Guru Ayurveda

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स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणं, आतुरस्य विकार प्रशमनं च।

अर्थात: स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा और रोगी के रोग का शमन ही आयुर्वेद का मुख्य उद्देश्य है।

आयुर्वेद के मार्ग पर चलें और जीवन में संतुलन, स्वास्थ्य व सुख की अनुभूति करें।

🌱 गुरु आयुर्वेद 🌱

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27/02/2026

आयुर्वेद के अनुसार आंवला क्यों ज़रूरी है? 📞7042699044
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26/02/2026

Best Ayurvedic Home Remedy For gonorrhea & Periods Problem ।📞7042699044
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26/02/2026

🌿 चेहरे की झाइयाँ (व्यंग): कारण भीतर, संकेत बाहर 🌿

झाइयाँ केवल सौंदर्य दोष नहीं हैं।
आयुर्वेद के अनुसार यह पित्त दोष की वृद्धि और रक्त धातु की दूष्यता का परिणाम है।
जब तक भीतर का कारण शांत नहीं होगा, केवल क्रीम से स्थायी लाभ संभव नहीं।

🌿आयुर्वेदिक संप्राप्ति (रोग बनने की प्रक्रिया)

1️⃣ मंद अग्नि → आम निर्माण
अधपचा भोजन ‘आम’ बनाता है, जो रक्त में मिलकर त्वचा की आभा बिगाड़ता है।

2️⃣ भ्राजक पित्त विकृति
त्वचा का वर्ण नियंत्रित करने वाला पित्त असंतुलित हो जाता है।

3️⃣ स्रोतोरोध
सूक्ष्म नलिकाओं में रुकावट से उस भाग का पोषण रुकता है और कालापन उभरता है।

🌿 उपचार सिद्धांत

✔ अग्नि दीपन
✔ आम पाचन
✔ रक्त शोधन
✔ पित्त शमन
✔ स्थानीय वर्ण सुधार

🌿 आंतरिक औषधि योग

अनंतमूल चूर्ण – 40 ग्राम

मंजीष्ठा चूर्ण – 30 ग्राम

गिलोय सत्त्व – 20 ग्राम

प्रवाल पिष्टी – 10 ग्राम

मात्रा: 2–3 ग्राम, दिन में दो बार
अवधि: 8–12 सप्ताह (प्रकृति अनुसार परिवर्तन संभव)

सहायक:
महामंजीष्ठाद्यारिष्ट 15–20 मि.ली. पानी मिलाकर भोजन बाद

🌿 लगाने की औषधि

यह लेप पित्त शांत करता है और त्वचा की रंगत संतुलित करने में सहायक है:

✔ शुद्ध चंदन चूर्ण – 1 चम्मच
✔ मुलेठी चूर्ण – ½ चम्मच
✔ खस (उशीर) चूर्ण – ½ चम्मच
✔ गुलाब जल या कच्चा दूध – आवश्यकतानुसार

विधि:
सभी को मिलाकर पतला लेप बनाएं।
रात में 20–25 मिनट लगाकर साधारण पानी से धो लें।
सप्ताह में 4–5 बार प्रयोग करें।

🌿धूप में जाने से पहले यह लेप न लगाएँ।

🌿 पथ्य (जो आधा इलाज है)

❌ अधिक मिर्च, खट्टा, तला भोजन
❌ देर रात जागना
❌ तनाव
❌ धूप में बिना सुरक्षा जाना

✔ आंवला, अनार, नारियल पानी
✔ पर्याप्त जल
✔ दोपहर की धूप से बचाव

🌿 जीवनशैली

प्रतिदिन 15 मिनट अनुलोम-विलोम।
7–8 घंटे गहरी नींद।
कब्ज न रहने दें।

🌿 कब तुरंत वैद्य से मिलें?

हार्मोनल असंतुलन
थायराइड
गर्भावस्था के बाद बढ़ती झाइयाँ
लंबे समय तक स्टेरॉयड क्रीम का उपयोग

📞 गुरु आयुर्वेद
वैद्य से परामर्श हेतु: 7042699044

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24/02/2026

Home Remedy For Ear Pain & Ear Discharge। 📞7042699044
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23/02/2026

*क्या आपको खून की कमी (पाण्डु रोग) है?*

थकान को आदत मत मानिए।
कई बार यह शरीर का संकेत होता है कि रक्त पर्याप्त नहीं बन रहा।

