हम समृद्धिपूर्ण समाज में अपने अनुभवों को साझा कर सकते हैं और उदारता का अनुभव कर सकते हैं।

आत्मिक समृद्धि

🌈 इस दरवाजे के माध्यम से हम अपने जीवन को आत्मिक समृद्धि और सत्यिक आत्मता की दिशा में मोड़ सकते हैं, जिससे हमें शांति, संतुलन, और आनंद की पूर्णता मिलती है।



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पहला दरवाजा:(Part-1) भौतिक शरीर 🌿भौतिक शरीर का महत्व: 🏋️‍♂️ इस दृष्टिकोण से, पहला दरवाजा हमें हमारे भौतिक शरीर की महत्वप...
20/02/2024

पहला दरवाजा:(Part-1) भौतिक शरीर 🌿

भौतिक शरीर का महत्व:
🏋️‍♂️ इस दृष्टिकोण से, पहला दरवाजा हमें हमारे भौतिक शरीर की महत्वपूर्णता को समझाता है। शारीरिक स्वास्थ्य और उसका संरक्षण एक स्वस्थ और सतत जीवन के लिए आवश्यक हैं। 🌱

भौतिकता का साकार:
🌈भौतिकता को एक साकार अनुभूति के रूप में वर्णित करते हुए, हम अवस्थाएं, सुख, और अनुभवों के माध्यम से इस मानवीय यात्रा को जीतते हैं। 🌟

सार्थक जीवन:
🚀 इस दरवाजे का अध्ययन हमें बताता है कि सार्थक जीवन के लिए यह आवश्यक है कि हम अपने भौतिक शरीर की सुरक्षा करें और इसे सही तरीके से संरक्षित रखें। 🌿

सांसारिक बाधाएं और उनसे उबरना:
🌍 इस दरवाजा हमें सांसारिक बाधाओं को समझने और उनसे उबरने का एक माध्यम प्रदान करता है। 🌟 भौतिक शरीर को सही तरीके से संरक्षित करके हम अपनी ऊर्जा को सांसारिक चुनौतियों का सामना करने में समर्थ होते हैं।

सार्थक जीवन का सूचीबद्धीकरण:
📈 इस दरवाजे का अध्ययन हमें सार्थक जीवन का सूचीबद्धीकरण करने की महत्वपूर्णता बताता है। 🌿 भौतिक शरीर को सही से देखने और समझने से हम अपने जीवन को सार्थक बना सकते हैं और सतत समृद्धि की दिशा में बढ़ सकते हैं।

संक्षेप में:
🌺 पहला दरवाजा हमें बताता है कि भौतिक शरीर और भौतिकता का सही से समझना और इसका सार्थक उपयोग करके हम अपने जीवन को समृद्धि और सार्थकता की दिशा में मोड़ सकते हैं। 🌟


📞 For more information and consultation, contact 8826009501 🌐

18/02/2024

योगिक दृष्टिकोण से जीवन को सुधारने के तीन कदम: - एक समझ|

1. आसन (शारीरिक स्थितियाँ): योग आसनों के अलावा, ध्यानपूर्वक ब्रेथ कंट्रोल और मानसिक स्थिति में सुधार के लिए अन्य तकनीकों में गहराई मिलती है। शारीरिक लाभ के अलावा, ये आसन मानसिक स्थिति को स्थिर और शांत करने में मदद करते हैं।

2. प्राणायाम (श्वास कंट्रोल): श्वास को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न प्राणायाम तकनीकों में विशेषज्ञता प्राप्त करने से आपका शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बना रह सकता है। उज्जायी प्राणायाम और अनुलोम विलोम से श्वास को संतुलित करें, जो स्ट्रेस को कम करने और मानसिक स्पष्टता को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।

3. ध्यान (ध्यान): योग शास्त्र में ध्यान को महत्वपूर्ण माना जाता है, जिससे मन को शांति मिलती है और आत्मा को पहचान में मदद होती है। ध्यान अभ्यास से मानसिक चुनौतियों का सामना करना सीखें और आंतरिक शक्ति को जागरूक करें।

