Bajrang Jyotish Kendra

Bajrang Jyotish Kendra Acharya Sandeep Vats Sharma
Contact : 81681-30183 He showed an inclination and curiosity towards astro-sciences at a tender age of 23.

The Bajrang Jyotish Kendra is one of the Best Astrologer, Palm Reader, Numerologist, Vastu Expert, Telepathy Expert, Spiritual Crisis Expert, Reiki Healing Master in India. Pandit Sandeep Sharma has the rare quality of reaching out to his clients, and being able to guide them in the most critical of circumstances and situations. His endearing ways of resolving the most intricate situations with ease and helping you with his apt counseling in times of need, makes him the most sought after astrologer of our times. However, what started as a hobby soon turned into an obsession and then a profession! Today, he is a certified Astrologer & Vastu Expert. He is also expert in spiritualism and other areas of Hinduism. Whenever you are in a dilemma of what to do or when to do, whenever a decision is to be taken which has multiple options, for all the ifs and buts of life, which confront us day in and day out, ask the jyotish guru. He will guide you through this maze of uncertainties called life.

https://youtu.be/x0VRKOmyzKE?si=daN-7AA1bKIxxA85पंडित संदीप शर्मा एक प्रसिद्ध ज्योतिषी और वास्तु विशेषज्ञ हैं, जिन्हें ह...
05/12/2025

https://youtu.be/x0VRKOmyzKE?si=daN-7AA1bKIxxA85
पंडित संदीप शर्मा एक प्रसिद्ध ज्योतिषी और वास्तु विशेषज्ञ हैं, जिन्हें हिंदू वैदिक ज्योतिष के क्षेत्र में व्यापक अनुभव है। पिछले 19 सालों से वह तनावपूर्ण जीवन जी रहे लोगों की समस्याओं का समाधान कर रहे हैं। पंडित संदीप शर्मा कई मशहूर हस्तियों, राजनेताओं, उद्योगपतियों, नौकरशाहों और उद्यमियों को अपनी ज्योतिषीय सेवाएं भी देते हैं।

पंडित संदीप शर्मा को अपने पूर्वजों से वैदिक ज्ञान और अनुभव प्राप्त हुआ है, वे सभी इन विद्याओं के उत्कृष्ट ज्ञाता थे। पंडित जी की शैली में पौराणिक और आधुनिक ज्योतिष का संगम देखने को मिलता है। अगर आपके भी कुछ ऐसे सवाल या समस्याएं हैं, जो आपके लिए बोझ बन गई हैं, तो पंडित संदीप शर्मा आपकी सभी समस्याओं का समाधान कर सकते हैं।

पंडित जी की मदद से आप अपनी कुंडली और हस्तरेखा अध्ययन के अनुसार अपनी शादी, संतान, नौकरी, व्यवसाय, घरेलू हिंसा, पितृदोष, मांगलिक दोष आदि सभी समस्याओं का समाधान पा सकते हैं।

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Website: https://bajrangjyotish.com

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24/11/2025

अध्याय 1 : बाल्यकाल का पहला विद्रोह (Age 12–13)

संदीप के भीतर आध्यात्मिक चिंगारी पहली बार तब जगी जब वह केवल 12–13 वर्ष के थे।
उम्र छोटी थी, पर मन में एक अजीब-सी स्पष्टता—
कि धर्म और कर्म से पैसा लेना गलत है।

यह विचार बिना किसी पुस्तक, बिना किसी गुरु के…
अंदर से उठी हुई एक सहज घृणा थी उन लोगों के प्रति
जो पूजा–पाठ, दान–दक्षिणा को व्यापार बना देते थे।

यहीं से टकराव शुरू हुआ—
“मैं कर्म से नहीं, सत्य से जिऊँगा।”

यही व्रत बाल मन में स्थापित हो गया।

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अध्याय 2 : ज्योतिष–ज्ञान की पहली पुकार (Age 19–21)

19वें वर्ष में संदीप ने जीवन का दूसरा बड़ा सत्य महसूस किया—
कि हमारा प्राचीन ज्ञान नष्ट हो रहा है।

लोग इसे अंधविश्वास या धंधा कहकर दूर भागते हैं,
पर वास्तव में यह एक गहरी साइंस है।
ज्योतिष, तंत्र, आयुर्वेद… सब विलुप्त हो रहे थे।

इसी जिज्ञासा ने उनके भीतर अध्ययन की अग्नि जला दी—
“मुझे सीखना है, संग्रह करना है, सहेजना है।”

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अध्याय 3 : शिक्षा—पर मन किसी और राह पर (12th Commerce → B.Com)

उन्होंने 12वीं कॉमर्स से की, फिर B.Com में प्रवेश लिया।
पर एक अजीब बात—
किताबें खोलीं, पर पढ़ाई में मन नहीं लगा।

कॉलेज नाम का था,
पर वास्तविक पढ़ाई उनकी दूसरी थी—
ज्योतिष, ग्रंथ, रसविद्या, तंत्र-सिद्धांत।

कक्षा से ज्यादा समय विचार में, ध्यान में,
और पुरानी पुस्तकों के साथ बीतने लगा।

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अध्याय 4 : आकाश की ओर उड़ान—और धरती पर लौटना

2005 में संदीप ने असामान्य निर्णय लिया—
Commercial Pilot Training।

Hisar Flying Club में CPL की राह कठिन थी,
पर उन्होंने तय की।
3–4 वर्षों में ट्रेनिंग और नौकरी दोनों पूरी हो गईं।
Kingfisher और Indigo दोनों कंपनियों में उड़ान भरी।

