Thetarotdharmaofficial444 by Swati Verma

Thetarotdharmaofficial444 by Swati Verma Astrologer

Black magic removal healing
17/05/2025

Black magic removal healing

14/05/2025
Booking open now
08/05/2025

Booking open now

यह Bada Mangal, जिसे Budhwa Mangal भी कहा जाता है, बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। यह पर्व हनुमान जी को समर्पित होता है और...
06/05/2025

यह Bada Mangal, जिसे Budhwa Mangal भी कहा जाता है, बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। यह पर्व हनुमान जी को समर्पित होता है और ज्येष्ठ माह (मई-जून) के हर मंगलवार को मनाया जाता है।

बड़ा मंगल क्यों मनाते हैं?

1. हनुमान जी और श्रीराम से जुड़ी मान्यता:
मान्यता है कि इसी दिन हनुमान जी ने पहली बार भगवान श्रीराम से भेंट की थी। इसलिए यह दिन हनुमान भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है।बड़ा मंगल के दिन श्रद्धा और सेवा का विशेष महत्व होता है। इस दिन आप निम्न कार्य कर सकते हैं:

बड़ा मंगल पर क्या करना चाहिए:

1. हनुमान जी की पूजा:

सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।

हनुमान जी को सिंदूर, चोला, लड्डू और फूल अर्पित करें।

हनुमान चालीसा, सुंदरकांड या बजरंग बाण का पाठ करें।

2. मंदिर दर्शन:

नजदीकी हनुमान मंदिर जाएं और दर्शन करें।

वहां दीपक जलाएं और प्रसाद चढ़ाएं।

3. भंडारा या जल सेवा:

गरीबों को भोजन कराना या भंडारे में सहयोग करना पुण्यकारी माना जाता है।

जगह-जगह जल/शरबत वितरण की सेवा (जल प्याऊ) करें।

4. दान-पुण्य:

इस दिन वस्त्र, अन्न, जल या धन का दान करें।

गाय, बंदर, और जरूरतमंदों को भोजन देना शुभ माना जाता है।

5. संकल्प और व्रत:

कुछ लोग बड़ा मंगल के दिन व्रत भी रखते हैं – फलाहार या केवल एक समय भोजन करते हैं।

व्रत रखते समय हनुमान जी का ध्यान और भक्ति करें।

6. धार्मिक कार्यों में भाग लें:

सुंदरकांड, कीर्तन, या हनुमान चालीसा पाठ जैसे आयोजनों में सम्मिलित हों।

मो​हिनी एकादशी पूजा विधि (Mohini Ekadashi Pooja Vidhi in Hindi):मो​हिनी एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। ...
06/05/2025

मो​हिनी एकादशी पूजा विधि (Mohini Ekadashi Pooja Vidhi in Hindi):

मो​हिनी एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। यह व्रत वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। इस दिन व्रत रखने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

पूजा विधि:

व्रत का संकल्प:

एक दिन पूर्व (दशमी) को सात्विक भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।

प्रातः काल सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें।

भगवान विष्णु का ध्यान करके व्रत का संकल्प लें – "आज मैं मो​हिनी एकादशी व्रत का पालन करूंगा।"

पूजा स्थल की तैयारी:

साफ स्थान पर लकड़ी का पाटा बिछाएं और उस पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।

दीपक जलाएं और धूप-दीप अर्पित करें।

भगवान विष्णु की पूजा:

भगवान को पीले पुष्प, तुलसी पत्र, चंदन, धूप, दीप, फल और नैवेद्य अर्पित करें।

विष्णु सहस्रनाम, गीता के श्लोक या "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें।

व्रत कथा सुनें या पढ़ें (मो​हिनी एकादशी व्रत कथा)।

उपवास नियम:

दिनभर व्रत रखें (निर्जला या फलाहार अनुसार क्षमता के अनुसार)।

रात को भगवान विष्णु के भजन कीर्तन करें और जागरण करें।

द्वादशी पर पारण:

अगले दिन सूर्योदय के बाद स्नान करें।

भगवान विष्णु की पूजा करके ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन और दान दें।

इसके बाद व्रत का पारण करें (फलाहार या भोजन से व्रत खोलें)।

यदि आप चाहें तो मैं मो​हिनी एकादशी व्रत कथा भी दे सकता हूँ। क्या आप कथा भी चाहते हैं?

Tarot session
21/04/2025

Tarot session

Address

First Floor, NGO Bhawan Building, 394, Opposite Iscon Temple, Hare Krishna Vihar, Nipania
Indore
455001

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Thetarotdharmaofficial444 by Swati Verma posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share

Share on Facebook Share on Twitter Share on LinkedIn
Share on Pinterest Share on Reddit Share via Email
Share on WhatsApp Share on Instagram Share on Telegram