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दुनिया की सबसे युवा महिला चार्टर्ड अकाउंटेंट! 19 साल की उम्र में नंदिनी अग्रवाल ने भारत के सबसे कठिन CA एग्ज़ाम को क्रैक...
21/02/2026

दुनिया की सबसे युवा महिला चार्टर्ड अकाउंटेंट!

19 साल की उम्र में नंदिनी अग्रवाल ने भारत के सबसे कठिन CA एग्ज़ाम को क्रैक किया और ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल की, 614/800 अंक के साथ।

मध्य प्रदेश के मोरना की यह लड़की गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज हुई, लेकिन दुनिया शांत रही। कोई मीडिया हेडलाइन नहीं, कोई सेलिब्रेशन नहीं।

लेकिन नंदिनी ने इस साइलेंस को अपनी ताकत बनाया।

13 साल की उम्र में 10वीं की पढ़ाई पूरी ✅

15 साल में 12वीं की पढ़ाई पूरी ✅

और 19 साल में CA बन गई! ✅

नंदिनी की कहानी हमें यह सिखाती है कि सच्चा सफलता का मतलब पहचान नहीं, बल्कि जुनून और लगन से है। जब आपका सपना आपका साथ देता है, तो दुनिया की आवाज़ मायने नहीं रखती।

सीख: अपनी मेहनत और लगन पर भरोसा रखो, सफलता खुद-ब-खुद आपके कदम चूमेगी।

21/02/2026

क्या आप चाहते हैं कि इस पेज पर साप्ताहिक रूप से अग्रवाल भाइयों के व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष पोस्ट शुरू की जाए?

20/02/2026

आज के समय कितने अग्रवाल भाई बहन जरूरतमंद अग्रवाल भाई बहन की मदद करना चाहते है?

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कहानी: “व्यापार की समझ”बहुत समय पहले एक छोटे से नगर में दो मित्र रहते थे—रमेश और सुरेश।रमेश एक बनिया परिवार से था, जबकि ...
20/02/2026

कहानी: “व्यापार की समझ”
बहुत समय पहले एक छोटे से नगर में दो मित्र रहते थे—रमेश और सुरेश।
रमेश एक बनिया परिवार से था, जबकि सुरेश किसान परिवार से।
दोनों ने तय किया कि वे जीवन में कुछ बड़ा करेंगे।
सुरेश ने कहा, “मैं खेत बढ़ाऊँगा, क्योंकि हमारे घर में यही काम होता आया है।”
रमेश मुस्कुराया और बोला, “हमारे घर में बचपन से ही हिसाब-किताब, बचत और व्यापार सिखाया जाता है, इसलिए मैं व्यापार करूँगा।”
रमेश के पिता उसे बचपन से सिखाते थे—
हर पैसे का सही उपयोग करो
कम कमाओ, पर समझदारी से कमाओ
ग्राहक को भगवान मानो
घाटा हो जाए तो सीख लो, हार मत मानो
रमेश ने छोटी सी किराने की दुकान शुरू की।
वह हर ग्राहक से प्यार से बात करता, उधार भी सोच-समझकर देता और थोड़ा-थोड़ा बचत करता रहता।
कुछ सालों बाद वही छोटी दुकान बड़ी हो गई।
सुरेश ने आश्चर्य से पूछा,
“तुम्हारी सफलता का राज क्या है? क्या इसलिए कि तुम बनिया हो?”
रमेश ने मुस्कुराकर जवाब दिया—
“सिर्फ बनिया होना वजह नहीं है।
असल वजह है बचपन से मिली सीख—मेहनत, धैर्य, बचत और सही सोच।
जिसके पास ये गुण हों, वह कोई भी हो… सफल व्यापारी बन सकता है।”
उस दिन सुरेश को समझ आया—
व्यापार किसी जाति का नहीं, बल्कि सोच और संस्कार का काम है।
सीख:
सफलता जन्म से नहीं,
बल्कि आदतों और समझ से मिलती है।

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सुप्रभात संदेश — महाराज अग्रसेन जी की प्रेरणा से“नया सवेरा नई उम्मीदें लेकर आता है।सत्य, परिश्रम और सेवा के मार्ग पर चले...
17/02/2026