आयुर्वेद में इसे पाण्डु रोग कहा गया है।
जब अग्नि मंद पड़ती है तो भोजन से पूरा रस नहीं बनता।
रसा धातु दुर्बल होती है और आगे चलकर रक्त धातु का निर्माण घटने लगता है।
धीरे-धीरे चेहरा फीका, शरीर कमजोर और मन उत्साहहीन हो जाता है।

पहले समझें स्थिति कितनी गंभीर है

हल्की अवस्था
• जल्दी थकान
• चेहरा या नाखून फीके
• चक्कर

मध्यम अवस्था
• सीढ़ी चढ़ते समय सांस फूलना
• दिल की धड़कन तेज लगना
• काम में मन न लगना

गंभीर अवस्था
• बहुत अधिक कमजोरी
• पैरों में सूजन
• हीमोग्लोबिन 7 g/dL के आसपास या कम
• गर्भावस्था में तेजी से गिरता Hb

ऐसी स्थिति में केवल घरेलू उपाय पर्याप्त नहीं होते। जाँच आवश्यक है।

कौन-सी जाँच कराएँ?

• CBC
• Serum Iron
• Ferritin
• आवश्यकता हो तो B12

रिपोर्ट देखे बिना केवल अनुमान से दवा लेना समझदारी नहीं है।

आयुर्वेदिक उपचार का सिद्धांत

• अग्नि सुधरे बिना रक्त नहीं सुधरता
• रसा से रक्त धातु निर्माण को पोषण देना आवश्यक
• दोषानुसार उपचार अलग होता है

सरल चूर्ण योग
(हल्की से मध्यम आयरन कमी में)

सामग्री:
• आमलकी चूर्ण – 50 ग्राम
• गुडूची चूर्ण – 30 ग्राम
• यष्टिमधु – 20 ग्राम
• मण्डूर भस्म – 20 ग्राम

अच्छी तरह मिलाकर रखें।

मात्रा (वयस्क)
आधा छोटा चम्मच (लगभग 3 ग्राम)
सुबह-शाम

कैसे लें
गुनगुने जल के साथ
कफ प्रवृत्ति में थोड़ा शहद मिलाया जा सकता है

अवधि
6–8 सप्ताह
बीच में Hb जाँच दोहराएँ

सावधानी:
• अम्लपित्त, कब्ज प्रवृत्ति, गर्भावस्था या गंभीर एनीमिया में स्वयं प्रयोग न करें
• 3 महीने में सुधार न हो तो कारण केवल आयरन कमी नहीं भी हो सकता

परंपरागत लौह योग
(वैद्यकीय परामर्श में)

• धात्री लौह – 1–2 गोली, दिन में 2 बार
• पुनर्नवासव – 15–20 मि.ली., भोजन बाद

उपयोगी जब दीर्घकालिक कमजोरी, यकृत दुर्बलता या सूजन साथ हो।

रक्तवर्धक सहायक काढ़ा

• द्राक्षा – 20 ग्राम
• आमलकी – 10 ग्राम
• गुडूची – 10 ग्राम

400 मि.ली. पानी में उबालें।
100 मि.ली. शेष रहने पर छान लें।
50 मि.ली. सुबह-शाम लें।

भोजन ही पहली दवा है

✔ हरी पत्तेदार सब्जियाँ
✔ अनार
✔ काली द्राक्ष
✔ मूंग दाल
✔ तिल व सीमित गुड़

✘ बार-बार चाय
✘ जंक फूड
✘ देर रात भोजन
✘ अत्यधिक उपवास

दिनचर्या में 3 जरूरी बातें

• समय पर भोजन
• पर्याप्त नींद
• रोज 15 मिनट प्राणायाम या तेज चाल से चलना

कब तुरंत अस्पताल जाएँ?

• सांस लेने में कठिनाई
• अचानक रक्तस्राव
• अत्यधिक चक्कर या बेहोशी
• गर्भावस्था में तेजी से गिरता Hb

खून की कमी धीरे-धीरे बनती है।
इसे नजरअंदाज करना आसान है, पर परिणाम लंबे समय तक रहते हैं।

व्यक्तिगत परामर्श और तैयार आयुर्वेदिक औषधि हेतु संपर्क करें
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गुरु आयुर्वेद

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20/02/2026

🍀 अर्श (बवासीर): कारण, उपचार और आयुर्वेदिक सहयोग 🍀

🍀मुख्य कारण

आयुर्वेद के अनुसार अर्श के प्रमुख कारण:

• दीर्घकालिक कब्ज
• मंदाग्नि (कमजोर पाचन)
• अपान वायु का असंतुलन

लगातार ज़ोर लगाकर शौच करने से गुदा क्षेत्र की शिराएँ सूज जाती हैं। धीरे-धीरे यही स्थिति बवासीर में बदल सकती है।

🍀केवल पेट साफ करना ही उपचार नहीं है।
जरूरी है:
• पाचन संतुलन
• मल को कोमल रखना
• सूजन व जलन कम करना

🍀 अर्श-सहायक मिश्रण 🍀

सामग्री:
• हरितकी – 50 ग्राम
• त्रिफला – 100 ग्राम
• नागकेसर – 40 ग्राम
• लोध्र – 40 ग्राम
• मुलहठी – 40 ग्राम
• इसबगोल भुसी – 150 ग्राम

🍀 कैसे सहायक है?

