Gera Ayurvedic Centre

Gera Ayurvedic Centre Dr. M.K. Gera is a highly experienced and respected Ayurvedic practitioner with over 41 years of dedicated service in the field of Ayurveda.

He is a certified Nadi Parikshak, specializing in the ancient and revered technique of pulse diagnosis To spread awareness on "Ayurvedic Medicine" , an healing system that originated in ancient India.

31/01/2026

Nature provides an abundance of natural remedies for common ailments, and many of them are just as effective as over-the-counter painkillers. The infographic outlines top natural painkillers like ginger, garlic, and turmeric, which can help with muscle pain, joint pain, and even chronic conditions like arthritis. These natural substances work by reducing inflammation and promoting faster healing.

For conditions like bloating or sinus pain, foods like pineapple and horseradish provide relief without the need for harsh medications. Natural remedies not only treat the symptoms but also work to address the root causes of pain by supporting overall health and reducing inflammation. Using these natural painkillers is a great way to avoid chemical-laden treatments.

Incorporating natural painkillers into your daily routine can have long-term health benefits and help you lead a more balanced life. These foods and herbs support your body’s natural healing process and help keep pain at bay. 🍒🍯

30/01/2026

शरीर की गहराई तक सफ़ाई करने वाली आयुर्वेदिक औषधि

अगर आप थकान, सूजन, एनीमिया, लिवर या किडनी की कमजोरी से परेशान हैं, तो आयुर्वेद की प्रसिद्ध औषधि पुनर्नवा मंडूर (Punarnava Mandur) शरीर को अंदर से डिटॉक्स और पुनर्जीवित करने में मदद करती है।

👉 “पुनर्नवा” का अर्थ है — जो शरीर को फिर से नया बना दे।

🌱 पुनर्नवा मंडूर क्या है?

यह एक क्लासिकल आयुर्वेदिक दवा है, जिसका उल्लेख चरक संहिता और भैषज्य रत्नावली जैसे ग्रंथों में मिलता है।
इसका मुख्य घटक है पुनर्नवा (Boerhavia diffusa) — एक शक्तिशाली सूजननाशक और मूत्रल औषधि।

यह शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालकर,
➡️ रक्त को शुद्ध
➡️ लिवर, किडनी, हृदय और त्वचा को मजबूत बनाती है।

🧪 मुख्य घटक (Ingredients):

पुनर्नवा

मंडूर भस्म (आयरन)

त्रिफला (हरड़, बहेड़ा, आंवला)

त्रिकटु (सोंठ, काली मिर्च, पिप्पली)

चित्रक, देवदारु, विडंग

गोमूत्र भावित

💪 पुनर्नवा मंडूर के प्रमुख फायदे
🩺 लिवर के लिए वरदान

फैटी लिवर, हेपेटाइटिस, पीलिया में सहायक

लिवर सेल्स को पुनर्जीवित करता है

💧 सूजन व जलोदर में लाभकारी

शरीर में जमा अतिरिक्त पानी बाहर निकालता है

पैरों, चेहरे और पेट की सूजन में राहत

🩸 एनीमिया (खून की कमी) में उपयोगी

हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मदद

कमजोरी और थकान कम करता है

🍽️ पाचन सुधारक

भूख बढ़ाता है

गैस, अपच और कब्ज में राहत

🦴 जोड़ों के दर्द व सूजन में सहायक

गठिया, जकड़न और सूजन कम करता है

🌸 त्वचा रोगों में लाभ

मुंहासे, फोड़े-फुंसी, खुजली में सहायक

🏠 घर पर उपयोग के आसान तरीके

🔹 कमजोरी/एनीमिया:
1–1 टैबलेट दिन में 2 बार, भोजन के बाद गुनगुने पानी या घी के साथ

🔹 सूजन / Water Retention:
2 टैबलेट दिन में 2 बार, पुनर्नवासव के साथ

🔹 लिवर डिटॉक्स:
सुबह खाली पेट 1 टैबलेट + गुनगुना पानी

💊 सेवन की सामान्य मात्रा (Dosage):

