16/12/2025
स्जोग्रेन की बीमारी:एक ही शैतान, सौ रूप
स्जोग्रेन कोई ढोल नगाड़े बजाकर नहीं आती।
चुपचाप आती है, कुर्सी खींचकर बैठती है,
और जब तक समझ आए कि गड़बड़ है,
तब तक अपनी जड़ें जमा चुकी होती है।
अक्सर पहचान सूखेपन से होती है।
आँखें ऐसी जलें जैसे धूल उड़ गई हो।
मुँह इतना सूखा कि रोटी भी पानी माँग ले।
कई बार दाँतों वाला डॉक्टर पहले पकड़ लेता है,
डॉक्टर बाद में।
यहीं ज़्यादातर लोग सोच बंद कर देते हैं।
“बस यही बीमारी है।”
और यहीं से असली खेल शुरू होता है।
देखने में सीधी साधी:
सूखी आँखें।
सूखा मुँह।
किताबों वाली बीमारी।
और बाकी परेशानी से ध्यान हटाने में माहिर।
जान निचोड़ने वाली:
ये वो थकान नहीं जो दो दिन आराम से ठीक हो जाए।
ये वो थकान है जो सुबह उठते ही चिपक जाती है।
जोड़ दुखते हैं, पर सूजते नहीं।
मरीज़ देखने में ठीक,
अंदर से पूरी तरह थका हुआ।
नसों में आग लगाने वाली:
जलन।
सुलगन।
ऐसी दर्द जैसे पैरों में आग जल रही हो।
अक्सर जवाब मिलता है
“विटामिन की कमी होगी”
या
“दिमाग़ का वहम है।”
यहीं एक हाल का किस्सा याद आता है।
हाल ही में Cosmos Hospital, मुरादाबाद में मेरे पास एक मरीज़ आई।
सालों से उसे रुमेटॉइड आर्थराइटिस बताया जा रहा था।
कारण सिर्फ़ इतना था कि उसका RF पॉज़िटिव था।
जोड़ों में सूजन नहीं।
एक्स रे सामान्य।
पर इलाज चलता रहा।
वो मेरे पास जोड़ दर्द लेकर नहीं आई थी।
वो आई थी दोनों पैरों में
ऐसी जलन लेकर
जो रात को सोने नहीं देती थी
और चलना मुश्किल कर देती थी।
मैंने, डॉ. पुनीत श्रीवास्तव,
थोड़ा रुककर पूरी बात सुनी।
ठीक से जाँच करवाई।
और नर्व कंडक्शन स्टडी कराई।
तब असली तस्वीर सामने आई।
स्जोग्रेन सिंड्रोम।
नसों पर असर।
RF तो बस भटकाने वाला नंबर निकला।
असल बीमारी नसों में बैठी थी।
फेफड़ों में चुपचाप बैठने वाली:
सूखी खाँसी जो महीनों नहीं जाती।
साँस फूलना जो धीरे धीरे बढ़ता है।
एक्स रे कुछ नहीं बताता।
CT स्कैन सच दिखा देता है।
अंदर से खेल बिगाड़ने वाली
किडनी बाहर से ठीक दिखती है,
अंदर से गड़बड़ करती रहती है।
पोटैशियम गिर जाता है।
शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है।
कभी कभी अचानक हालत खराब।
रोज़ नया भेस बदलने वाली:
नीले बैंगनी दाग।
ठंड में उँगलियाँ सफ़ेद पड़ जाना।
अजीब अजीब चकत्ते।
आज किसी और बीमारी जैसी।
कल किसी और जैसी।
जहाँ मज़ाक बिल्कुल नहीं
गाँठें सूजकर बैठ जाती हैं।
वज़न बिना वजह घटने लगता है।
यहाँ हँसी मज़ाक बंद।
लिंफोमा कम होता है,
पर नामुमकिन नहीं।
आख़िरी बात, साफ़ साफ़:
स्जोग्रेन सिर्फ़ सूखापन नहीं है।
वो तो बस शुरुआत है।
हर RF सच नहीं बोलता।
हर जलन वहम नहीं होती।
और पैरों की आग
कभी कभी बीमारी की असली पहचान होती है।
एक ही शैतान।
सौ रूप।