Gera Ayurvedic Centre

Gera Ayurvedic Centre Dr. M.K. Gera is a highly experienced and respected Ayurvedic practitioner with over 41 years of dedicated service in the field of Ayurveda.

He is a certified Nadi Parikshak, specializing in the ancient and revered technique of pulse diagnosis To spread awareness on "Ayurvedic Medicine" , an healing system that originated in ancient India.

03/12/2025

पैदल चलना: सबसे सरल, सबसे असरदार व्यायाम!



आज की भाग-दौड़ वाली जिंदगी में लोग जिम, मशीनें और गैजेट्स खोजते रहते हैं, लेकिन आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान, दोनों कहते हैं कि पैदल चलना शरीर का सबसे प्राकृतिक, सुरक्षित और सम्पूर्ण व्यायाम है।
न कोई खर्च, न कोई एक्स्ट्रा समय—बस रोज़ 20–30 मिनट की निरंतर चाल आपकी उम्र में सालों का इज़ाफ़ा कर सकती है।

🧬 क्यों है पैदल चलना ‘ऑल-इन-वन’ एक्सरसाइज़?

पैदल चलने से शरीर के लगभग 80% हिस्से एक्टिव होते हैं।

दिल मज़बूत

फेफड़े साफ

ब्लड प्रेशर संतुलित

शुगर कंट्रोल

पेट की चर्बी कम

नींद बेहतर

दिमाग शांत

यह एक ऐसा व्यायाम है जो युवा से लेकर बुज़ुर्ग तक—हर उम्र के लिए सुरक्षित और अत्यंत प्रभावी है।

🩺 विज्ञान क्या कहता है?

रिसर्च बताती है कि रोज़ तेज़ 30 मिनट चलने से—

हृदय रोग का खतरा 35–40% कम

डायबिटीज का रिस्क 30% कम

डिप्रेशन 25% कम

वजन 2–3 गुना तेजी से घटता है

जॉइंट्स की जकड़न 40% कम हो जाती है

🌿 आयुर्वेदिक दृष्टि: “चालनं सर्वव्याधि नाशकं”

आयुर्वेद के अनुसार पैदल चलना—

वात को संतुलित करता है

हृदय और पाचन को मजबूत करता है

अग्नि बढ़ाता है

नींद को सुधरता है

शरीर में उर्जा प्रवाह सुधारता है

यही कारण है कि प्राचीन वैद्यों ने भोजन के बाद 500 कदम चलने की सलाह दी है।

🔥 कब, कितना और कैसे चलें कि फायदे ‘दोगुने’ मिलें?
1️⃣ सुबह की तेज चाल: दिन की सबसे शक्तिशाली शुरुआत

सुबह 5:30–7 बजे के बीच की पैदल चाल शरीर को तीन बड़े लाभ देती है—
✔ ऑक्सीजन ज्यादा
✔ दिमाग शांत
✔ मेटाबॉलिज्म तेज

कितना:
20–30 मिनट तेज चाल (Brisk Walk)
कैसे:
एड़ी से ज़मीन छुए, कदम सधे हुए, सांस गहरी लें

2️⃣ दोपहर/शाम की वॉक—खाना पचाने की चाबी

खाना खाने के बाद 20–25 मिनट बैठना या मोबाइल चलाना पेट की गैस, एसिडिटी और सुस्ती बढ़ाता है।
लेकिन खाना खाने के 20 मिनट बाद 500–800 कदम चलना हर रोग का इलाज है।

✔ गैस नहीं बनेगी
✔ पेट हल्का
✔ ब्लड शुगर नियंत्रित
✔ नींद बेहतर

3️⃣ रात को हल्की चाल—दिमाग भी साफ, पेट भी

रात में 10–12 मिनट की हल्की वॉक शरीर को रीसेट करती है।
✔ कब्ज मिटती है
✔ नींद गहरी
✔ पाचन सुधरता है

ध्यान रहे—बहुत तेज़ नहीं चलना, वरना शरीर एक्टिव हो जाएगा और नींद टूट सकती है।

⏱️ कितना चलना ‘सबसे परफेक्ट’?

