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🧠⚡ जब माइंड अचानक शरीर को “स्विच-ऑफ” कर दे… बिना चेतावनी केक्या आपने कभी ऐसा देखा है?👉 किसी को सदमे या झगड़े के बाद गला ...
19/02/2026

🧠⚡ जब माइंड अचानक शरीर को “स्विच-ऑफ” कर दे… बिना चेतावनी के
क्या आपने कभी ऐसा देखा है?
👉 किसी को सदमे या झगड़े के बाद गला रुँध जाए या आवाज ही चली जाए।
… आपने ऐसा कोई जोर से चिल्लाया भी नहीं … लेकिन आवाज़ रुँध गई
👉 कोई महिला शांत बैठी है, फिर भी उसका हाथ अपने-आप कांप रहा है… और वह कहती है, “मैं नहीं कर रही।”
👉 किसी को तनाव के बाद अचानक पैरों में कमजोरी महसूस हो जाए… जबकि रिपोर्ट्स नॉर्मल हों।
ये सारा कुछ Conversion Disorder हो सकता है।

🤔 Conversion Disorder क्या है? (आसान शब्दों में)
जब बहुत ज़्यादा तनाव, ट्रॉमा या भावनात्मक बोझ शरीर में ... convert होकर .. भौतिक लक्षणों या physical symptoms के रूप में सामने आ जाए, तो उसे Conversion Disorder कहा जाता है।
❌ यह नाटक नहीं है।
❌ यह कमजोरी नहीं है।
❌ यह कल्पना नहीं है।
👉 यह नर्वस सिस्टम का ओवरलोड रिएक्शन है।

⚠️ इसके लक्षण कैसे दिख सकते हैं?
• गला रुँध जाना या आवाज़ बंद हो जाना या हकलाना
• अचानक मांसपेशियों में खिंचाव आना या स्प्रेन
• अचानक एसिडिटी या हेडेक शुरू हो जाना
• अचानक हाथ-पैर में कमजोरी या लकवा
• मिर्गी जैसे दौरे, लेकिन epilepsy नहीं
• सुन्नपन, धुंधला दिखना
• तनाव में कांपना या गिर जाना
टेस्ट नॉर्मल आते हैं।
स्कैन में कुछ नहीं दिखता।
फिर भी लक्षण 100% असली होते हैं।

🧩 ऐसा क्यों होता है?
ये भी हमारे बॉडी का डिफेंस मैकेनिज्म की वजह से होता है। हमारे दिमाग में “survival circuits” होते हैं।
जब भावनाएँ बहुत भारी या असुरक्षित लगती हैं,
तो दिमाग उन्हें सीधे महसूस करने की बजाय

👉 शरीर के रास्ते बाहर निकाल देता है।
इसे ऐसे समझें:
जैसे सिस्टम “इमरजेंसी ब्रेक” खींच दे या यूँ कहें कि बिजली का MCB इलेक्ट्रिसिटी ओवरलोड की स्थिति में ट्रिप-ऑफ हो जाये ...
और ऐसा इसलिए ताकि माइंड को और नुकसान ना पहुँचे।

💚 सबसे ज़रूरी सच
ये लक्षण ठीक हो सकते हैं।
लेकिन:
❌ “कुछ नहीं हुआ” कहकर दबाने से नहीं
❌ बार-बार स्कैन कराने से नहीं
❌ भावनाएँ अनदेखी करने से नहीं

🌿 क्या मदद करता है?
✔️ Nervous system को शांत करना
✔️ Trauma-informed therapy
✔️ हल्की और धीरे-धीरे physical rehab
✔️ क्लींजिंग थेरेपी से बॉडी के टॉक्सिक बिल्डअप को फ्लश आउट करना
✔️ सुरक्षा, भरोसा और धैर्य
✔️ असली तनाव पर काम करना
जैसे-जैसे नर्वस सिस्टम शांत होता है,
शरीर धीरे-धीरे लक्षण छोड़ने लगता है।

