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असाध्य (Non-healing) घाव का उपचार क्षार द्वारा — आयुर्वेदिक दृष्टि से---🔹 परिचय :जब कोई घाव (wound) लंबे समय तक ठीक नहीं...
27/10/2025

असाध्य (Non-healing) घाव का उपचार क्षार द्वारा — आयुर्वेदिक दृष्टि से

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🔹 परिचय :

जब कोई घाव (wound) लंबे समय तक ठीक नहीं होता, बार-बार पस निकलती है, दर्द या सूजन बनी रहती है, तो उसे असाध्य या अजीर्ण व्रण (non-healing wound) कहा जाता है। ऐसे घाव सामान्य औषधियों या मलहमों से ठीक नहीं होते। आयुर्वेद में इन घावों के उपचार के लिए क्षार कर्म (Kshara Karma) का उल्लेख मिलता है।

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🔹 क्षार क्या है?

क्षार एक प्रकार का संक्षारक (caustic) पदार्थ है, जो विभिन्न औषधीय वनस्पतियों की राख (भस्म) से बनाया जाता है।
यह एक तरह से प्राकृतिक "क्लीनिंग एजेंट" है, जो मृत या संक्रमित ऊतकों को गलाकर बाहर निकाल देता है।

सामान्यतः उपयोग होने वाले क्षार —

अपामार्ग क्षार (Achyranthes aspera)

अरका क्षार (Calotropis gigantea)

स्नुही क्षार (Euphorbia neriifolia)

यव क्षार (Barley alkali)

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🔹 क्षार द्वारा उपचार की प्रक्रिया :

1. घाव की सफाई (Wound Cleaning)
पहले घाव को त्रिफला क्वाथ या नीम जल से अच्छे से धोया जाता है।

2. क्षार का प्रयोग (Application of Kshar)

प्रभावित स्थान पर थोड़ी मात्रा में क्षार लगाया जाता है।

यह संक्रमित या सड़े हुए ऊतकों को गलाकर अलग कर देता है।

कुछ मिनटों बाद जब झनझनाहट या जलन महसूस हो, तो क्षेत्र को नींबू रस या घृत से धो दिया जाता है।

3. घाव पर लेप या तेल का प्रयोग (Aftercare)

घाव को शीतल औषधियों से ठंडा किया जाता है, जैसे – जट्यादी तेल, घृतकुमारी रस, या नीम तेल।

इससे नई त्वचा बनने की प्रक्रिया तेज होती है।

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🔹 क्षार के लाभ :

घाव के अंदर छिपे हुए मृत ऊतक (dead tissues) निकाल देता है।

संक्रमण कम करता है।

रक्तस्राव (bleeding) रोकता है।

नई त्वचा के निर्माण में सहायता करता है।

बार-बार पुनः संक्रमण (reinfection) से बचाता है।

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🔹 सावधानियाँ :

क्षार केवल प्रशिक्षित वैद्य या सर्जन की देखरेख में ही लगाया जाना चाहिए।

अत्यधिक या बार-बार लगाने से त्वचा जल सकती है।

घाव में अत्यधिक दर्द, सूजन या लालिमा हो तो तुरंत उपचार रोकें।

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🔹 निष्कर्ष :

आयुर्वेद में क्षार कर्म को "शस्त्र एवं अग्नि कर्म" के मध्य का उपचार माना गया है — न पूरी तरह ऑपरेशन, न पूरी तरह दवा।
यह पुरानी, सड़ी, या संक्रमित घावों के लिए एक प्रभावी उपाय है, जो शरीर की प्राकृतिक हीलिंग क्षमता को बढ़ाकर घाव को भरने में मदद करता है।

7905022024

🪷 डायबिटिक वाउंड एवं बर्न – आयुर्वेदिक कारण व उपचार✍️ प्रस्तुतकर्ता – डॉ. सुनील गुप्ताआयुर्वेदिक कारण (Hetu)डायबिटिक रोग...
21/08/2025

🪷 डायबिटिक वाउंड एवं बर्न – आयुर्वेदिक कारण व उपचार

✍️ प्रस्तुतकर्ता – डॉ. सुनील गुप्ता

आयुर्वेदिक कारण (Hetu)

