Goda Moda Wala

Goda Moda Wala Joint Pain Treatment

अगर कमर के निचले हिस्से सेदर्द शुरू होकरकूल्हे, जांघऔर सीधे पैर के तलवे तक चला जाता है,बैठते समय, उठते समयया झुकते वक्तब...
11/02/2026

अगर कमर के निचले हिस्से से
दर्द शुरू होकर
कूल्हे, जांघ
और सीधे पैर के तलवे तक चला जाता है,
बैठते समय, उठते समय
या झुकते वक्त
बिजली जैसा झटका लगता है,
तो ये आम कमर दर्द नहीं,
साइटिका दर्द हो सकता है।

साइटिका तब होता है
जब कमर की नस दब जाती है,
अक्सर L4–L5 या L5–S1 की समस्या,
पुरानी चोट,
ज्यादा देर गलत पोजीशन में बैठना
या भारी वजन उठाने से
ये दर्द धीरे-धीरे बढ़ता जाता है।

अक्सर लोग पेनकिलर खाते रहते हैं,
थोड़ा आराम आता है
लेकिन नस की जड़ पर
काम नहीं हो पाता,
इसलिए दर्द बार-बार लौट आता है।

ऐसे में इलाज
नसों और रीढ़ को
अंदर से सपोर्ट देने से होता है,
और इसके लिए ये देसी तरीके
ध्यान से समझिए।

पहला तरीका,
पंसारी की दुकान से
अश्वगंधा और गोखरू ले आइए,
दोनों 50-50 ग्राम लेकर
बारीक पाउडर बना लीजिए,
रोज सुबह गुनगुने दूध के साथ
इसका आधा चम्मच सेवन कीजिए,
ये नसों की कमजोरी में मदद करता है।

दूसरा तरीका,
रात को सोने से पहले
गुनगुने तिल के तेल में
थोड़ी सी सोंठ या लहसुन डालकर
हल्का गर्म करें
और कमर, कूल्हे
और दर्द वाली नस पर
5–7 मिनट हल्की मालिश करें।

तीसरा तरीका,
अजवाइन की पोटली बनाइए,
अजवाइन को तवे पर हल्का गर्म करके
कपड़े में बांध लें
और कमर व कूल्हे पर सेक करें,
इससे जकड़न और सूजन में आराम मिलता है।

चौथा तरीका,
रोज सुबह खाली पेट
एक गिलास गुनगुने पानी में
आधा चम्मच त्रिफला चूर्ण लीजिए,
पेट साफ रहेगा
तो नसों पर दबाव कम पड़ेगा।

पांचवां तरीका,
ज्यादा देर एक ही जगह न बैठें,
हर 30–40 मिनट में
थोड़ा चलना जरूरी है,
नीचे झुककर
अचानक वजन उठाने से बचें।

छठा तरीका,
सोते समय
बहुत मुलायम गद्दे से बचें,
रीढ़ को सपोर्ट देने वाला
मीडियम हार्ड बिस्तर इस्तेमाल करें।

20 से 30 दिन तक
ये देसी तरीके
नियमित रूप से अपनाने से
कमर से पैर तक जाने वाला दर्द,
झनझनाहट
और जकड़न में
धीरे-धीरे सुधार महसूस
अधिक जानकारी के लिए हमसे कांटेक्ट करें 7497812451

आयुर्वेद के अनुसार साइटिका को गृध्रसी रोग कहा जाता है। इस रोग में पैर में तेज पीड़ा होती है, जिसके कारण व्यक्ति का चलने ...
03/02/2026

आयुर्वेद के अनुसार साइटिका को गृध्रसी रोग कहा जाता है। इस रोग में पैर में तेज पीड़ा होती है, जिसके कारण व्यक्ति का चलने का तरीका गिद्ध (Vulture) जैसा हो जाता है। इसी वजह से इस रोग को गृध्रसी कहा गया है।

आयुर्वेद में इसे वातजन्य रोगों की श्रेणी में रखा गया है। यह समस्या मुख्य रूप से बढ़े हुए वात दोष और दूषित कफ दोष के कारण उत्पन्न होती है।

जब व्यक्ति अत्यधिक वात बढ़ाने वाले आहार का सेवन करता है, जैसे—बीन्स, अंकुरित अनाज, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ, अत्यधिक सूखा और ठंडा भोजन, फास्ट-फूड तो यह समस्या ज्यादा बढ़ जाती है।

