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मुलेठी – एक ऐसा नाम जिसे सुनते ही ज़बान पर मिठास सी घुल जाती है,,,,,। यह केवल स्वाद में ही नहीं, बल्कि अपने शीतल, बलवर्ध...
31/12/2025

मुलेठी – एक ऐसा नाम जिसे सुनते ही ज़बान पर मिठास सी घुल जाती है,,,,,।
यह केवल स्वाद में ही नहीं, बल्कि अपने शीतल, बलवर्धक, रोगनाशक और संजीवनी गुणों के कारण प्राचीन आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में एक प्रतिष्ठित स्थान रखती है।

संस्कृत नाम: यष्टीमधु,,,,,,,
बोटैनिकल नाम: Glycyrrhiza glabra,,,,,,,
स्वाद: मधुर (मीठा)
गुणधर्म: गुरु, स्निग्ध
वीर्य: शीत
विपाक: मधुर,,,,,

मुलेठी की जड़ में इतनी औषधीय शक्तियां समाई हुई हैं कि इसे आयुर्वेद में कई उपचारों की मूल औषधि माना गया है। चलिए जानते हैं इस ‘मिठास भरे चमत्कार’ के अनसुने तथ्य और घर में आज़माए जाने वाले आयुर्वेदिक उपाय।

अज्ञात तथ्य,,,,,,,,,,
1. वात-पित्त का संतुलन बनाए,,,,
मुलेठी शीतल होती है और पित्त को शांत करती है, लेकिन विशेष बात यह है कि यह वात को भी नियंत्रित करती है।

2. धूम्रपान छोड़ने में सहायक,,,,,,
मुलेठी की डंडी को चबाने से धूम्र की लत धीरे-धीरे कम होती है। यह तृप्ति देती है और गले को राहत भी।

3. स्त्री रोगों में उपयोगी,,,,,,
मुलेठी को शतावरी व अशोक के साथ लिया जाए तो यह स्त्रीजनित हार्मोनल असंतुलन, मासिक धर्म की अनियमितता और गर्भाशय की दुर्बलता में चमत्कारी है।


4. स्वर (Voice) को सुंदर बनाए,,,,,
मुलेठी गायक, वक्ता और शिक्षकों के लिए अमृत समान है। स्वर को मधुर, स्पष्ट और ताकतवर बनाती है।

5. शरीर में प्राकृतिक स्टेरॉइड का निर्माण बढ़ाए,,,,,
मुलेठी की जड़ में उपस्थित ‘ग्लायसिरिज़िन’ (Glycyrrhizin) शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन के समान कार्य करता है, जिससे तनाव में राहत और सूजन में कमी आती है।

6. त्वचा रोगों में उपयोगी,,,,,,,
मुलेठी में मेलानिन निर्माण नियंत्रित करने की क्षमता होती है। इसका पाउडर दही या एलोवेरा के साथ चेहरे पर लगाने से झाइयां, मुंहासे, काले धब्बे दूर होते हैं।

घर में अपनाएं ये आयुर्वेदिक घरेलू नुस्खे,,,,,,
✅ 1. गला बैठा है या खांसी है ?
उपाय:

1/2 चम्मच मुलेठी चूर्ण + 1 चम्मच शहद

दिन में दो बार सेवन करें।
👉 लाभ: गले को शीतलता, बलगम शमन, स्वर सुधार

✅ 2. गैस्ट्रिक या अल्सर की समस्या
उपाय:

मुलेठी चूर्ण को दूध में मिलाकर उबालें।

रोज़ सुबह खाली पेट पिएं।

👉 लाभ: अम्लपित्त, जलन, गैस व पेट दर्द में लाभ..

✅ 3. तनाव या अनिद्रा
उपाय:

मुलेठी + अश्वगंधा + शंखपुष्पी का सम मिश्रण

एक चम्मच रात को सोने से पहले दूध के साथ

👉 लाभ: मानसिक शांति, नींद में सुधार

✅ 4. त्वचा पर दाग या धब्बे
उपाय:

मुलेठी पाउडर + दूध या गुलाबजल

15 मिनट चेहरे पर लगाएं, फिर धो लें

👉 लाभ: साफ, चमकदार और दाग-धब्बों रहित त्वचा

✅ 5. मौसमी सर्दी-जुकाम
उपाय:

मुलेठी + तुलसी + अदरक + शहद की काढ़ा

👉 लाभ: प्रतिरक्षा बढ़े, गला साफ हो, जुकाम नियंत्रित हो

आयुर्वेद में मुलेठी का विशेष उल्लेख,,,,,,,,,,
चरक संहिता में मुलेठी को “कंठ्य”, “रसायन” और “वृष्य” कहा गया है। इसका मतलब –

कंठ्य: जो गले के रोगों को ठीक करे..