शुरुआती लोग: 15–20 मिनट

सामान्य फिटनेस: रोज़ 30–40 मिनट

वजन घटाना: 45–60 मिनट brisk walking

डायबिटिक/BP वाले: दो बार—सुबह 30 मिनट + शाम 20 मिनट

💥 ये 5 तरीके अपनाएँ—फायदे 2 गुना मिलेंगे
⭐ 1. अपने कदमों की स्पीड 10% बढ़ाएँ

धीमी चाल से कैलोरी 1X
तेज़ चाल से कैलोरी 2–3X
ब्रिस्क वॉक (थोड़ी तेज़) सबसे बेहतर है।

⭐ 2. खाली पेट सुबह चलना—फैट बर्न दोगुना

सुबह शरीर फैट ब्लॉक तोड़ने में सबसे सक्रिय होता है।
खाली पेट पैदल चलना पेट की चर्बी घटाने में तेज़ी से मदद करता है।

⭐ 3. घास पर नंगे पैर चलें—आँखें, दिमाग और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर

Acupressure पॉइंट्स एक्टिव होते हैं।
बहुत पुराने समय से यह तरीका शरीर की ऊर्जा बढ़ाने और तनाव कम करने के लिए प्रसिद्ध है।

⭐ 4. मोबाइल मत देखें—सांस पर ध्यान दें

गहरी सांस के साथ चलने से—

फेफड़े मजबूत

ऑक्सीजन आपूर्ति बेहतर

दिमाग शांत

हृदय स्वस्थ

यह "Mindful Walking" कहलाती है।

⭐ 5. सुबह धूप में 10 मिनट की वॉक—Vitamin D + Warm-up

यह हड्डियों, मन और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए वरदान है।

🥗 क्या खाएँ कि पैदल चलने के फायदे बढ़ें?

चलने से 15 मिनट पहले गुनगुना पानी

वॉक के बाद हल्का नारियल पानी

नाश्ते में फाइबर + प्रोटीन

रात में ज्यादा भारी खाना न खाएँ

⚠️ कौन-कौन सी गलतियाँ वॉकिंग के फायदे कम कर देती हैं?

❌ चलते समय मोबाइल देखना
❌ बहुत भरा हुआ पेट लेकर चलना
❌ बहुत तेज चाल से दौड़ने जैसी गति बनाए रखना
❌ गलत जूते पहनना
❌ तुरंत बैठ जाना

🧭 निष्कर्ष: पैदल चलना—लाइफ बदलने वाली आदत

पैदल चलना दवा नहीं, जीवनशैली का असली आधार है।
यह शरीर, मन, नींद, वजन, पाचन और हृदय सभी को एक साथ बेहतर करता है—वो भी बिना किसी खर्च के।

आज से 20–30 मिनट अपने लिए निकालें…
आपके कदम आपको बीमारी से दूर, और सेहत के और करीब ले जाएंगे।

02/12/2025

आयुर्वेद के अनुसार जब हमारा पाचनतंत्र कमजोर पड़ जाता है, तो भोजन पूरी तरह नहीं पच पाता। यह अपच धीरे-धीरे “आम” का रूप ले लेता है। आम को आधुनिक भाषा में टॉक्सिन या शरीर में जमा हानिकारक अवशेष कहा जा सकता है। यह चिपचिपा, भारी और दुर्गंधयुक्त होता है। आम शरीर के रास्तों—नाड़ियों, आँतों, जोड़ों, त्वचा और अंगों—में फंसकर उनकी कार्यक्षमता को बिगाड़ देता है। यही आम आगे चलकर कई रोगों को जन्म देता है जैसे कब्ज, एसिडिटी, जोड़ों में दर्द, सिर दर्द, त्वचा रोग, मोटापा, थकान और प्रतिरक्षा कमजोरी।

आम बनने के प्रमुख कारण हैं—भोजन का गलत संयोजन, जंक-फूड, देर रात तक जागना, तनाव, अधिक तली-भुनी चीज़ें, मौसम के विपरीत आहार, बार-बार खाना और पाचन अग्नि का कमजोर होना। आयुर्वेद कहता है कि हमारी अग्नि यानी डाइजेशन फायर मजबूत रहे तो भोजन अमृत बनता है, कमजोर हो जाए तो वही भोजन ज़हर बन जाता है। इसलिए आम हटाने से अधिक जरूरी है कि आगे आम बनने न पाए।

