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स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणं, आतुरस्य विकार प्रशमनं च।

अर्थात: स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा और रोगी के रोग का शमन ही आयुर्वेद का मुख्य उद्देश्य है।

आयुर्वेद के मार्ग पर चलें और जीवन में संतुलन, स्वास्थ्य व सुख की अनुभूति करें।

🌱 गुरु आयुर्वेद 🌱

Natural Solution for weight loss 🌱गुरु आयुर्वेदा 🌱📞7042699044
01/02/2026

Natural Solution for weight loss
🌱गुरु आयुर्वेदा 🌱
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Ayurvedic home remedy for bleeding gums, swelling & bad breath🌱☘️🌱गुरु आयुर्वेदा 🌱📞7042699044
27/01/2026

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🌱गुरु आयुर्वेदा 🌱
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भावप्रकाश निघण्टु पढ़ते हुए आज एक अच्छी औषधि मिली आप सब से साझा कर रहा हूँ बच्चों में पेट के कीड़े (कृमि) हेतु🌿आयुर्वेद ...
27/01/2026

भावप्रकाश निघण्टु पढ़ते हुए आज एक अच्छी औषधि मिली आप सब से साझा कर रहा हूँ

बच्चों में पेट के कीड़े (कृमि) हेतु🌿

आयुर्वेद के अनुसार बच्चों में कृमि (पेट के कीड़े) होने का मुख्य कारण मंदाग्नि (पाचन की कमजोरी) और खान-पान में लापरवाही है।

प्रमुख लक्षण (कैसे पहचानें?)
• सोते समय मुँह से लार टपकना।
• सोते समय दांत पीसना।
• गुदा मार्ग (मल द्वार) में खुजली होना, विशेषकर रात में।
• पेट में बार-बार दर्द होना।
• भूख कम लगना या बहुत ज्यादा लगना।
• वजन का न बढ़ना और चेहरे पर पीलापन या सफेद चकत्ते दिखना।
• चिड़चिड़ापन और शरीर में सुस्ती रहना।
📖 (चरक संहिता):
"विडङ्गं कृमिघ्नानां श्रेष्ठम्।"
अर्थात् सभी कृमिनाशक औषधियों में वायविडंग सबसे उत्तम है।
💊 औषधि प्रयोग एवं मात्रा:
(वायविडंग चूर्ण को शहद या गुनगुने पानी के साथ सुबह खाली पेट देना चाहिए)
• 2 से 5 वर्ष: 125 मिलीग्राम (1 छोटी चुटकी) – अधिकतम 3 दिन तक।
• 5 से 10 वर्ष: 250 मिलीग्राम – 3 से 5 दिन तक।
• 10 से 14 वर्ष: 500 मिलीग्राम – 5 दिन तक।
⚠️ जरूरी सावधानियाँ:
1. 2 साल से छोटे बच्चों को बिना वैद्य की सलाह के औषधि न दें।
2. बुखार, दस्त या बहुत ज्यादा कमजोरी होने पर यह दवा न दें।
3. उपचार के दौरान मीठा, दूध, दही और बाहर का जंक फूड बंद कर देना चाहिए।
4. व्यक्तिगत अवस्था के अनुसार औषधि की मात्रा में बदलाव संभव है, अतः स्थानीय वैद्य का परामर्श उचित है।
🕉️🕉️🕉️

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Home Remedy For Freckles 7042699044
24/01/2026

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24/01/2026

अगर स्लिप डिस्क और कमर से परेशान है तो ये करें।

Natural Cure for Splenomegaly in Ayurveda🌿🌱 गुरु आयुर्वेदा 🌱 📞7042699044     ्लीबढ़नेकारोग       treatment
23/01/2026

Natural Cure for Splenomegaly in Ayurveda🌿
🌱 गुरु आयुर्वेदा 🌱
📞7042699044

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गर्भधारण नहीं हो रहा? आयुर्वेदिक समाधान। 🌿🌱 गुरु आयुर्वेदा 🌱 📞7042699044 #गर्भधारण  #बांझपन  #संतानसुख
23/01/2026

गर्भधारण नहीं हो रहा? आयुर्वेदिक समाधान। 🌿
🌱 गुरु आयुर्वेदा 🌱
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23/01/2026

