Astrologer Avinash Pandey

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28/01/2026
28/01/2026

 #माँमंगलागौरी
28/01/2026

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     #जयबजरंगबली
27/01/2026

#जयबजरंगबली

🚩शनि स्थान को पूर्ण दृष्टि से देखने पर जातक श्याम वर्णवाला  स्वस्त्री से विमुख, प्रस्तरगामी और लम्पट होता है।🌼दूसरे भाव ...
27/01/2026

🚩शनि स्थान को पूर्ण दृष्टि से देखने पर जातक श्याम वर्णवाला स्वस्त्री से विमुख, प्रस्तरगामी और लम्पट होता है।

🌼दूसरे भाव को देखता हो तो ३६ वर्ष की अवस्था तक धननाशक, कुटुम्बविरो और नाना रोगों का शिकार होता है।

🌼तीसरे भाव को देखता हो तो पराक्रमी, अधार्मिक, भाइयों के सुख से रहित, नीच संगतिप्रिय और बुरे कार्य करनेवाला होता है।

🌼चौथे भाव को देखता हो तो प्रथम वर्ष में शारीरिक कष्ट पानेवाला, राजमाना ३५ या ३६ वर्ष की अवस्था में राज्याधिकार में वृद्धि प्राप्त करनेवाला और लब्धप्रतिष्ठ

🌼पांचवें भाव को देखता हो तो सन्तान-हानि, नीचविद्याविशारद नीचजनप्रिय औ नीचकार्यरत होता है।

🌼छठे भाव को देखा जाता है तो शत्रुनाशक, मातुलकष्टकारक, नेत्ररोग, प्रमेहरोग, धर्म से विमुख और कुमार्गघात होता है।

🌼सातवें भाव को देखता हो तो कलहप्रिय, ३६ वर्ष की अवस्था में मृत्युतुल्य कार पानेवाला, धननाशक और मलीन स्वभाववाला होता है।

🌼आठवें भाव को देखता हो तो कुटुम्ब-विरोधी, राज्यहानिवाला, पिता के धन का ३६ वर्ष की आयु तक नाश करनेवाला और रोगी होता है।

🌼नवें भाव को दृष्टि हो तो देशाटन करने वाला, सैनिक से विरोध करने वाला, प्रवासी, धन प्राप्त करने वाला, निंदाकर्मरत, दोषयुक्त, धर्महीन और निंदक होता है।

🌼दसवें भाव को देखता हो तो पिता के सुख से रहित, माता के लिए कष्टकारक, भूमिपति, राजमान्य और सुखी होता है।

🌼ग्यारहवें भाव को देखता हो तो वृद्धावस्था में पुत्र का सुख पानेवाला, नाना भाषाओं का ज्ञाता और साधारण व्यापार में लाभ प्राप्त करनेवाला होता है।

🌼बारहवें भाव को दृष्टिगोचर होता है तो अशुभ कार्यों में धन व्यय करनेवाला, मातुल को कष्टदायक, शत्रुनाशक और सामान्य लाभ करनेवाला होता है।

🚩चन्द्रमा🌼लग्न को चन्द्रमा पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो जातक व्यवसायी, भाग्यवान, शौकीन कृपण, स्त्रीप्रेमी और प्रवासी होता...
26/01/2026

🚩चन्द्रमा

🌼लग्न को चन्द्रमा पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो जातक व्यवसायी, भाग्यवान, शौकीन कृपण, स्त्रीप्रेमी और प्रवासी होता है।

🌼✓ द्वितीय भाव को देखता हो तो अधिक सन्ततिवाला, सामान्य सुखी, ८-१० वर्ष की अवस्था में शारीरिक कष्टयुक्त, धनहानिकारक, जल में डूबने की आशंकावाला और चोट, घाव, खरोंच आदि के दुःख को प्राप्त करनेवाला होता है।

🌼तृतीय भाव को देखता हो तो धार्मिक प्रवासी, २४ वर्ष की अवस्था में पराक्रमी, सत्संगतिप्रिय और मिलनसार होता है।

🌼चतुर्थ भाव को दृष्टिगोचर होता है तो 24 वर्ष की अवस्था से सुखी होने वाला, राजसम्मानित, कॉन्ट्रिब्यूशन वाला और मातृसेवी होता है।