या फिर कड़वे और कसैले रस वाले पदार्थों का अधिक मात्रा में उपयोग करता है, लगातार उपवास करता है, बहुत देर तक खड़ा रहता है या लंबे समय तक एक ही जगह बैठा रहता है
तो शरीर में वात दोष बढ़ जाता है। इसी बढ़े हुए वात दोष के कारण गृध्रसी और अन्य वात संबंधी रोग उत्पन्न होते हैं।

अगर हम वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझें, तो हमारी रीढ़ की हड्डी कई छोटे-छोटे मनकों (Vertebrae) से बनी होती है। कमर के हिस्से में L4, L5, S1, S2, S3 जैसे मनके होते हैं।

इन मनकों के बीच से बहुत पतली नसें निकलती हैं, जो आगे जाकर आपस में मिल जाती हैं और मिलकर साइटिका नर्व बनाती हैं। यही नस हमारे हिप्स से शुरू होकर पूरी टांग में नीचे तक जाती है।

साइटिका एक प्रमुख नस है, जो कूल्हे से निकलकर पूरी टांग में फैलती है।
जहां-जहां यह नस जाती है, वहां-वहां व्यक्ति को दर्द महसूस होता है।

रीढ़ की हड्डी के मनकों के बीच एक नरम डिस्क होती है, जो झटकों (Jerks) से बचाने का काम करती है।

किसी भी कारण से जब यह डिस्क अपनी जगह से हिल जाती है, तो समस्या शुरू हो जाती है।

अक्सर लोग मानते हैं कि भारी वजन उठाने या गिरने की वजह से डिस्क खिसक गई।
ऐसी स्थिति में डिस्क साइटिका नर्व पर दबाव डाल देती है, जिससे पूरी टांग में लगातार दर्द बना रहता है।

कभी-कभी डिस्क दब जाती है, जिससे मनकों के बीच का गैप कम हो जाता है।
कई बार डिस्क अपनी सीध से बाहर निकल जाती है।
और कई बार मनकों के बीच का अंतर ज्यादा बढ़ जाता है।

इन सभी परिस्थितियों में साइटिका नर्व पर दबाव पड़ता है और दर्द उत्पन्न होता है।

जिन लोगों के शरीर में वात यानी वायु अधिक बनती है,
जिनकी नसें और मांसपेशियां कमजोर होती हैं,
उन्हें साइटिका और कमर दर्द की समस्या ज्यादा होती है।

सबसे बड़े दो कारण यही हैं—
शरीर में वात की अधिकता और नसों की कमजोरी।

जब शरीर में वात बढ़ता है, तो यह नसों को कमजोर कर देता है और उनमें ऐंठन पैदा करता है।
इसीलिए सबसे जरूरी है शरीर से अतिरिक्त वात को बाहर निकालना।

आजकल साइटिका की समस्या इसलिए भी बढ़ रही है क्योंकि अधिकतर लोगों को दिनभर बैठकर काम करना पड़ता है।
इससे स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और साइटिका जैसी समस्याओं की संभावना बढ़ जाती है।

साइटिका दर्द होने के मुख्य कारण
☑️जो लोग बहुत ज्यादा एक्सरसाइज करते हैं
☑️जो लोग भारी वजन उठाते हैं
☑️जो लोग बिल्कुल भी व्यायाम नहीं करते
☑️ जिनके शरीर में वात जमा होता रहता है

जब शरीर में बहुत अधिक वात इकट्ठा हो जाती है, तो यह डिस्क के अंदर मौजूद छल्लों के बीच के फ्लूड को सुखा देती है।
यह फ्लूड लगभग 80% पानी और 20% प्रोटीन व कैल्शियम से बना होता है।

फ्लूड सूखने के कारण छल्ले आपस में टकराने लगते हैं।
उनके बीच की जगह खत्म हो जाती है और किसी न किसी नस पर दबाव पड़ जाता है।

जब नस दबती है, तो पूरी टांग में दर्द शुरू हो जाता है।
यह दर्द मुख्य रूप से टांग के पीछे वाले हिस्से में होता है।
बैठने पर टांगों में सुन्नपन आने लगता है।
लेटने पर दर्द ज्यादा महसूस होता है।

जब व्यक्ति खड़ा होकर चलता है, तो शरीर गर्म होने लगता है और धीरे-धीरे साइटिका का दर्द कम होने लगता है।

साइटिका को ठीक करने के उपाय
अगर आप डॉक्टरी इलाज की बात करें, तो ज्यादातर मामलों में इसका स्थायी समाधान नहीं होता।
कारण यह है कि डॉक्टर एक डिस्क को तो ठीक कर सकते हैं,
लेकिन समस्या दोबारा किसी दूसरी डिस्क में हो सकती है।

