30/09/2025
महत्वपूर्ण बीज मंत्र
मूल बीज मंत्र "ॐ" है। यही वह आदिम ध्वनि है, जिससे सम्पूर्ण सृष्टि और सभी मंत्रों का उद्भव हुआ है। प्रत्येक बीज मंत्र एक विशिष्ट देवता या देवी से जुड़ा होता है और उनके विशेष गुणों तथा शक्तियों का प्रतिनिधित्व करता है। बीज मंत्रों की प्रमुख चार श्रेणियां मानी जाती हैं – योग बीज मंत्र, तेजो बीज मंत्र, शांति बीज मंत्र और रक्षा बीज मंत्र।
प्रमुख बीज मंत्र और उनके अर्थ
ह्रौं
यह शिव का बीज मंत्र है। "ह्र" का अर्थ है शिव और "औं" का अर्थ है सदाशिव। इस मंत्र का जप भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने तथा साधक के भीतर शिवत्व को जाग्रत करने के लिए किया जाता है।
दूं
यह दुर्गा बीज मंत्र है। "द" दुर्गा का प्रतीक है और "ऊ" सुरक्षा का द्योतक है। अंत का ‘बिंदु’ प्रार्थना है। इस मंत्र द्वारा मां दुर्गा से रक्षा, कृपा और मातृसुलभ आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है।
क्रीं
यह काली मंत्र है। "क" मां काली का स्वरूप है, "र" ब्रह्म का और "ई" महामाया का संकेत है। इस मंत्र का भाव है – हे महामाया काली! मेरे पाप और दुखों का हरण करें।
गं
यह गणेश बीज मंत्र है। "ग" गणपति का प्रतीक है और बिंदु दुखों के नाश का संकेत है। इस मंत्र का जप करने से विघ्नों का नाश होता है और सभी शुभ कार्य सफल होते हैं।
ग्लौं
यह भी गणेश का बीज मंत्र है। "ग" स्वयं गणेश, "ल" सर्वव्यापकता और "औं" प्रतिभा का अर्थ रखता है। इस मंत्र से गणपति प्रसन्न होकर बुद्धि, यश और सफलताओं की वृद्धि करते हैं।
ह्रीं
यह महामाया या भुवनेश्वरी मां का बीज मंत्र है। "ह" का अर्थ शिव, "र" का अर्थ प्रकृति, "ई" का अर्थ महामाया और बिंदु दुख नाशक है। इस मंत्र का जप दुर्भाग्य को दूर करके सौभाग्य देने वाला माना गया है।
श्रीं
यह लक्ष्मी बीज मंत्र है। "श्र" महालक्ष्मी का स्वरूप है, "र" धन का अर्थ प्रकट करता है और "ई" पूर्ति की प्रतीक है। ¬ इस मंत्र से साधक को धन, सम्पत्ति एवं समृद्धि की प्राप्ति होती है।
ऐं
यह सरस्वती बीज मंत्र है। "ऐं" का अर्थ है – हे मां सरस्वती! इस मंत्र से विद्या, ज्ञान, कला और वाणी की प्राप्ति होती है। छात्रों, संगीत साधकों और कलाकारों के लिए यह मंत्र अत्यंत कल्याणकारी है।
क्लीं
यह कामदेव का बीज मंत्र है। "क" कामदेव, "ल" इंद्र और "ई" संतोष का द्योतक है। इस मंत्र के द्वारा प्रेम, आकर्षण और आनंद की प्राप्ति होती है।
हूं
यह भैरव का बीज मंत्र है। "ह" शिव का और "ऊं" भैरव का प्रतीक है। इस मंत्र का प्रभाव साधक के भय और संकटों का नाश करने में होता है।
श्रौं
यह नृसिंह बीज मंत्र है। "क्ष" नृसिंह का स्वरूप है, "र" ब्रह्म का, "औ" उनके उग्र दांतों का और बिंदु दुख नाश का संकेत है। इस मंत्र द्वारा साधक भगवान नृसिंह से अपनी रक्षा और दुखों के नाश की प्रार्थना करता है।