✨ याद रखें:
Conversion Disorder शरीर का धोखा नहीं है।
यह शरीर की सुरक्षा की कोशिश है,
जब तनाव के लिए कोई और रास्ता नहीं बचता।
माइंड और बॉडी अलग नहीं हैं।
वे लगातार एक-दूसरे से बात करते हैं।
कभी-कभी… शरीर पहले बोल देता है 🧠💚

💬 डॉ रुपक रंजन, सर्टिफाइड नेचुरोपैथ और क्लींजिंग थेरापी प्रेक्टिसनर 📱8800980344

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Change your mind to keeping yourself healthy and to earn a medicine free long life. Dr. Rupak Ranjan, certified Naturopa...
18/02/2026

Change your mind to keeping yourself healthy and to earn a medicine free long life. Dr. Rupak Ranjan, certified Naturopath and Cleansing Therapy Practitioner 📱8800980344
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🦶 Your feet can reflect your internal health conditions: इन्हें नजरअंदाज न करें!🦶​क्या आप जानते हैं कि आपके पैरों में हो...
18/02/2026

🦶 Your feet can reflect your internal health conditions: इन्हें नजरअंदाज न करें!🦶

​क्या आप जानते हैं कि आपके पैरों में होने वाले छोटे-छोटे बदलाव आपके शरीर के अंदर चल रही बड़ी बीमारियों का संकेत हो सकते हैं? चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, पैर अक्सर शरीर के पहले अंग होते हैं जो गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के लक्षण दिखाते हैं।
​यहाँ वे 7 चेतावनी संकेत दिए गए हैं जिन्हें आपको कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए:

​⚠️ 7 महत्वपूर्ण चेतावनी संकेत:

​ठंडे पैर (Cold Feet):
​यह खराब रक्त संचार (Poor Circulation), हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism) या एनीमिया (Anemia) का लक्षण हो सकता है।

​सूजे हुए पैर और टखने (Swollen Feet & Ankles):
​लगातार सूजन किडनी की समस्याओं (Kidney Issues), हृदय रोगों (Heart Problems) या नसों की कमजोरी (Venous Insufficiency) का संकेत हो सकती है।

​फटी एड़ियां (Cracked Heels):
​यह सिर्फ सौंदर्य समस्या नहीं है; यह शरीर में पानी की कमी (Dehydration), थायराइड असंतुलन या पोषक तत्वों (जैसे जिंक और ओमेगा-3) की कमी को दर्शाता है।

​सुन्न होना या झुनझुनी (Numbness or Tingling):
​पैरों का बार-बार सुन्न होना मधुमेह (Diabetes), परिधीय न्यूरोपैथी या विटामिन B12 की भारी कमी का संकेत हो सकता है।

​लगातार पैर दर्द (Persistent Foot Pain):
​पैर में पुराना दर्द गठिया (Arthritis), गाउट (Gout) या स्ट्रेस फ्रैक्चर के कारण हो सकता है।

​जलन की भावना (Burning Sensation):
​पैरों के तलवों में जलन तंत्रिका क्षति (Nerve Damage), मधुमेह या जरूरी विटामिन की कमी की ओर इशारा करती है।

​नाखूनों के नीचे काले धब्बे (Dark Spots Under Nails):
​इसे मामूली चोट न समझें; यह रक्त संचार की समस्याओं, मधुमेह या किसी गंभीर संक्रमण का संकेत हो सकता है।

​💡 बचाव के उपाय:
​अपने पैरों की रोजाना सफाई करें और उन्हें मॉइस्चराइज़ रखें।
​संतुलित आहार लें और पर्याप्त पानी पिएं। इसके साथ ही एक नियमित अंतराल पर क्लींजिंग थेरापी शुरू करें तो आपके शरीर को किसी बड़े बीमारी तक पहुंच ने से पहले ही स्थायी रुप से रोका जा सकता है।

​अगर इनमें से कोई भी लक्षण लंबे समय तक बना रहे, तो घर पर रह कर ही क्लींजिंग थेरापी करने के लिए संपर्क करें -
डॉ रुपक रंजन, सर्टिफाइड नेचुरोपैथ और क्लींजिंग थेरापी प्रेक्टिसनर 📱 88 00 98 03 44