वयस्क: 1–2 टैबलेट दिन में 2 बार

बच्चे: आधी मात्रा (डॉक्टर की सलाह से)

बेहतर प्रभाव के लिए: गुनगुना पानी, शहद या पुनर्नवासव के साथ लें

⚠️ सावधानियाँ

गर्भवती महिलाएँ पहले डॉक्टर से सलाह लें

आयरन अधिक होने की समस्या (Hemochromatosis) में न लें

दवा लेते समय पर्याप्त पानी पिएँ

🌼 कुछ रोचक तथ्य

पुनर्नवा पौधा सूखने के बाद भी बारिश में फिर हरा हो जाता है — इसी कारण इसका नाम पुनर्नवा पड़ा

प्राचीन काल में जलोदर रोगियों के लिए यह मुख्य औषधि मानी जाती थी

आधुनिक शोध में इसके लिवर-प्रोटेक्टिव गुण वैज्ञानिक रूप से सिद्ध पाए गए हैं

इसे कई जगह Natural Iron Tonic भी कहा जाता है

🔖

30/01/2026

आम क्या है?
(रोग बनने से पहले का विष – आयुर्वेद का अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्धांत)
पहली पोस्ट में समझा —
बीमारी अचानक नहीं होती।
दूसरी पोस्ट में जाना —
शरीर पहले संकेत देता है (पूर्वरूप)।
तीसरी पोस्ट में स्पष्ट हुआ —
भूख कम होना यानी अग्नि का कमजोर होना।
अब स्वाभाविक प्रश्न है —
जब अग्नि कमजोर होती है, तब शरीर के अंदर क्या बनता है?
आयुर्वेद का स्पष्ट उत्तर है —
आम।
शास्त्रीय परिभाषा (मूल समझ)
अष्टांग हृदयम् में कहा गया है कि —
जब भोजन ठीक से पचता नहीं अग्नि उसे रूपांतरित नहीं कर पाती
तो जो अपचा, चिपचिपा, भारी द्रव्य बनता है उसे आम कहा जाता है।

सरल शब्दों में: -
जो भोजन शरीर का हिस्सा बनने से पहले ही बिगड़ जाए — वही आम है।
आम कोई रोग नहीं, रोग की जड़ है
यह बात बहुत ध्यान से समझिए —
आम डायबिटीज नहीं है
आम BP नहीं है
आम जोड़ों का दर्द नहीं है आम वह बीज है
जिससे ये सारे रोग आगे चलकर पैदा होते हैं।
इसीलिए आयुर्वेद में कहा गया है —
रोग को नहीं,
रोग की जड़ को पकड़ो।

आम कैसे बनता है? (क्रमबद्ध प्रक्रिया)
आम बनने की प्रक्रिया बहुत स्पष्ट है:
1️⃣ अग्नि कमजोर हुई
2️⃣ भोजन पूरा नहीं पचा
3️⃣ अधपचा अन्न रस में मिला
4️⃣ चिपचिपा, भारी, विषैला द्रव्य बना
5️⃣ वही आम कहलाया
यह प्रक्रिया रोज़-रोज़ होती है
तो आम शरीर में जमा होने लगता है।

आम के सूक्ष्म लक्षण (जिन्हें लोग पहचान नहीं पाते)
ये संकेत बहुत सामान्य लगते हैं,
लेकिन आयुर्वेद में बहुत गंभीर माने गए हैं:
शरीर में भारीपन
आलस्य, सुस्ती
सुबह उठते ही थकान
जीभ पर सफ़ेद परत
बदबूदार पसीना
मल साफ न होना
हल्का-हल्का दर्द, जकड़न
ये सब बताते हैं — शरीर के अंदर आम मौजूद है।
आम + दोष = बीमारी

यह आयुर्वेद का बहुत बड़ा सूत्र है:
जब आम किसी दोष से जुड़ता है,
तब रोग का नाम बनता है।
उदाहरण:
आम + वात → जोड़ दर्द, सायटिका
आम + कफ → मोटापा, कफ रोग
आम + पित्त → एसिडिटी, त्वचा रोग