रसायन: जो शरीर में नई ऊर्जा व कोशिकाएं बनाए

वृष्य: जो प्रजनन शक्ति को बढ़ाए....

सुश्रुत संहिता में इसे नेत्रज विकार, अग्निमांद्य, हृदय रोग और श्वास रोग में विशेष उपयोगी माना गया है।

सावधानियाँ (Precautions),,,,,,,,,,,
उच्च रक्तचाप वाले व्यक्ति सीमित मात्रा में लें

लंबे समय तक अत्यधिक सेवन से जलन या BP बढ़ सकता है

गर्भवती महिलाएं चिकित्सक की सलाह पर ही लें

निष्कर्ष,,,,,,,,,
मुलेठी एक सरल, सस्ती लेकिन अत्यंत शक्तिशाली औषधि है। चाहे वह गले की खराश हो, तनाव हो या पाचन की समस्या – यह हर घर के आयुर्वेदिक बॉक्स में होनी ही चाहिए।
जिस तरह से शहद में सबको जोड़ने की शक्ति है, वैसे ही मुलेठी भी एक ‘मधुर चमत्कार’ है जो शरीर, मन और त्वचा – तीनों को संवारने में सहायक है।

जानकारी अच्छी लगी हो तो कृपया पेज को फॉलो जरूर कर

तुरंत इलाज तुरंत आराम
31/12/2025

तुरंत इलाज तुरंत आराम

बासी रोटी खाने के फायदा
30/12/2025

बासी रोटी खाने के फायदा

नागरमोथा, जिसे अंग्रेज़ी में Nut Grass कहा जाता है, आयुर्वेद में एक शक्तिशाली औषधीय पौधा माना जाता है। यह अक्सर खेतों और...
30/12/2025

नागरमोथा, जिसे अंग्रेज़ी में Nut Grass कहा जाता है, आयुर्वेद में एक शक्तिशाली औषधीय पौधा माना जाता है। यह अक्सर खेतों और बगीचों में खरपतवार की तरह उगता है, लेकिन इसकी जड़ों में अनेक औषधीय गुण छिपे होते हैं। आयुर्वेद में इसका उपयोग पाचन, वजन नियंत्रण, त्वचा रोग, महिलाओं के स्वास्थ्य और बुखार जैसी समस्याओं में किया जाता है।

✅️ नागरमोथा के अद्भुत औषधीय फायदे जानिए :--

1️⃣ पाचन तंत्र के लिए वरदान —
पाचन के लिए नागरमोथा अत्यंत लाभकारी है। इसमें भूख बढ़ाने और पाचन सुधारने वाले गुण पाए जाते हैं। यह मंदाग्नि यानी कम भूख लगने की समस्या को दूर करता है, दस्त और पेट की मरोड़ में राहत देता है और पेट के हानिकारक कीड़ों को खत्म करने में मदद करता है। पाचन समस्याओं में इसे शहद या गुनगुने पानी के साथ लेना सबसे सरल और असरदार तरीका है।

2️⃣ वजन घटाने में सहायक —
वजन नियंत्रण में भी नागरमोथा उपयोगी है। इसमें एंटी-ओबेसिटी गुण होते हैं जो शरीर में जमा हुए अतिरिक्त फैट को कम करने में मदद करते हैं।

3️⃣ त्वचा और सौंदर्य के लिए लाभकारी —
त्वचा और सौंदर्य के लिए भी नागरमोथा काफी लाभकारी है। इसकी खुशबू और एंटी-बैक्टीरियल गुण त्वचा को साफ और स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं। मुँहासे और दाग-धब्बे कम करने के लिए इसका लेप लगाया जा सकता है, जबकि खुजली और त्वचा संक्रमण होने पर इसके काढ़े से प्रभावित हिस्से को धोना लाभकारी होता है।