आयुर्वेद में आम निकालने के लिए दो मुख्य उपाय माने गए हैं—दीपन-पाचन और आम निष्कासन। दीपन-पाचन से पाचन अग्नि मजबूत होती है और जमा आम धीरे-धीरे पिघलकर बाहर निकलने लगता है। इसके अंतर्गत अदरक, काली मिर्च, जीरा, अजवाइन, त्रिफला, हल्दी, और नींबू जैसे पदार्थ उपयोगी हैं। भोजन में इनका संतुलित प्रयोग अग्नि को बल देता है।

सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीना आम को गला कर बाहर निकालने का सबसे सरल उपाय है। गर्म पानी नाड़ियों को खोलता है और पाचन सुधारता है। यदि रोज़ सुबह एक गिलास गुनगुने पानी में नींबू और एक चुटकी शहद लिया जाए तो यह शरीर में जमे टॉक्सिन को धीरे-धीरे साफ करने लगता है। दिन में भी ठंडे पानी की जगह हल्का गर्म पानी लेना चाहिए।

उपवास और फलाहार भी आम निकालने में अत्यंत लाभकारी हैं। सप्ताह में एक बार हल्का उपवास या सिर्फ फल-सब्जियाँ, नारियल पानी जैसे जूस लेना पाचन तंत्र को आराम देता है और शरीर स्वयं को साफ करने लगता है। आयुर्वेद में इसे “लंगन” कहा गया है—अर्थात शरीर पर भोजन का बोझ कम करके रोग कम करना।

त्रिफला चूर्ण रात को गुनगुने पानी के साथ लेने से आँतों की सफाई होती है और पुराना जमा कचरा निकलता है। इससे कब्ज खत्म होती है और अग्नि मजबूत होती है। इसके साथ-साथ हल्दी, आंवला, गिलोय, नीम और तुलसी जैसे द्रव्य रक्त शुद्धि में सहायक हैं और पूरे सिस्टम को डीटॉक्स करते हैं।

योग और प्राणायाम आम निष्कासन में बेहद प्रभावी भूमिका निभाते हैं। सूर्य नमस्कार, पवनमुक्तासन, भुजंगासन, कपालभाति और अनुलोम-विलोम से पाचन क्रिया सुधरती है, गैस-कब्ज कम होती है और विषाक्त पदार्थ पसीने व श्वसन के माध्यम से बाहर निकलते हैं। तनाव और नकारात्मक भावनाएँ भी आम बनने का बड़ा कारण हैं, इसलिए ध्यान और सकारात्मक सोच आवश्यक है।

पंचकर्म आयुर्वेद में शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने का सर्वोच्च उपाय माना गया है। इसके पाँच भाग—वमन, विरेचन, नस्य, बस्ती और रक्‍तमोक्षण—शरीर की गहराई तक जमा आम को बाहर निकालकर अंगों को नया जीवन देते हैं। यह प्रक्रिया विशेषज्ञ वैद्य की देख-रेख में ही करनी चाहिए।

इसके अलावा जीवनशैली में कुछ सरल आदतें आम को दूर रखने में मदद करती हैं—
• रोज़ सुबह जल्दी उठें और रात को समय पर सोएँ
• भोजन में ताजगी, सरलता और मौसमी चीज़ों को प्राथमिकता दें
• ओवरईटिंग और बार-बार स्नैकिंग से बचें
• बहुत देर तक खड़े या बैठे न रहें
• भोजन के तुरंत बाद पानी न पिएँ
• दिन में दही, दूध-नॉनवेज या दूध-अचार जैसे विरुद्ध आहार न लें

जब शरीर में आम अधिक होता है, तो कुछ संकेत स्वतः दिखाई देने लगते हैं—जीभ पर मोटी सफेद परत, पेट भारी रहना, बार-बार थकान, मल बदबूदार और चिपचिपा होना, मुंह की दुर्गंध, त्वचा पर फुंसियाँ या खुजली, और भूख न लगना। इन संकेतों की अनदेखी न करें बल्कि तुरंत अपनी दिनचर्या सुधारें।