✔ मल को नियमित व कोमल रखता है
✔ हल्के रक्तस्राव में सहयोगी
✔ सूजन व जलन कम करने में सहायक
✔ पाचन अग्नि संतुलित करता है

🍀 सेवन विधि

सामान्य कब्ज या दर्द में
रात को 1 छोटा चम्मच (लगभग 5 ग्राम)
गुनगुने पानी के साथ

🍀 हल्के रक्तस्राव में
सुबह और रात
सादे पानी या पतली छाछ के साथ

🍀 कम से कम 3 सप्ताह नियमित सेवन करें

🍀 सहायक नियम

• 2–3 लीटर पानी प्रतिदिन
• दोपहर में पतली छाछ
• 20 मिनट टहलना
• शौच में ज़ोर न लगाएँ
• मिर्च, मैदा, तला भोजन बंद करें

🍀 इन स्थितियों में केवल चूर्ण पर्याप्त नहीं:

• अत्यधिक रक्तस्राव
• बाहर निकले मस्से (ग्रेड 3–4)
• असहनीय दर्द
• पुराना एनीमिया

ऐसी स्थिति में व्यक्तिगत परामर्श आवश्यक है।

यदि शुद्ध द्रव्य उपलब्ध न हों या स्वयं बनाना संभव न हो, तो परामर्श के बाद मिश्रण उपलब्ध कराया जा सकता है।

📞 7042699044

🌿 गुरु आयुर्वेद 🌿

18/02/2026

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18/02/2026

🔶 लिपोमा (वसा की गांठ)

लिपोमा सामान्यतः हानिरहित वसा की गांठ है। आयुर्वेद में इसे मेद-ग्रन्थि कहा जाता है। यह कफ और मेद धातु के असंतुलन से बनती है।

🍀पहले USG से पुष्टि अवश्य करा लें कि यह साधारण लिपोमा है।

🍀सहायक चूर्ण योग

निम्न औषधियाँ समान मात्रा (30-30 ग्राम) लेकर बारीक चूर्ण बना लें:

• कंचनार छाल
• शुद्ध गुग्गुलु
• त्रिफला
• त्रिकटु
• चित्रक मूल
• वरुण छाल
• पुनर्नवा
• विडंग

मात्रा: 3 ग्राम (लगभग आधा चम्मच)
दिन में 2 बार
समय: भोजन के 40 मिनट बाद गुनगुने पानी से
अवधि: 8–12 सप्ताह (स्थिति अनुसार)

🍀 कंचनार गुग्गुलु की स्पष्ट मात्रा

🍀 सामान्य वयस्क (18–60 वर्ष)
2 गोली (प्रत्येक 250–500 mg की)
दिन में 2 बार
भोजन के बाद गुनगुने पानी के साथ

🍀कमजोर पाचन या बुजुर्ग
1–1 गोली दिन में 2 बार

🍀 अधिक कफ/मेद प्रधान एवं मोटापे में
2–2 गोली दिन में 2 बार (चिकित्सकीय निगरानी में)

🍀 3 महीने से अधिक लगातार सेवन से पहले चिकित्सकीय परामर्श लें।

🍀 किन्हें सावधानी रखनी चाहिए

• गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएँ
• अल्सर या तीव्र एसिडिटी वाले रोगी
• गंभीर लिवर या किडनी रोग
• 15 वर्ष से कम आयु

🍀 क्या अपेक्षा रखें?