बिना आम के
दोष अकेले बीमारी नहीं बना पाते।
आधुनिक बीमारियाँ और आम
आज की अधिकांश “क्रॉनिक” बीमारियाँ
आयुर्वेद की भाषा में सामज (आमयुक्त) होती हैं:
आमवात (रूमेटाइड)
फैटी लिवर
IBS
थायरॉइड
माइग्रेन
एलर्जी
लेकिन आधुनिक चिकित्सा
आम को पहचानती ही नहीं।
आयुर्वेद की उपचार रणनीति (बहुत महत्वपूर्ण)

आयुर्वेद कहता है —
जब तक आम है,
तब तक पोषण नहीं, सिर्फ़ पाचन।
इसीलिए शास्त्रों में पहले आता है: 1️⃣ आम पाचन
2️⃣ अग्नि दीपना
3️⃣ फिर दोष शमन
4️⃣ अंत में पोषण
अगर आम रहते हुए
ताकत की दवा दी जाए
तो वह आम को और बढ़ा देती है।

गहरा निष्कर्ष
आम दिखता नहीं,
लेकिन बीमारी से पहले मौजूद रहता है
यह शरीर का पहला आंतरिक विष है
जो व्यक्ति आम को समय रहते पहचान ले
वह बड़ी बीमारी से बच सकता है
आम को समझना
आयुर्वेद को समझना है।

नोट:-
यह लेख आधारित है —
अष्टांग हृदयम् (आम व अग्नि सिद्धांत)
चरक संहिता (सामज रोग अवधारणा)
सुश्रुत संहिता
यह कोई इलाज का दावा नहीं,
बल्कि आयुर्वेद का मूल रोग-विज्ञान है।
साभार: शैलेश

29/01/2026

Did you know that eating a banana on an empty stomach can activate your metabolism and cleanse your digestive system? Bananas are rich in natural sugars and fiber that provide quick energy and improve glucose regulation early in the day. They're also packed with electrolytes, making them perfect for hydration and energy replenishment.

In the afternoon, bananas can help boost physical endurance and productivity, keeping you full without adding extra weight. Plus, they help replenish potassium levels after physical exertion, preventing muscle cramps. This makes them an ideal snack after exercise or during your busy workday.

At night, eating a banana can promote better sleep by helping to relax your muscles and reduce stress. They’re not just a snack, but a natural remedy for a healthier and more balanced day. 🍌🌙

27/01/2026

श्रीफल (नारियल): शरीर, मन और आत्मा का पोषण करने वाला चमत्कारी फल! 🥥✨

भारत में नारियल को सिर्फ फल नहीं, “श्रीफल” यानी शुभ फल कहा जाता है। धार्मिक अनुष्ठानों से लेकर आयुर्वेद, सौंदर्य और घरेलू उपचारों तक — नारियल का हर हिस्सा उपयोगी है।

1) नारियल जल — प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइट

आयुर्वेद में इसे “जीवन रसायन” कहा गया है।

शरीर को ठंडक, डिहाइड्रेशन से बचाव

विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में सहायक

उल्टी, दस्त, बुखार के बाद ऊर्जा बहाल

पित्त शमन में उपयोगी

🔎 रोचक तथ्य: आपात स्थितियों में नारियल पानी का उपयोग IV फ्लूइड जैसा किया गया है।

2) नारियल तेल — त्वचा और बालों का प्राकृतिक कवच

सदियों से दक्षिण भारत में सौंदर्य रहस्य।
बालों के लिए: गुनगुना तेल रात में लगाएँ → जड़ें मजबूत, डैंड्रफ कम, बाल घने।
त्वचा के लिए: सूखी त्वचा, फटे होंठ, स्किन इंफेक्शन में लाभकारी।
एंटीबैक्टीरियल व एंटीफंगल गुणों से भरपूर।