अधिक जानकारी और सलाह के लिए 8826009501 पर संपर्क करें।

17/02/2024

🌟 "खुद की देखभाल के लिए 11 मिनट" - एक सरल योग आसन का सुनहरा उपाय। ⭐⭐⭐⭐⭐

👉 बैठने और खड़ा होने का सही तरीका 90% बीमारियों को रोक सकता है।

👉 शरीर में पाँच तत्वों का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। ♾️

👉 तत्वों का असंतुलन ऊर्जा के प्रवाह में बाधा डाल सकता है।

👉 इससे शरीर में नकारात्मक रासायनिक परिवर्तन हो सकता है। 🧪

👉 अनजाने में कई बीमारियों का कारण बन सकता है। 🤕

🤯 "योग-संजीवनी" - एक 11-मिनट का योग आसन जो सरल है और रोज़ाना किया जा सकता है।

🌿 इससे शरीर की सही स्थिति में तेजी से सुधार हो सकता है।

🧪 तंतु में सुधार होता है और स्वास्थ्य में 10 गुना बेहतरी होती है।

🚫 बिना किसी दवा के, यह बजट-मित्र तथा सहज है।

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"आपकी स्वास्थ्य जिम्मेदारी, हमारी देखभाल।"

"आरोग्य संजीवनी" - बीमारी को बदलने का एक सामर्थ्यपूर्ण तरीका।

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@सभी

16/02/2024

15/02/2024

🚨"STOP FUTURE DISEASE".Just 11 Minutes Easy PRACTICE.

👉Improper "SPINE & BODY POSTURE" is the basis of 90% Chronic Diseases.

👉Disturb the Balance of Five Elements In the Body.♾️

👉Imbalance in Elements creates blockage in flow of Life Energies.

👉Further Creates Huge Harmful Chemical Disturbance in the Body System.🧪

👉Leads to Many Chronic Diseases Unknowingly.🤕

🤯 Result in"TOTAL DISTURBED LIFE", and Can't be treated by External Source.

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14/02/2024

An Ancient Wisdom - "Prana-2"📜''सांसरिक कामों में लगे हुए, अवधान, को दो श्‍वासों के बीच टिकाओ। इस से थोड़े ही दिन में नय...
13/02/2024

An Ancient Wisdom - "Prana-2"📜
''सांसरिक कामों में लगे हुए, अवधान, को दो श्‍वासों के बीच टिकाओ। इस से थोड़े ही दिन में नया जन्‍म होगा''। “सांसारिक कामों में लगे हुए” इसलिए कहा गया है, “सांसारिक कामों में लगे हुए… तुम जो भी कर रहे हो, उसमे अवधान को दो श्‍वासों के अंतराल में स्थिर रखो।

लेकिन काम-काज में लगे हुए ही इसे साधना है। ”श्‍वासों को भूल जाओं और उनके बीच में अवधान को लगाओ। एक श्‍वास भीतर आती है। इसके पहले कि वह लौट जाए, उसे बाहर छोड़ा जाए। वहां एक अंतराल होता है। उदाहरण के लिए तुम भोजन कर रहे हो।

भोजन करते जाओ और अंतराल पर अवधान रखो। तुम चल रहे हो, चलते जाओ और अवधान को अंतराल पर टिकाओ। तुम सोने जा रहे हो, लेटो और नींद को आने दो। लेकिन तुम अंतराल के प्रति सजग रहो। काम-काज में डांवाडोल न हों और अंतराल में स्थिर रहें।

तब तुम्‍हारे अस्‍तित्‍व के दो तल हो जाएंगे। करना ओर होना अथार्त एक करने का जगत और दूसरा होने का जगत। एक परिधि है और दूसरा केंद्र। परिधि पर काम करते रहो, रूको नहीं; लेकिन केंद्र पर भी सावधानी से काम करते रहो।