इसीलिए कुछ ऐसे आयुर्वेदिक और घरेलू उपाय हैं,
जिनसे बहुत से लोगों को स्थायी लाभ मिला है।

डॉक्टरी पद्धति में जहां स्थायी इलाज नहीं है,
वहीं योग और आयुर्वेद में इसका परमानेंट समाधान संभव है।

1. लहसुन वाला दूध
लहसुन दूध स्वाद में भले अच्छा न लगे, लेकिन साइटिका के लिए बहुत असरदार है।
कम से कम 20 दिन तक इसका सेवन करना जरूरी है।

विधि:
4–5 लहसुन की कलियां
लगभग 300 ml दूध
1 कप पानी
स्वादानुसार शहद

लहसुन छीलकर कुचल लें।
दूध और पानी के साथ उबालें।
उबाल आने पर गैस बंद करें और गुनगुना होने दें।
हल्का ठंडा होने पर शहद मिलाएं (डायबिटीज में न डालें)।

रोज रात सोने से 1 घंटा पहले पिएं।

लहसुन में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं,
जो साइटिका नर्व की सूजन को कम करते हैं।

2. हल्दी और तिल के तेल की मालिश
1 चम्मच हल्दी पाउडर
1 चम्मच तिल का तेल

दोनों को मिलाकर पेस्ट बनाएं और दर्द वाली जगह पर हल्के हाथ से मालिश करें।
दिन में दो बार किया जा सकता है।

ध्यान रखें—बाजार का पाउडर नहीं,
गांठ वाली हल्दी को सुखाकर पीसकर इस्तेमाल करें।

हल्दी नसों की मरम्मत (Nerve Regeneration) में मदद करती है।

3. हल्दी पानी
सुबह खाली पेट एक गिलास गुनगुने पानी में
½ चम्मच घर की पिसी हल्दी मिलाकर
धीरे-धीरे सिप करके पिएं।

4. शिलाजीत का सेवन
शिलाजीत हड्डियों और नसों को मजबूत करता है।

शिलाजीत को एक चने के बराबर मात्रा में दूध में मिलाकर पिएं।

15 दिन तक रोज सेवन करें।

शरीर में वात के असंतुलित होने की वजह से

जोड़ों में दर्द
घुटनों का दर्द
गठिया (Arthritis)
साइटिका
और कमर दर्द

जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
इसीलिए इन सभी रोगों में वात को संतुलित करना सबसे ज्यादा जरूरी होता है।

वात संतुलन के लिए मेथी दाने का सेवन
वात को संतुलित करने के लिए एक और बेहद असरदार औषधि है।
जिसका उपयोग लोग कई वर्षों से करते आ रहे हैं और इससे उन्हें अच्छे परिणाम भी मिले हैं।

मेथी दाने
अश्वगंधा
विधारा
सोंठ सफेद तिल (हल्का भुना हुआ)
बबूल गोंद
को बराबर मात्रा में चूर्ण बनाकर सुबह-शाम सेवन करें।

मेथी दाने वात दोष को संतुलित करने में मदद करते हैं,
नसों को मजबूती देते हैं
और कमर दर्द, साइटिका व जोड़ों के दर्द में धीरे-धीरे आराम पहुंचाते हैं।

मसाला काढ़ा (पुराने कमर दर्द के लिए)
1 बड़ी इलायची
1 inch दालचीनी
3 लौंग
गुड़

इनसे बना काढ़ा वात और कफ दोष को संतुलित करता है,
हड्डियों को मजबूत करता है और नसों को खोलता है।

खाली पेट सेवन करें।

मसाज और जीवनशैली
महानारायण तैल
महामाष तैल
प्रसारिणी तैल
महाविषगर्भ तैल

उपयोग का तरीका

इस तेल से कमर, कूल्हे और पैर में हल्की मालिश करें।
रोज रात सोने से पहले लगाएं।
औषधियां
महायोगराज गुगुल
महावाविध्वंसन रस
वात गजांकुश रस
एरंड पाक
याद रखें औषधियों का कुछ समय तक नियमित रूप से सेवन करना चाहिए क्योंकि इस रोग में अक्सर लोग बहुत से अंग्रेजी दवाइयों का सेवन करके निराश हो चुके होते हैं।

इससे साइटिका, नर्व पेन और कमर दर्द में बहुत लाभ मिलता है
रोज व्यायाम करें
सही पॉस्चर में बैठें
धूम्रपान न करें
एक जगह देर तक न बैठें या खड़े न रहें
शरीर में पानी की कमी न होने दें

