Astrologer Avinash Pandey

Astrologer Avinash Pandey आइए अपने सनातन धर्म से जुड़े,
आइए अध्यात्म से जुड़े,एक कदम अध्यात्म की ओर,

🚩 #मकर  #लग्न की कुंडली में छठा भाव (मिथुन राशि) रोग, ऋण और शत्रुओं का कारक होता है। यहाँ शुक्र (योगकारक) होने पर करियर ...
24/03/2026

🚩 #मकर #लग्न की कुंडली में छठा भाव (मिथुन राशि) रोग, ऋण और शत्रुओं का कारक होता है। यहाँ शुक्र (योगकारक) होने पर करियर व वित्तीय वृद्धि होती है, जबकि शनि होने पर अनुशासन और शत्रुओं पर विजय मिलती है। राहु इस भाव में विदेश से लाभ और तीव्र सफलता देता है। जातक मेहनती, रणनीतिक और सेवाभावी होते हैं।
🪅मकर लग्न के छठे भाव में ग्रहों के प्रभाव:
🌱 #शुक्र (5वें और 10वें स्वामी): चूँकि शुक्र मकर लग्न के लिए योगकारक है, यहाँ होने पर यह करियर में बड़ी सफलता, रचनात्मकता और प्रेम संबंधों में समझदारी देता है। यह स्थिति सेवा-उन्मुख व्यवसायों के लिए बेहतरीन है।
🌱 #शनि (1-2 भाव का स्वामी): यदि शनि छठे भाव में हो, तो जातक को अनुशासित बनाता है। यह शत्रुओं को हराने और ऋण मुक्त होने की क्षमता देता है। यह जातक को चिकित्सा या सलाहकार के क्षेत्र में भी सफल बना सकता है।
🌱 #राहु (मिथुन राशि में): मिथुन में राहु को बहुत शुभ माना जाता है। यह जातक को कूटनीतिक बनाता है, जिससे वे प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं, राजनीति या खेलों में जीतते हैं।
🌱 #बृहस्पति (3-12 भाव के स्वामी): छठा भाव में बृहस्पति शत्रुओं के साथ-साथ आने वाली चुनौतियों से लड़ने के लिए दार्शनिक दृष्टिकोण देता है। यह व्यक्ति को उपचार (healing) की शक्तियों से जोड़ सकता है।
🌱 #सूर्य (8वें स्वामी): सूर्य के होने से जातक अपने दुश्मनों पर हावी रहता है, लेकिन यह स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही या कड़े व्यवहार का कारण भी बन सकता है।
✍️ #सामान्य #निष्कर्ष:
मकर लग्न के छठे भाव के जातक साहसी होते हैं और चुनौतियों से नहीं डरते, लेकिन उन्हें अपने स्वास्थ्य, विशेषकर पेट और पाचन क्रिया पर ध्यान देने की आवश्यकता होती है।

🚩 #धनु  #लग्न लग्न  की कुंडली में छठा भाव  वृषभ राशि का होता है, जिसका स्वामी शुक्र  है। यहाँ के मुख्य प्रभाव में व्यक्त...
24/03/2026

🚩 #धनु #लग्न लग्न की कुंडली में छठा भाव वृषभ राशि का होता है, जिसका स्वामी शुक्र है। यहाँ के मुख्य प्रभाव में व्यक्ति अपने कार्यों के प्रति अनुशासित रहता है, शत्रुओं पर विजय प्राप्त करता है, लेकिन स्वास्थ्य और कार्यस्थल पर अतिरिक्त सावधानी की आवश्यकता होती है।
🪅धनु लग्न में छठे भाव का फलादेश:
🌱स्वास्थ्य: छठे भाव में वृषभ राशि होने से गले, गले के नीचे के हिस्से, या थायराइड से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं। पाचन तंत्र को लेकर सावधान रहना चाहिए।
🌱कार्यक्षेत्र व करियर: जातक में नौकरी के प्रति बहुत समर्पण होता है। अगर कोई भी क्रूर ग्रह यहाँ हो, तो कार्यक्षेत्र में चुनौतियां आ सकती हैं, लेकिन मेहनत से सफलता मिलती है।
🌱शत्रु और संघर्ष: जातक अपने विरोधियों को मात देने में सक्षम होता है। कानूनी मामलों में अगर कुंडली के अन्य योग अच्छे हों तो विजय मिलती है, लेकिन शत्रु हमेशा सक्रिय रह सकते हैं।
🌱आर्थिक स्थिति: छठे भाव का शुक्र व्यक्ति को मेहनत के बल पर अच्छी आय देता है। हालांकि, स्वास्थ्य या अन्य समस्याओं पर खर्च भी हो सकता है।
🌱व्यक्तित्व: ऐसे व्यक्ति व्यावहारिक होते हैं और अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित रखना पसंद करते हैं। उन्हें अपने काम में नवीनता और रचनात्मकता पसंद आती है।
✍️विशेष सलाह:
धनु लग्न के जातकों को अपनी जीवनशैली में अनुशासन बनाए रखना चाहिए, क्योंकि छठा भाव संघर्ष और चुनौतियों का घर है। यह स्थिति संघर्षशील जीवन के बाद उच्च पद या सफलता की ओर संकेत करती है।

