Basil's Ayurved

Basil's Ayurved Basil's Ayurved specializes in Panchkarma treatment.Authentic Panchkarma treatments in Jaipur with i

*लिपिड प्रोफाइल*एक प्रसिद्ध डॉक्टर ने लिपिड प्रोफाइल को बहुत ही बेहतरीन ढंग से समझाया और अनोखे तरीके से समझाने वाली एक ख...
18/08/2025

*लिपिड प्रोफाइल*

एक प्रसिद्ध डॉक्टर ने लिपिड प्रोफाइल को बहुत ही बेहतरीन ढंग से समझाया और अनोखे तरीके से समझाने वाली एक खूबसूरत कहानी साझा की।
कल्पना कीजिए कि हमारा शरीर एक छोटा-सा कस्बा है। इस कस्बे में सबसे बड़े उपद्रवी हैं - *कोलेस्ट्रॉल।*🟡🟡🟡🟡

इनके कुछ साथी भी हैं। इनका मुख्य अपराध में भागीदार है - *ट्राइग्लिसराइड।*

इनका काम है - गलियों में घूमते रहना, अफरा-तफरी मचाना और रास्तों को ब्लॉक करना।
*दिल* इस कस्बे का सिटी सेंटर है। सारी सड़कें दिल की ओर जाती हैं।
जब ये उपद्रवी बढ़ने लगते हैं तो आप समझ ही सकते हैं क्या होता है। ये दिल के काम में रुकावट डालने की कोशिश करते हैं।
लेकिन हमारे शरीर-कस्बे के पास एक पुलिस बल भी तैनात है -
*HDL*
वो अच्छा पुलिसवाला इन उपद्रवियों को पकड़कर जेल *(लिवर)* में डाल देता है।

फिर लिवर इनको शरीर से बाहर निकाल देता है – हमारे ड्रेनेज सिस्टम के ज़रिए।
लेकिन एक बुरा पुलिसवाला भी है - *LDL* जो सत्ता का भूखा है।
LDL इन उपद्रवियों को जेल से निकालकर फिर से सड़कों पर छोड़ देता है।
जब अच्छा पुलिसवाला *HDL* कम हो जाता है तो पूरा कस्बा अस्त-व्यस्त हो जाता है।
ऐसे कस्बे में कौन रहना चाहेगा?

क्या आप इन उपद्रवियों को कम करना और अच्छे पुलिसवालों की संख्या बढ़ाना चाहते हैं?
*चलना* शुरू कीजिए!

हर कदम के साथ *HDL* बढ़ेगा, और *कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड* और *LDL* जैसे उपद्रवी कम होंगे।
आपका शरीर (कस्बा) फिर से जीवंत हो उठेगा।
आपका दिल – सिटी सेंटर – उपद्रवियों की ब्लॉकेज *(हार्ट ब्लॉक)* से सुरक्षित रहेगा।

और जब दिल स्वस्थ होगा तो आप भी स्वस्थ रहेंगे।
इसलिए जब भी मौका मिले – चलना शुरू कीजिए!

*स्वस्थ रहें...* और
*अच्छे स्वास्थ्य* की कामना
*यह लेख HDL (अच्छा कोलेस्ट्रॉल) बढ़ाने और LDL (खराब कोलेस्ट्रॉल) कम करने का बेहतरीन तरीका बताता है यानी चलना।*
हर कदम HDL को बढ़ाता है।
इसलिए – *चलो, चलो और चलते रहो।*

यह चीजें कम करें:-
1. नमक
2. चीनी
3. ब्लीच किया हुआ मैदा
4. डेयरी उत्पाद
5. प्रोसेस्ड फूड्स

*यह रोज खाएं:-*
1. सब्जियां
2. दालें
3. बीन्स
4. मेवे
5. अंडे
6. कोल्ड प्रेस्ड तेल

