Dr J.M.Tripathi

Dr  J.M.Tripathi homoeopathic doctor

मानो कोई दिव्य सितारा उदित हुआ हो…महाराष्ट्र के अहिल्यानगर के युवा देवव्रत महेश रेखे ने मात्र 19 वर्ष की आयु में ऐसा अद्...
03/12/2025

मानो कोई दिव्य सितारा उदित हुआ हो…

महाराष्ट्र के अहिल्यानगर के युवा देवव्रत महेश रेखे ने मात्र 19 वर्ष की आयु में ऐसा अद्भुत कार्य कर दिखाया है, जिसे सुनकर हर सनातनी का हृदय गर्व से भर उठे।

🔱 दण्डक्रम वेद पारायण के अंतर्गत
🔱 25 लाख से अधिक वेद पदों का
🔱 लगातार 50 दिनों तक
🔱 बिना किसी ग्रंथ के सहारे,
🔱 बिना एक भी त्रुटि,
उच्चारण कर उन्होंने सनातन वेद परंपरा की ध्वजा और भी ऊँची कर दी है।

उनकी वाणी में तप है, साधना है, और अप्रतिम दिव्यता का तेज है।
ऐसी अलौकिक प्रतिभा सदियों में कभी-कभार जन्म लेती है।

देवव्रत जी को हृदय से साधुवाद एवं शुभाशीष।

अभिनंदन! अभिनंदन!

दर्शन के बाद मंदिर की पैड़ी पर क्यों बैठते थे हमारे बुजुर्ग?● पैड़ी पर बैठकर क्यों बोलते थे एक श्लोक - पुराने समय में मं...
22/11/2025

दर्शन के बाद मंदिर की पैड़ी पर क्यों बैठते थे हमारे बुजुर्ग?

● पैड़ी पर बैठकर क्यों बोलते थे एक श्लोक - पुराने समय में मंदिर की पैड़ी पर बैठकर एक श्लोक बोला जाता था, जिसे लोग अब भूलते जा रहे हैं, यह श्लोक न केवल आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि जीवन के प्रति एक सुंदर दृष्टिकोण भी देता है, वह श्लोक है: अनायासेन मरणम् | बिना देन्येन जीवनम् | देहान्ते तव सानिध्यम् | देहि मे परमेश्वरम्

● श्लोक का अर्थ और गहरा संदेश: अनायासेन मरणम् - अर्थ: हमारी मृत्यु बिना किसी कष्ट के हो, हम कभी बिस्तर पर पड़े-पड़े दुख झेलकर मृत्यु को प्राप्त न हों, चलते-फिरते ही शरीर का त्याग हो जाए।

● बिना देन्येन जीवनम् - अर्थ: जीवन में कभी किसी पर आश्रित न होना पड़े, न लकवे की स्थिति आए, न किसी पर बोझ बनने की स्थिति, भगवान की कृपा से सम्मानपूर्वक जीवन बीते।

● देहान्ते तव सानिध्यम - अर्थ: मृत्यु के समय भगवान का सानिध्य मिले, जैसी भीष्म पितामह जब प्राण त्याग रहे थे, तब स्वयं भगवान उनके सामने उपस्थित थे।

● देहि मे परमेश्वरम् - अर्थ: हे प्रभु, हमें ऐसा ही शुभ और पवित्र जीवन तथा मृत्यु का वरदान दें।

● प्रार्थना और याचना में अंतर - प्रार्थना भगवान से श्रेष्ठ, आध्यात्मिक निवेदन है, इसमें सांसारिक वस्तुएं गाड़ी, पैसा, घर, नौकरी नहीं मांगी जातीं, ये सब तो भगवान आपकी पात्रता के अनुसार स्वयं देते हैं, याचना केवल सांसारिक पदार्थों के लिए की जाती है, जबकि प्रार्थना जीवन की उच्चतर इच्छा का निवेदन है।

● मंदिर में आंखें क्यों न बंद करें - मंदिर में प्रवेश करते समय और दर्शन करते समय आंखें खुली रखनी चाहिए, भगवान के स्वरूप, चरण, मुख, श्रृंगार सबको ध्यान से निहारना चाहिए, दर्शन करने के बाद पैड़ी पर बैठकर आंखें बंद करें और जो रूप देखा है, उसका मन में ध्यान करें, अगर ध्यान में स्वरूप न आए तो पुनः दर्शन करें, यही शास्त्र का निर्देश है।