🚩 #वृश्चिक  #लग्न का स्वामी मंगल है, जो जातक को ऊर्जावान, दृढ़निश्चयी, रहस्यमयी और साहसी बनाता है। बिच्छू प्रतीक वाले इस...
23/03/2026

🚩 #वृश्चिक #लग्न का स्वामी मंगल है, जो जातक को ऊर्जावान, दृढ़निश्चयी, रहस्यमयी और साहसी बनाता है। बिच्छू प्रतीक वाले इस लग्न के लोग स्पष्टवादी होते हैं और अपने मान-सम्मान के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। ये गुप्त स्वभाव के, तीव्र भावना वाले और मेडिकल, राजनीति या रिसर्च के क्षेत्र में सफल होते हैं।
🪅वृश्चिक लग्न के मुख्य लक्षण और विशेषताएं:
🌱 #व्यक्तित्व: यह जल तत्व की स्थिर राशि है। जातक गंभीर, शोधकर्ता, और खोजी स्वभाव के होते हैं। इनमें बदला लेने की भावना भी हो सकती है।
🌱 #करियर: मेडिकल (सर्जन), पुलिस/सेना, इंजीनियरिंग, राजनीति, जासूसी, और गुप्त विद्याओं में बहुत सफल होते हैं।
🌱 #स्वास्थ्य: पित्त प्रधान प्रकृति के कारण इन्हें पेट में जलन, गैस्ट्रिक, बवासीर या रक्तचाप से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं।
🌱 #भाग्य: जीवन में शुरुआती संघर्ष के बाद, ये अपनी मेहनत के दम पर 22, 24, 28 या 32वें वर्ष में भाग्योदय प्राप्त करते हैं।
🌱 #मित्र-शत्रु ग्रह:
🌱 #शुभ: मंगल (लग्नेश), सूर्य, चंद्रमा, बृहस्पति।
🌱अशुभ: बुध (अष्टमेश/एकादशेश) और शुक्र (व्ययेश/सप्तमेश)।
🌱 #वैवाहिक #जीवन: जीवनसाथी के साथ वैचारिक मतभेद या अलगाव की संभावना रहती है। इनका वैवाहिक जीवन चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
✍️विशेष सलाह: वृश्चिक लग्न वालों को धोखा देने से बचना चाहिए और अपने गुस्से को नियंत्रित करना चाहिए। निराश न हों, क्योंकि सकारात्मक रहने पर ये जीवन में बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं।

🚩 #तुला  #लग्न लग्न  की कुंडली में छठा भाव  मीन राशि का होता है, जिसका स्वामी बृहस्पति  है। यह स्थान रोग, ऋण, और शत्रु क...
23/03/2026