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🚨 साइलेंट किलर है शारीरिक निष्क्रियता (Physical Inactivity) 🚨यह सिर्फ वजन बढ़ने की बात नहीं है।कम चलना-फिरना आज की सबसे ...
17/02/2026

🚨 साइलेंट किलर है शारीरिक निष्क्रियता (Physical Inactivity) 🚨
यह सिर्फ वजन बढ़ने की बात नहीं है।
कम चलना-फिरना आज की सबसे बड़ी छुपी हुई बीमारियों की जड़ बन चुका है ⚠️
और यह बात दशकों की वैज्ञानिक रिसर्च से साबित है।

🔬 साइंस क्या कहती है?

1️ दुनिया में मौत का चौथा सबसे बड़ा कारण है शारीरिक निष्क्रियता।
यह Smoking 🚬 और खराब खान-पान जितना बड़ा खतरा है।

2️ सिर्फ कुछ दिनों की inactivity से ही:
• Insulin resistance बढ़ सकता है 🍬
• BP बढ़ सकता है 📈
• VO₂ max (फेफड़ों और दिल की क्षमता) घट सकती है
👉 नुकसान जल्दी शुरू हो जाता है।

3️ जो लोग एक्टिव नहीं हैं,
उन्हें Heart disease का खतरा 1.75 गुना ज़्यादा होता है ❤️

4️ कम चलना-फिरना Dementia का खतरा लगभग 40% बढ़ा देता है 🧠
Insulin resistance सीधे दिमाग़ की क्षमता पर असर डाल सकती है।

5️ उम्र बढ़ने के साथ inactivity मिल जाए तो
मांसपेशियों का तेज़ी से कम होना (Sarcopenia) शुरू हो जाता है 💪⬇️
जिससे कमजोरी और जल्दी मृत्यु का खतरा बढ़ता है।

6️ अच्छी खबर 😊
अगर आप सिर्फ बैठने के समय को तोड़कर हल्का-फुल्का चलें,
तो भी glucose control और insulin sensitivity बेहतर होती है 🚶‍♂️

💡 याद रखें
आपको extreme workout की ज़रूरत नहीं है।
आपका शरीर चलने के लिए बना है।
👉 हर घंटे की छोटी movement
बीमारी को पीछे धकेलती है।

Inactivity है असली जोखिम।
Movement ही असली दवा है। 💚

इसलिए आज से
🪑 कम बैठिए
🚶‍♀️ ज़्यादा चलिए
और अपने शरीर को वही दीजिए
जिसके लिए वह बना है - Movement.

डॉ रुपक रंजन, सर्टिफाइड नेचुरोपैथ और क्लींजिंग थेरापी प्रेक्टिसनर 📱8800980344

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कोलेस्ट्रॉल ठीक है… लेकिन चीनी कितनी खा रहे हैं? अक्सर रिपोर्ट देखकर हम निश्चिंत हो जाते हैं —“कोलेस्ट्रॉल तो नॉर्मल है ...
15/02/2026

कोलेस्ट्रॉल ठीक है… लेकिन चीनी कितनी खा रहे हैं?
अक्सर रिपोर्ट देखकर हम निश्चिंत हो जाते हैं —
“कोलेस्ट्रॉल तो नॉर्मल है ”
लेकिन असली सवाल यह है

आप रोज़ कितनी चीनी खा रहे हैं?
Harvard और UCSF के शोध बताते हैं कि
ज़्यादा शुगर
शरीर में सूजन (Inflammation) बढ़ाती है
फैटी लिवर का कारण बनती है
और रक्त नलिकाओं को नुकसान पहुँचाती है

यह सब तब भी हो सकता है जब कोलेस्ट्रॉल सामान्य हो
यानी बीमारी चुपचाप अंदर बढ़ती रहती है
और रिपोर्ट हमें “सब ठीक” का भरोसा देती रहती है।
मीठा सिर्फ वजन नहीं बढ़ाता
यह मेटाबॉलिज़्म बिगाड़ता है
दिल पर सीधा असर डालता है
इसलिए सिर्फ कोलेस्ट्रॉल पर नज़र मत रखिए