आयुर्वेद कहता है कि शरीर की सफाई केवल दवाओं से नहीं होती बल्कि भोजन और आदतों के अनुशासन से होती है। यदि हम रोज़ अपने भोजन को अच्छी तरह चबा कर, सही समय पर, मौसम के अनुसार और शांत मन से खाएँ, तो आम बनने की संभावना कम हो जाती है। शरीर की प्राकृतिक क्षमता इतनी अद्भुत है कि थोड़ी मदद मिलते ही वह खुद को स्वयं ही ठीक करने लगता है।

कुल मिलाकर, आम यानी टॉक्सिन आज की जीवनशैली में लगभग हर व्यक्ति के शरीर में कहीं-न-कहीं जमा होता है। इसे हटाना आवश्यक है, लेकिन सबसे अधिक जरूरी है पाचन अग्नि की रक्षा करना। अग्नि स्वस्थ होगी तो भोजन पोषण बनेगा, रोग नहीं। यही आयुर्वेद का मूल सिद्धांत है—“जब अग्नि ठीक, तब तन-मन ठीक।”

02/12/2025

आयुर्वेदिक विज्ञान ने नया इतिहास रचते हुए प्रयागराज के डॉ. संतोष दुबे ने पलाश क्षार विधि से गर्भाशय कैंसर का सफल उपचार कर दिखाया, जहाँ ऑपरेशन के बाद एमआरआई में कैंसर के कोई निशान नहीं मिले और विशेषज्ञों ने इसे सर्जिकल क्षार चिकित्सा की आधुनिक उपलब्धि बताया।



02/12/2025

“ठंडी में चाय की बढ़ती तलब बन रही है Acidity का नया कारण—जानें कैसे बचें और कौन-सी Remedies देती हैं तुरंत राहत!”



सर्दियाँ आते ही भारत में एक चीज़ अचानक बढ़ जाती है—चाय पीने की मात्रा।
सुबह की चाय, दोपहर की चाय, ऑफिस ब्रेक की चाय, ठंड में हाथ गरमाने वाली चाय… यानी दिन में 4–6 कप चाय अब आम बात हो चुकी है।
लेकिन क्या आप जानते हैं?
आयुर्वेद व आधुनिक विज्ञान दोनों मानते हैं कि सर्दियों में चाय की अधिकता पेट की acidity को दोगुना बढ़ा देती है।

☕ सर्दी में चाय से Acidity क्यों बढ़ती है?—Rare पर सच्चे Facts
1️⃣ ठंड में शरीर की पाचन-अग्नि तेज होती है, चाय उसे बिगाड़ देती है

सर्दी में हमारा पाचन मजबूत रहता है, लेकिन चाय में मौजूद caffeine व tannins इस अग्नि को irritate करके पेट में अम्ल (acid) बढ़ा देते हैं।
नतीजा—छाती में जलन, खट्टे डकार, पेट भारी और जी मचलना।

2️⃣ खाली पेट चाय = सीधा Acid Attack

खासकर सुबह-सुबह या रात के खाने के बाद चाय अम्ल-स्तर को कई गुना बढ़ा देती है।
इसलिए सर्दियों में जो लोग उठते ही चाय पीते हैं, उन्हें acidity जल्दी होती है।

3️⃣ बार-बार चाय पीने से पेट की protective lining कमजोर होती है

चाय में tannins stomach lining को सुखाकर उसकी सुरक्षा कम कर देते हैं।
इससे acid आसानी से irritate करता है—यह सर्दियों में acidity का असली hidden कारण है।

4️⃣ मीठी और दूध वाली चाय acid को और बढ़ाती है

दूध + चीनी + over-boiled चाय → acidity का perfect formula।
यह combination mucus lining को disturb करता है और अम्ल रचना बढ़ाता है।

❄️ तो क्या चाय बिल्कुल छोड़ दें?