4️⃣ महिलाओं की स्वास्थ्य समस्याओं में मदद —
महिलाओं के स्वास्थ्य में भी इसका विशेष महत्व है। मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द को कम करने में यह सहायक है और अनियमित पीरियड्स को संतुलित करने में मदद करता है।

5️⃣ बुखार कम करने में सहायक —
इसके अलावा, नागरमोथा बुखार को कम करने में भी प्रभावी माना जाता है। पुराने या बार-बार आने वाले बुखार में इसका काढ़ा शरीर के तापमान को सामान्य करने और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है।

✅️ नागरमोथा का कौन सा भाग इस्तेमाल किया जाता है?

नागरमोथा में औषधीय गुण मुख्य रूप से इसकी जड़ और उससे बनने वाले छोटे गांठ वाले ट्यूबर (tubers) में पाए जाते हैं। इसे आयुर्वेद में सबसे महत्वपूर्ण भाग माना जाता है।

■ जड़ और ट्यूबर :- सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाला भाग है। इन्हें सुखाकर या ताजा रूप में चूर्ण, काढ़ा, तेल या लेप बनाने में उपयोग किया जाता है।

■ पत्तियां और तना :- इनका औषधीय उपयोग कम होता है और मुख्यतः जड़ की तुलना में विशेष असर नहीं होता है।

✅️ नागरमोथा का उपयोग कैसे करें —

1) चूर्ण :- 1–3 ग्राम चूर्ण को शहद या गुनगुने पानी के साथ लिया जा सकता है।

2) काढ़ा :- 10–20 मिलीलीटर दिन में दो बार सेवन कर सकते है।

3) लेप :- त्वचा रोगों के लिए पानी के साथ पेस्ट बनाकर प्रभावित हिस्से पर लगा सकते है।

⚠️ सावधानियाँ —

किसी भी जड़ी-बूटी का नियमित सेवन करने से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी है, खासकर यदि आप गर्भवती हैं या किसी विशेष दवा का सेवन कर रहे हैं।

#नागरमोथा

सरसों का तेल और लहसुन(Mustard Oil & Garlic)जोड़ों का दर्द और जकड़न के लिए(For Joint Pain & Stiffness)कैसे इस्तेमाल करें ...
30/12/2025

सरसों का तेल और लहसुन
(Mustard Oil & Garlic)

जोड़ों का दर्द और जकड़न के लिए
(For Joint Pain & Stiffness)

कैसे इस्तेमाल करें (How to Use):
सरसों के तेल में लहसुन की 3–4 कलियाँ काली होने तक पकाएँ।
गुनगुने तेल से मालिश करें।

---

हल्दी का लेप
(Turmeric Paste)

चोट और खून बहने पर
(For Cuts & Bleeding)

फायदा (Benefit):
खून बहना रोकती है और एंटीसेप्टिक का काम करती है
(ताकि इंफेक्शन न हो)

श्री राजीव दीक्षित जी हेल्थ टिप्स
30/12/2025

श्री राजीव दीक्षित जी हेल्थ टिप्स

28/12/2025

सर्दी खांसी जुकाम एकदम ठीक होगा

नाभी कुदरत की एक अद्भुत देन है,,,,,,एक 62 वर्ष के बुजुर्ग को अचानक बांई आँख से कम दिखना शुरू हो गया। खासकर रात को नजर न ...
28/12/2025

नाभी कुदरत की एक अद्भुत देन है,,,,,,

एक 62 वर्ष के बुजुर्ग को अचानक बांई आँख से कम दिखना शुरू हो गया। खासकर रात को नजर न के बराबर होने लगी।जाँच करने से यह निष्कर्ष निकला कि उनकी आँखे ठीक है परंतु बांई आँख की रक्त नलीयाँ सूख रही है। रिपोर्ट में यह सामने आया कि अब वो जीवन भर देख नहीं पायेंगे।.... मित्रो यह सम्भव नहीं है..

