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08/08/2020
COVID-19 Presentations
19/03/2020

COVID-19 Presentations

Malaria vaccine is called Masquirix. Dose- 4 doses I/M starting from age 5 months in children. 3 doses are given at mont...
28/04/2019

Malaria vaccine is called Masquirix. Dose- 4 doses I/M starting from age 5 months in children. 3 doses are given at monthly intervals like D.P.T. Booster; ie. 4th dose is given at 2 years of age.
Efficacy - 39% reduction in ordinary malaria incidence. 29% reduction in severe malaria.

07/04/2018

" *मध्य प्रदेश सरकार की पहल*"
➖➖➖➖➖➖
*7 अप्रैल 2018 से सभी टीकाकरण केंद्रों पर पीसीबी (न्यूमोकोकल निमोनिया)का टीका*
*💉अब मुफ्त में लगेगा, यह टीका बाजार में 3000 में मिलता हैं,जो कि अब सभी टीकाकरण केंद्र,जिला अस्पताल पर नि:शुल्क लगेगा और यह टीका इंजेक्शन से लगाया जाने वाला टीका है,*
यह टीका
" *न्यूमोकोकल निमोनिया और मेंनिंजाइटिस*"...........................
से संरक्षण प्रदान करता है,
******************
*यह टीका 1 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को* "

*डेढ़ माह,*
💉 *साढे तीन माह*
💉 *9माह, की उम्र*
💉" *तीन खुराक*
दी जायेगी
☘☘☘☘☘☘

🌻 *पीसीबी का टीका प्रदेश में "निमोनिया और मैनिंजाइटिस" से होने वाले बच्चों की मृत्यु को रोकने में सहायक होगा*

7-4-2018 से प्रारंभ होने वाले पीसीबी टीका का लाभ ले और अपने बच्चे को निमोनिया और मैनिंजाइटिस जैसी बीमारियों से बचाएं और स्वस्थ बनाएं*
और अपने आसपास के लोगों को भी *जानकारी* प्रदान करें"।

27/09/2016

Vaccination schedule children & adults --
(Govt scheduled under UIP)

At birth (within 24hr) - BCG, OPV & Hepatitis B
6 weeks (1 1/2 month) - OPV1, fIPV1 & Penta 1
10 weeks (2 1/2 month) - OPV2, Penta 2
14 weeks (3 1/2 month) - OPV3, fIPV2 & Penta 3
9 - 12 month - Measles 1 & Vit A 1st dose
16 - 24 month - Measles 2 & Vit A 2nd dose
5 - 6 Year - DPT booster & OPV booster.
10 - 11 Year - TT
16 - 17 Year - TT
Pregnancy - 2 TT doses apart 1 month.

Other vaccines - Private Scheduled
MMR, Rotavirus, PCV, meningococcal, Hepatitis A etc.

Adults Vaccination - Private Scheduled

Typhoid vaccine -
0, 2, 4 & 6 days in cap form every 2yr
or injection every 5 year
Flue vaccine - every year
Hepatitis B - 0, 1, 3 or 0, 3, 6 monthly schedule
HPV (only in Females) - injectable

27/09/2016

Cough History :-

Positive history - To rule out important diseases in acute or chronic conditions.
Acute conditions _
(1) Acute dry cough with RD_Foreign body choking (ARDS)
(2) Wheezing cough_Asthma Attack
(3) Cough with cold, Crepitus, rales or wheez_URTI & LRTI
(4) Coughing on phonation_Vocal cord paralysis
(5) Coughing on swallowing_Vagus Nerve paralysis

Negative History - To rule out important suspected diseases of chronic conditions.
(1) Breathlessness_Lung diseases - Cystic Fibrosis, BPD etc
(2) Dyspnea, PND, BHS_Heart Diseases - Septal, Valvular diseases etc
(3) Distension or Dehydration_Abdominal Diseases - Ascitis, Acidosis, ARF, CRF etc
(4) Pallor_Anemia - Nutritional, Hemolytic
(5) Other Diseases - Tuberculosis(Productive cough), Pneumonia(Purulent cough), Plural effusion, Pluerisy, consolidation etc.

27/09/2016

Navbharat Times: भारत में जन्म लेने वाली हर बच्ची के लिए 11,000 रुपये फिक्स्ड डिपॉजिट करेगी ऑक्सी
http://nbt.in/2_zuoZ/baa via : http://app.nbt.in

08/10/2015

जानें, वायरल फीवर के क्या हैं लक्षण

मौसम के बदलने के समय वायरल फीवर होता है। जब भी मौसम बदलता है तब तापमान के उतार-चढ़ाव के कारण शरीर का इम्यून सिस्टम थोड़ा कमजोर हो जाता है जिसके कारण वायरस से शरीर जल्दी संक्रमित हो जाता है। वैसे तो वायरल फीवर के लक्षण अन्य आम फीवर के तरह ही होते हैं मगर इसको नजर अंदाज करने पर अवस्था गंभीर हो सकती है। फीवर होने के प्रथम अवस्था में गले में दर्द, थकान, खाँसी आदि होता है। जिसको लोग नजरअंदाज कर देते हैं, और इसी नजर अंदाज के कारण वायरस को पनपने में आसानी होती है।