नहीं।
बस कैसे और कब पी जा रही है—यह सबसे बड़ा factor है।
आयुर्वेद कहता है—
“द्रव्य न दोष करति, कालो दोष करति।”
यानि चीज़ दोष नहीं करती, गलत समय और गलत मात्रा दोष करते हैं।

🍃 सर्दियों की Acidity में Quick Relief पाने की Proven Remedies (Rare + Fast Acting)
1️⃣ लौंग चबाना—1 मिनट में राहत

लौंग stomach-acid neutralize करती है और anti-inflammatory होती है।
बस एक लौंग मुंह में रखकर धीरे-धीरे चबाएँ—
सीने की जलन तुरंत कम होती है।

2️⃣ 1 चम्मच सौंफ + 1 चुटकी मिश्री—सबसे सुरक्षित त्वरित उपाय

सौंफ acid को absorb करती है और गैस को शांत करती है।
खाना खाने के बाद या acidity शुरू होते ही यह उपाय तुरंत राहत देता है।
सौंफ सर्दी में सबसे gentle antacid मानी जाती है।

3️⃣ गुनगुना पानी + 1 बूंद Desi Ghee

यह remedy rare है लेकिन अत्यंत असरदार।
गुनगुना पानी acid को पतला करता है और घी आंतों की irritation को शांत करता है।
2–3 मिनट में आराम महसूस होता है।

4️⃣ ठंडी छाछ + भुना जीरा (अगर मुश्किल ज्यादा हो)

छाछ को natural antacid भी कहा जाता है।
½ गिलास छाछ में ½ चम्मच भुना जीरा मिलाकर पिएँ—
सीने की जलन तुरंत गिरती है।

5️⃣ मुलैठी का पानी—आयुर्वेद का सबसे gentle acid healer

1/4 चम्मच मुलैठी चूर्ण को गुनगुने पानी में मिलाकर चुस्की लें।
यह stomach lining को coat करता है और acid को शांत करता है।
सही अर्थ में प्राकृतिक “acid shield” का काम करता है।

6️⃣ इलायची—चाय की गर्मी को neutralize करती है

इलायची पेट की गर्मी कम करती है।
अगर चाय पीनी ही है—तो उसमें 1–2 इलायची डालें।
यह acidity के chances कम करता है।

7️⃣ चाय की Quantity Control—आयुर्वेद का Golden Rule

✔ दिन में 2 कप से ज्यादा नहीं
✔ चाय खाली पेट नहीं
✔ बहुत ज्यादा कड़ी चाय बिल्कुल नहीं
✔ रात के खाने के बाद चाय बंद
✔ चाय के साथ पानी जरूर पिएँ

🍵 चाय पीनी है—तो इसे Healthy कैसे बनाएं? (Science + Ayurveda Based)
👉 अदरक चाय

कफ को कम करती है और acidity भी घटाती है।

👉 तुलसी चाय

एंटी-एसिड और एंटी-इन्फ्लेमेटरी।

👉 दालचीनी की बहुत हल्की मात्रा

पाचन मजबूत करती है, acid कम।

👉 खींची हुई काली चाय (light tea)

कम tannins, कम acid।

Note: बहुत कड़ी चाय बिल्कुल avoid करें।

🔥 कब डॉक्टर या वैद्य से मिलना चाहिए?

✔ रोज़ acidity
✔ रात में जलन
✔ खट्टे पानी का बार-बार आना
✔ पेट के दाईं या बीच में दर्द
✔ भूख कम होना या वजन गिरना

ये chronic acidity या GERD का संकेत हो सकते हैं।

🧾 निचोड़ (Conclusion)

सर्दियों में चाय का आनंद लें—but wisely!
चाय की मात्रा, समय और तरीके में थोड़ा-सा बदलाव आपकी acid problem को खत्म कर सकता है।
और ऊपर दिए गए rare, आयुर्वेदिक और scientifically-proven उपाय तुरंत राहत भी देते हैं और पेट का संतुलन भी बनाते हैं।

02/12/2025

कब्ज (Constipation) न सिर्फ पाचन को बिगाड़ती है, बल्कि आयुर्वेद के अनुसार त्रिदोष असंतुलन, भूख में कमी, गैस, शरीर में भारीपन, त्वचा पर dullness और तनाव तक पैदा करती है।