चीनी कम करना शायद उससे भी ज़्यादा ज़रूरी है
कम मीठा = कम सूजन
स्वस्थ लिवर
सुरक्षित दिल
याद रखिए:

कभी-कभी असली खतरा वो होता है,
जिसे हम “नॉर्मल” समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं।

डॉ रुपक रंजन, सर्टिफाइड नेचुरोपैथ और क्लींजिंग थेरापी प्रेक्टिसनर 📱8800980344
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👏 तालियाँ सिर्फ खुशी के लिए नहीं होतीं… ये दिमाग को भी तेज़ बनाती हैं! तालबद्ध तरीके से ताली बजाना (Rhythmic Clapping)शर...
12/02/2026

👏 तालियाँ सिर्फ खुशी के लिए नहीं होतीं… ये दिमाग को भी तेज़ बनाती हैं!

तालबद्ध तरीके से ताली बजाना (Rhythmic Clapping)
शरीर और दिमाग के बीच बेहतर तालमेल सिखाता है
एकाग्रता (Focus) को तेज़ करता है
और दिमाग के उन हिस्सों को सक्रिय करता है
जो भाषा और संवाद से जुड़े होते हैं

जब हम एक तय लय में ताली बजाते हैं ⏱️
दिमाग टाइमिंग समझता है
हाथ-आँख समन्वय बढ़ता है
सुनने, समझने और बोलने की क्षमता मजबूत होती है
बच्चों के लिए यह सीखने का शानदार तरीका है
बड़ों के लिए याददाश्त और ध्यान बढ़ाने का

7 Science backed benefits

🔹 1️नर्वस सिस्टम को संतुलित करता है
ताली बजाने से:
हथेलियों के nerve endings activate होते हैं
Brain तक rhythmic signals जाते हैं
👉 इससे:
Para-Sympathetic nervous system सक्रिय होता है
तनाव और anxiety कम होती है
🔹 2️ Stress Hormones को कम करता है
Regular rhythmic clapping से:
Cortisol (stress hormone) कम होता है
Endorphins (feel-good hormones) बढ़ते हैं
👉 मन हल्का और सकारात्मक महसूस करता है।
🔹 3️ Blood Circulation बेहतर करता है
ताली बजाने से:
हाथ, कंधे और ऊपरी शरीर में blood flow बढ़ता है
Oxygen supply बेहतर होती है
👉 इससे:
सुस्ती कम
ऊर्जा बढ़ती है
🔹 4️ Acupressure Points को Stimulate करता है
हथेलियों में:
कई acupressure points होते हैं
ये heart, lungs, brain और digestion से जुड़े होते हैं
👉 rhythmic clapping इन points को naturally stimulate करता है।
🔹 5️ Immune System को Support करता है
Better circulation + reduced stress
= बेहतर immunity
Regular practice से:
शरीर की defense power मजबूत होती है
बार-बार बीमार पड़ने की संभावना घटती है
🔹 6️ Mind–Body Coordination सुधारता है
जब हम लय में ताली बजाते हैं:
Brain और muscles का coordination बढ़ता है
Focus और awareness बेहतर होती है
👉 खासतौर पर बच्चों और बुज़ुर्गों के लिए उपयोगी।
🔹 7️ Emotional Healing में सहायक
समूह में rhythmic clapping:
अकेलेपन की भावना कम करता है
Emotional release देता है
Positivity बढ़ाता है

सरल और मज़ेदार अभ्यास 🎶
💡 इसलिए भजन, कीर्तन, खेल या ग्रुप एक्टिविटी में
ताली बजाना सिर्फ परंपरा नहीं —
एक नेचुरल ब्रेन एक्सरसाइज़ है!
👏 रोज़ 2–3 मिनट ताली बजाइए
🧠 दिमाग को एक्टिव रखिए
😊 और सीखने को आनंदमय बनाइए

कभी-कभी
एक साधारण ताली… दिमाग में बड़ा बदलाव ला देती है!