*तीन चीजें जिन्हें भूलने की कोशिश करें:*
1. अपनी उम्र
2. अपना अतीत
3. अपनी शिकायतें

*चार जरूरी चीजें जिन्हें अपनाएं:*
1. अपना परिवार
2. अपने दोस्त
3. सकारात्मक सोच
4. स्वच्छ और स्वागत भरा घर

*तीन मूलभूत बातें जिन्हें अपनाना चाहिए:*
1. हमेशा मुस्कराएं
2. अपनी गति से नियमित शारीरिक गतिविधि करें
3. अपने वजन की जांच और नियंत्रण करें

*छः आवश्यक जीवन-शैली जो आपको अपनानी चाहिए:*
1. पानी पीने के लिए तब तक प्रतीक्षा न करें जब तक आप प्यासे न हों।
2. आराम करने के लिए तब तक प्रतीक्षा न करें जब तक आप थके नहीं।
3. चिकित्सीय परीक्षणों के लिए तब तक प्रतीक्षा न करें जब तक आप बीमार न हों।
4. चमत्कारों की प्रतीक्षा न करें, स्वयं पर भरोसा रखें।
5. कभी भी अपने आप पर से विश्वास न खोएं।
6. सकारात्मक रहें और हमेशा एक बेहतर कल की आशा रखें।

28/04/2025

🌿 अल्कलाइन पानी: सेहत का वरदान या बोतल में बंद एक बड़ा छलावा? 🌿

👴🏻
एक चाचा चौधरी जैसी मूंछों वाले, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से कॉमर्स में स्नातक की डिग्री प्राप्त व्यक्ति को, आपने शायद टीवी या फेसबुक पर देखा होगा —
हाथ में एक तुर्रीनुमा संरचना पकड़े हुए,
बड़ी शान से दावा करते हुए कि —
"यह उपकरण आपके पानी को क्षारीय बना देगा और पानी का हाइड्रोजन एक्टिवेट हो जाएगा!"

मार्केटिंग का दावा:
"चूंकि आधुनिक आहार हमारे शरीर को 'अत्यधिक अम्लीय' बना देता है, इसलिए अल्कलाइन पानी पीने से शरीर की इस अम्लता को 'निष्क्रिय' किया जा सकता है, शरीर को डिटॉक्स किया जा सकता है, उम्र बढ़ने की गति को धीमा किया जा सकता है, और कैंसर, गठिया तथा मधुमेह जैसी बीमारियों से बचाव किया जा सकता है।"

यह सुनने में इतना दिव्य प्रतीत होता है — मानो किसी बोतल में गंगाजल भर दिया गया हो —
पर क्या वास्तव में ऐसा है?

काश मूर्खता का कोई पैमाना होता... तो शायद यह उसका अंतिम छोर होता!
और दुर्भाग्य यह कि —
इस भ्रम में वे लोग फंसे हैं, जो इस तरह की बातों से अपने स्वास्थ्य को संवारने की उम्मीद लगाये बैठे हैं।

⚡ भय से बेचा जा रहा है,
भय से खरीदा जा रहा है।

📜 अब आइए सच्चाई जानें:
क्या है अल्कलाइन पानी?
सामान्य जल का pH लगभग 7 होता है (न्यूट्रल)।

अल्कलाइन जल का pH 8 से 9.5 तक बताया जाता है।

दावा है — "ये शरीर की अम्लता कम करेगा, डिटॉक्स करेगा, और बुढ़ापा व बीमारियाँ रोकेगा।"

सपने बिक रहे हैं — बोतलों में!

🔬 विज्ञान क्या कहता है?
शरीर खुद अपने pH को सन्तुलित करता है।

रक्त का pH 7.35 से 7.45 के बीच होता है।

थोड़ा भी हिलना डुलना शरीर को संकट में डाल देता है — जिसे संभालते हैं हमारे फेफड़े और गुर्दे, न कि अल्कलाइन पानी।

पेट का अम्ल सारी क्षारीयता को समाप्त कर देता है।

जो भी क्षारीय पानी आप पीते हैं, वह पेट की प्रचंड अम्लता में समा जाता है।

अंततः आंतों में पहुँचने पर वह साधारण जल ही होता है!