🚩 #तुला #लग्न लग्न की कुंडली में छठा भाव मीन राशि का होता है, जिसका स्वामी बृहस्पति है। यह स्थान रोग, ऋण, और शत्रु का माना जाता है, लेकिन यह विकास का स्थान भी है। मीन राशि होने के कारण, जातक को कार्यस्थल पर भावनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
🪅तुला लग्न में छठे भाव के मुख्य प्रभाव:
🌱 #स्वास्थ्य और रोग : छठे भाव में मीन राशि होने से पैर, कफ, या हार्मोनल असंतुलन की समस्या हो सकती है। बृहस्पति यदि यहां कमजोर हो तो लीवर या पेट से संबंधित बीमारियां दे सकता है।
🌱 #शत्रु और प्रतियोगिता: जातक को अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है, लेकिन अंततः वे सेवा भाव या कूटनीति से विवाद सुलझा लेते हैं।
🌱 #करियर (Career): सेवा (Service), चिकित्सा (Medical), या विदेशी कार्यों से संबंधित करियर में सफलता मिलती है। जातक अक्सर NGO या समाज सेवा के क्षेत्र में भी जाता है।
🌱 #बृहस्पति (गुरु) का प्रभाव: चूंकि मीन राशि का स्वामी गुरु है, इसलिए यदि गुरु यहां स्थित हो, तो वह ज्ञान, अध्यात्म और सेवा के माध्यम से समस्याओं को दूर करने की क्षमता देता है।
🌱 #ऋण और आर्थिक स्थिति: छठा भाव ऋण का भी है। यहाँ पापी ग्रह के होने से जातक पर काम का दबाव या वित्तीय बोझ बढ़ सकता है।
✍️विशेष सलाह: छठा भाव मेहनत का है, इसलिए इस लग्न वाले जातकों को संघर्ष से घबराने के बजाय अपनी एकाग्रता और सेवा भाव का उपयोग करना चाहिए।

🚩 #कन्या  #लग्न  की कुंडली में छठा भाव  कुंभ राशि का होता है, जिसका स्वामी शनि है। इस भाव में ग्रहों की स्थिति रोग, ऋण, ...
22/03/2026

🚩 #कन्या #लग्न की कुंडली में छठा भाव कुंभ राशि का होता है, जिसका स्वामी शनि है। इस भाव में ग्रहों की स्थिति रोग, ऋण, और शत्रुओं से संघर्ष या उन पर विजय का संकेत देती है। आमतौर पर, यहाँ ग्रह सेवा, अनुशासन और मेहनत की ओर प्रेरित करते हैं।
🪅 #कन्या लग्न में छठे भाव के प्रमुख ज्योतिषीय प्रभाव:
🌱शनि (स्वराशि/मित्र राशि): शनि यहाँ शत्रुओं को परास्त करता है और करियर में कड़ी मेहनत से सफलता दिलाता है, लेकिन स्वास्थ्य के प्रति सावधानी जरूरी है।
🌱 #राहु (अशुभ/शुभ): राहु यहाँ शत्रुओं पर विजय दिलाता है और करियर में अप्रत्याशित वृद्धि या विदेश से लाभ करा सकता है।
🌱 #चंद्रमा (अशुभ): छठे भाव में चंद्रमा भावनात्मक अस्थिरता, मानसिक तनाव, माता के स्वास्थ्य में गिरावट और अनावश्यक खर्च का कारण बन सकता है।
🌱 #गुरु (अशुभ): कुंभ राशि में गुरु को आम तौर पर शुभ नहीं माना जाता, जो स्वास्थ्य और धन में रुकावटें पैदा कर सकता है। इसके लिए उपाय करना फायदेमंद हो सकता है।
🌱 #मंगल (अशुभ): मंगल यहां संघर्ष और कानूनी मामलों में उलझा सकता है।
✍️विशेष सलाह: छठे भाव में कोई भी ग्रह हो, नियमित योग, ध्यान और स्वास्थ्य की जांच जरूरी है, क्योंकि कन्या राशि का छठा भाव पाचन तंत्र से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं को नियंत्रित करता है।

🚩 #सिंह  #लग्न के लिए चौथा भाव (सुख भाव) वृश्चिक राशि का होता है, जिसका स्वामी मंगल है। इस भाव में मंगल का होना बहुत अच्...
22/03/2026