🌿 त्रिफला (द्रव्य एक, अनुपात अनेक)🌿

आयुर्वेद में त्रिफला कोई साधारण चूर्ण नहीं है।
यह एक ऐसा योग है, जिसका प्रभाव द्रव्य से अधिक उसके अनुपात, मात्रा और सेवन काल पर निर्भर करता है।

आंवला, हरड़ और बहेड़ा
तीनों अपने-अपने गुणों में पूर्ण हैं।

• हरड़ – वातहर, दीपन, रेचक
• बहेड़ा – कफहर, कास-श्वास हित
• आंवला – पित्तहर, रसायन, रक्तशोधक

इन्हीं गुणों के कारण आयुर्वेद में कहा गया है कि
दोष के अनुसार त्रिफला का अनुपात बदला जा सकता है।

1️⃣ सम मात्रा त्रिफला (1 : 1 : 1)

यह त्रिफला का सामान्य, संतुलित और सौम्य रूप है।

उपयोग
• सामान्य स्वास्थ्य संरक्षण
• रसायन प्रयोग
• बच्चों, वृद्धों और दुर्बल व्यक्तियों में
• दीर्घकालीन सेवन हेतु

यह अनुपात शरीर पर धीरे और सुरक्षित रूप से कार्य करता है।

2️⃣ आंवला प्रधान त्रिफला (1 : 2 : 3 या 1 : 1 : 3)

जहाँ पित्त प्रबल हो, वहाँ आंवला की मात्रा बढ़ाई जाती है।

उपयोग
• अम्लपित्त, जलन, गर्मी
• रक्तदोष
• त्वचा एवं नेत्र विकार
• मेद वृद्धि व कमजोरी

यह अनुपात शीतल, पोषक और रसायन प्रभाव देता है।

3️⃣ हरड़ प्रधान त्रिफला (3 : 2 : 1)

वात और कब्ज प्रधान अवस्था में हरड़ की मात्रा बढ़ाई जाती है।

उपयोग
• पुरानी व जिद्दी कब्ज
• गैस, उदर में वायु
• वात विकार
• आंतों की शुद्धि

यह अनुपात अधिक रेचक होता है, इसलिए मात्रा कम रखी जाती है।

4️⃣ बहेड़ा प्रधान त्रिफला (1 : 3 : 1)

कफ विकारों में बहेड़ा की प्रधानता दी जाती है।

उपयोग
• खांसी, बलगम
• कास-श्वास
• गले व फेफड़ों के रोग

यह अनुपात कफहर प्रभाव से कार्य करता है।

5️⃣ मिश्रित दोष में (2 : 1 : 2 आदि)

जब दोष स्पष्ट न हों या मिश्रित हों,
तो वैद्य अपनी युक्ति प्रमाण से संतुलित अनुपात का चयन करता है।

सेवन काल का प्रभाव

• प्रातः शहद या गुड़ के साथ
→ पोषक, बलवर्धक

• रात्रि में गर्म पानी या दूध के साथ
→ रेचक, शोधन

सेवन अवधि
त्रिफला का सेवन
लगातार लगभग 90 दिन कर के 15–20 दिन का विराम देना उचित है।
इससे शरीर पर संतुलित प्रभाव बना रहता है।

सबसे अच्छा त्रिफला घर का बनाया होता है अगर ना बना सके तो
100% शुद्ध त्रिफला लेने हेतु संपर्क करें 🌿7042699044🌿










स्वर्णप्रशासन से मिला लाभ।🌱 गुरु आयुर्वेदा 🌱 📞7042699044
21/01/2026

स्वर्णप्रशासन से मिला लाभ।

🌱 गुरु आयुर्वेदा 🌱
📞7042699044











21/01/2026

🌿 मुखपाक (Mouth Ulcers)🌿

आयुर्वेद के अनुसार मुँह में होने वाली
जलन, दर्द, सूजन या घाव को मुखपाक कहते हैं।
यह रोग मुख्यतः पित्त दोष के असंतुलन से होता है
और केवल साधारण छाले नहीं होते।