परहेज
दही
फूलगोभी
भिंडी
उड़द दाल
ठंडी, तली-भुनी और मसालेदार चीजें
खट्टी चीजें,
ठंडी चीजें
इनसे दूर रहें,
क्योंकि ये वात को बढ़ाती हैं और नसों को कमजोर करती हैं।
Goda Moda Wala
33 Housing Board Colony Sirsa Road Hisar Haryana 7497812451

🔥 SLIP DISC & SCIATICA – MYTH vs FACT 🔥❌ Myth 1: Slip Disc मतलब रीढ़ की हड्डी टूट जाती है✅ Fact:Slip Disc में हड्डी नहीं...
26/01/2026

🔥 SLIP DISC & SCIATICA – MYTH vs FACT 🔥

❌ Myth 1: Slip Disc मतलब रीढ़ की हड्डी टूट जाती है
✅ Fact:
Slip Disc में हड्डी नहीं टूटती। डिस्क का अंदर का जेल जैसा हिस्सा बाहर की ओर उभर आता है और नस पर दबाव डालता है — जिससे दर्द, झनझनाहट और कमजोरी होती है।

❌ Myth 2: ज़्यादा दर्द मतलब समस्या बहुत खतरनाक है
✅ Fact:
कभी-कभी हल्का दर्द भी nerve compression का संकेत हो सकता है। सही जाँच सबसे ज़रूरी होती है।

❌ Myth 3: युवा लोगों को Slip Disc नहीं होता
✅ Fact:
गलत posture, मोबाइल/लैपटॉप का ज़्यादा इस्तेमाल और गलत gym technique की वजह से
आज 18–35 साल की उम्र में भी Slip Disc और Sciatica आम हो गया है।

❌ Myth 4: MRI में Disc Bulge दिखा मतलब ऑपरेशन तय
✅ Fact:
MRI सिर्फ diagnosis करता है, इलाज तय नहीं करता।
अधिकतर मरीजों में non-surgical treatment से आराम मिल जाता है।

❌ Myth 5: चलने से Slip Disc और बिगड़ जाता है
✅ Fact:
डॉक्टर की सलाह से किया गया controlled movement और exercise recovery को तेज़ करता है।

❌ Myth 6: Sciatica मतलब नस हमेशा के लिए खराब
✅ Fact:
Sciatica अधिकतर मामलों में reversible होता है।
Nerve Block, और GMW जैसी advanced techniques से नस पर दबाव कम किया जा सकता है।

👨‍⚕️ Expert Spine Care – Hisar

🏥 GMW Shri Sai health care centre
📍 33 Housing Board Colony Sirsa Road Hisar Haryana
📞 7497812451

⭐ Advanced Non-Surgical Treatment For:

✔ Slip Disc (L4–L5, L5–S1)
✔ Sciatica
✔ Back Pain
✔ Cervical Pain
✔ Nerve Compression

26/01/2026

Happy republic day

25/01/2026

All important points of body

🔥 Sciatic nerve pain doesn’t happen by chance.It’s a warning sign from your nervous system.The sciatic nerve begins in t...
21/01/2026

🔥 Sciatic nerve pain doesn’t happen by chance.
It’s a warning sign from your nervous system.

The sciatic nerve begins in the lower spine (L4, L5, S1), travels through the pelvis, and runs all the way down the leg.
It’s the longest and thickest nerve in the human body.

When this nerve gets compressed, irritated, or mechanically stressed, your body responds with pain ⚡

❓ Common causes include:

• 💿 Disc herniation pressing on the nerve root
• 🚧 Spinal canal narrowing (stenosis)
• 🔥 Inflammation around the nerve
• 😖 Excessive tension in the piriformis muscle
• 🧍‍♂️ Poor posture & repetitive movement patterns

When the nerve loses space, blood flow decreases, inflammation increases, and the brain interprets the signal as:
🔥 burning
⚡ electric shocks
🐜 tingling
💪 weakness
⬇️ pain traveling down the leg

👉 This is not just a “muscle problem.”
It’s a neuromechanical issue.

As long as compression continues, pain doesn’t disappear—it builds up.

✅ The real solution isn’t masking symptoms.
It’s restoring space, mobility, lumbar stability, and movement control.
When the nerve can move freely again, pain begins to fade 🌱

Your body isn’t failing you.
🚨 It’s communicating with you.

Move better.
Protect your spine.
Reclaim your life. 💪🔥
Contact us 7497812451






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ठंड के वो 14 दिन जो रखे
आपको वात रोगों से दूर

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33 Housing Board Colony Sirsa Road
Hisar
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