3) नारियल का गूदा — ऊर्जा और पाचन

फाइबर और हेल्दी फैट्स से भरपूर।

पाचन को सहज बनाता है

शरीर को त्वरित ऊर्जा देता है

4) नारियल दूध — सुंदरता और शक्ति

त्वचा: 1 चम्मच नारियल दूध + हल्दी → टैनिंग कम, निखार बढ़े।
बाल: ड्रायनेस और दो-मुँहे बालों में लाभ।
शरीर: 1 कप नारियल दूध थकान कम कर मांसपेशियों को पोषण देता है।

5) आयुर्वेदिक दृष्टि — त्रिदोष संतुलन

नारियल वात-पित्त शांत करता है, मानसिक शांति देता है।

पित्त शांति पेय: नारियल पानी + तुलसी रस

त्वचा रोग: नारियल तेल में नीम पत्ता उबालकर लगाएँ

ऑयल पुलिंग: 1 चम्मच तेल 5 मिनट कुल्ला → दांत-मसूड़े मजबूत

6) नारियल से जुड़े चौंकाने वाले तथ्य

फल, बीज और मेवा — तीनों गुण एक साथ

नारियल पानी सुरक्षित “IV Fluid” जैसा

एक पेड़ ~100 साल जीवित, साल में ~75 फल

“Tree of Life” — हर हिस्सा उपयोगी

नारियल तेल में मौजूद MCTs दिमागी कोशिकाओं को ऊर्जा देते हैं

रोज़मर्रा का सरल उपयोग

सुबह 1 टुकड़ा नारियल खाने से कब्ज में राहत, हल्की कमजोरी में टॉनिक जैसा लाभ।

✨ निष्कर्ष:
नारियल केवल भोजन नहीं, आयुर्वेद का संपूर्ण पोषण पैकेज है — जो शरीर, त्वचा, बाल और मन सबको संतुलित रखता है।

Hashtags

#श्रीफल #नारियल #आयुर्वेद

27/01/2026

पेट दर्द में अजवाइन क्यों है रामबाण औषधि? 🌿

हमारी रसोई का छोटा-सा मसाला अजवाइन (Carom Seeds / Trachyspermum ammi) स्वाद में भले तीखा-कसैला हो, लेकिन गुणों में किसी औषधि से कम नहीं। आयुर्वेद में इसे “पेट का रखवाला” और प्राकृतिक दर्दनिवारक कहा गया है। खासकर पेट दर्द, गैस, अपच और एसिडिटी जैसी समस्याओं में अजवाइन तुरंत राहत देती है।

अजवाइन के मुख्य गुण

थाइमोल (Thymol) से भरपूर — पाचन को सक्रिय और दर्द को शांत करता है

फाइबर, आयरन, कैल्शियम जैसे पोषक तत्व

एंटीऑक्सीडेंट और सूजनरोधी प्रभाव

पाचक, वातनाशक और कृमिनाशक गुण

पेट दर्द में अजवाइन क्यों है खास?

1️⃣ वात संतुलन
अधिकतर पेट दर्द वात दोष से जुड़ा होता है। अजवाइन वात को शांत कर दर्द और गैस कम करती है।

2️⃣ गैस और फुलाव में राहत
थाइमोल पाचन एंज़ाइम्स को सक्रिय कर गैस और ब्लोटिंग घटाता है।

3️⃣ भूख बढ़ाए
अपच और बदहजमी में भूख नहीं लगती। अजवाइन जठराग्नि को प्रज्वलित करती है।

4️⃣ ऐंठन (Cramps) में आराम
आंतों की मांसपेशियों को रिलैक्स कर ऐंठन कम करती है।

5️⃣ एसिडिटी से राहत
अम्लता को संतुलित कर पेट को आराम देती है।

असरदार घरेलू नुस्खे 🏠

✔️ अजवाइन + काला नमक
1 चम्मच अजवाइन में चुटकी काला नमक मिलाकर चबा लें — गैस, दर्द, फुलाव में तुरंत राहत।