तब तुम्‍हारा काम-काज अभिनय हो जाएगा। मानों तुम कोई पार्ट अदा कर रहे हो। उदाहरण के लिए, तुम किसी नाटक में पार्ट कर रहे हो । नाटक में तुम श्रीकृष्ण बने हो। यद्यपि तुम श्रीकृष्ण का अभिनय करते हो, तो भी तुम स्‍वयं बने रहते हो।

केंद्र पर तुम जानते हो कि तुम कौन हो और परिधि पर तुम श्रीकृष्ण का रोल अदा करते हो। तुम जानते हो कि तुम श्रीकृष्ण नहीं हो, उनका का अभिनय भर कर रहे हो। तुम कौन हो तुमको मालूम है। तुम्‍हारा अवधान तुममें केंद्रित है और तुम्‍हारा काम परिधि पर जारी है।

यदि इस विधि का अभ्‍यास हो तो पूरा जीवन एक लंबा नाटक बन जाएगा। तुम एक अभिनेता होगें। अभिनय भी करोगे और सदा अंतराल में केंद्रित रहोगे। जब तुम अंतराल को भूल जाओगे, तब तुम अभिनेता नहीं रहोगे, तब तुम कर्ता हो जाओगे।

तब वह नाटक नहीं रहेगा। उसे तुम भूल से जीवन समझ लोगे और यही हम सबने किया है। हर मनुष्य सोचता है कि वह जीवन जी रहा है लेकिन यह जीवन नहीं बल्कि एक रोल है। जो समाज ने, परिस्‍थितियों ने, संस्‍कृति ने, देश की परंपरा ने तुमको थमा दिया है।

तुम अभिनय कर रहे हो और तुम इस अभिनय के साथ तादात्‍म्‍य भी कर बैठे हो। उसी तादात्‍म्‍य को तोड़ने के लिए यह विधि है। श्रीकृष्‍ण के अनेक नाम है, वे सबसे कुशल अभिनेताओं में से एक है। वे सदा अपने में स्थिर है और लीला कर रहे है।

गंभीरता तादात्‍म्‍य से पैदा होती है। यदि नाटक में तुम सच ही श्री कृष्ण हो जाओ तो अवश्‍य समस्‍याएं खड़ी होगी। जब-जब राधा से विछोह होगा , तो तुमको दिल का दौरा पड़ सकता है और पूरा नाटक बंद हो जाना भी निश्‍चित है। लेकिन अगर तुम बस अभिनय कर रहे हो ।

तो राधा का विछोह से तुमको समस्‍याएं नहीं होगी । तुम अपने घर लौटोगे और चैन से सो जाओगे। इसका बड़ा गहरा अर्थ है, और अर्थ यह है कि यदि तुम समझ जाते हो कि तुम्‍हारे लिए जीवन नाटक हो जाता है। तो उसका अर्थ हुआ कि तुम केवल उसे अंजाम देने वाले हो।

तुमको उसे जीना नहीं उसका अभिनय करना है। यह विधि, तुमको एक खेल बना देती है। तुम दो श्‍वासों के अंतराल में स्थिर हो और जीवन परिधि पर चल रहा है। यदि तुम्‍हारा अवधान केंद्र पर है, तो तुम्‍हारा अवधान परिधि पर नहीं है। परिधि पर जो है वह उपावधान है।

इस विधि से तुम्‍हारा समूचा जीवन बदल जाएगा और स्वय की प्रतीति होना शुरू होगा । जब स्वय को जान लिया तो बहुत से संसारिक दुखो से मुक्त हो जाते।

Address

Shastri Nagar
Delhi
110052

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Monday 9am - 5pm
Tuesday 9am - 5pm
Wednesday 9am - 5pm
Thursday 9am - 5pm
Friday 9am - 5pm
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Sunday 9am - 5pm

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