पाँच तत्त्वों में बसता है भगवान—अपने भीतर झाँकिये , वही साक्षात् दर्शन है।”🙏
21/11/2025

पाँच तत्त्वों में बसता है भगवान—अपने भीतर झाँकिये , वही साक्षात् दर्शन है।”🙏

11/11/2025
अगर आप में भी निम्नलिखित लक्षण रहते हैं      1. सूखा हुआ बुढ़ापे जैसा झुरीदार शरीर नीचे का धड़  दुबला       2. नीचे से ऊ...
16/10/2025

अगर आप में भी निम्नलिखित लक्षण रहते हैं
1. सूखा हुआ बुढ़ापे जैसा झुरीदार शरीर नीचे का धड़ दुबला
2. नीचे से ऊंचे मकानों को और ऊंचाई से नीचे देखने में डर लगता है
3. कहीं आने-जाने की घबराहट में दस्त आ जाना
4. मीठा खाने की इच्छा परंतु मीठे से पेट खराब हो जाना हरे घास की तरह के दस्त आ जाना
5. पेट में हवा का आधिक्य अपचन
अगर आपको भी इस तरह के लक्षण है आपका शरीर सूखा हुआ है दुबला पतला है जवानी में बूढ़े जैसा शरीर चेहरे पर झुर्रियां प्रतिदिन दुबला होता जा रहा है।
यह व्यक्ति जब सड़कों पर चलता है तब ऊंचे ऊंचे मकानों को देखने से घबरा जाता है शरीर कांपने लगता है पसीना आने लगता है इसी प्रकार जब ऊंची जगह से नीचे देखा है तब भी घबराता है किसी पुल को पार नहीं कर सकता ऊंची जगह पर बैठे हुए या पुल पार करते हुए सोचने लगता है कि यहां से गिर पड़ना कितना भयानक होगा कभी-कभी यह विचार उसे पर इतना हावी हो जाता है कि वह सचमुच इस ऊंचाई से नीचे जा गिरता है।
किसी बात के इंतजार से घबराहट पैदा होना जब कोई काम करना होता है तो जब तक व्यक्ति काम के इंतजार में रहता है जब तक काम हो नहीं जाता तब तक उसका समय मस्तिक की कमजोरी के कारण परेशानी में बीतता है।
कहीं जाने की घबराहट में दस्त आ जाना अगर उसको कहीं जाना है किसी शादी विवाह में सिनेमा देखने मंदिर में पूजा करने पेपर देने रोजमर्रा के बिना किसी अन्य काम कोशिश करना है तो वह और चिंता उसे इतना व्याकुल कर देती है कि वह शौच के लिए जाना पड़ता है।
इस रोगी को मीठे की अत्यंत चाह होती है उसे मीठे का कीड़ा समझिए परंतु मीठा उसे नुकसान पहुंचता है वह मीठा चाहता है परंतु मीठा उसे नहीं चाहता मीठा खाने से पेट में हवा भर जाती है खट्टी डकार आने लगती है वह मीठे को पचा नहीं सकता दस्त आने लगते हैं ।
अगर आप में भी इस तरह के लक्षण है तो यह दवा आपके लिए रामबाण सिद्ध हो सकती है।

चार बूंद तीन बार डायरेक्ट जीभ पर या एक चम्मच पानी के साथ
दवा आप किसी भी कंपनी की ले सकते हैं।

15/10/2025

एक आदमी एक मुर्गा खरीद कर लाया। एक दिन वह मुर्गे को मारना चाहता था, इसलिए उस ने मुर्गे को मारने का बहाना सोचा और मुर्गे से कहा, "तुम कल से बाँग नहीं दोगे, नहीं तो मै तुम्हें मार डालूँगा।"

मुर्गे ने कहा, "ठीक है, सर, जो भी आप चाहते हैं, वैसा ही होगा !"
सुबह , जैसे ही मुर्गे के बाँग का समय हुआ, मालिक ने देखा कि मुर्गा बाँग नहीं दे रहा है, लेकिन हमेशा की तरह, अपने पंख फड़फड़ा रहा है।

मालिक ने अगला आदेश जारी किया कि कल से तुम अपने पंख भी नहीं फड़फड़ाओगे, नहीं तो मैं वध कर दूँगा।

अगली सुबह, बाँग के समय, मुर्गे ने आज्ञा का पालन करते हुए अपने पंख नहीं फड़फड़ाए, लेकिन आदत से, मजबूर था, अपनी गर्दन को लंबा किया और उसे उठाया।