सैलरी लाखों में—
110–120 हजार से शुरू होकर 260–280 हजार तक।

पर आश्चर्य यह कि—
उन्होंने एक पैसा अपने पास नहीं रखा।
सब घर भेज देते।

फिर एक दिन
सिर्फ एक कपड़ा पहनकर,
700 रुपये के कमरे में रहने,
किताबें उठाने
और तपस्या करने निकल पड़े।

कर्मकांड से नहीं,
साधना से जीवन चलाना था।

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अध्याय 5 : हरिद्वार — 112 साल के संत की छाया (2002–2005)

2002 में संदीप हरिद्वार पहुँचे।
भूमा निकेतन आश्रम—
वहाँ मिले महान संत लक्ष्येश्वर महाराज,
जिनकी उम्र तब 112 वर्ष थी।

उनके शिष्य थे अच्युतानंद जी,
जिनके साथ संदीप 2 वर्ष रहे।

पहला अलौकिक अनुभव

एक दिन संदीप और उनका मित्र
आधे किलोमीटर दूर कमरे में बैठे थे।
जो बातें वे धीरे-धीरे बोल रहे थे,
महाराज जी ने वही-वही दोहराना शुरू कर दिया।

बिना सुने, बिना सामने हुए—
सटीक शब्द, सटीक भाव।

तब पहली बार लगा—
यह संसार पाँच इंद्रियों से बड़ा है।

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अध्याय 6 : उंगली की एक रेखा—और वैज्ञानिक का अहंकार टूट गया

संदीप ने महाराज जी से कहा—
“कुछ practical दिखाइए।”

महाराज जी मुस्कुराए,
उंगली से जमीन पर एक सीधी रेखा खींच दी,
और बोले— “पार करो।”

उन्होंने रोड़े फेंके—
अंदर नहीं गए।
ईंटें फेंकी—
रेखा पार नहीं हुई।

स्वयं कदम बढ़ाए—
शरीर आगे नहीं बढ़ा।

वह क्षण निर्णायक था।
तब समझ आया—
साधना विज्ञान है, जादू नहीं।
और गुरु की शक्ति वास्तविक है।

यहीं से उनकी यात्रा गहरी हो गई।

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अध्याय 7 : ग्रंथों का महासागर — 1000+ पुस्तकों का अध्ययन

लक्ष्येश्वर महाराज की लाइब्रेरी में
हजारों–लाखों ग्रंथ थे।
उन्होंने रसविद्या, रसायन, तारक तंत्र,
घटक, आयुर्वेद, ज्योतिष, संस्कृत—
सब पढ़ना शुरू किया।

एक दिन उन्होंने 10–20 किताबें random खोलीं।
जहाँ भी उंगली रखी—
महाराज जी तुरंत उसी लाइन को
संस्कृत, हिंदी और अंग्रेज़ी में fluently बोलने लगे।

वह 112 वर्ष के थे—
पर तेजस्वी जैसे 20 वर्ष का युवक।

तभी पहली बार संदीप ने सोचा—
“ज्ञान साधना है, उम्र नहीं।”

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अध्याय 8 : दूसरा गुरु — गोविंदाचार्य महाराज (2005–2015)

2005 में संदीप हिसार लौटे।
भंडारे कराने जाते थे।
वहीं मिले ब्राह्मण फकीर— गोविंदाचार्य।

रहने की जगह नहीं थी,
तो वे संदीप के कमरे में रहने लगे।

उन्होंने संदीप को जीवन का कठोर अनुशासन सिखाया—

भोजन स्वयं बनाना

एकांत में खाना

अपनी थाली और बिस्तर किसी को न देना

शुद्धता का पालन

हवन और कर्मकांड की सही विधि

साधक का मन, वाणी और आचरण

वे 2005 से 2015 तक संदीप के साथ रहे।
उनके साए में संदीप एक साधक बने।

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अध्याय 9 : तीसरा गुरु — हरजीत बराड़ (तांत्रिक गुरु)

बराड़ घर से बेघर थे,
पर तंत्र में अत्यंत अनुभवी।
कामाख्या, तारा देवी, नलखेड़ा—सब घूम चुके थे।

वे संदीप के पास रहने लगे और
काली साधना, गायत्री, अघोर तंत्र, वीरान साधनाएँ सिखाईं।

21 दिनों की वीरान साधना

खेतों, शमशान, सुनसान क्षेत्रों में
रात के हवन, दीपक, गोला-धारा—
और चारों ओर अनदेखी आवाज़ें।

कभी स्त्री की आवाज़,
कभी पुरुष,
कभी पशु।

एक रात संदीप की बुलेट की चेन टूटने जैसी आवाज़ आई।
बराड़ को बुलाया।
रास्ते में उसका स्कूटर दो टुकड़े हो गया…
फिर भी घसीटकर आया।

पर सुबह जांच में—
स्कूटर भी सही,
बुलेट भी सही।

ऐसे अनुभवों ने साधना को सिद्धि में बदला—
और उनके पास दूर-दूर से लोग आने लगे।

लेकिन साथ ही…
अहंकार भी आया।

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अध्याय 10 : अहंकार की अग्नि और उसका शांत होना (2007–2012)

2007–08 में उनके पास
भीड़ लगी रहती—
वशीकरण, मोहन, व्यापार वृद्धि—
सबके काम सेकंडों में सफल होते थे।

यहीं मन में भाव आया—
“ये तो मेरे हाथ में है।”

लेकिन 2012 में बराड़ ने कहा—
“या तो घर बसाना सीख,
या फिर संकटग्रस्त आत्माओं का बोझ उठाना।”

संदीप ने शादी ठुकरा दी।
दिन में 20–30 संकटग्रस्त लोग आने लगे—
बंधन, परे, प्रभाव, पीड़ाएं।

यहीं से मन की कठोरता गलने लगी,
अंदर विनम्रता आने लगी,
और साधना पुनः पवित्र हो गई।

18/11/2025
09/11/2025

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