लेकिन खुशखबरी यह है कि आयुर्वेद रात में किए गए कुछ बेहद सरल और प्राचीन उपायों को “Morning Evacuation Regulators” मानता है—यानी ऐसे उपाय, जो नींद में ही पाचन सुधाकर अगली सुबह आंतों की गति को सुचारु करते हैं।

#सुबह_पेट_साफ

यहाँ हैं 7 rare लेकिन चौंकाने वाले, proven और बेहद असरदार night remedies, जिन्हें आज भी वैद्य लोग quietly recommend करते हैं:

1️⃣ रात को गुनगुना पानी—आंतों के लिए रात्रि-सफाई मोड

सोने से 1 घंटे पहले एक छोटा कप गुनगुना पानी आंतों को हल्का-सा warm signal देता है।
आयुर्वेद में इसे अग्नि दीपक क्रिया कहा गया है—यानी अग्नि मंद न पड़े और अगली सुबह मल उत्सर्जन स्वाभाविक हो।
यह remedy ultra-simple है लेकिन कब्ज वालों के लिए game changer है।

2️⃣ रात में गाय का घी—कब्ज का सबसे शुद्ध ब्राह्मण औषध

सोने से 30 मिनट पहले 1 चम्मच देशी गाय का घी गुनगुने पानी के साथ।
यह आंतों की सूखी नलियों को तेल की तरह लुब्रिकेट करता है और कोमल मल बनाकर सुबह आसानी से बाहर निकालता है।
वैद्य इसे “स्नेह-पान की सूक्ष्म मात्रा” कहते हैं—सफाई, पोषण और नींद—तीनों में मदद करता है।

3️⃣ रात में त्रिफला—पेट की सुबह की अलार्म घड़ी

त्रिफला रात में लेने पर पाचन को mildly detox करती है।
इसकी खासियत यह है कि ये purgative नहीं, regulative herb है—यानि पेट को उसकी प्राकृतिक गति से काम करना सिखाती है।
1/2 चम्मच त्रिफला गर्म पानी के साथ लें।
सुबह पेट खुद उठकर साफ हो जाता है।

4️⃣ गर्म पानी में 4 मुनक्का—आंतों का gentle laxative

मुनक्का रातभर भिगोकर हल्का गुनगुना करके खाना या उसका पानी पीना—दोनों ही आंतों को कोमल बनाते हैं।
इसमें natural soluble fiber होता है जो सुबह मल को soft बनाकर आसानी से निकाल देता है।
दवाइयों की आदत डालने की जगह यह एक शुद्ध देसी उपाय है।

5️⃣ रात को छोटी हरड़—कब्ज की महारानी दवा

छोटी हरड़ (अभया) को “विष्टम्भ नाशिनी”—कब्ज नाशक कहा गया है।
रात में हल्का-सा चूर्ण या गोलियां लेने से colon की गति संतुलित होती है।
यह rare remedy है, लेकिन आयुर्वेद में centuries से इसकी सिफारिश की जाती है।

6️⃣ 10 मिनट Abdominal Massage—रात को पेट को विश्राम, सुबह को स्वतंत्रता

सोने से पहले हल्के हाथों से पेट पर clockwise मालिश आंतों की peristalsis को gentle push देती है।
विशेषकर left-lower abdomen (descending colon) पर 2–3 मिनट ध्यान देने से सुबह bowel movement पहले की तरह smooth हो जाता है।

7️⃣ रात का Golden Rule: देर रात खाना बंद करें

Late-night dinner पेट की सुबह की स्वच्छता को पूरी तरह बिगाड़ देता है।
आयुर्वेद कहता है—
“रात्रौ भोजनं विरुद्धं मलसंगाय कारणम्”
यानी देर से खाया भोजन, सुबह मल को रोक देता है।
सही समय: रात 8 बजे तक हल्का, warm और easily digestible खाना।

🌕 Bonus: Rare Remedy—गर्म पानी + सोते समय सिरहाने 1 इलायची

इलायची की सुगंध न सिर्फ mind को relax करती है बल्कि अग्नि को balanced रखती है।
कई वैद्य इसे constipation tendency वालों के लिए night-time aromatic therapy मानते हैं।
हल्की इलायची सुगंध digestion pathways को open रखती है।

🛌 कब मिलेगा असर?