✔️ अजवाइन का पानी
½ चम्मच अजवाइन एक गिलास पानी में उबालकर पिएँ — अपच और एसिडिटी में लाभ।

✔️ अजवाइन-हींग चूर्ण
अजवाइन, हींग और काला नमक बराबर मात्रा में पीस लें। गुनगुने पानी के साथ लें।

✔️ अजवाइन + नींबू रस
अजवाइन पाउडर में नींबू रस मिलाकर सुखा लें। जरूरत पर 1 चम्मच सेवन करें।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण

आयुर्वेद के अनुसार पेट दर्द का मूल कारण मंद अग्नि और वात विकार है। अजवाइन अग्नि को तेज कर दीपन-पाचन करती है और वात दोष को शांत करती है। इसलिए इसे दीपन-पाचक और वातरोग नाशक औषधि माना गया है।

आधुनिक विज्ञान क्या कहता है?

थाइमोल पाचन ग्रंथियों को सक्रिय करता है

एंटीबैक्टीरियल गुण पेट के संक्रमण से रक्षा करते हैं

आंतों की मांसपेशियों को रिलैक्स कर दर्द कम करता है

सावधानियाँ ⚠️

अधिक मात्रा में सेवन से जलन या एसिडिटी बढ़ सकती है

गर्भवती महिलाएँ बड़ी मात्रा में सेवन से बचें

लगातार पेट दर्द में केवल घरेलू उपायों पर निर्भर न रहें, चिकित्सक से सलाह लें

रोचक तथ्य

प्राचीन मिस्र में अजवाइन को पवित्र औषधि माना जाता था

अजवाइन की धूनी से कीटाणु नष्ट होते हैं

इसे “Ujjain Seeds” भी कहा जाता है

निष्कर्ष

छोटी-सी अजवाइन, बड़े-बड़े पेट दर्द की दुश्मन! सही मात्रा और सही तरीके से सेवन करने पर यह गैस, अपच, ऐंठन और एसिडिटी में तुरंत राहत देती है। रसोई में मौजूद यह साधारण मसाला, सच में एक असाधारण औषधि है।

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#अजवाइन #पेटदर्द #गैससेराहत #आयुर्वेद #घरेलूनुस्खे

26/01/2026

शतावरी: हर स्त्री के लिए आयुर्वेद का वरदान 🌸

आज के समय में PCOS, अनियमित माहवारी, हार्मोन असंतुलन और बांझपन जैसी समस्याएँ आम होती जा रही हैं। ऐसे में आयुर्वेद की एक अद्भुत जड़ी-बूटी महिलाओं के लिए आशा बनकर सामने आती है — शतावरी (Asparagus racemosus)।
संस्कृत में शतावरी का अर्थ है “सौ पतियों वाली”, यानी ऐसी औषधि जो स्त्री की प्रजनन क्षमता, हार्मोन संतुलन और संपूर्ण स्त्री-स्वास्थ्य को सशक्त बनाए।

आयुर्वेद में इसे “स्त्रियों की रानी औषधि” कहा गया है।

शतावरी क्या है?

शतावरी एक शीतल, पोषक, रसायन और वात-पित्त शामक जड़ी-बूटी है, जिसकी जड़ें औषधि के रूप में उपयोग की जाती हैं।

मुख्य गुण:

हार्मोन संतुलन

मासिक धर्म नियमित करना

प्रजनन क्षमता बढ़ाना

शरीर, मन और गर्भाशय को पोषण देना

महिलाओं के लिए शतावरी क्यों अमृत समान?
1️⃣ PCOS में सहायक

हार्मोन बैलेंस करती है

ओवरी फंक्शन सुधारती है

पिंपल्स और बाल झड़ने में राहत

2️⃣ अनियमित माहवारी

मासिक धर्म चक्र को नियमित बनाती है

दर्द और अधिक रक्तस्राव में राहत

3️⃣ प्रजनन क्षमता बढ़ाती है

ओव्यूलेशन सुधारती है

गर्भाशय को मजबूत बनाती है

गर्भधारण की संभावना बढ़ाती है

गर्भावस्था में लाभकारी 🤰

गर्भ को पोषण देती है

शिशु के विकास में सहायक

Morning sickness में राहत

स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए 🤱

शतावरी प्राकृतिक Galactagogue है (दूध बढ़ाने वाली)