🚩 #सिंह #लग्न के लिए चौथा भाव (सुख भाव) वृश्चिक राशि का होता है, जिसका स्वामी मंगल है। इस भाव में मंगल का होना बहुत अच्छा माना जाता है, क्योंकि यह 'रुचक महापुरुष योग' बना सकता है, जिससे भूमि, वाहन और सुख-साधन मिलते हैं। हालाँकि, यहाँ मंगल होने से पारिवारिक कलह या माता के स्वास्थ्य में थोड़ी परेशानी हो सकती है, लेकिन व्यक्ति साहसी और दृढ़ निश्चयी होता है।
🪅 #सिंह लग्न में चतुर्थ भाव के मुख्य प्रभाव:
🌱मंगल का प्रभाव (सर्वश्रेष्ठ स्थिति): यदि मंगल 4थे भाव में है, तो जातक को अचल संपत्ति (घर, जमीन) और वाहन का सुख मिलेगा, खासकर यदि यह योगकारक बनकर वहां बैठे।
🌱 #व्यक्तित्व: जातक अपनी माता के करीब होता है और उसमें एक तरह का राजसी भाव होता है। घर के मामले में वह नियंत्रण रखना पसंद करता है।
🌱भावात्मक स्थिति: चूँकि वृश्चिक एक भावुक और गुप्त राशि है, जातक अपने घर के माहौल को लेकर बहुत गंभीर होता है।
🌱 #अन्य #ग्रह:
सूर्य/बुध (बुधादित्य): शिक्षा और घर में प्रसिद्धि दिलाता है।
शनि: यदि यहाँ हो, तो घर में अनुशासनात्मक माहौल होता है लेकिन पारिवारिक सुख में बाधा आ सकती है।
🌱 #गुरु: यदि यहाँ हो, तो घर के सुखों में थोड़ी कमी या जन्मस्थान से दूरी हो सकती है।
🌱 #सकारात्मक और #नकारात्मक परिणाम:
मंगलीक भंग योग: यदि मंगल स्वराशि (वृश्चिक) में है, तो यह योग बनता है, जो शुरुआत में परेशानी के बाद बहुत सफलता देता है।
विवाद: घर में बार-बार अशांति या रिश्तों में मतभेद की संभावना हो सकती है।

🚩 #कर्क  #लग्न  की कुंडली में छठा भाव (धनु राशि) रोग, ऋण और शत्रुओं का घर होता है, जिसका स्वामी बृहस्पति है। इस भाव में ...
22/03/2026

🚩 #कर्क #लग्न की कुंडली में छठा भाव (धनु राशि) रोग, ऋण और शत्रुओं का घर होता है, जिसका स्वामी बृहस्पति है। इस भाव में ग्रह ऋण प्रबंधन, स्वास्थ्य, सेवा और दैनिक दिनचर्या में संघर्ष को प्रभावित करते हैं। यहाँ स्थित ग्रहों के अनुसार परिणाम मिलते हैं, जैसे राहु-चंद्रमा मानसिक तनाव, सूर्य-मंगल साहस और संघर्ष, तथा बृहस्पति ज्ञान प्रदान कर सकते हैं।
🪅कर्क लग्न में छठे भाव के मुख्य प्रभाव:
🌱स्वास्थ्य और भावनात्मक स्थिति: चूँकि छठा भाव 'दुस्थान' है, यहाँ चंद्रमा की उपस्थिति (प्रथमेश होकर) स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता और भावनात्मक संघर्ष को दर्शाती है। ऐसे व्यक्तियों को अपनी भावनाओं को अनुशासित रखने की आवश्यकता होती है।
🌱 #ऋण और #वित्तीय #संघर्ष: यदि सूर्य (दूसरे भाव के स्वामी) यहाँ हों, तो पारिवारिक संपत्ति का उपयोग मुकदमेबाजी में हो सकता है, जिससे वित्तीय अस्थिरता आती है।
🌱 #शत्रु और विवाद: छठे भाव में मंगल की स्थिति (योगकारक होकर) शत्रुओं पर विजय दिलाती है, लेकिन यह दैनिक जीवन में उच्च ऊर्जा और संघर्ष का कारण भी बनती है।
🌱 #कार्यक्षेत्र : यहाँ ग्रह स्थित होने से व्यक्ति सेवा, तकनीकी, या कानून के क्षेत्र में मेहनत के बाद सफलता प्राप्त करते हैं।
🌱बृहस्पति की स्थिति: यदि गुरु (छठे भाव के स्वामी) स्वयं छठे भाव में हों, तो यह विपरीत राजयोग की तरह काम कर सकता है, जिससे व्यक्ति शत्रुओं को मित्र बना लेता है और ज्ञान के माध्यम से समस्याओं को सुलझाता है।
✍️ #उपाय:
इस भाव से संबंधित नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए, नियमित दिनचर्या, शारीरिक व्यायाम, और अपने कार्यस्थल पर अनुशासित रहना महत्वपूर्ण है।

🚩 #मिथुन  #लग्न में छठे भाव में वृश्चिक राशि होती है, जिसका स्वामी मंगल है। यह स्थान संघर्ष, रोग, ऋण और शत्रुओं का होता ...
21/03/2026

