25/01/2026
🚩सूर्य
🌼प्रथम भाव को सूर्य पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो जातक रजोगुणी, नेत्ररोगी, धनी,साधुसेवी, वेदान्ती, पितृभक्त राज द्वारा सम्मानित और चिकित्सक होता है।
🌼द्वितीय भाव को देखता हो तो सामान्य सुखी, नेत्ररोगी, पशु व्यवसायी, संचित
धननाशक, परिश्रम से थोड़े धन का लाभ करनेवाला और कष्ट सहनेवाला होता है।
🌼तृतीय भाव को देखता हो तो कुलीन, राजमान्य, भाई के सुख से रहित, उद्यमी, शासक, नेता और पराक्रमी होता है।
🌼चतुर्थ भाव को देखता हो तो २२-२३ वर्ष, तक दुःखी मातृसुखी, २२ वर्ष की
आयु के पश्चात् वाहनादि सुखों को प्राप्त करनेवाला और स्वाभिमानी होता है।
🌼पंचम भाव को देखता हो तो सन्ताननाशक, पुत्र के लिए चिन्तित, मंत्रों को एवंशास्त्रों को जाननेवाला, विद्वान्, सेवावृत्ति और २०-२१ वर्ष की अवस्था में संतान प्राप्त करनेवाला होता है।
🌼छठे भाव को देखता हो तो दुःखी, वामनेत्ररोगी, ऋणी होता है।
🌼सातवें भाव को देखता हो तो ऋणी, २२-२३ वर्ष की आयु में स्त्रीनाशक, व्यापारी, उग्र स्वभाववाला और प्रारम्भ में दुःखी तथा अन्त में सुखी होता है।
🌼अष्टम भाव और दृष्टि हो तो चिकित्सक रोगी, व्यवहारिक, असत्यभाषी, पाखंडी निन्दित कार्य करने वाला होता है।
🌼नौवें भाव को देखता हो तो धर्मभीरु, बड़े भाई और साले के सुख से रहित होता है।
🌼दसवें भाव को देखता हो तो राजसम्मानित, धनी, मातृनाशक होता है।
🌼एकादश भाव को देखें तो धनलाभ करने वाला, प्रसिद्ध, व्यापार, प्रथम
और संतान नाशक बुद्धिजीवी, विद्वान, कुलीन और धर्मात्मा होता है।
🌼बारहवें भाव को देखता हो तो प्रवासी, नेत्ररोगी, कान या नाक पर तिल चिह्नधारक,शुभ कार्यों में व्यय करनेवाला, सवारी का शौकीन होता है।