दूध की मात्रा और गुणवत्ता में सुधार

शतावरी के अन्य लाभ

कमजोरी दूर करे

मेनोपॉज में राहत

त्वचा और बालों में चमक

एसिडिटी और अल्सर में उपयोगी

सेवन के तरीके

शतावरी चूर्ण – 3–5 ग्राम दूध के साथ

शतावरी टैबलेट/गोलियां – नियमित सेवन से लाभ

शतावरी कल्प – गर्भवती/स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए श्रेष्ठ

काढ़ा (Decoction) – ताजी जड़ों से

सावधानियाँ

अधिक मात्रा से बचें

गर्भावस्था में डॉक्टर की सलाह लें

हार्मोनल/थायरॉइड समस्या हो तो परामर्श आवश्यक

केवल प्रमाणित उत्पाद चुनें

आयुर्वेदिक ग्रंथों में शतावरी

चरक संहिता: “स्त्री रसायन में श्रेष्ठ”

भावप्रकाश: स्तन्यवर्धक, गर्भधारण कारक, शीतल

अष्टांग हृदयम्: संतुलन और पोषण देने वाली औषधि

निष्कर्ष

शतावरी केवल एक जड़ी-बूटी नहीं, बल्कि स्त्री-स्वास्थ्य की प्राकृतिक संरक्षक है। हार्मोन संतुलन से लेकर मातृत्व तक, यह हर चरण में महिला शरीर का साथ देती है।

प्रकृति ने महिलाओं के लिए जो अनमोल उपहार दिया है — वह है शतावरी।

Hashtags

#शतावरी #महिलास्वास्थ्य #आयुर्वेद #हार्मोनसंतुलन #प्रजननस्वास्थ्य #स्त्रीरसायन

26/01/2026

क्यों मैदा पचने में लेता है 4 से 5 दिन? जानें कैसे यह आपके पाचन तंत्र में 'गोंद' की तरह चिपक जाता है।

सफेद, मुलायम और दिखने में आकर्षक—मैदा हमारे आधुनिक खान-पान का एक ऐसा हिस्सा बन चुका है जिसे हम चाहकर भी नजरअंदाज नहीं कर पा रहे। बिस्किट से लेकर बर्गर तक और समोसे से लेकर भटूरे तक, हर जगह मैदे का राज है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह 'सफेद आटा' आपके शरीर के भीतर जाकर क्या रूप लेता है? आधुनिक गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट और आयुर्वेद विशेषज्ञ एक स्वर में चेतावनी दे रहे हैं कि मैदा आपके पाचन तंत्र के लिए किसी 'साइलेंट क्राइसिस' से कम नहीं है।

मैदा: गेहूं की 'आत्मा' के बिना बना शव
मैदा और गेहूं के आटे में जमीन-आसमान का अंतर है। गेहूं से मैदा बनाने की प्रक्रिया में उसकी बाहरी परत (Bran) और भ्रूण (Germ) को हटा दिया जाता है। यह वही हिस्सा है जहाँ फाइबर, विटामिन और मिनरल्स होते हैं। जो बचता है, वह है केवल एंडोस्पर्म यानी शुद्ध स्टार्च।

आयुर्वेद इसे 'निःसत्व आहार' की श्रेणी में रखता है। इसमें फाइबर (रूक्षांश) की मात्रा शून्य होती है। बिना फाइबर के कोई भी भोजन हमारी आंतों में वैसे ही व्यवहार करता है जैसे बिना ग्रीस के मशीन।

आंतों में 'गोंद' जैसा प्रभाव: क्यों लगता है इतना समय?
सामान्यतः साबुत अनाज या सब्जियां २४ से ७२ घंटों में पचकर शरीर से बाहर निकल जाती हैं। लेकिन मैदे के साथ कहानी अलग है।