कोई ठोस प्रमाण नहीं।

कैंसर, डायबिटीज़, या उम्र बढ़ने पर प्रभाव डालने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण अब तक नहीं मिला।

'शरीर को क्षारीय करना' — केवल भ्रम है।

हमारा शरीर अपने आप pH संतुलन में रहता है, चाहे आप क्या भी खाएँ या पिएँ।

🧠
संक्षेप में:
अल्कलाइन पानी से शरीर का pH बदलने की कोशिश वैसी है, जैसे किसी सुनामी के सामने छाता खोलकर खड़े होना।

🪔 आयुर्वेद का विचार:
जल को शीतल, स्निग्ध, शुद्ध होना चाहिए — न कि कृत्रिम रूप से छेड़ा गया।

तुलसी युक्त जल, ताम्रपात्र का जल, या प्राकृतिक स्रोतों का स्वच्छ जल — यही असली जीवन रक्षक है।

आयुर्वेद में कहीं नहीं कहा गया कि "pH बढ़ाकर" स्वास्थ्य बनाया जाए।

🌿
प्राकृतिक जल ही असली औषधि है। कृत्रिम अल्कलाइन पानी — केवल बाज़ार का छलावा।

💧
स्कूल में प्रार्थना के बाद बजने वाला गीत याद आ गया ........

पानी रे पानी तेरा रंग कैसा जिसमें मिला दो लगे उस जैसा

# copied

खाना पचेगा या सड़ेगा-             खाना खाने के बाद पेट में खाना पचेगा या खाना सड़ेगा, यह जानना बहुत जरूरी होता है। हमने ...
30/01/2025

खाना पचेगा या सड़ेगा-
खाना खाने के बाद पेट में खाना पचेगा या खाना सड़ेगा, यह जानना बहुत जरूरी होता है। हमने रोटी खाई, हमने दाल खाई, हमने सब्जी खाई, हमने दही खाया लस्सी पी, दूध, दही छाछ, लस्सी फल आदि यह सब कुछ भोजन के रूप में हमने ग्रहण किया। यह सब कुछ हमें उर्जा देते हैं और पेट उस उर्जा को आगे ट्रांसफर करता है।

पेट में एक छोटा सा स्थान होता है, जिसको हम हिन्दी में "आमाशय" कहते हैं। इसका संस्कृत नाम है "जठर"। यह एक थैली की तरह होता है। यह जठर हमारे शरीर में सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि सारा खाना सबसे पहले इसी में आता है। यह बहुत छोटा सा स्थान है। हम जो कुछ भी खाते हैं, वह सब इस आमाशय में आ जाता है। आमाशय में जो अग्नि प्रदीप्त होती है उसे जठराग्नि कहते हैं।
यह जठराग्नि आमाशय में प्रदीप्त होने वाली आग है। जैसे ही हम खाना खाना खाते हैं, जठराग्नि प्रदीप्त हो जाती है। यह ऑटोमेटिक है,जैसे ही हमने रोटी का पहला टुकड़ा मुँह में डाला, कि इधर जठराग्नि प्रदीप्त हो गई। यह अग्नि तब तक जलती है जब तक खाना पचता है। अब हमने खाना खाते ही गटागट पानी पी लिया और खूब ठंडा पानी पी लिया।अब जो आग (जठराग्नि) जल रही थी, वह बुझ गयी। आग अगर बुझ गयी, तो पचने की जो क्रिया है वह रुक जाती है।

अब हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि खाना पेट में जाने पर पेट में दो ही क्रियाएं होती हैं, एक क्रिया है जिसको हम कहते हैं पचना, और दूसरी है, सड़ना।

