15/03/2026
हर बार इलाज के लिए घर से एम्स तक सफर तय करने वाले हरीश राणा रविवार को आखिरी बार एम्स के लिए रवाना हुए, इस उम्मीद में कि एम्स के डॉक्टर शायद 13 साल पुराने उसके इस दर्द से हमेशा के लिए छुटकारा दिला पाएगें, छुटकारा इलाज या सर्जरी से नहीं बल्कि छुटकारा इच्छामृत्यु के जरिए जीवन लीला खत्म करने के लिए, सुनकर पढ़कर और लिखकर यह जिनता दर्द विदारक लग रहा है, हरीश के माता पिता के लिए उससे भी कहीं अधिक है बेटे को इस अवस्था में देखना। यही वजह है कि हरीश के केस में पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने एम्स के हक में फैसला दिया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद देश में पहली बार 31 साल के हरीश राणा को पैसिव यूथेनीसिया के जरिए मौत दी जाएगी, जिसे इच्छामृत्यु भी कहा जाता है।
इच्छामृत्यु के लिए एम्स में कमेटी गठित, वेंटिलेटर पर नहीं है हरीश नई दिल्ली, सेहत संवाददाता हर बार इलाज के लिए घर से...