🚩 #मिथुन #लग्न में छठे भाव में वृश्चिक राशि होती है, जिसका स्वामी मंगल है। यह स्थान संघर्ष, रोग, ऋण और शत्रुओं का होता है। मंगल या राहु की यहां उपस्थिति व्यक्ति को अत्यंत साहसी, प्रतिस्पर्धी और शत्रुओं पर विजयी बनाती है। ऐसा जातक चतुर, मेहनती और कानून या चिकित्सा के क्षेत्र में सफल हो सकता है, लेकिन स्वास्थ्य (विशेषकर पाचन) व क्रोध पर नियंत्रण की आवश्यकता होती है।
🪅मिथुन लग्न के छठे भाव के मुख्य प्रभाव:
🌱शत्रुओं पर विजय और साहस: मंगल के स्वगृही या उच्च (यदि राशि विशेष हो) होने से व्यक्ति निर्भीक होता है और विरोधियों को परास्त करता है।
🌱 #करियर में सफलता: यह स्थिति नौकरी, प्रबंधन, या मेडिकल के क्षेत्र में सफलता दिलाती है। आप चुनौतियों से निडर होकर लड़ते हैं।
🌱 #स्वास्थ्य संबंधी सावधानी: पाचन तंत्र, लीवर या गुप्त रोगों के प्रति सचेत रहना चाहिए। मानसिक शांति के लिए योग और व्यायाम आवश्यक है।
🌱 #राहु का प्रभाव: यदि राहु छठे भाव में हो, तो यह आपको जातक को अजेय बनाता है और रणनीति के माध्यम से संघर्षों में विजय दिलाता है।
🌱 #व्यावहारिक #दृष्टिकोण: आप जीवन की समस्याओं को सुलझाने के लिए व्यावहारिक और कूटनीतिक रवैया अपनाते हैं।
✍️ #उपाय:
प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करें।
मंगलवार को व्रत रखें या हनुमान जी की पूजा करें।
गुड़ या मसूर की दाल का दान करें।

🚩वृषभ राशि  में छठा भाव दैनिक दिनचर्या, स्वास्थ्य और कार्यस्थल में स्थिरता, संतुलन और व्यावहारिकता को दर्शाता है। यह स्थ...
21/03/2026

🚩वृषभ राशि में छठा भाव दैनिक दिनचर्या, स्वास्थ्य और कार्यस्थल में स्थिरता, संतुलन और व्यावहारिकता को दर्शाता है। यह स्थिति व्यक्ति को अनुशासित बनाती है, लेकिन स्वास्थ्य के प्रति जिद्दी रवैया या दिनचर्या में बदलाव के प्रति प्रतिरोध भी पैदा कर सकती है। जातक अपनी मेहनत से दुश्मनों और कर्जों पर नियंत्रण पाने में सक्षम होते हैं।
🌄वृषभ राशि में छठे भाव का विस्तृत विवरण:
🌱स्वास्थ्य और दिनचर्या: यह स्थिति उत्तम स्वास्थ्य की ओर इशारा करती है। जातक अपनी दिनचर्या को लेकर बहुत अनुशासित होते हैं और जो आदतें अपनाते हैं, उन्हें लंबे समय तक निभाते हैं। हालांकि, अपनी पसंद के अनुसार काम करने के कारण वे कभी-कभी हठधर्मी हो सकते हैं और स्वास्थ्य संबंधी सलाह को नजरअंदाज कर सकते हैं।
🌱कार्यस्थल और चुनौतियाँ: कार्यक्षेत्र में, जातक एक भरोसेमंद, मेहनती और स्थिर कर्मचारी के रूप में देखे जाते हैं। वे व्यावहारिक रूप से समस्याओं का समाधान करने के लिए तर्क का उपयोग करते हैं। यदि कोई शत्रु या बाधा आती है, तो वे दृढ़ता से उसका सामना करते हैं।
🌱व्यक्तित्व पर प्रभाव: वृषभ के छठे भाव में होने के कारण व्यक्ति थोड़ा जिद्दी हो सकता है और अक्सर सलाह लेने के बजाय अपनी योजनाओं पर चलना पसंद करता है। यह स्थिति स्वास्थ्य के मामले में आराम करने और अत्यधिक काम के बोझ से बचने का संकेत देती है।
🌱विशेष स्थितियाँ (ग्रहों के अनुसार):
🪅शनि: वृषभ लग्न के लिए शनि का छठे भाव में होना करियर के लिए शुभ है, क्योंकि यह उच्च पद प्रदान कर सकता है, हालांकि वैवाहिक जीवन में चुनौतियाँ आ सकती हैं।
🪅सूर्य: यदि वृषभ लग्न में सूर्य छठे भाव में हो, तो यह एक साहसी स्थिति है जो प्रतिस्पर्धा में सफलता दिला सकती है।