चिपचिपापन (Sticky Nature): जब मैदे में पानी मिलाया जाता है, तो यह बेहद चिपचिपा हो जाता है (ठीक उसी तरह जैसे पुराने समय में किताबों को चिपकाने के लिए मैदे की 'लेई' बनाई जाती थी)।

पेरिस्टाल्सिस की कमी: हमारी आंतें संकुचन (Contraction) के जरिए भोजन को आगे बढ़ाती हैं। मैदे में फाइबर न होने के कारण आंतों को इसे धकेलने में अत्यधिक मशक्कत करनी पड़ती है।

विली (Villi) का अवरुद्ध होना: हमारी छोटी आंत में छोटे-छोटे बाल जैसे 'विली' होते हैं जो पोषक तत्वों को सोखते हैं। मैदा इन विली के बीच में जाकर चिपक जाता है, जिससे न केवल मैदा बल्कि अन्य पोषक तत्वों का अवशोषण भी रुक जाता है।

दुर्लभ लेकिन डरावने सत्य तथ्य (Rare but True Facts)
एलोक्सन (Alloxan) का खतरा: मैदे को सफेद और चमकदार बनाने के लिए इसे ब्लीच किया जाता है। इस प्रक्रिया में एक उप-उत्पाद (By-product) बनता है जिसे एलोक्सन कहते हैं। वैज्ञानिक रूप से, एलोक्सन का उपयोग प्रयोगशाला में चूहों के 'पैन्क्रियाज' को नष्ट करने के लिए किया जाता है ताकि उन्हें डायबिटीज दी जा सके और फिर उन पर दवाओं का परीक्षण हो सके। आप अनजाने में वही केमिकल खा रहे हैं।

हड्डियों का दुश्मन: मैदा एसिडिक (अम्लीय) प्रकृति का होता है। जब आप अत्यधिक मैदा खाते हैं, तो शरीर रक्त की अम्लता को कम करने के लिए आपकी हड्डियों से कैल्शियम खींचना शुरू कर देता है, जिससे हड्डियां कमजोर हो सकती हैं।

मेटाबॉलिक सुसाइड: मैदे का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) बहुत अधिक होता है। इसे खाते ही शुगर लेवल रॉकेट की तरह बढ़ता है, जिससे इंसुलिन का भारी स्राव होता है। यह प्रक्रिया धीरे-धीरे शरीर को 'इंसुलिन रेजिस्टेंट' बना देती है।

आयुर्वेदिक समाधान और बचाव
यदि आप मैदे के शौकीन हैं और इसे पूरी तरह नहीं छोड़ पा रहे, तो आयुर्वेद इन सुरक्षा नियमों की सलाह देता है:

त्रिफला का सेवन: यदि आपने मैदा खाया है, तो उस रात गुनगुने पानी से त्रिफला चूर्ण जरूर लें ताकि आंतों में चिपका हुआ अंश साफ हो सके।

अजवाइन और काला नमक: मैदे वाली चीजों के साथ अजवाइन का प्रयोग करें, यह वात को शांत करती है और पाचन तेज करती है।

विकल्प चुनें: मैदे की जगह मल्टीग्रेन आटा, जौ या रागी को प्राथमिकता दें। यदि पास्ता खाना ही है, तो सूजी (Semolina) या होल व्हीट पास्ता चुनें।

निष्कर्ष
मैदा स्वाद में भले ही 'मखमली' लगे, लेकिन यह आपकी आंतों के लिए 'जाम' पैदा करने वाला कचरा है। याद रखें, जो चीज बाहर प्लेट में जितनी सफेद और सुंदर दिखती है, शरीर के अंदर वह अक्सर उतनी ही घातक साबित होती है। अपनी आंतों को 'गोंद का डिब्बा' न बनने दें।

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House No. 1050, Vyapar Kendra Road, Opposite Muskan Dental, Block C, DLF Garden Villas
Gurugram
122001

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