आयुर्वेद के हिसाब से आग जलेगी तो खाना पचेगा, खाना पचेगा तो उससे रस बनेगा। रस से मांस, मज्जा, रक्त, वीर्य, हड्डियां, मल, मूत्र और अस्थि बनेगा और सबसे अंत में मेद बनेगा। यह तभी होगा जब खाना पचेगा। खाना सड़ने पर सबसे पहला जहर जो बनता है वह है यूरिक एसिड। यूरिक एसिड बढ़ने से ही घुटने, कंधे, कमर में दर्द होता है। जब खाना सड़ता है, तो यूरिक एसिड जैसा ही एक दूसरा विष बनता है जिसको हम कहते हैं एलडीएल ( खराब कोलस्ट्रॉल )। खराब कोलस्ट्रॉल के बढ़ने से ही ब्लड प्रेशर ( बीपी ) बढ़ता है। ये सभी बीमारियां तब आती हैं जब खाना पचता नहीं है, बल्कि सड़ता है।

खाना पचने पर किसी भी प्रकार का कोई भी जहर नहीं बनता है। खाना पचने पर जो बनता है वह है मांस, मज्जा, रक्त, वीर्य, हड्डियां, मल, मूत्र, अस्थि और खाना नहीं पचने पर बनता है यूरिक एसिड, कोलेस्ट्रोल, एलडीएल, वीएलडीएल और यही हमारे शरीर को रोगों का घर बनाते हैं। पेट में बनने वाला यही जहर जब ज्यादा बढ़कर खून में आता है, तो खून दिल की नाड़ियों में से निकल नहीं पाता और रोज थोड़ा थोड़ा कचरा जो खून में आया है, इकट्ठा होता रहता है और एक दिन नाड़ी को ब्लॉक कर देता है। इसी से हार्ट अटैक होता है।

अतः हमें ध्यान इस बात पर देना चाहिए कि जो हम खा रहे हैं, वह ठीक से पचना चाहिए, इसके लिए पेट में ठीक से आग (जठराग्नि) प्रदीप्त होनी ही चाहिए, क्योंकि बिना आग के खाना पचता नहीं है और खाना पकता भी नहीं है।
महत्व की बात खाने को खाना नहीं खाने को पचाना है। हमने क्या खाया, कितना खाया यह महत्त्वपूर्ण नहीं है। खाना अच्छे से पचे इसके लिए आयुर्वेद ने सूत्र दिया है-
"भोजनान्ते विषं वारी" (खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीना जहर पीने के बराबर है )। इसलिए खाने के तुरंत बाद पानी कभी नहीं पीना चाहिए।
जब हम खाना खाते हैं तो जठराग्नि द्वारा सब एक दूसरे में मिक्स होता है और फिर खाना पेस्ट में बदलता है। पेस्ट में बदलने की क्रिया होने तक एक घंटा ४८ मिनट का समय लगता है। उसके बाद जठराग्नि कम हो जाती है। बुझती तो नहीं, लेकिन बहुत धीमी हो जाती है। पेस्ट बनने के बाद शरीर में रस बनने की प्रक्रिया शुरू होती है, तब हमारे शरीर को पानी की जरूरत होती है।

🌱🌱🌱Seven-day vegetarian Indian lunch plan 🌱🌱🌱🌱🏵️🏵️Introduction🏵️🏵️A balanced vegetarian Indian lunch, designed to pacify...
10/09/2024

🌱🌱🌱Seven-day vegetarian Indian lunch plan 🌱🌱🌱🌱

🏵️🏵️Introduction🏵️🏵️

A balanced vegetarian Indian lunch, designed to pacify the three doshas—Vata, Pitta, and Kapha—can help maintain physical, emotional, and mental harmony.

