15/03/2026
हर शहर की पहचान उसकी इमारतों से नहीं,
उसके सपनों से बनती है।
डॉ. अरविंद गुप्ता ने फर्रुखाबाद के लिए एक ऐसा सपना देखा है,
जो सिर्फ एक मंदिर का नहीं
बल्कि मानवता, समानता और प्रेम का मंदिर है।
एक ऐसा स्थान जहाँ
अमीर और गरीब का कोई भेद न हो,
जहाँ जाति और ऊँच-नीच की दीवारें टूट जाएँ,
जहाँ दीन-दुखियों को सहारा मिले,
और हर हृदय में प्रेम, करुणा और विश्वास का दीप जले।
एक ऐसा समाज जहाँ
काम, क्रोध, लोभ और मोह से ऊपर उठकर
मानवता का सच्चा प्रकाश फैले।
यह सिर्फ एक सपना नहीं,
बल्कि एक नई सोच की शुरुआत है।
क्योंकि जब समाज प्रेम और विश्वास से जुड़ता है,
तभी सच्चे अर्थों में एक महान भविष्य बनता है।
हो मेरा सपना साकार
कि ऐसा बन पाऊँ मैं मंदिर,
जहाँ हर इंसान को अपनापन मिले।