सुप्रभात संदेश — महाराज अग्रसेन जी की प्रेरणा से
“नया सवेरा नई उम्मीदें लेकर आता है।
सत्य, परिश्रम और सेवा के मार्ग पर चलें,
तो जीवन में सुख-समृद्धि स्वयं आ जाती है।
हर दिन किसी के चेहरे पर मुस्कान लाने का संकल्प लें—
यही सच्ची पूजा है।”
महाराज अग्रसेन जी की कृपा से
आपका दिन मंगलमय, सुखद और सफल हो।
सुप्रभात। 🌼

आप सभी को  #महाशिवरात्री की हार्दिक शुभकामनाएं।
15/02/2026

आप सभी को #महाशिवरात्री की हार्दिक शुभकामनाएं।

ॐ नमोः नारायणाय॥भगवान श्री विष्णु जी की कृपा प्राप्ति के पावन पर्व विजया एकादशी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।जगत के पा...
13/02/2026

ॐ नमोः नारायणाय॥

भगवान श्री विष्णु जी की कृपा प्राप्ति के पावन पर्व विजया एकादशी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।

जगत के पालनकर्ता श्री हरि विष्णु जी आप सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता का आशीर्वाद प्रदान करें।

अग्रवाल समाज के लिए महाराज अग्रसेन की प्रेरक कथाबहुत पुराने समय की बात है। अग्रोहा नगरी में एक निर्धन व्यापारी अपने परिव...
12/02/2026

अग्रवाल समाज के लिए महाराज अग्रसेन की प्रेरक कथा

बहुत पुराने समय की बात है। अग्रोहा नगरी में एक निर्धन व्यापारी अपने परिवार सहित आकर बस गया। उसके पास न रहने का ठिकाना था, न व्यापार के लिए पूंजी और न ही कोई सहारा। नगर के लोग उसकी स्थिति देखकर सहानुभूति तो जताते थे, लेकिन खुलकर सहायता करने का साहस कोई नहीं जुटा पा रहा था।

जब यह समाचार महाराज अग्रसेन तक पहुँचा, तो उन्होंने तुरंत सभा बुलाई। उन्होंने समाज को संबोधित करते हुए कहा,
“किसी भी समाज की महानता उसकी समृद्धि से नहीं, बल्कि इस बात से मापी जाती है कि वह अपने सबसे कमजोर व्यक्ति को कितनी मजबूती देता है।”

फिर उन्होंने अपना प्रसिद्ध सिद्धांत लागू किया—
👉 अग्रोहा के हर घर से एक ईंट और एक रुपया उस जरूरतमंद परिवार को दिया जाए।

देखते ही देखते सैकड़ों ईंटें और पर्याप्त धन इकट्ठा हो गया। कुछ ही समय में उस व्यक्ति का छोटा-सा घर तैयार हो गया और व्यापार शुरू करने लायक पूंजी भी मिल गई। उसने मेहनत, ईमानदारी और समाज के सहयोग के बल पर धीरे-धीरे सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ीं। कुछ वर्षों बाद वही व्यक्ति नगर का सम्मानित और सफल व्यापारी बन गया।

एक दिन वह कृतज्ञता से भरकर महाराज के दरबार में पहुँचा और बोला,
“महाराज, आपने मुझे सिर्फ आर्थिक मदद नहीं दी, आपने मुझे सम्मान, आत्मविश्वास और नई शुरुआत का अवसर दिया।”

महाराज ने शांत भाव से उत्तर दिया,
“यही हमारे समाज की परंपरा है—खुद आगे बढ़ना और दूसरों को भी साथ लेकर चलना।”

कथा का संदेश (अग्रवाल समाज के लिए प्रेरणा)

समाज की असली शक्ति उसकी एकजुटता में होती है।

सच्ची महानता केवल धन अर्जित करने में नहीं, बल्कि किसी को आगे बढ़ाने में है।

जहाँ हर व्यक्ति दूसरे का सहारा बनता है, वहाँ समृद्धि स्थायी होती है।

महाराज अग्रसेन की यह सोच आज भी अग्रवाल समाज की पहचान है—सहयोग, सम्मान और सामूहिक प्रगति।

महाराज अग्रसेन जी की एक और प्रेरणादायक कहानी सुनिए 🌟👑एक बार महाराज अग्रसेन जी ने देखा कि कुछ लोग सिर्फ अपने फायदे के लिए...
09/02/2026