In Ayurveda, the tridosha (Vata, Pitta, and Kapha) influences our body’s constitution, digestion, and overall health.
By consuming meals that are tridosha- pacifying, we can balance our internal energies, promoting wellness and preventing disease.
This seven-day vegetarian Indian lunch plan is not only nutritious but also tailored to suit all three doshas, ensuring harmony and balance throughout the week.

This plan emphasizes wholesome ingredients like grains, vegetables, legumes, and spices, all cooked in ways that align with Ayurvedic principles.
Each meal is carefully crafted to maintain a balance of flavors and nutrients, catering to Vata’s need for grounding, Pitta’s need for cooling, and Kapha’s need for lightness.

🌟Monday:
Methi Thepla with Cucumber Raita

Ingredients
– Whole wheat flour – 1 cup
– Fresh fenugreek leaves (methi) – ½ cup
– Cumin seeds – ½ tsp
– Turmeric – ¼ tsp
– Yogurt – 2 tbsp
– Cucumber (grated) – 1 medium
– Fresh mint leaves – 1 tbsp
– Salt – to taste
– Ghee – 1 tbsp

Procedure:-
1. Mix wheat flour, chopped fenugreek leaves, turmeric, cumin, yogurt, and salt. Knead the dough using water.
2. Roll into small theplas and cook with ghee on a tawa until golden brown.
3. For the raita, mix grated cucumber with yogurt, add chopped mint leaves, and season with salt.

Nutritional Information
– Calories: 350 kcal
– Proteins: 10g
– Carbohydrates: 50g
– Fat: 12g

Benefits:-
Methi (fenugreek) balances Vata and Kapha, while cucumber and yogurt in raita cool Pitta.

🌟Tuesday:
Dal Khichdi with Vegetable Stir-fry

Ingredients:-
– Basmati rice – ½ cup
– Moong dal – ¼ cup
– Carrot, peas, and beans – 1 cup (mixed)
– Cumin seeds – 1 tsp
– Turmeric powder – ½ tsp
– Ghee – 1 tbsp
– Salt – to taste

Procedure:-
1. Wash rice and moong dal together, then cook with turmeric, cumin, and salt until soft.
2. In a separate pan, sauté mixed vegetables with cumin in ghee.
3. Serve khichdi with the stir-fried vegetables.

Nutritional Information:-
– Calories: 400 kcal
– Proteins: 15g
– Carbohydrates: 60g
– Fat: 10g

Benefits:-
Khichdi is a light and easy-to-digest meal, suitable for all doshas. It provides grounding for Vata, cooling for Pitta, and lightness for Kapha.

🌟Wednesday:
Vegetable Pulao with Mint Chutney

Ingredients:-
– Basmati rice – 1 cup
– Green peas, carrots, potatoes – 1 cup (mixed)
– Cinnamon, cloves, bay leaf – 1 tsp (mixed)
– Ghee – 1 tbsp
– Fresh mint leaves – ½ cup
– Lemon juice – 1 tsp
– Salt – to taste

Procedure:-
1. Sauté whole spices in ghee, then add washed rice and vegetables. Cook with water until rice is fluffy.
2. Blend mint leaves with lemon juice and salt to make the chutney.

Nutritional Information:-
– Calories: 380 kcal
– Proteins: 8g
– Carbohydrates: 60g
– Fat: 9g

Benefits:-
Vegetable pulao is nourishing and pacifies all doshas. The mint chutney provides cooling for Pitta, while the spices aid digestion.

🌟Thursday:
Palak Dal with Quinoa

Ingredients
– Spinach (palak) – 2 cups
– Yellow moong dal – ½ cup
– Garlic – 2 cloves
– Cumin seeds – 1 tsp
– Quinoa – ½ cup
– Ghee – 1 tbsp
– Turmeric – ¼ tsp

Procedure
1. Cook moong dal with turmeric and salt. Sauté garlic and cumin in ghee, then add spinach until wilted. Combine with dal.
2. Cook quinoa in water until fluffy and serve with the palak dal.