🚩मेष राशि  की कुंडली में छठा भाव (कन्या राशि) आमतौर पर शत्रुओं पर विजय, कठिन परिश्रम से सफलता और स्वास्थ्य में उतार-चढ़ा...
18/03/2026

🚩मेष राशि की कुंडली में छठा भाव (कन्या राशि) आमतौर पर शत्रुओं पर विजय, कठिन परिश्रम से सफलता और स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव लेकर आता है। यहाँ स्थित ग्रह कड़ी प्रतिस्पर्धा में लाभ करा सकते हैं, लेकिन मानसिक तनाव या पेट से जुड़ी समस्याएं भी संभव हैं। यह भाव सेवा और शत्रुओं को दबाने के लिए अच्छा माना जाता है।
🚩मेष राशि में छठे भाव का फलादेश:
🌱शत्रु और संघर्ष: छठा भाव शत्रुओं का होता है, इसलिए मेष राशि के जातक अपने शत्रुओं पर हावी रहते हैं और उन्हें परास्त करते हैं।
🌱स्वास्थ्य: छठे भाव में कन्या राशि होने के कारण, जातकों को पेट, पाचन क्रिया, या त्वचा से संबंधित छोटी-मोटी बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है।
🌱करियर और प्रतिस्पर्धा: इस स्थान पर मेष राशि वालों को प्रतियोगिता, नौकरी और प्रतियोगी परीक्षाओं में कड़ी मेहनत के बाद सफलता मिलती है।
🌱व्यय (खर्च): यदि यहाँ पर पाप ग्रह (जैसे शनि या राहु) हों, तो कर्ज की स्थिति या अचानक स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ सकता है।

🚩मार्च 2026 में प्रमुख ग्रहों का राशि परिवर्तन हो रहा है, जिसमें 14-15 मार्च को सूर्य कुंभ से मीन राशि में प्रवेश करेंगे...
18/03/2026

🚩मार्च 2026 में प्रमुख ग्रहों का राशि परिवर्तन हो रहा है, जिसमें 14-15 मार्च को सूर्य कुंभ से मीन राशि में प्रवेश करेंगे, जिससे मीन संक्रांति और खरमास शुरू होगा। साथ ही, शुक्र 2 मार्च से 26 मार्च तक मीन राशि में उच्च के होकर गोचर कर रहे हैं। यह समय मेष, मिथुन, सिंह और धनु जैसी राशियों के लिए करियर और धन के मामले में शुभ रहेगा।

🚩प्रमुख राशि परिवर्तन विवरण:
सूर्य का मीन राशि में गोचर (14-15 मार्च 2026): सूर्य कुंभ से मीन राशि में आ रहे हैं, जिससे 16 मार्च के बाद से विवाह आदि शुभ कार्यों पर रोक (खरमास) लग जाएगी। यह समय आध्यात्मिक विकास और नौकरी में बदलाव के लिए अच्छा माना जा रहा है।
शुक्र का मीन राशि में गोचर (2-26 मार्च 2026): शुक्र अपनी उच्च राशि मीन में गोचर कर रहे हैं, जो सुख-सुविधा, रचनात्मकता और आर्थिक समृद्धि के लिए बेहद शुभ है।
मंगल का कुंभ राशि में गोचर (23 फरवरी 2026 से): मंगल मकर से कुंभ राशि में आ चुके हैं, जो मेष, वृषभ, कन्या और धनु के लिए अनुकूल, लेकिन अन्य के लिए मिश्रित फल दे सकता है।

🚩राशियों पर प्रभाव:
शुभ प्रभाव (मेष, वृषभ, कन्या, धनु, सिंह): इन राशियों को करियर में उन्नति, प्रमोशन, नए अवसर और अटके हुए धन की प्राप्ति हो सकती है।
सावधानी (मिथुन, कर्क, तुला, कुंभ): जोखिम लेने से बचें और स्वास्थ्य का ध्यान रखें।

🚩उपाय:
सूर्य देव को नियमित जल अर्पित करें और रविवार को हनुमान जी की पूजा करें, इससे नकारात्मक प्रभाव कम होंगे।

18/03/2026

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