• छोटे, मुलायम लिपोमा में बेहतर परिणाम
• बड़े या बहुत पुराने कठोर लिपोमा में पूर्ण समाप्ति हर बार संभव नहीं
• तेजी से बढ़ने या दर्द होने पर तुरंत जांच कराएं

🍀 आयुर्वेद में उपचार रोगी की प्रकृति अनुसार बदलता है।
सभी मामलों में एक जैसा परिणाम अपेक्षित नहीं।

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गुरु आयुर्वेद

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Home Remedy for Smallpox. 📞7042699044
18/02/2026

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11/02/2026

सुबह ओपीडी में एक सज्जन आए। बोले वैद्य जी, पहले जैसा ही खा रहा हूँ, पर पेट निकल आया है। कम करूँ तो कमजोरी लगती है, और छोड़ दूँ तो वजन बढ़ता है।
यह स्थिति आज बहुत सामान्य हो गई है।

मोटापा केवल अधिक खाने का परिणाम नहीं। आयुर्वेद की दृष्टि से यह मुख्यतः कफ प्रधान स्थौल्य है, पर अधिकांश मामलों में यह आम-कफज अवस्था बन जाता है। जठराग्नि मंद पड़ती है। भोजन पूरा नहीं पचता। अधपचा अंश आम बनता है। यही आम कफ के साथ मिलकर मेदवह स्रोतों में रुकावट करता है।

धीरे धीरे स्रोतोरोध बढ़ता है। धात्वग्नि भी प्रभावित होती है। रस का पोषण ठीक नहीं होता, पर मेद धातु बढ़ती जाती है। शरीर भारी, पर शक्ति कम।
आरंभिक अवस्था में केवल वजन बढ़ता है।
पुरानी अवस्था में सांस फूलना, आलस्य, घुटनों का दर्द, मधुमेह या रक्तचाप जुड़ने लगते हैं।

हर मोटापा एक जैसा नहीं होता।
कुछ में मेद अधिक होता है।
कुछ में आम अधिक होता है।
कुछ में जल-संचय।
और कुछ में हार्मोनल कारण प्रमुख होते हैं।
इसलिए एक ही औषधि सब पर समान परिणाम नहीं देती।

कारणों पर देखें तो देर रात भोजन, बार बार खाना, मीठा-मैदा, दिन में सोना, कम चलना – ये सब मंदाग्नि को बढ़ाते हैं।
मंदाग्नि से आम बना, आम ने कफ बढ़ाया, कफ ने मेद को स्थिर कर दिया।
यही रोग की जड़ है।

अब उपाय की बात।

सुबह खाली पेट गुनगुना पानी लें, उसमें थोड़ा शहद मिला सकते हैं। यह कफहर और लघु है, स्रोतों को खोलने में सहायक है।
भोजन के बाद आधा चम्मच त्रिकटु चूर्ण गुनगुने पानी से लें। यह जठराग्नि को प्रज्वलित करता है और आम को पचाने में सहायक है।
रोज कम से कम 30 मिनट तेज चाल से चलना आवश्यक है। स्थौल्य में विहार आधा उपचार है।

औषधि चयन अवस्था अनुसार बदलता है।

त्रिफला गुग्गुल
जब मेद अधिक हो, पुरानी प्रवृत्ति हो, कब्ज या स्रोतोरोध हो।
मात्रा: 2 गोली दिन में दो बार, भोजन के बाद।
अवधि: 6–8 सप्ताह, फिर पुनर्मूल्यांकन।
यह मेदहर और स्रोतोशोधक है। तीव्र पित्त, गर्भावस्था या अल्सर में सावधानी।

मेदोहर वटी
आरंभिक अवस्था, मंदाग्नि और कफ प्रधान मोटापा।
मात्रा: 2 गोली सुबह–शाम भोजन के बाद।
यदि आम अधिक है तो अकेले पर्याप्त नहीं, पहले दीपनीय औषधि आवश्यक हो सकती है।

यदि वजन जल-संचय जैसा हो, पैरों में सूजन हो, तो दृष्टि अलग होगी।
यदि PCOS या हार्मोनल कारण हों तो केवल मेदहर औषधि पर्याप्त नहीं।
यदि 8 सप्ताह में अग्नि में सुधार न दिखे तो औषधि योजना बदलनी चाहिए।

पथ्य में जौ, मूंग, छाछ, हरी सब्जियाँ रखें। ये लघु और कफहर हैं।
मीठा, तला हुआ, ठंडे पेय, दिन में सोना और बार बार स्नैकिंग रोकना अधिक महत्वपूर्ण है। ये अग्नि को और मंद करते हैं।

यदि तेजी से वजन बढ़ रहा हो, मासिक अनियमित हो, मधुमेह, थायरॉयड, अत्यधिक सांस फूलना या सूजन हो, तो प्रत्यक्ष परामर्श आवश्यक है।

मोटापा केवल शरीर का भार नहीं, अग्नि और स्रोतों का विषय है।
जब तक अग्नि संतुलित नहीं होगी, वजन टिकाऊ रूप से नहीं घटेगा।
दवा सहायक है, पर अनुशासन और नियमितता ही आधार हैं।
हर शरीर अलग है, इसलिए उपचार भी वैयक्तिक होना चाहिए।

