27/03/2026
भए प्रगट कृपाला दीनदयाला, कौसल्या हितकारी ।
हरषित महतारी, मुनि मन हारी, अद्भुत रूप बिचारी ॥
लोचन अभिरामा, तनु घनस्यामा, निज आयुध भुजचारी ।
भूषन बनमाला, नयन बिसाला, सोभासिंधु खरारी ॥
जीवन में अनेक ऐसे क्षण आते हैं जब चुनाव अपरिहार्य हो जाता है और दोनों ही विकल्प किसी न किसी रूप में उचित भी लगते हैं और अपूर्ण भी। ऐसे समय में निर्णय लेना सहज नहीं होता; मन विचलित होता है और स्पष्टता धुंधली पड़ने लगती है। वस्तुतः यही वह क्षण है, जहाँ व्यक्ति के विचार और उसके मूल्य परखे जाते हैं।
भगवान का मनुष्य रूप में अवतरण एक जीवन-दृष्टि है, जो हमें सिखाती है कि विषम परिस्थितियों में भी धैर्य, मर्यादा और विवेक बनाए रखते हुए सत्य का चयन किया जा सकता है। रामनवमी का यह पावन अवसर हमें स्मरण कराता है कि आदर्श मात्र कथनों में नहीं, अपितु हमारे आचरण, हमारे निर्णयों और हमारे दैनिक जीवन में प्रतिबिंबित होने चाहिए।
जब हम अपने छोटे-छोटे कर्मों में भी सत्यनिष्ठा और संतुलन बनाए रखते हैं, तभी 'श्रीराम' का वास्तविक सार हमारे जीवन में उतरता है। लिटरेरी सोसाइटी की ओर से आप सभी को रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएँ।