20/12/2025
कैंसर के इलाज को लोगों के घर तक पहुंचाकर देखभाल की कमी को दूर करने के दृष्टिकोण से हनुमान प्रसाद पोद्दार कैंसर अस्पताल एवं शोध संस्थान, गीता वाटिका, गोरखपुर ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी- देवरिया के सहयोग से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, पिपरा दौलाकदम, देवरिया, के प्रांगण में दिनांक 19 दिसंबर, 2025, दिन शुक्रवार, को प्रातः 10:00 बजे से शाम 3:00 बजे तक एक नि:शुल्क कैंसर की प्राथमिक जांच एवं प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया। भीषण ठंड और व्यापक कोहरे के बावजूद 86 मरीज आए और उन्होंने अपने मुँह, मसूड़ों, गले, फेफड़ों, स्तन, बच्चेदानी आदि में हो रही समस्याओं को कैंसर अस्पताल के चिकित्सक डॉ. राकेश श्रीवास्तव को दिखाया तथा इनमें कैंसर होने के लक्षण की जांच कराई। सभी लोगों की समस्या देखकर तथा जांचकर उचित निशुल्क दवाई दी गई तथा दुर्दांत कैंसर रोग के प्रकार एवं उनके लक्षण के सम्भावित मरीजों एवं उनके परिजनों को प्रशिक्षण तथा इलाज के बारे में जानकारी दी गई।
कैंसर जागरूकता अभियान के तहत इस स्वास्थ्य केंद्र से संबंधित ए. एन. एम., जी. एन. एम., आशा संगिनी एवं आशा कार्यकर्ताओं तथा अस्पताल में आए सभी लोगों को डॉ. राकेश श्रीवास्तव ने समझाया कि खान-पान में गलत आदतें, दोषपूर्ण जीवन शैली, प्रदूषण के अलावा हानिकारक रसायनों के अधिक संपर्क में रहने के कारण कैंसर का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है। संयमित जीवन शैली व उचित खान- पान रखकर और धूम्रपान, शराब, गुटका तंबाकू उत्पाद, खैनी, दोहरा, हुक्का, आदि के सेवन से परहेज करने मात्र से कैंसर के खतरों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। मुख कैंसर के लक्षण मुंह में छाले व सफेद दाग, मुंह का कम खुलना, तीखा खाने से मुंह में जलन आदि है। स्तन कैंसर के लक्षण स्तन के अंदर या कांख में गांठ होना। स्तनाग्र (निपल) से स्राव आना। स्तन की बाहरी त्वचा का रंग या पोत में बदलाव (गड्ढा आना, सिकुड़ना/छिलना) स्तनाग्र की दिशा में बदलाव- अंदर की ओर खिंचना है। गर्भाशय मुख (सर्वाइकल) कैंसर के लक्षण मासिक अवधि के बीच के दिनों में रक्तस्राव संभोग के बाद रक्तस्राव होना, रजोनिवृत्ति (मासिक रुकना) के बाद रक्तस्राव, अनियमित भारी मासिक धर्म, योनि से असाधारण रक्त के धब्बों के साथ स्राव निकलना आदि है। इसी के साथ महिलाओं को स्तन परीक्षण की स्वयं तकनीक बताई ताकि वह हर 15 दिन पर खुद जांच करती रहें और यदि कोई गांठ या सीने में दर्द होता है तो तुरंत एक कैंसर चिकित्सक से मिले ताकि उसका सफल इलाज हो सके। शिविर प्रबंधक अजय श्रीवास्तव ने इनकी जिज्ञासाओ को दूर करते हुए बताया कि कैंसर से डरना नहीं, बल्कि समय रहते उसका सामना करना जरूरी है। जागरूकता और समय पर जांच के माध्यम से कैंसर की पहचान प्रारंभिक अवस्था में ही हो सकती है, जिससे इलाज अधिक प्रभावशाली होता है। उन्होंने कैंसर के लक्षण, आधुनिक उपचार पद्धतियाँ तथा निवारक उपायों की विस्तृत जानकारी साझा करते हुए कहा कि क्वाड्रिवेलेंट ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एच० पी० वी०) भारतीय लोगों के लिए एक वरदान है क्योंकि यहां गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर के कारण महिलाओं में होने वाली मृत्यु दर सालाना लगभग 1 लाख है। इसलिए ऐसे टीकाकरण के लिए लड़कियों को आगे आना चाहिए।
सभी लोगो को कैंसर से संबंधित IEC (सूचना शिक्षा संचार) सामग्री जैसे पत्रक, विवरण पुस्तिका, फ्लिपबुक, पोस्टर, लीफलेट/चित्रों के साथ पैम्फलेट आदि वितरित किया गया ताकि वे अपने क्षेत्र में कार्यक्रम संचालित कर और लोगो को कैंसर के बारे मे जागरुक कर सकें जिससे हम साथ मिलकर कैंसर से लड़कर उसको जीतने न दें।
शिविर की सफलता में प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक डॉ. धनंजय कुशवाहा, डॉ. राकेश श्रीवास्तव, डॉ. अक्षय प्रताप, डॉ. जूही चौबे, अजय श्रीवास्तव, सत्यवती तिवारी, देवेन्द्र यादव, अमित कुमार गुप्ता, नारद मुनि, रामसूरत सिंह, स्वास्थ्य केन्द्र के डॉक्टर एवं कर्मचारियों आदि का विशेष योगदान रहा।