26/04/2026
प्रिय साथियों, सादर नमस्कार।
आज मैं आप सभी से अत्यंत गंभीर और निर्णायक क्षण में संवाद कर रहा हूँ। इलेक्ट्रो होम्योपैथी, जिसका इतिहास संघर्ष, सेवा और समर्पण से भरा रहा है, आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ से उसका भविष्य तय होना है। यह केवल एक चिकित्सा पद्धति की मान्यता का प्रश्न नहीं, बल्कि लाखों रोगियों के विश्वास, सस्ती और सुलभ चिकित्सा के अधिकार, तथा हमारे वर्षों के परिश्रम का परिणाम है।
हाल ही में स्वास्थ्य एवं अनुसंधान विभाग, भारत सरकार की ओर से एक महत्वपूर्ण ई-मेल प्राप्त हुआ, जिसका विषय था — “Current address of your institute for updation of records in the proposal”
इस ई-मेल में स्पष्ट किया गया है कि इलेक्ट्रो होम्योपैथी की मान्यता का विषय वर्तमान में अंतर-विभागीय समिति (IDC) के विचाराधीन है। साथ ही संस्थानों से उनके अद्यतन विवरण — पूर्ण पता, संपर्क नंबर, ई-मेल आईडी तथा संस्थान का छायाचित्र — तत्काल उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है।
साथियों, यह कोई साधारण प्रक्रिया नहीं है। यह संकेत है कि सरकार अब इस चिकित्सा पद्धति को गंभीरता से परखने और अंतिम निर्णय की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसके अंतर्गत—
संस्थानों का निरीक्षण
शिक्षण एवं प्रशिक्षण की गुणवत्ता का मूल्यांकन
क्लिनिकल डेटा का परीक्षण
औषधि निर्माण प्रक्रिया की जांच
जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं का गहन परीक्षण किया जाएगा। यह हमारे लिए अंतिम अवसर भी हो सकता है।
यदि हम इस निरीक्षण में खरे नहीं उतरे, यदि हम अपने कार्यों को प्रमाणिक रूप से प्रस्तुत नहीं कर पाए, यदि हम आपसी मतभेदों में उलझे रहे— तो यह सुनहरा अवसर हमारे हाथों से निकल सकता है, और भविष्य में मान्यता प्राप्त करना अत्यंत कठिन, लगभग असंभव हो जाएगा।
इसलिए मैं आप सभी से कुछ स्पष्ट और विनम्र आग्रह करना चाहता हूँ—
1. एकजुटता ही सबसे बड़ी शक्ति है
व्यक्तिगत मतभेद, संगठनात्मक विवाद और आपसी आरोप-प्रत्यारोप इस समय सबसे बड़ा नुकसान कर सकते हैं। हमें यह समझना होगा कि यह लड़ाई “व्यक्ति” की नहीं, “पद्धति” के अस्तित्व की है।
2. क्लिनिकल डेटा को प्राथमिकता दें
आपके पास जो भी सफल उपचार के प्रमाण हैं— केस स्टडी, रिपोर्ट, फोटो, वीडियो— उन्हें व्यवस्थित करें। यही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।
3. मानक और गुणवत्ता पर ध्यान दें
शिक्षण संस्थान हों या क्लिनिक— सभी को अपने कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करनी होगी।
4. Proposlist Holder संस्थानों के साथ सहयोग करें
यदि आपका संस्थान सीधे प्रस्ताव सूची में नहीं है, तब भी आप अपने कार्य और डेटा के माध्यम से किसी Proposlist Holder के साथ जुड़कर इस प्रक्रिया का हिस्सा बन सकते हैं।
5. समय का महत्व समझें
यह वह समय है जब हमें सक्रिय होना है, न कि प्रतीक्षा करनी है।
साथियों,
इलेक्ट्रो होम्योपैथी केवल एक वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति नहीं है, बल्कि यह उन लोगों के लिए आशा की किरण है जो महंगे इलाज का खर्च नहीं उठा सकते। यदि इसे उचित मान्यता मिलती है, तो भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था में एक नई क्रांति आ सकती है— सस्ती, सुलभ और प्रभावी उपचार की दिशा में।
हमारे पूर्वजों और वरिष्ठ चिकित्सकों ने इस पद्धति को जीवित रखने के लिए वर्षों तक संघर्ष किया है। अब यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम इसे उसका उचित स्थान दिलाएं।
आइए, हम सब मिलकर इस अवसर को इतिहास में बदल दें।
एकजुट होकर, प्रमाण के साथ, और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ें— ताकि आने वाली पीढ़ियाँ हमें उस पीढ़ी के रूप में याद करें जिसने इलेक्ट्रो होम्योपैथी को उसका अधिकार दिलाया।
आपका सहयोग ही इस आंदोलन की सबसे बड़ी शक्ति है।
सादर,
अजय हार्डिया, निदेशक,
देवी अहिल्या कैंसर हॉस्पिटल