28/12/2025
Crohn’s Disease और Ulcerative Colitis में क्या अंतर है, यह जानना बहुत ज़रूरी है क्योंकि दोनों ही आंतों से जुड़ी गंभीर और लंबे समय तक चलने वाली बीमारियाँ हैं। आमतौर पर लोग इन्हें एक ही समस्या समझ लेते हैं, जबकि इनके प्रभाव, फैलाव और इलाज में स्पष्ट अंतर होता है।
Ulcerative Colitis मुख्य रूप से बड़ी आंत यानी कोलन को प्रभावित करती है। इसमें आंत की अंदरूनी परत में सूजन और घाव बन जाते हैं। इसके प्रमुख लक्षणों में बार-बार दस्त आना, मल में खून आना, पेट दर्द, थकान और कमजोरी शामिल हैं। यह बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है और सही समय पर इलाज न मिलने पर गंभीर रूप ले सकती है।
वहीं Crohn’s Disease पाचन तंत्र के किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकती है, मुँह से लेकर मलद्वार तक। इसमें सूजन आंत की पूरी दीवार तक फैल सकती है, जिससे तेज़ पेट दर्द, वजन कम होना, पोषण की कमी, आंत में संकुचन या फिस्टुला जैसी जटिलताएँ हो सकती हैं। कई मामलों में लंबे समय तक इलाज और विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है।
इन दोनों बीमारियों में सही और समय पर जाँच बहुत महत्वपूर्ण होती है। आधुनिक एंडोस्कोपी, कोलोनोस्कोपी, ईआरसीपी और ईयूएस जैसी जाँच विधियों से बीमारी की सही पहचान कर प्रभावी उपचार संभव है। यदि पेट से जुड़ी समस्या लंबे समय से बनी हुई है, तो इसे नज़रअंदाज़ करना नुकसानदायक हो सकता है।
पेट, आंत, लिवर और पैंक्रियाज़ से जुड़ी बीमारियों के विशेषज्ञ से परामर्श लेकर आप सही दिशा में इलाज शुरू कर सकते हैं।
डॉ. ठाकुर प्रशांत सिंह
इंटेस्टाइन, लिवर और पैंक्रियाज़ रोग विशेषज्ञ
एमबीबीएस, एमडी, डीएम (गैस्ट्रोएंटरोलॉजी)
पूर्व सहायक प्रोफेसर, एसजीपीजीआई, लखनऊ
पूर्व सहायक प्रोफेसर, बीआरडी मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर
डायग्नोस्टिक और थेरेप्यूटिक एंडोस्कोपी, ईआरसीपी और ईयूएस विशेषज्ञ
एंडोस्कोपी, कोलोनोस्कोपी और ईआरसीपी की सुविधा उपलब्ध
क्लिनिक का पता
स्कोप डाइजेस्टिव क्लिनिक
खजांची चौराहा, केनरा बैंक के नीचे
मेडिकल कॉलेज रोड, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश
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