डायबिटिक रोगी में घाव (wound) या जलन (burn) जल्दी क्यों बिगड़ जाते हैं?
आयुर्वेद के अनुसार कारण हैं –
1. मधुमेह (Prameha) में दोष imbalance –
• कफ और मेद दोष की वृद्धि → शरीर में रक्त व रस धारा को बाधित करती है।
• पित्त असंतुलन → त्वचा व मांस धातु को कमजोर करता है।
2. रक्त धातु दूषित होना –
• रक्त में शर्करा अधिक होने से रक्तसंचार मंद हो जाता है।
• इससे घाव भरने की शक्ति (Ropan Shakti) कम हो जाती है।
3. अग्नि मंद्यता (Digestive Fire weak) –
• जठराग्नि मंद होने से पोषण रस धातुओं तक नहीं पहुँचता।
• त्वचा (Twak), मांस (Mamsa) और अस्थि (Asthi) धातु दुर्बल हो जाते हैं।
4. Ojas क्षीणता –
• मधुमेह में ओज (प्रतिरोधक शक्ति) कम हो जाती है।
• परिणाम: घाव जल्दी संक्रमित होते हैं और धीरे भरते हैं।



आयुर्वेदिक उपचार

1. शोधन (Cleansing & Detox)
• त्रिफला क्वाथ या नीम-पानी से घाव धोना।
• पंचवल्कल क्वाथ से स्नान करना।

2. लेप एवं बाह्य प्रयोग
• जैवंत्यादि घृत / शतधौत घृत से लेप।
• हल्दी, नीम, घृतकुमारी (Aloe vera) का मिश्रण लेप।
• मधु (शहद) का उपयोग – रक्तशोधन व जीवाणुनाशक।

3. आंतरिक औषधि (Oral Medicines)
• निशामलकी चूर्ण (हल्दी + आंवला) – 3–6 gm सुबह-शाम।
• गुडमार (Meshshringi), जामुन बीज चूर्ण – शुगर नियंत्रण हेतु।
• मंजिष्ठा, नीम, हरिद्रा – रक्त शुद्धि व wound healing हेतु।

4. रसायन (Rejuvenation)
• अमलकी रसायन
• शिलाजीत
• अश्वगंधा

5. पथ्य (Do’s)
• जौ, कोदो, कूटू, करेला, मेथी, लहसुन का प्रयोग।
• हरी सब्जियाँ, नीम की पत्तियाँ, गिलोय रस।

6. अपथ्य (Don’ts)
• मिठाई, मैदा, चावल, आलू, तैलीय व गरिष्ठ भोजन।
• मानसिक तनाव व देर रात जागना।

आयुर्वेद के अनुसार डायबिटिक वाउंड और बर्न का मूल कारण है –
दोष असंतुलन (विशेषकर कफ–पित्त), रक्तदूष्यता और ओज क्षीणता।
यदि आंतरिक औषधि + बाह्य लेप + शोधन सही ढंग से किया जाए, तो घाव शीघ्र भर सकते हैं और रोगी जटिलताओं से बच सकता है।


डॉ. सुनील गुप्ता
094520 25732

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14/08/2025

🌧️ बारिश और फिशर क्षारसूत्र के साथ – Dr. Sunil Gupta 🌿 🌧️ 🌿

बरसात का मौसम आते ही ठंडी हवाएँ और बूंदों की टप-टप मन को सुकून देती हैं, लेकिन इसी मौसम में बवासीर, फिशर और फिस्टुला की तकलीफ़ें भी अक्सर बढ़ जाती हैं।
ऐसे में फिशर के लिए क्षारसूत्र एक प्राकृतिक, सुरक्षित और बिना ऑपरेशन का बेहतरीन इलाज है — जो बारिश में भी आराम और राहत देता है।

बरसात में फायदा क्यों?
• 🌱 हर्बल (औषधीय) धागे से उपचार, कोई टांका नहीं
• 💨 तेज़ी से घाव भरने में मदद
• 🩺 दर्द और तकलीफ़ में तुरंत राहत
• 🌿 सर्जरी का डर और अस्पताल में भर्ती की ज़रूरत नहीं

बारिश का मौसम हो,
या दर्द का बादल —
क्षारसूत्र है आपके साथ। 🌧️🌿

बरसात का मौसम है… ठंडी हवाएँ, भीगी मिट्टी की खुशबू और हरियाली चारों ओर।
लेकिन इस मौसम में स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी ज़रूरी है, खासकर अगर आपको फिशर जैसी परेशानी है।