▪ 2–3 दिन में हल्कापन
▪ 5–7 दिन में सुबह की दिनचर्या स्वाभाविक
▪ 15 दिन में पाचन और metabolism दोनों बेहतर

🌱 आयुर्वेद की मुख्य बात

पेट तभी सहज साफ होगा जब—
✔ रात को अग्नि शांत न हो
✔ आंतें पर्याप्त लुब्रिकेटेड हों
✔ भोजन समय से हो
✔ नींद गहरी हो

ये सभी night remedies इन्हीं चार बिंदुओं को टारगेट करते हैं।

01/12/2025

मक्की की रोटी: पंजाब से लेकर पहाड़ों तक पसंदीदा खाद्य!

सर्दियों का मौसम आते ही रसोई में एक खुशबू लौट आती है— #मक्की_की_रोटी की। पंजाब से लेकर पहाड़ों तक, यह रोटी सिर्फ स्वाद नहीं बल्कि एक आयुर्वेदिक, पोषक और शरीर को गर्म रखने वाला शक्तिशाली अनाज है। हमारी दादी-नानी इसे सर्दियों में क्यों ज़रूर बनाती थीं? इसके पीछे छिपे हैं 10 ऐसे फ़ायदे, जो रेयर, फ़ैक्ट-बेस्ड और बेहद ज़रूरी हैं।

🌽 1. शरीर में प्राकृतिक गर्मी पैदा करती है – थर्मोजेनिक फ़ूड

#मक्की में मौजूद विटामिन B-कॉम्प्लेक्स और स्वस्थ कार्ब्स शरीर की थर्मल एक्टिविटी बढ़ाते हैं।
आयुर्वेद इसे उष्ण वीर्य यानी शरीर को अंदर से गर्म रखने वाला आहार मानता है।
इसलिए सर्दियों में इसे खाने से हाथ-पैरों की ठंडक कम होती है और ऊर्जा बढ़ती है।

🌽 2. लगातार भूख लगना कम — लंबे समय तक पेट भरा रखती है

मक्की की रोटी का फाइबर डेंसिटी गेहूँ से दोगुनी होती है।
यह पाचन को धीमा करके लंबे समय तक पेट भरा रखती है।
अनियंत्रित स्नैकिंग और सर्दियों की ओवर-ईटिंग पर कंट्रोल करने का बेहतरीन तरीका।

🌽 3. जोड़ों के दर्द और stiffness में राहत

कम लोग जानते हैं—
मक्की में मैग्नीशियम, कैल्शियम और पोटैशियम का दुर्लभ कॉम्बिनेशन होता है।
ये तीनों मिलकर सर्दियों में बढ़ने वाले वात रोग (जॉइंट पेन, सुन्नपन, अकड़न) को शांत करते हैं।

अगर इसे सर्सों के साग या घी के साथ खाया जाए तो फायदा दोगुना हो जाता है।

🌽 4. पेट की गैस, कब्ज़ और अपच कम

मक्की का घुलनशील फाइबर आंतों की गति को संतुलित करता है।
आयुर्वेद के अनुसार यह अग्नि दीपक है—यानी पाचन शक्ति को जगाता है और मल त्याग बेहतर बनाता है।
सर्दियों में कम पानी पीने की वजह से होने वाली कब्ज़ इसमें काफी कम होती है।

🌽 5. विंटर-फगनेस (सर्दियों की थकान) में तुरंत ऊर्जा

मक्की के कार्ब्स धीरे-धीरे रिलीज़ होते हैं, जिससे

सुस्ती,

भारीपन

दिन भर थकान

कम होती है।
यह प्राकृतिक ऊर्जा देती है, बिना ब्लड-शुगर को तेजी से बढ़ाए।

🌽 6. कोलेस्ट्रॉल कम करने में वैज्ञानिक रूप से मददगार

मक्की में मौजूद पॉलीफेनॉल्स और फाइबर एलडीएल (खराब कोलेस्ट्रॉल) को कम करते हैं।
सर्दियों में भारी भोजन से बढ़े कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में यह रोटी कारगर है।