मालिक ने परेशान होकर अगला आदेश जारी कर दिया कि कल से गर्दन भी नहीं हिलनी चाहिए। अगले दिन मुर्गा चुपचाप मुर्गी बनकर सहमा रहा और कुछ नहीं किया।

मालिक ने सोचा ये तो बात नहीं बनी, इस बार मालिक ने भी कुछ ऐसा सोचा जो वास्तव में मुर्गे के लिए नामुमकिन था।

मालिक ने कहा कि कल से तुम्हें अंडे देने होंगे नहीं तो मै तेरा वध कर दूँगा।

अब मुर्गे को अपनी मौत साफ दिखाई देने लगी और वह बहुत रोया।
मालिक ने पूछा, "क्या बात है?"
मौत के डर से रो रहे हो?
मुर्गे का जवाब बहुत सुंदर और सार्थक था।

मुर्गा कहने लगा:
"नहीं, मै इसलिए रो रहा हूँ कि, अंडे न देने पर मरने से बेहतर है बाँग देकर मरता...
बाँग मेरी पहचान और अस्मिता थी ,
मैंने सब कुछ त्याग दिया और तुम्हारी हर बात मानी , लेकिन जिसका इरादा ही मारने का हो तो उसके आगे समर्पण नहीं संघर्ष करने से ही जान बचाई जा सकती है, जो मैं नहीं कर सका..."

अपने अस्तित्व, अपनी अस्मिता की रक्षा के लिए संघर्ष करना पड़े तो पीछे नहीं हटना चाहिए...!!
मैं यहां मुर्गे की बात नही कर रहा...!!
विचार अवश्य करियेगा....!!

10/10/2025

विद्या विवादाय धनं मदाय शक्तिः परेषां परिपीडनाय ।
खलस्य साधोर विपरीतमेतद् ज्ञानाय दानाय च रक्षणाय ॥

The mischievous use their education for conflict, money for intoxication, and power for oppressing others. Honest ones use it for knowledge, charity, and protecting others, respectively.

दुर्जन की विद्या विवाद के लिये, धन उन्माद के लिये, और शक्ति दूसरों का दमन करने के लिये होती है। सज्जन इसी को ज्ञान, दान, और दूसरों के रक्षण के लिये उपयोग करते हैं।

03/10/2025

*💥"दस रुपये के बदले,13 लाख"💥*😳🤫👇👇👇

*😳सेठ ने अभी दुकान खोली ही,थी l कि :- एक औरत आई और बोली:- "सेठ जी ये अपने दस रुपये लो"..।👍🙏*

