08/10/2025
🇮🇳 महायोगराज गुग्गुल चूर्ण – जोड़ों का राजा और वात रोगों का विजेता
🙏 आयुर्वेद में महायोगराज गुग्गुल को “वात रोग नाशक रत्न” कहा गया है।
यह एक ऐसा शक्तिशाली योग है जो शरीर के गहराई में जाकर दर्द, सूजन, stiffness और गठिया जैसी समस्याओं को जड़ से ठीक करता है।
इसका नाम ही बताता है – “महायोगराज”, यानी महान औषधीय संयोजन।
संक्षिप्त परिचय:
महायोगराज गुग्गुल चूर्ण एक प्राचीन आयुर्वेदिक योग है जो वात, पित्त और कफ – तीनों दोषों को संतुलित करता है।
यह हड्डियों, नसों, जोड़ों और मांसपेशियों को मजबूत बनाकर शरीर में नई ऊर्जा भर देता है।
मुख्य लाभ
1. गठिया और जोड़ों का दर्द दूर करे
यह जोड़ों में जमा हुए “आम” (toxins) को बाहर निकालता है, जिससे दर्द, सूजन और अकड़न कम होती है।
2. स्नायु और नसों को शक्ति दे
यह नसों में रक्त प्रवाह बढ़ाता है और तंत्रिका तंत्र (nervous system) को मज़बूत बनाता है।
3. सायटिका, कमर दर्द और सर्वाइकल में लाभकारी
कमर के नीचे या गर्दन के दर्द में यह विशेष रूप से असरदार है।
4. पाचन और मेटाबॉलिज़्म को सुधारे
पाचन को संतुलित रखकर शरीर में गैस और कब्ज की समस्या को दूर करता है।
5. संधिवात, आमवात और वातरक्त में अमृत समान
पुराने गठिया, सूजन और जोड़ों के विकारों में यह चूर्ण चमत्कारी परिणाम देता है।
🙏 बनाने की विधि
सामग्री
1. शुद्ध गुग्गुल – 100 ग्राम
2. त्रिफला चूर्ण – 50 ग्राम
3. त्रिकटु चूर्ण (सौंठ, मरीच, पिपली) – 25 ग्राम
4. विदंग चूर्ण – 20 ग्राम
5. चवय, चित्रक, हिंगु, अजमोद – 10-10 ग्राम
6. लोहत भस्म – 10 ग्राम
7. अभ्रक भस्म – 5 ग्राम
8. ताम्र भस्म – 5 ग्राम
9. वट, पीपल और अश्वगंधा चूर्ण – 20-20 ग्राम
10. एरण्ड मूल चूर्ण – 20 ग्राम
11. घी या गोमूत्र अर्क – भिन्न-भिन्न रूप में मिश्रण हेतु
विधि
1. सभी औषधियों को बारीक पीसकर एकसार चूर्ण बना लें।
2. गुग्गुल को हल्के गर्म गोमूत्र अर्क या त्रिफला क्वाथ में घोंटकर मुलायम बना लें।
3. अब इस मिश्रण में सभी चूर्ण धीरे-धीरे मिलाएँ।
4. इसे सुखाकर एयरटाइट शीशी में रखें।
5. चाहें तो इसे टैबलेट रूप में भी तैयार किया जा सकता है (500 mg की गोलियाँ)।
🙏 सेवन विधि
मात्रा: 1 चम्मच (या 2 टैबलेट)
समय: दिन में 2 बार, भोजन के बाद
सहायक द्रव्य: गुनगुना पानी, दूध या रस्नादि क्वाथ
कोर्स अवधि: 40 दिन से 3 माह तक नियमित सेवन करें
🙏 सावधानियाँ
गर्भवती महिलाएँ इसे बिना वैद्य की सलाह के न लें।
अत्यधिक गर्म प्रकृति वाले लोग ठंडी तासीर वाले आहार के साथ लें।
अधिक मात्रा में सेवन से जलन या पित्त बढ़ सकता है।
🙏 निष्कर्ष
👉 महायोगराज गुग्गुल चूर्ण सिर्फ एक औषधि नहीं, बल्कि यह शरीर को वात दोषों से मुक्त कर नई ऊर्जा देने वाला रसायन है।
नियमित सेवन से जोड़ों की जकड़न मिटती है, थकान दूर होती है और शरीर फिर से सक्रिय, लचीला और शक्तिशाली महसूस करता है। 🙏