गुरु आयुर्वेद
वैद्य से परामर्श हेतु 7042699044

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10/02/2026

*बच्चों में भूख की कमी*

अक्सर माता-पिता कहते हैं, “डॉक्टर साहब, बच्चा खेल तो लेता है, पर खाने के नाम पर मुंह बना लेता है।”
कभी कुछ न कुछ खाते रहना, कभी टीवी देखते हुए खाना, कभी ठंडी-मीठी चीज़ों से पेट भर जाना — धीरे-धीरे बच्चा अपनी स्वाभाविक भूख पहचानना छोड़ देता है।

आयुर्वेद में भूख का सीधा संबंध अग्नि से है। जब जठराग्नि मंद होती है तो भोजन ठीक से नहीं पचता। अपचा अंश शरीर में आम बनाता है। यही आम पेट में भारीपन, गैस, जीभ पर सफेद परत और भूख की कमी का कारण बनता है।

बार-बार स्नैकिंग, पैकेट फूड, ठंडी चीज़ें — ये सब कफ दोष बढ़ाते हैं। कफ बढ़ता है तो अग्नि दबती है। अग्नि दबेगी तो भूख घटेगी। और जब पाचन ठीक नहीं होगा तो धातुओं का पोषण भी संतुलित नहीं रहेगा। इसलिए यह केवल कम खाने की आदत नहीं, बल्कि पाचन शक्ति का संकेत है।

सरल घरेलू उपाय

1. अदरक + सेंधा नमक
भोजन से 10–15 मिनट पहले बहुत छोटी मात्रा में।
यह जठराग्नि को जागृत करता है और कफ को कम करता है।

2. अजवाइन (हल्की भुनी) + थोड़ा गुड़
दिन में एक बार चुटकी भर।
यह आम और गैस कम कर पाचन को सुधारता है।

आयु अनुसार मात्रा (बहुत महत्वपूर्ण)
🔹 1–3 वर्ष

अदरक-नमक केवल जीभ लगवाएँ।

अजवाइन का पानी (¼ चम्मच अजवाइन उबालकर 1–2 चम्मच पानी)।

च्यवनप्राश: मटर के दाने जितना, सप्ताह में 3–4 दिन।

बाल चतुर्भद्र चूर्ण: 250–500 mg (चुटकी भर) शहद के साथ।

🔹 3–7 वर्ष

अदरक-नमक मटर के दाने जितना।

अजवाइन + गुड़ चुटकी भर।

च्यवनप्राश: ½ चम्मच रोज़।

बाल चतुर्भद्र चूर्ण: 1 ग्राम तक, दिन में 1–2 बार।

🔹 7 वर्ष से ऊपर

अदरक-नमक छोटी फांकी।

अजवाइन ¼ चम्मच तक।

च्यवनप्राश: 1 चम्मच।

बाल चतुर्भद्र चूर्ण: 1–2 ग्राम।

(मात्रा वजन और प्रकृति अनुसार समायोजित करें।)

ध्यान रखें

यदि बच्चा सक्रिय है, वजन सामान्य है और केवल अपेक्षा से कम खाता है, तो हर बार यह रोग नहीं होता।
लेकिन यदि वजन रुक जाए, बार-बार पेट दर्द या कीड़े हों, बच्चा थका या चिड़चिड़ा रहे — तो मूल कारण की जाँच आवश्यक है।

पथ्य

निश्चित समय पर भोजन

ताज़ा, हल्का और गर्म भोजन

मूंग की दाल, सादी खिचड़ी, थोड़ी मात्रा में घी

पर्याप्त खेल और धूप

अपथ्य

बार-बार स्नैक्स

ठंडी-मीठी चीज़ें

टीवी/मोबाइल देखते हुए खाना

जबरदस्ती खिलाना

भूख शरीर का स्वाभाविक संकेत है।
उसे दवाओं से नहीं, सही दिनचर्या और संतुलित अग्नि से जगाया जाता है।
बाल चिकित्सा में कम मात्रा, नियमितता और धैर्य ही सबसे बड़ी औषधि है।

📞 गुरु आयुर्वेद
वैद्य से परामर्श हेतु 7042699044

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08/02/2026

Home Remedy for Bloody Diarrhea.📞7042699044

Address

A-19 Chanakya Place Part-1 Opp C-1 Janakpuri
Delhi
110059

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Tuesday 10:30am - 7pm
Wednesday 10:30am - 7pm
Thursday 10:30am - 8pm
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Telephone

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