वायरल फीवर के खास लक्षण ये हैं-
* थकान
* मांसपेशियों या बदन में दर्द
* तेज बुखार
* खांसी
* जोड़ो में दर्द
* दस्त
* त्वचा के ऊपर रैशज़
* सर्दी
* गले में दर्द
* सर दर्द
* आंखों में लाली और जलन का अनुभव
* ग्रस्नी में सूजन

08/10/2015

वायरल फीवर से राहत पाने के घरेलू उपचार


मौसम के बदलने के समय वायरल फीवर होता है। जब भी मौसम बदलता है तब तापमान के उतार-चढ़ाव के कारण शरीर का इम्यून सिस्टम थोड़ा कमजोर हो जाता है। इस फीवर से बचने और निजात पाने के लिए दवाईयों के अलावा कई घरेलू उपाय हैं, जिससे जल्द राहत मिल जाती है।

पढें, वायरल फीवर के क्या हैं लक्षण

सूखे अदरक का मिश्रण- अदरक के अनगिनत स्वास्थ्य संबंधी गुण होते हैं। इसका एन्टी- इन्फ्लैमटोरी और एन्टी-ऑक्सिडेंट गुण बुखार के लक्षणों से राहत दिलाने में सहायता करते हैं। सूखा अदरक, एक छोटा चम्मच हल्दी और एक छोटा चम्मच काली मिर्च का पावडर और थोड़ा-सा चीनी एक कप पानी में डालकर तब तक उबालें जब तक कि सुखकर आधा न हो जाये। दिन में चार बार इस काढ़े को पीने से बुखार से राहत मिलता है।

तुलसी- तुलसी का एन्टी बायोटीक और एन्टी बैक्टिरीअल गुण वायरल फीवर के लक्षणों से राहत दिलाने में बहुत मदद करते हैं। बीस ताजा तुलसी के पत्तों को एक लीटर पानी में एक चम्मच लौंग पावडर डालकर तब तक उबालें जब तक कि वह सुख कर आधा न हो जाये। उसके बाद उसको छानकर हल्का ठंडा करके दो घंटा के अंतराल में पीयें।

मेथी का जल- मेथी में बहुत सारे औषधिय गुण होते हैं जो वायरल फीवर के कष्टों से राहत दिलाने में सहायता करते हैं। एक कप पानी में एक बड़ा चम्मच मेथी के दाने रात भर भिगोकर रखें। अगले दिन सुबह इसको छानकर निश्चित अंतराल में इसका सेवन करें। सुबह मेथी के दाने, नींबू का रस और शहद के मिश्रण का सेवन करने से भी कुछ हद तक बुखार से राहत मिलता है।

धनिया चाय- धनिया में फाइटोनूट्रीअन्ट और विटामिन होता है जो प्रतिरक्षी तंत्र को उन्नत करने में बहुत सहायता करता है। धनिया प्राकृतिक तरीके से वायरल फीवर से लड़ने में मदद करता है। एक गिलास पानी में एक बड़ा चम्मच धनिया के दाने डालें और उसको थोड़ा उबाल लें। उसके बाद कप में छानकर स्वाद के अनुसार थोड़ा-सा दूध और चीनी डालकर पीने से बुखार से राहत मिलता है।

सोआ का काढ़ा- यह शरीर के प्रतिरक्षी तंत्र को तो उन्नत करता ही है साथ ही बुखार को कम करने में भी सहायता करता है। फल्वेनॉयड और मोनोटर्पीन के गुण होने के कारण यह फीवर से राहत दिलाने में मदद कर पाता है। एक कप पानी में एक बड़ा चम्मच सोआ के दाने, एक छोटा चम्मच काली मिर्च और एक छोटा चम्मच कलौंजी डालकर दस मिनट तक उबालें। उबालने के बाद एक कप में छान लें और उसमें एक चुटकी दालचीनी का पावडर डालकर अच्छी तरह से मिला लें। काढ़ा को पीने से बुखार से राहत मिलेगी।

राइस स्टार्च- उपचार का यह तरीका बहुत पुराना है। यह शरीर से विषाक्त पदार्थ को निकालने में बहुत मदद करता है। जिससे प्रतिरक्षी तंत्र को वायरस से लड़ने में शक्ति मिलती है। राइस स्टार्च पौष्टिकता से भरपूर होता है इसलिए इसके सेवन से रोगी को शक्ति मिलती है।

03/10/2015

सेहत और लुक्स दोनों को लेकर दुनिया में जागरूकता दिन ब दिन बढ़ रही है। ऐसे में वजन बढ़ने की समस्या को लेकर चिंतित होना लाजिमी है। वजन के चलते आप एक दिन भी अपनी मॉर्निंग वॉक या जिम क्लास को मिस नहीं करना चाहते। लेकिन क्या सिर्फ वजन घटाना काफी है?