🌽 7. त्वचा को देता है प्राकृतिक glow

मक्की का नियासिन (Vitamin B3) त्वचा का

सूखापन,

रूखापन

और सर्दियों की क्रैकिंग

कम करता है।
इसके फाइबर से toxins निकलते हैं जिससे चेहरा हेल्दी दिखता है।

🌽 8. ब्लड-सर्कुलेशन बेहतर—ठंड में सुन्नता घटती है

मक्की में थायमिन (Vitamin B1) और मैग्नीशियम रक्त प्रवाह को बेहतर बनाते हैं।
इससे ठंड में हाथ-पैरों का सुन्न हो जाना, झनझनाहट और ब्लड सर्कुलेशन में सुस्ती काफी कम होती है।

🌽 9. हड्डियों को मजबूत—Vitamin D का प्राकृतिक बूस्टर

यह बात रेयर है लेकिन सच—
मक्की में फाइटोन्यूट्रियंट्स ऐसे होते हैं जो Vitamin D के अवशोषण को बढ़ाते हैं।
इसलिए सर्दियों में कम धूप मिलने पर भी हड्डियों की मजबूती बनी रहती है।

🌽 10. दिमाग को तेज़—सर्दियों की brain fog में राहत

ठंड में सोचने और काम करने की क्षमता धीमी हो जाती है।
मक्की में मौजूद

ओमेगा-6 फैटी एसिड

मैग्नीशियम

विटामिन B1

नर्वस सिस्टम को सक्रिय रखते हैं, जिससे brain fog और सुस्ती कम होती है।

🔥 कैसे खाएँ कि फ़ायदे दोगुने हो जाएँ? (Pro Tips)
✔ 1. घी लगाकर खाएँ

आयुर्वेद में घृत + मक्की को श्रेष्ठ जोड़ी कहा गया है।
इससे विटामिन्स का अवशोषण बढ़ता है और जोड़ों का दर्द कम होता है।

✔ 2. सरसों का साग + मक्की की रोटी = Perfect Winter Combo

फाइबर + कैल्शियम + आयरन → शक्तिशाली पोषण, पाचन मजबूत और इम्युनिटी बेहतर।

✔ 3. गुड़ के साथ खाएँ

गुड़ में मौजूद मिनरल्स विटामिन्स को एक्टिवेट करते हैं।
सर्दियों में शरीर का तापमान संतुलित रखने में मदद मिलती है।

🔍 Rare Ayurvedic Insight (बहुत कम लोग जानते हैं)

आयुर्वेद कहता है—
मक्की शीघ्र पचने वाली नहीं, लेकिन सही संयोजन में खाई जाए तो शरीर को रसायन फल देती है।

इसका मतलब:
अगर इसे

घी

साग

मूली

सरसों

गुड़

के साथ खाया जाए, तो पाचन सुधरता है और पोषक तत्व दोगुने प्रभाव से काम करते हैं।

📝 निष्कर्ष: क्यों मक्की की रोटी है “सर्दियों की सुपरफ़ूड”?

क्योंकि इसमें हैं:
✔ प्राकृतिक गर्मी
✔ जोड़ों का सपोर्ट
✔ थकान से राहत
✔ सही पाचन
✔ त्वचा का glow
✔ बेहतर circulation
✔ कम cholesterol
✔ brain-fog से राहत

यह सिर्फ रोटी नहीं, सर्दियों में शरीर को मौसम के अनुकूल रखने का पारंपरिक लेकिन वैज्ञानिक तरीका है।

30/11/2025

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6-कमजोरी
7- हाई बी पी
8-फैटी लीवर
9-बाल का झड़ना
10-बांझपन

11- मोटापा

*आदि रोग*
Mission chemical free
*100% आयुर्वेदिक इलाज*
*No Side Effects*

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9315510202

29/11/2025

Why Water is the Lifeline of our body? In Hindi.

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House No. 1050, Vyapar Kendra Road, Opposite Muskan Dental, Block C, DLF Garden Villas
Gurugram
122001

Opening Hours

Monday 9am - 7:30pm
Tuesday 9am - 7:30pm
Wednesday 9am - 7:30pm
Thursday 9am - 7:30pm
Friday 9am - 7:30pm
Saturday 9am - 7:30pm

Telephone

+919315510202

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