मित्रों हमारा शरीर परमात्मा की अद्भुत देन है...गर्भ की उत्पत्ति नाभी के पीछे होती है और उसको माता के साथ जुडी हुई नाडी से पोषण मिलता है और इसलिए मृत्यु के तीन घंटे तक नाभी गर्म रहती है।

गर्भधारण के नौ महीनों अर्थात 270 दिन बाद एक सम्पूर्ण बाल स्वरूप बनता है। नाभी के द्वारा सभी नसों का जुडाव गर्भ के साथ होता है। इसलिए नाभी एक अद्भुत भाग है।

नाभी के पीछे की ओर पेचूटी या navel button होता है।जिसमें 72000 से भी अधिक रक्त धमनियां स्थित होती है

नाभी में देशी गाय का शुध्द घी या तेल लगाने से बहुत सारी शारीरिक दुर्बलता का उपाय हो सकता है।

1. आँखों का शुष्क हो जाना, नजर कमजोर हो जाना, चमकदार त्वचा और बालों के लिये उपाय...

सोने से पहले 3 से 7 बूँदें शुध्द देशी गाय का घी और नारियल के तेल नाभी में डालें और नाभी के आसपास डेढ ईंच गोलाई में फैला देवें।

2. घुटने के दर्द में उपाय

सोने से पहले तीन से सात बूंद अरंडी का तेल नाभी में डालें और उसके आसपास डेढ ईंच में फैला देवें।

3. शरीर में कमपन्न तथा जोड़ोँ में दर्द और शुष्क त्वचा के लिए उपाय :-

रात को सोने से पहले तीन से सात बूंद राई या सरसों कि तेल नाभी में डालें और उसके चारों ओर डेढ ईंच में फैला देवें।

4. मुँह और गाल पर होने वाले पिम्पल के लिए उपाय:-

नीम का तेल तीन से सात बूंद नाभी में उपरोक्त तरीके से डालें।

नाभी में तेल डालने का कारण

हमारी नाभी को मालूम रहता है कि हमारी कौनसी रक्तवाहिनी सूख रही है,इसलिए वो उसी धमनी में तेल का प्रवाह कर देती है।

जब बालक छोटा होता है और उसका पेट दुखता है तब हम हिंग और पानी या तैल का मिश्रण उसके पेट और नाभी के आसपास लगाते थे और उसका दर्द तुरंत गायब हो जाता था।बस यही काम है तेल का।

अपने स्नेहीजनों, मित्रों और परिजनों में इस नाभी में तेल और घी डालने के उपयोग और फायदों को शेयर करिये।

करने से होता है , केवल पढ़ने से नहीं,,,,

मुलेठी – एक ऐसा नाम जिसे सुनते ही ज़बान पर मिठास सी घुल जाती है,,,,,। यह केवल स्वाद में ही नहीं, बल्कि अपने शीतल, बलवर्ध...
28/12/2025

मुलेठी – एक ऐसा नाम जिसे सुनते ही ज़बान पर मिठास सी घुल जाती है,,,,,।
यह केवल स्वाद में ही नहीं, बल्कि अपने शीतल, बलवर्धक, रोगनाशक और संजीवनी गुणों के कारण प्राचीन आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में एक प्रतिष्ठित स्थान रखती है।

संस्कृत नाम: यष्टीमधु,,,,,,,
बोटैनिकल नाम: Glycyrrhiza glabra,,,,,,,
स्वाद: मधुर (मीठा)
गुणधर्म: गुरु, स्निग्ध
वीर्य: शीत
विपाक: मधुर,,,,,

मुलेठी की जड़ में इतनी औषधीय शक्तियां समाई हुई हैं कि इसे आयुर्वेद में कई उपचारों की मूल औषधि माना गया है। चलिए जानते हैं इस ‘मिठास भरे चमत्कार’ के अनसुने तथ्य और घर में आज़माए जाने वाले आयुर्वेदिक उपाय।

अज्ञात तथ्य,,,,,,,,,,
1. वात-पित्त का संतुलन बनाए,,,,
मुलेठी शीतल होती है और पित्त को शांत करती है, लेकिन विशेष बात यह है कि यह वात को भी नियंत्रित करती है।

2. धूम्रपान छोड़ने में सहायक,,,,,,
मुलेठी की डंडी को चबाने से धूम्र की लत धीरे-धीरे कम होती है। यह तृप्ति देती है और गले को राहत भी।