डॉ. सुनील गुप्ता द्वारा किया जाने वाला क्षारसूत्र उपचार
☘️ बिना ऑपरेशन
☘️ कम दर्द
☘️ जल्दी आराम
☘️ प्राकृतिक और सुरक्षित

बारिश हो या धूप, आपका स्वास्थ्य हमारी प्राथमिकता है।
“आराम पाना है तो सही इलाज चुनना है।”

📍 Yash Polyclinic – Dr. Sunil Gupta
📞 9452025732

07/08/2025

क्षारसूत्र चिकित्सा
डॉ. सुनील गुप्ता जी के साथ – एक विशेषज्ञ और समर्पित चिकित्सक

🪷
“जहाँ आधुनिकता और आयुर्वेद का मिलन होता है, वहाँ जन्म लेती है एक सुरक्षित, कारगर और प्राकृतिक चिकित्सा – क्षारसूत्र।”

👉 डॉ. सुनील गुप्ता, आयोध्या के प्रसिद्ध क्षारसूत्र विशेषज्ञ हैं, जिनके कुशल हाथों में न जाने कितने मरीजों को बिना ऑपरेशन के राहत मिली है।
उनकी विशेषज्ञता और अनुभव ने फिस्टुला (भगंदर), पाइल्स (बवासीर), फिशर जैसी जटिल समस्याओं को भी आसान, सुलभ और दर्द-मुक्त इलाज में बदल दिया है।



🌿 क्षारसूत्र क्या है?
• प्राचीन आयुर्वेदिक विधि है जो फिस्टुला, पाइल्स और फिशर का बिना चीरा, टांका और हॉस्पिटल में भर्ती के इलाज करती है।
• इसमें एक विशेष औषधीय धागा (क्षारसूत्र) को प्रभावित स्थान पर बाँधकर रोग को धीरे-धीरे जड़ से समाप्त किया जाता है।



✨ क्यों चुने डॉ. सुनील गुप्ता का क्षारसूत्र उपचार?

🔹 20+ वर्षों का अनुभव
🔹 सैकड़ों सफल केस, रोग मुक्त जीवन की गारंटी
🔹 बिना ऑपरेशन, बिना दर्द, बिना रक्तस्त्राव
🔹 आयुर्वेदिक उपचार में आधुनिक परामर्श और देखभाल
🔹 मरीजों से व्यक्तिगत संवाद और संपूर्ण परामर्श



🙏 मरीज कहते हैं:

“जहाँ ऑपरेशन का डर दिखता है, वहाँ डॉ. सुनील जी की क्षारसूत्र विधि ने मुझे नई आशा दी – और आज मैं पूरी तरह ठीक हूँ!”



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Yash Polyclinic
स्थान: शांति नगर, पूरे हुसैन, अयोध्या
📞 संपर्क: 9452025732
🕉️ “आपके रोग का समाधान, प्राकृतिक और वैज्ञानिक उपचार के साथ।”



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💡 सिर्फ सही जानकारी और सही डॉक्टर की ज़रूरत है।

02/08/2025

📢 Yash Polyclinic – अयोध्या में सेवा और संवेदना का नया नाम

🪷 Yash की स्मृति में समर्पित – हर मरीज के लिए सच्ची सेवा



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📍 स्थान: शांति नगर, पूरे हुसैन, अयोध्या
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👨‍⚕️ डॉ. सुनील कुमार गुप्ता (क्षारसूत्र विशेषज्ञ)



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31/07/2025

🟤 निःशुल्क क्षारसूत्र चिकित्सा शिविर 🟤

भगंदर, बवासीर, फिशर, नासूर जैसी जटिल बीमारियों का आयुर्वेदिक समाधान!

🕘 समय: सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक
📍 स्थान: यश पॉलीक्लिनिक, शांति नगर, पूरे हुसैन, अयोध्या]

✅ विशेषताएं:
🔸 आयुर्वेदिक पद्धति से बिना ऑपरेशन इलाज
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👨‍⚕️ आयोजक:
डॉ. एस.के. गुप्ता, आयुर्वेदाचार्य
(विशेषज्ञ – भगंदर, बवासीर, फिस्टुला, पाइलोनाइडल साइनस)

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Sultanpur Road Pure Husain
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Opening Hours

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Tuesday 9am - 5pm
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