महाराज अग्रसेन जी की एक और प्रेरणादायक कहानी सुनिए 🌟👑
एक बार महाराज अग्रसेन जी ने देखा कि कुछ लोग सिर्फ अपने फायदे के लिए दूसरों को दबाते हैं और समाज में ईर्ष्या व लालच बढ़ रहा है।
महाराज जी ने अपने मंत्रियों को बुलाया और कहा—
✅ “राजा वही जो न्याय करे,
पर महान राजा वह जो लोगों में सद्भावना बढ़ाए।”
उन्होंने राज्य में एक नियम बनाया:
व्यापार में धोखा, तौल में कमी और झूठे वादे करने वालों को सख्त दंड मिलेगा।
फिर उन्होंने लोगों को समझाया—
🌿 “धन कमाओ, पर धर्म के साथ”
🌿 “व्यापार करो, पर ईमानदारी से”
🌿 “मुनाफा लो, पर किसी का हक मत मारो”
धीरे-धीरे पूरे राज्य में यह बदलाव आया:
✨ लोग एक-दूसरे पर भरोसा करने लगे
✨ व्यापार तेज़ी से बढ़ने लगा
✨ राज्य खुशहाल हो गया
सीख:
💛 “ईमानदारी ही सबसे बड़ा व्यापार है।”

महाराज अग्रसेन जी पर बच्चों के लिए एक छोटी, आसान और सीख वाली कहानी 📖✨🌟 कहानी: “एक ईंट, एक रुपया – मदद की ताकत”बहुत समय प...
30/01/2026

महाराज अग्रसेन जी पर बच्चों के लिए एक छोटी, आसान और सीख वाली कहानी 📖✨
🌟 कहानी: “एक ईंट, एक रुपया – मदद की ताकत”
बहुत समय पहले अग्रोहा नाम का एक सुंदर नगर था। वहाँ के राजा थे महाराज अग्रसेन जी।
वे बहुत दयालु और समझदार राजा थे।
एक दिन एक गरीब परिवार अपने छोटे बच्चे के साथ अग्रोहा आया।
उनके पास रहने के लिए घर नहीं था, और काम भी नहीं था।
बच्चा उदास होकर बोला—
😔 “माँ, अब हम कहाँ रहेंगे?”
यह बात महाराज अग्रसेन जी को पता चली।
वे तुरंत वहाँ पहुँचे और बोले—
😊 “घबराओ मत! अग्रोहा में कोई भी अकेला नहीं रहता।”
फिर महाराज अग्रसेन जी ने नगर के लोगों को बुलाया और कहा—
🏠 “आज से नियम होगा—
जो भी नया परिवार आएगा, हर घर से 1 ईंट
और हर घर से 1 रुपया उसकी मदद के लिए दिया जाएगा।”
सभी लोगों ने खुशी से कहा—
🙌 “जैसा आदेश महाराज!”
कुछ ही दिनों में उस परिवार का घर बन गया,
और रुपये से उन्होंने छोटा सा काम भी शुरू कर लिया।
बच्चे के चेहरे पर मुस्कान आ गई 😄
उस दिन महाराज अग्रसेन जी ने सबको समझाया—
✨ “जब हम मिलकर मदद करते हैं,
तो बड़ा दुख भी छोटा हो जाता है।”

यः स्मरेत पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः।आस्था, साधना और आंतरिक शुद्धि के पावन पर्व जया एकादशी के शुभ अवसर पर समस्...
29/01/2026

यः स्मरेत पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः।

आस्था, साधना और आंतरिक शुद्धि के पावन पर्व जया एकादशी के शुभ अवसर पर समस्त श्रद्धालुओं को हार्दिक शुभकामनाएँ।

भगवान श्रीहरि विष्णु से प्रार्थना है कि उनके आशीर्वाद से सभी के जीवन में शांति, सद्भाव और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो।

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Agroha Dham

Agroha is a Hindu temple complex in Agroha, India. Construction started in 1976 and was completed in 1984. The temple is dedicated to the Hindu goddess Mahalakshmi.

History and development

The decision to construct the temple was made at the convention of All India Aggarwal Representatives in 1976. The trust was established for this purpose under Shri Krishna Modi and Rameshwar Das Gupta. The land was donated to the trust by Laxmi Narain Gupta and construction was started under the supervision of Tilak Raj Aggarwal. The construction of the main temple was completed in 1984 while construction of other features started in 1985 under Subhash Goel.

Description