डॉ रुपक रंजन, सर्टिफाइड नेचुरोपैथ और क्लींजिंग थेरापी प्रेक्टिसनर 📱88 00 98 03 44

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Do you overthink?सिर्फ सोच भी शरीर को बीमार कर सकती है!क्या आप जानते हैं?लगातार चिंता और overthinkingबिना किसी शारीरिक ख...
06/02/2026

Do you overthink?

सिर्फ सोच भी शरीर को बीमार कर सकती है!
क्या आप जानते हैं?
लगातार चिंता और overthinking
बिना किसी शारीरिक खतरे के भी
शरीर को अंदर से नुकसान पहुँचा सकती है
जब दिमाग़ बार-बार worry में फँसा रहता है
तो शरीर का stress system बंद ही नहीं होता।
इससे Cortisol और Adrenaline लगातार बढ़े रहते हैं

Harvard Medical School की रिसर्च बताती है कि
लंबे समय तक stress रहने से:
❌ Immunity कमजोर होती है
❌ नींद बिगड़ती है
❌ Blood Pressure बढ़ता है
और समय के साथ खतरा बढ़ता है:
❤️ Heart disease
🍬 Diabetes
🧠 Depression
⚡ Stroke
👉 यानी जिन विचारों को आप रोक नहीं पा रहे,
उनकी कीमत शरीर चुका रहा है।

Stress आपको तेज़ी से बूढ़ा भी करता है!
American Psychological Association के अनुसार
लगातार stress और rumination से:
Cells जल्दी बूढ़े होते हैं
Telomeres तेज़ी से छोटे होते हैं
Aging process तेज़ हो जाती है

अच्छी खबर क्या है?
Stress को सीखा जा सकता है संभालना
छोटे-छोटे कदम बड़ा फर्क लाते हैं👇
🌬️ Deep breathing → nerves शांत
🏃‍♂️ Physical activity → cortisol कम
🧘 Mindfulness → ध्यान और नियंत्रण
🧠 Thought control → लंबी और बेहतर ज़िंदगी

✨ याद रखें:
हर चिंता सच नहीं होती,
लेकिन हर चिंता शरीर पर असर ज़रूर डालती है।
आज से अपने दिमाग़ को थोड़ा आराम दीजिए
क्योंकि मन शांत होगा, तभी शरीर स्वस्थ रहेगा

डॉ रुपक रंजन, सर्टिफाइड नेचुरोपैथ और क्लींजिंग थेरापी प्रेक्टिसनर 📱 88 00 98 03 44

ज़्यादा Carbs कैसे दिल की बीमारी की ओर ले जाते हैं? अक्सर हमें सिखाया जाता है किFat = Heart disease लेकिन असली कहानी कही...
05/02/2026

ज़्यादा Carbs कैसे दिल की बीमारी की ओर ले जाते हैं? अक्सर हमें सिखाया जाता है कि
Fat = Heart disease
लेकिन असली कहानी कहीं ज़्यादा गहरी है।

Step 1: ज़्यादा Carbs का सेवन
हम रोज़ाना खाते हैं : चावल, रोटी, मिठाइयाँ, शक्कर, Refined carbs

Step 2: Insulin लगातार ऊँचा रहता है
Carbs → Sugar → Insulin
लगातार high insulin से
शरीर में Insulin Resistance शुरू हो जाती है।

Step 3: Fatty Liver बनना
High insulin की वजह से:
Fat liver में जमा होने लगता है
Liver overload हो जाता है
Fatty Liver सिर्फ liver की बीमारी नहीं, ये metabolism की warning है

Step 4: Fat खून में घूमने लगता है
जब liver ज़्यादा fat संभाल नहीं पाता Fat bloodstream में जाता है, LDL और triglycerides बढ़ते हैं

Step 5: Arteries को नुकसान
ये fat Arteries की अंदरूनी परत को नुकसान पहुँचाता है, Inflammation पैदा करता है।

Step 6: Plaque बनता है धीरे-धीरे
Fat + inflammation = Plaque, Arteries संकरी होने लगती हैं

Step 7: Heart Disease
जब arteries clog होती हैं:
Blood flow कम होता है
Heart attack का खतरा बढ़ता है

Final Truth (सबसे ज़रूरी बात)
दिल की बीमारी सिर्फ fat खाने से नहीं, बल्कि ज़्यादा carbs + high insulin से होती है।

Solution क्या है?
Carbs की quality और quantity सुधारें, Sugar और refined foods कम करें
Protein और fibre बढ़ाएँ
Physical activity करें
Regular Liver Cleansing करें

Dr. Rupak Ranjan, Certified Naturopath and Cleansing Therapy Practitioner 📱8800980344

Our internal Defence mechanism more competent to protect our organs than we thought.🧠 Fatty Liver: बीमारी नहीं, शरीर का ...
03/02/2026

Our internal Defence mechanism more competent to protect our organs than we thought.

🧠 Fatty Liver: बीमारी नहीं, शरीर का सुरक्षा सिस्टम! 🛡️🫀
अक्सर लोग सोचते हैं कि
Fatty Liver = Liver खराब हो गया ❌
लेकिन सच इससे काफ़ी अलग है।

🔄 असल में होता क्या है?
जब शरीर में Insulin Resistance होती है 👇
तो Insulin ज़्यादा बनने लगता है,
लेकिन fat cells इंसुलिन की बात सुनना बंद कर देते हैं।

😵‍💫 Result क्या होता है?
🧈 Fat cells भर जाते हैं और fat बाहर बहने लगता है
यह extra fat
खून के ज़रिये पूरे शरीर में घूमने लगता है 🚨

अगर ये fat:
दिल ❤️
Pancreas
Muscles
Brain 🧠
में जमा हो जाए
तो बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है।

🫀 तभी Liver आगे आता है – Superhero की तरह 🦸‍♂️
Liver इस extra fat को
खुद के अंदर absorb कर लेता है।
क्यों?
👉 ताकि बाकी organs सुरक्षित रहें
👉 ताकि शरीर का balance बना रहे

💡 इसलिए याद रखिए
❌ Fatty liver = liver failure नहीं
✅ Fatty liver = liver का damage control mode
यह liver की कमज़ोरी नहीं,
बल्कि उसकी समझदारी है।

⚠️ लेकिन Warning भी ज़रूरी है
अगर insulin resistance ठीक नहीं हुई,
तो liver पर ज़्यादा बोझ पड़ता है
और धीरे-धीरे inflammation शुरू हो सकता है 🔥

🌱 Solution क्या है?
Sugar और refined carbs कम करें 🍬❌
Physical activity बढ़ाएँ 🚶‍♂️
Weight management करें ⚖️
Liver Cleansing अपनाएँ 🌿

Fatty liver डरने की नहीं, समझने की चीज़ है।
यह शरीर का alarm है - “Lifestyle को बदलने की जरूरत है। ‘क्लींजिंग थेरेपी’ है समाधान। हर तीन महीने पर कीजिए अपना ‘लीवर क्लींजिंग’। ‘लीवर क्लींजिंग’ करने के लिए हमेशा ऑथेंटिक थेरेपी मटेरियल का इस्तेमाल करें..... Dr. Rupak Ranjan, Certified Naturopath and Cleansing Therapy practitioner

अभी भी समय है!” ⏰ Act before it’s too late.

*क्या आप पेट की चर्बी से परेशान हैं???*🔥 पेट की चर्बी सिर्फ दिखावे की समस्या नहीं है - ये सेहत का बड़ा खतरा है! ⚠️अक्सर ...
02/02/2026

