22/09/2020
🙄💥 डॉक्टर_का_अनुभव और डिजिटल_उपकरण 💥‼️
डिजिटल उपकरण खामी होना कोई नई बात नही है। सभी डिजिटल उपकरण में थोड़ी त्रुटि रहती ही है और अलग अलग कंपनी के उपकरणों में वेरिएशन भी हो सकते हैं। यहाँ तक कि एक ही कंपनी के उपकरण में भी वेरिएशन हो सकते हैं। और हमारे देश मे भ्र्ष्टाचार और सत्ता के ताकत के बलपर क्या नही किया जा सकता , फिर तो इससे भी ज्यादा त्रुटिपूर्ण उपकरणों की सम्भावना बहुत बढ़ जाती है।
हम डॉक्टर्स हैं, इस प्रकार की त्रुटि और वेरिएशन के बारे में भली-भांति जानकारी और अनुभव रखते हैं। ये हमारा रोज़ का काम है।
हाल ही की एक सच्ची घटना सुनाता हूँ।
एक सरकारी डॉक्टर ने एक व्यक्ति को मृत घोषित कर दिया था। तभी एक व्यक्ति ने ऐसा ही एक उपकरण उनकी उंगली में पहना दिया। फिर क्या था , उपकरण बजने लगा और उसमें दिल की धड़कन और ऑक्सीजन लेवल भी दिखाने लगा। बस क्या था फिर, हंगामा और लोगों की भीड़ जमा होनी लगी। डॉक्टर ने फिर से देखा, फिर जांच की ,BP, pulse,Heart Beat , ECG ,जीवन के हर लक्षण बार-बार चेक किये औऱ भीड़ के दबाव में जीवन रक्षक दवाई और CPR करना जारी रखा।लेकिन न तो वो उपकरण ने गलत रीडिंग देना बंद किया और न ही मरीज़ के परिजनों के दिमाग का संशय ही शांत हुआ। तभी 1 घंटे बाद उस डिजिटल उपकरण का बैटरी खत्म हो गया। फिर नया डिजिटल उपकरण बाज़ार से मंगवाया गया क्योंकि अस्पताल के उपकरण और डॉक्टर ,दोनों पर ही भरोसा किसको साथ था। नए उपकरण ने सही रीडिंग दी और दिल की धड़कन और ऑक्सीजन लेवल दोनों की ही रीडिंग शून्य थी । तब जाके डॉक्टर की जान बच पाई।
इसलिये हमारा सवाल आपसे है कि अगर कोई डॉक्टर इस त्रुटि को पहचान ले और अपने अनुभव के हिसाब से इलाज़ करना चाहेंगे , तो आप किसकी सुनेंगें डिजिटल उपकरण की या डॉक्टर की ?