3. स्त्री रोगों में उपयोगी,,,,,,
मुलेठी को शतावरी व अशोक के साथ लिया जाए तो यह स्त्रीजनित हार्मोनल असंतुलन, मासिक धर्म की अनियमितता और गर्भाशय की दुर्बलता में चमत्कारी है।


4. स्वर (Voice) को सुंदर बनाए,,,,,
मुलेठी गायक, वक्ता और शिक्षकों के लिए अमृत समान है। स्वर को मधुर, स्पष्ट और ताकतवर बनाती है।

5. शरीर में प्राकृतिक स्टेरॉइड का निर्माण बढ़ाए,,,,,
मुलेठी की जड़ में उपस्थित ‘ग्लायसिरिज़िन’ (Glycyrrhizin) शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन के समान कार्य करता है, जिससे तनाव में राहत और सूजन में कमी आती है।

6. त्वचा रोगों में उपयोगी,,,,,,,
मुलेठी में मेलानिन निर्माण नियंत्रित करने की क्षमता होती है। इसका पाउडर दही या एलोवेरा के साथ चेहरे पर लगाने से झाइयां, मुंहासे, काले धब्बे दूर होते हैं।

घर में अपनाएं ये आयुर्वेदिक घरेलू नुस्खे,,,,,,
✅ 1. गला बैठा है या खांसी है ?
उपाय:

1/2 चम्मच मुलेठी चूर्ण + 1 चम्मच शहद

दिन में दो बार सेवन करें।
👉 लाभ: गले को शीतलता, बलगम शमन, स्वर सुधार

✅ 2. गैस्ट्रिक या अल्सर की समस्या
उपाय:

मुलेठी चूर्ण को दूध में मिलाकर उबालें।

रोज़ सुबह खाली पेट पिएं।

👉 लाभ: अम्लपित्त, जलन, गैस व पेट दर्द में लाभ..

✅ 3. तनाव या अनिद्रा
उपाय:

मुलेठी + अश्वगंधा + शंखपुष्पी का सम मिश्रण

एक चम्मच रात को सोने से पहले दूध के साथ

👉 लाभ: मानसिक शांति, नींद में सुधार

✅ 4. त्वचा पर दाग या धब्बे
उपाय:

मुलेठी पाउडर + दूध या गुलाबजल

15 मिनट चेहरे पर लगाएं, फिर धो लें

👉 लाभ: साफ, चमकदार और दाग-धब्बों रहित त्वचा

✅ 5. मौसमी सर्दी-जुकाम
उपाय:

मुलेठी + तुलसी + अदरक + शहद की काढ़ा

👉 लाभ: प्रतिरक्षा बढ़े, गला साफ हो, जुकाम नियंत्रित हो

आयुर्वेद में मुलेठी का विशेष उल्लेख,,,,,,,,,,
चरक संहिता में मुलेठी को “कंठ्य”, “रसायन” और “वृष्य” कहा गया है। इसका मतलब –

कंठ्य: जो गले के रोगों को ठीक करे..

रसायन: जो शरीर में नई ऊर्जा व कोशिकाएं बनाए

वृष्य: जो प्रजनन शक्ति को बढ़ाए....

सुश्रुत संहिता में इसे नेत्रज विकार, अग्निमांद्य, हृदय रोग और श्वास रोग में विशेष उपयोगी माना गया है।

सावधानियाँ (Precautions),,,,,,,,,,,
उच्च रक्तचाप वाले व्यक्ति सीमित मात्रा में लें

लंबे समय तक अत्यधिक सेवन से जलन या BP बढ़ सकता है

गर्भवती महिलाएं चिकित्सक की सलाह पर ही लें

निष्कर्ष,,,,,,,,,
मुलेठी एक सरल, सस्ती लेकिन अत्यंत शक्तिशाली औषधि है। चाहे वह गले की खराश हो, तनाव हो या पाचन की समस्या – यह हर घर के आयुर्वेदिक बॉक्स में होनी ही चाहिए।
जिस तरह से शहद में सबको जोड़ने की शक्ति है, वैसे ही मुलेठी भी एक ‘मधुर चमत्कार’ है जो शरीर, मन और त्वचा – तीनों को संवारने में सहायक है।

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​ #मुलेठी #आयुर्वेद #घरेलू_नुस्खे

खाली पेट चबाकर खाने हैं
28/12/2025

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