बढ़ते हुए वजन को कम करने में जुटा हर इंसान रोज एक बात जरूर सोचता है कि कैसे एक्सट्रा वजन कम किया जाए। हो सकता है आपने वजन कम कर लिया हो और स्लिम बॉडी भी हासिल कर ली हो, लेकिन क्या आप चुस्त-तंदुरुस्त भी हैं?

वजन घटाने के साथ-साथ फिटनेस होना भी बेहद जरूरी है। सिर्फ स्लिम होने का मतलब फिट होना नहीं होता। फिटनेस का मतलब है पूरी तरह से अच्छी सेहत और ये सिर्फ अच्छे खानपान और वर्जिश से ही हासिल की जा सकती है।

ये जानना बेहद जरूरी है कि फिटनेस का मतलब वजन घटाना होता है, लेकिन सिर्फ वजन घटाने का मतलब फिट होना नहीं होता। अब अस्वस्थ तरीके से भी वजन घटा सकते हैं। फिटनेस के लिये अच्छा खाना, अच्छा आराम, अच्छी एक्सरसाइज सबकुछ बेहद जरूरी है।

वजन घटाने के चक्कर में अक्सर आपका पाचन तंत्र बिगड़ जाता है। डाइट में हुए परिवर्तन से बिगड़े पाचन तंत्र को एक्सरसाइज के जरिये ठीक किया जा सकता है। इसके लिये ठीक से सांस लेना, चलना और दूसरी शारीरिक गतिविधियों की मदद भी ली जा सकती है।

फिटनेस आपकी स्किन को भी हेल्दी बनाती है। जबकि सिर्फ वजन घटाने से आपका श्वसन तंत्र प्रभावित हो सकता है। फिट रहने से आपका हृदय में स्मूद ब्लड और ऑक्सीजन सर्कुलेशन, स्वस्थ फेफड़े, कॉर्डियोवेस्कुलर सिस्टम भी सुधरता है।

शारीरिक फिटनेस का मतलब सिर्फ शरीर की मजबूती नहीं बल्कि मानसिक मजबूती से भी है। सभी शारीरिक गतिविधियां आपको मानसिक तौर पर भी मजबूत बनाती है। वजन घटाने की जल्दी आपको मानसिक दबाव का शिकार बना सकती है। एक्सरसाइज करने से आपके मसल्स में सुधार होगा और आपकी पूरी पर्सनैलिटी निखरेगी।

तो खुश रहने के लिये अब सिर्फ वजन मत घटाइये बल्कि फिटनेस पर ध्यान दीजिये।

03/10/2015

मोटापा कम करने के लिए यूं तो कई घरेलू नुस्खे कारगर साबित होते है लेकिन नए शोध यह बताते है कि लाल मिर्च वजन कम करने में सहायक होता है। एक अध्ययन के मुताबिक खाने में लाल मिर्च का इस्तेमाल करने से पेट की नर्व्स की क्रिया पर असर पड़ता है, जिससे आप ज्यादा खाने से बचते हैं।

लाल मिर्च कई तरह के उपयोगी तत्व भी पाएं जाते हैं। जैसे अमीनो एसिड, एस्कार्बिक एसिड, फोलिक एसिड, सिट्रीक एसिड, मैलिक एसिड, मैलोनिक एसिड, सक्सीनिक एसिड, शिकिमिक एसिड, आक्जेलिक एसिड, क्युनिक एसिड, कैरोटीन्स , क्रिप्तोकैप्सीन, बाई-फ्लेवोनाईड्स, कैप्सेंथीन, कैप्सोरूबीन डाईएस्टर, आल्फा-एमिरिन, कोलेस्टराल, फायटोफ्लू, कैप्सीडीना, कैप्सी-कोसीन, आदि तत्व पाएं जाते हैं।

लाल मिर्च के सेवन से शरीर का मेटॉबालिज्म तेज होता है । यह एक पाचन उत्तेजक है जो वजन में कम करने में सहायक होता है। लाल मिर्च आपके वजन को संतुलित करने में इसलिए मददगार होता है क्योंकि इससे सेवन से अनावश्यक कैलोरी बर्न होती है और शरीर में ज्यादा फैट नहीं बन पाता है। शोध के मुताबिक खाने में लाल मिर्च का पाउडर मिलाने से आपकी मेटॉबालिज्म की प्रक्रिया तेज होती है और भोजन के बाद शरीर से अवांछित कैलोरी कम होती है और इससे आपका वजन नहीं बढ़ता है। अगर वजन ज्यादा है तो तेजी से कम होता चला जाता है।

शोध के मुताबिक कोई व्यक्ति आहार में हाई फैट डाइट और लाल मिर्च लेता है, तो खाने में मौजूद रिसेपटर (अभिग्राहक) आपको सिगनल देकर भरा हुआ महसूस कराते हैं। जब हमारा पेट भर जाता है, तो उसमें खिंचाव होने लगता है, जो कि नर्व्स को सक्रिय कर हमें भरा होने का अहसास कराता है। लाल मिर्च में कैपसाइसिन नामक पदार्थ होता है, जो व्यक्ति को ज्यादा खाना खाने से रोकता है।

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