*😳सेठ उस गरीब सी औरत को प्रश्नवाचक नजरों से देखने लगा,जैसे पूछ रहा हो ? कि :- मैंने कब तुम्हे दस रुपये दिये?😳*
*😳औरत बोली :- कल शाम को मै सामान ले गई थी l तब आपको सौ रुपये दिये थे। 70 रुपये का सामान खरीदा था। आपने 30 रुपये की जगह मुझे 40 रुपये वापस दे दिये। "सेठ ने दस रुपये को माथे से लगाया,फिर गल्ले मे डालते हुए बोला :- एक बात बयाइये बहन जी? आप सामान खरीदते समय कितने मौल भाव कर रही थी। पांच रुपये कम करवाने के लिए आपने कितनी बहस की थी,और अब ये दस रुपये लौटाने चली आई? 🤔औरत बोली :-"पैसे कम करवाना मेरा हक है"। मगर एक बार मौल भाव होने के बाद, "उस चीज के कम पैसा देना पाप है।"*😳🤫
*😳सेठ बोला :-लेकिन, आपने कम पैसे कहाँ दिये? आपने पूरे पैसे दिये थे,ये दस रुपया तो मेरी गलती से आपके पास चला गया। रख लेती,तो मुझे कोई फर्क नही पड़ने वाला था। औरत बोली :- आपको कोई फर्क नही पड़ता ? मगर मेरे मन पर हमेशा ये बोझ रहता ? कि:- मैंने जानते हुए भी,आपके पैसे खाये। 🤫इसलिए मै रात को ही,आपके पैसे वापस देने आई थी l मगर उस समय आपकी दुकान बन्द थी।😳 सेठ ने महिला को आश्चर्य से देखते हुए पूछा :- "आप कहाँ रहती हो"..? वह बोली ;- "सेक्टर आठ मे रहती हूँ".। सेठ का मुँह खुला रह गया ...?🤔 बोला :- "आप 7 किलोमीटर दूर से",ये दस रुपये देने,"दूसरी बार आई हो"..?😳🤔 औरत सहज भाव से बोली :- "हाँ दूसरी बार आई हूँ"। मन का सुकून चाहिए,तो -"ऐसा करना पड़ता है"। मेरे पति इस दुनिया मे नही है l मगर उन्होंने मुझे एक ही,बात सिखाई है l कि:- "दूसरे के हक का एक पैसा भी,मत खाना"। 🤫क्योंकि :- "इंसान चुप रह सकता hai...? मगर - "ऊपर वाला कभी भी,हिसाब मांग सकता है ?🤫 और... "उस हिसाब की सजा मेरे बच्चों को भी मिल सकती है"।🤫 इतना कह कर वह औरत चली गई।*🤫😳
*😳सेठ ने तुरंत गल्ले से तीन सौ रुपये निकाले और स्कूटी पर बैठता हुआ अपने नौकर से बोला, :- तुम दुकान का ख्याल रखना,मै अभी आता हूँ। सेठ बाजार मे ही,एक दुकान पर पहुंचा। फिर उस दुकान वाले को तीन सौ रुपये देते हुए बोला :- ये अपने तीन सौ रुपये लीजिए प्रकाश जी। कल जब आप सामान लेने आये थे,तब हिसाब मे ज्यादा जुड़ गए थे।😳प्रकाश हँसते हुए बोला :- "पैसे हिसाब मे ज्यादा जुड़ गए थे,तो आप तब दे देते "? "जब मै दुबारा दुकान पर आता"...। इतनी सुबह सुबह आप तीन सौ रुपये देने चले आये।*😳🤔
*😳सेठ बोला, :- जब आप दुबारा आते ? "तब तक मै मर जाता तब"..?? आपके मुझमे तीन सौ रुपये निकलते है,ये आपको तो पता ही,नही था, न..? इसलिए देना जरूरी था। पता नही ...? "ऊपर वाला कब हिसाब मांगने लग जाए"...? 😳🤔 और... "उस हिसाब की सजा मेरे बच्चों को भी, मिल सकती है"...।*😳🤫
*😳सेठ तो चला गया..? मगर प्रकाश के दिल मे खलबली मच गई। क्योंकि दस साल पहले उसने अपने एक दोस्त से "तीन लाख रुपये"उधार लिए थे। मगर पैसे देने के दूसरे ही दिन,"दोस्त मर गया था"।*😳🤫🤔

*😳दोस्त के घर वालों को पैसों के बारे मे पता नही था। इसलीए किसी ने उससे पैसे वापस नही मांगे थे। प्रकाश के दिल मे लालच आ गया था। इसलिए खुद पहल करके पैसे देने वह नही गया। आज दोस्त का परिवार गरीबी मे जी रहा था। दोस्त की पत्नी लोगों के घरों मे झाडू पौंछा करके बच्चों को पाल रही थी। फिर भी, प्रकाश उनके पैसे हजम किये बैठा था। सेठ का ये वाक्य " पता नही ...? "कब ऊपर वाला हिसाब मांगने बैठ जाए"...? और ...."उस हिसाब की सजा मेरे बच्चों को भी,मिल सकती है"....l "प्रकाश को डरा रहा था"...।*😳🤫
*😳प्रकाश दो तीन दिन तक टेंशन में रहा। आखिर मे उसका जमीर जाग गया। उसने बैंक से तेरह लाख रुपये निकाले और पैसे लेकर दोस्त के घर पहुँच गया। दोस्त की पत्नी घर पर ही,थी। वह अपने बच्चो के पास बैठी बतिया रही थी,कि प्रकाश जाकर उसके पैरों मे गिर गया।एक एक रुपये के लिए संघर्ष कर रही,उस"विधवा औरत"के लिए 13 लाख रुपये बहुत बड़ी रकम थी। पैसे देखकर उसकी आँखों मे आँसू आ गए। वह प्रकाश को"दुआएं"देने लगी,जो उसने ईमानदारी दिखाते हुए,पैसे लौटा दिये।👌👍*

*😳🤫"ये वही औरत थी"....,"जो" "सेठ को दस रुपये लौटाने,दो बार गई थी"...।*😳🤫
*💥 अपनी "मेहनत" और "ईमानदारी"का खाने वालो की ईश्वर"परीक्षा"जरूर लेता है l मगर कभी भी,उन्हे अकेला नही छोड़ता। एक दिन जरूर सुनता है। "ऊपर वाले पर भरोसा रखिये"।
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