🌼पंचम भाव को देखता हो तो व्यवहारकुशल, बुद्धिमान्, कलाप्रिय होता है।

🌼षष्ट भाव को देखता हो तो शान्त, रोगी, शत्रुओं से कष्ट पानेवाला, गुप्त रोगों से ग्रस्त, व्यय करनेवाला, २४ वर्ष की अवस्था में जल से क्षतिग्रस्त होनेवाला होता है।

🌼सप्तम भाव को देखता हो तो सुन्दर, सुखी, सुन्दर स्त्री प्राप्त करनेवाला, सत्यवादी, व्यापार से धन संचित करनेवाला और कृपण होता है।

🌼अष्टम भाव को दृष्टिगोचर होता है तो पितृधननायक, कुटुंबविरोधी, भ्रातृहीन और बुद्धि होता है।

🌼नवम भाव को देखें तो धर्मात्मा, भाग्य, भ्रातृहीन और बुद्धि होती है।

🌼दशम भाव को देखता हो तो पशु-व्यवसायी, धर्मान्तर में दीक्षित होनेवाला, पितृविरोधी और चिड़चिड़े स्वभाव का होता है।

🌼एकादश भाव को दृष्टि हो तो लाभ प्राप्त करने वाला, कुशल सदुपयोग, अधिक कन्या सन्तति वाला और मित्रप्रेमी होता है।

🌼द्वादश भाव को देखें तो शत्रु द्वारा धन्नाश करने वाला, चिंता अभिनेता एवं अंतिम दिनों में सुखी होता है।

🚩सूर्य🌼प्रथम भाव को सूर्य पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो जातक रजोगुणी, नेत्ररोगी, धनी,साधुसेवी, वेदान्ती, पितृभक्त राज द्वा...
25/01/2026

🚩सूर्य

🌼प्रथम भाव को सूर्य पूर्ण दृष्टि से देखता हो तो जातक रजोगुणी, नेत्ररोगी, धनी,साधुसेवी, वेदान्ती, पितृभक्त राज द्वारा सम्मानित और चिकित्सक होता है।

🌼द्वितीय भाव को देखता हो तो सामान्य सुखी, नेत्ररोगी, पशु व्यवसायी, संचित
धननाशक, परिश्रम से थोड़े धन का लाभ करनेवाला और कष्ट सहनेवाला होता है।

🌼तृतीय भाव को देखता हो तो कुलीन, राजमान्य, भाई के सुख से रहित, उद्यमी, शासक, नेता और पराक्रमी होता है।

🌼चतुर्थ भाव को देखता हो तो २२-२३ वर्ष, तक दुःखी मातृसुखी, २२ वर्ष की
आयु के पश्चात् वाहनादि सुखों को प्राप्त करनेवाला और स्वाभिमानी होता है।

🌼पंचम भाव को देखता हो तो सन्ताननाशक, पुत्र के लिए चिन्तित, मंत्रों को एवंशास्त्रों को जाननेवाला, विद्वान्, सेवावृत्ति और २०-२१ वर्ष की अवस्था में संतान प्राप्त करनेवाला होता है।

🌼छठे भाव को देखता हो तो दुःखी, वामनेत्ररोगी, ऋणी होता है।

🌼सातवें भाव को देखता हो तो ऋणी, २२-२३ वर्ष की आयु में स्त्रीनाशक, व्यापारी, उग्र स्वभाववाला और प्रारम्भ में दुःखी तथा अन्त में सुखी होता है।

🌼अष्टम भाव और दृष्टि हो तो चिकित्सक रोगी, व्यवहारिक, असत्यभाषी, पाखंडी निन्दित कार्य करने वाला होता है।

🌼नौवें भाव को देखता हो तो धर्मभीरु, बड़े भाई और साले के सुख से रहित होता है।
🌼दसवें भाव को देखता हो तो राजसम्मानित, धनी, मातृनाशक होता है।

🌼एकादश भाव को देखें तो धनलाभ करने वाला, प्रसिद्ध, व्यापार, प्रथम
और संतान नाशक बुद्धिजीवी, विद्वान, कुलीन और धर्मात्मा होता है।

🌼बारहवें भाव को देखता हो तो प्रवासी, नेत्ररोगी, कान या नाक पर तिल चिह्नधारक,शुभ कार्यों में व्यय करनेवाला, सवारी का शौकीन होता है।

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25/01/2026

Big thanks to Rupesh Kumar, Kanchan Pandey, Hemant Pandey, Abhishek Kashyap, Pramod Tiwari, Sandeep Chaturvedi, Pintu Singh Pintu Singh, Ganga Parsad, Atharva Pandey

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बेला काली माँ मंदिर
25/01/2026

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