🌿 मुख्य कारण
🔹 तीखा, खट्टा व नमकीन भोजन
🔹 अधिक गर्म पदार्थ
🔹 कब्ज व पाचन दोष
🔹 तनाव व नींद की कमी

🌿 आयुर्वेदिक समाधान
✔️ खदिरादि वटी – बार-बार होने वाले छालों में
✔️ इरिमेदादि तैल – मसूड़ों की सूजन व दुर्गंध में
✔️ वासा स्वरस – अधिक जलन व पित्त बढ़ने पर
✔️ पंचवल्कल कषाय – घाव भरने में सहायक

🌿 पथ्य–अपथ्य
✔️ ठंडा, हल्का व सुपाच्य भोजन
❌ मिर्च, अचार, चाय-कॉफी, तंबाकू

🌿 बार-बार मुखपाक होना
आंतरिक पित्त असंतुलन का संकेत हो सकता है।
लंबे समय तक न ठीक हों तो
योग्य वैद्य से परामर्श अवश्य लें।

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19/01/2026

अस्थमा, जुकाम और एलर्जी में आयुर्वेदिक अनुभव

🌱 तालीशादी चूर्ण- 50 ग्राम
🌱टंकण भस्म- 10 ग्राम
🌱श्रगं भस्म- 5 ग्राम
🌱 प्रवाल पिस्टी - 5 ग्राम
🌱मंग पीपल - 5 ग्राम
🌱अभ्रक भस्म - 5 ग्राम

निर्देश:

🌱 1/2-1/2 चम्मच दवा को 1 चम्मच अदरक के रस और 1 चम्मच शहद (या गुड़) में मिलाकर सुबह और शाम, भोजन के बाद लें।
🌱 इस प्रक्रिया को 3 माह तक लगातार अपनाएँ।

परहेज:

🌱 खट्टी चीजें जैसे अमचूर, नींबू, खट्टा दही, और केरी का आचार से बचें।
🌱 तेल-मसालेदार खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें।

असली अनुभव:

🌱 एक व्यक्ति ने कहा कि उसे हर सर्दी के मौसम में तीव्र खांसी होती थी जो किसी भी डॉक्टर से ठीक नहीं हुई। यह दवा उसे बहुत राहत देने में सफल रही।
🌱 उनके पिताजी को भी एलर्जी थी और विभिन्न प्रकार के परिशानियाँ थीं, लेकिन इस दवा ने उन्हें पूरी तरह स्वस्थ कर दिया।
🌱 मामी जी जिनको अस्थमा और अन्य समस्याएँ थीं, अब पूरी तरह से स्वस्थ हैं।
🌱 एक दोस्त को सर्दियों में खांसी शुरू हो जाती थी, इस दवा ने उसे भी राहत दी और उसकी बीवी भी वापस आ गई।
🌱 एक व्यक्ति जिसका फेफड़ा पूरी तरह से जाम हो गया था और डॉक्टर ने भी जवाब दे दिया था, अब इस दवा के सेवन से पूरी तरह स्वस्थ है।

🌱गुरु आयुर्वेद🌱
वैद्य से परामर्श हेतु
📞7042699044












18/01/2026

*बच्चे के छाती में जमे बलगम में तुंरत राहत देने वाला रामबाण आयुर्वेदिक घरेलू नुस्खा*

*सामग्री:-*
1- पान पत्ता
2- आधा चम्मच शहद
3- अदरक

*बनाने की विधि:-*
☘️पान के पत्ते को अच्छे से कूट लें, और फिर 1/4 चम्मच रस निकाल लें। अदरक को कूटकर और फिर 1/4 अदरक का रस निकाल लें। रस निकालकर तीनों को मिला लें अच्छे से।

*सेवन विधि:-* बनी हुई इस आयुर्वेदिक दवा को 2 भाग में बांट लें। और फिर सुबह - शाम बच्चें को पिलायें। बच्चें का जमा हुआ बलगम निकल जाएगा।

☘️ एक साल से छोटे बच्चें को शहद ना दें, उसके लिए पान के पत्ते के ऊपर थोड़ा सा काला नमक डाल दें उसके बाद तवे पर सेंक के बच्चें के छाती पर लगाये उससे भी आराम मिल जायेगा।

🌱 गुरु आयुर्वेदा 🌱
📞7042699044












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