*क्या आप पेट की चर्बी से परेशान हैं???*

🔥 पेट की चर्बी सिर्फ दिखावे की समस्या नहीं है - ये सेहत का बड़ा खतरा है! ⚠️
अक्सर हम सोचते हैं कि belly fat सिर्फ appearance खराब करती है 😕
लेकिन सच्चाई ये है 👇
👉 पेट की अंदरूनी चर्बी (Visceral Fat) एक biological problem है,
जो चुपचाप शरीर के सिस्टम को बिगाड़ती है 🧠❤️
Visceral Fat क्या होती है और ये इतनी खतरनाक क्यों है? 🤔
🧬 Visceral fat वो चर्बी है जो:
पेट के अंदर
लीवर, आंत, पैंक्रियास जैसे organs के चारों ओर लिपटी रहती है
⚠️ ये चर्बी:
❌ Hormones को बिगाड़ती है
❌ Insulin resistance बढ़ाती है
❌ लगातार inflammation पैदा करती है 🔥
👉 इसी वजह से यह:
Diabetes
Heart disease ❤️
Stroke
Fatty liver
का खतरा कई गुना बढ़ा देती है।
कैसे पहचानें कि Visceral Fat ज़्यादा है? 📏
आपको six-pack की ज़रूरत नहीं, बस ये संकेत देखें 👇
🔸 पेट सख़्त और बाहर निकला हुआ
🔸 कमर का साइज़ बढ़ना
• पुरुष: 90 cm (36 inch) से ज़्यादा
• महिलाएँ: 80 cm (32 inch) से ज़्यादा
🔸 हल्का सा खाने पर भी वजन बढ़ना
🔸 Sugar, BP या cholesterol borderline होना
👉 बाहर से पतले दिखने वाले लोगों में भी
Visceral fat छुपी हो सकती है ⚠️

Visceral Fat और Liver का गहरा कनेक्शन 🧠🍺
लीवर शरीर का master organ है,
जो fat, sugar और hormones को manage करता है।
जब visceral fat बढ़ती है:
Free fatty acids सीधे लीवर में जाती हैं
लीवर fat से भरने लगता है (Fatty Liver)
लीवर की efficiency घट जाती है ❌
👉 कमजोर लीवर =
✔️ Sugar control बिगड़ता है
✔️ Cholesterol बढ़ता है
✔️ Detox slow हो जाता है
✔️ और visceral fat और तेज़ी से बढ़ती है 🔄
⚠️ ये एक vicious cycle बन जाता है।

इसलिए यह जरूरी है कि हर तीन महीने में एक बार लिवर क्लिंज करें और अपने लिवर को स्वस्थ और एफिशिएंट बनाए रखें।

💡 याद रखने वाली बात
पेट की चर्बी को ignore करना,
भविष्य की बीमारियों को न्योता देना है।

🌿 अच्छी खबर क्या है? 😊
Visceral fat:
✔️ रेगुलर लिवर क्लींजिंग
✔️ सही खान-पान
✔️ अच्छी नींद 😴
✔️ Stress control 🧘‍♂️
✔️ नियमित walk + strength training
से कम की जा सकती है 💪✨

❤️ पेट छोटा करना cosmetic goal नहीं,
ये health का सबसे बड़ा investment है।
Dr. Rupak Ranjan, Certified Naturopath and Cleansing Therapy practitioner 📱8800980344

🌍 Plastic is no longer just an environmental issue — it’s a human health issue.Studies around the world have already sho...
01/02/2026

🌍 Plastic is no longer just an environmental issue — it’s a human health issue.
Studies around the world have already shown traces of microplastics and pesticide residues in mothers’ breast milk.
Now, new research reveals something even more alarming ⚠️
🧬 Microplastics were found in male testicles — in 100% of samples studied.
Not some. Every single one.
Researchers believe this invisible plastic load may be contributing to the global decline in s***m count 📉
🌊 Plastic isn’t just in oceans anymore…
👉 It’s inside our bodies.
👉 Toxic buildup is real.
🧘‍♂️ This is why deep, comprehensive cleansing is no longer optional — it’s essential.
A scientifically designed *Cleansing therapy*, when done correctly and safely, can help the body reduce toxic load and support natural healing ✨
🔬 Dr. Piyush Saxena's cleansing protocol, using authentic therapy materials and expert guidance, offers a structured and holistic approach to detoxification.
🏕️ The easiest and most convenient way to experience this therapy is at WellthyLife Camp, under trained expert supervision — ensuring safety, effectiveness, and real results.

💚 Because protecting your health starts from within..... Dr. Rupak Ranjan, Certified Naturopath and Cleansing Therapy Practitioner. 🤙O8800980344

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