09/12/2025
कुंभक वह साधना है जिसमें श्वास को एक निश्चित समय के लिए रोककर प्राणशक्ति को भीतर संचय किया जाता है। यह केवल श्वास रोकने की क्रिया नहीं, बल्कि शरीर, मन और चेतना को एकसूत्र करने का गहन अभ्यास है।
कुंभक से प्राण का प्रवाह स्थिर होता है, जिससे शरीर में ऊर्जा का संचित भंडार बनता है। यह अभ्यास फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है, नाड़ियों को शुद्ध करता है और मस्तिष्क को अधिक सक्रिय तथा शांत बनाता है। मानसिक तनाव, भय, अस्थिरता और चंचलता धीरे-धीरे समाप्त होने लगती है। साधक में धैर्य, एकाग्रता, निर्णय क्षमता और आंतरिक दृढ़ता अद्भुत रूप से बढ़ती है।
कुंभक को प्राणायाम की आत्मा कहा गया है, क्योंकि यह प्राण को नियंत्रित कर साधक को स्थिरता, संतुलन और ध्यान की उच्च अवस्था तक ले जाता है। कुंभक का अभ्यास शरीर को स्वस्थ, मन को निश्चल और चेतना को प्रकाशमान बनाता है।
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