Nutritional Information
– Calories: 420 kcal
– Proteins: 18g
– Carbohydrates: 55g
– Fat: 10g

Benefits
Spinach helps balance Pitta, while quinoa is high in protein and fiber, making this meal tridosha-balancing.

🌟Friday:
Aloo Gobi with Chapati

Ingredients
– Potatoes – 2 medium
– Cauliflower florets – 1 cup
– Turmeric – ½ tsp
– Coriander powder – 1 tsp
– Whole wheat flour – 1 cup
– Ghee – 1 tbsp
– Cumin seeds – 1 tsp

Procedure
1. Sauté cumin seeds in ghee, add potatoes, cauliflower, turmeric, and coriander powder. Cook until tender.
2. Knead wheat flour into dough, roll into chapatis, and cook on a tawa with ghee.

Nutritional Information
– Calories: 450 kcal
– Proteins: 12g
– Carbohydrates: 70g
– Fat: 14g

Benefits
Aloo gobi pacifies Vata and Kapha, while chapati offers grounding energy for all doshas.

🌟Saturday:
Lentil Soup with Brown Rice

Ingredients
– Red lentils (masoor dal) – ½ cup
– Carrot, zucchini – 1 cup (mixed)
– Ginger – 1 tsp (grated)
– Brown rice – ½ cup
– Ghee – 1 tbsp
– Cumin seeds – 1 tsp
– Salt – to taste

Procedure
1. Cook lentils with carrots, zucchini, and ginger in water until soft. Sauté cumin in ghee and add to the soup.
2. Serve with cooked brown rice.

Nutritional Information
– Calories: 370 kcal
– Proteins: 15g
– Carbohydrates: 55g
– Fat: 8g

Benefits
Lentils are a good source of protein and aid in balancing Kapha and Pitta. Brown rice provides grounding energy for Vata.

🌟Sunday:
Paneer Bhurji with Roti

Ingredients
– Fresh paneer – 200g
– Onion, tomato, capsicum – 1 cup (mixed)
– Turmeric – ½ tsp
– Cumin seeds – 1 tsp
– Whole wheat flour – 1 cup
– Ghee – 1 tbsp
– Salt – to taste

Procedure
1. Sauté cumin seeds in ghee, then add onions, tomatoes, and capsicum. Add crumbled paneer and turmeric. Cook until soft.
2. Knead wheat flour into dough, roll into rotis, and cook with ghee.

Nutritional Information
– Calories: 500 kcal
– Proteins: 18g
– Carbohydrates: 60g
– Fat: 15g

Benefits
Paneer is a cooling and nourishing source of protein, making it suitable for all doshas, especially Pitta.

🏵️🏵️Conclusion🏵️🏵️

This seven-day vegetarian Indian lunch plan is a holistic approach to maintaining tridosha balance.
Incorporating whole grains, vegetables, and light proteins,
it provides essential nutrients like fiber, protein, healthy fats, vitamins, and minerals.
Each meal is carefully curated to pacify Vata, Pitta, and Kapha, ensuring that your body receives balanced energy and nourishment throughout the week. Adopting this Ayurvedic approach to your diet promotes long-term health, digestion, and emotional well-being.

*आयुर्वेद के जनक महर्षि चरक जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं*☘️🌿🍀🌱
09/08/2024

*आयुर्वेद के जनक महर्षि चरक जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं*
☘️🌿🍀🌱

🥗आहार के नियम भारतीय 12 महीनों अनुसार🥗🟢चैत्र ( मार्च-अप्रैल) – इस महीने में गुड का सेवन करे क्योकि गुड आपके रक्त संचार औ...
07/06/2024

🥗आहार के नियम भारतीय 12 महीनों अनुसार🥗

🟢चैत्र ( मार्च-अप्रैल) –
इस महीने में गुड का सेवन करे क्योकि गुड आपके रक्त संचार और रक्त को शुद्ध करता है एवं कई बीमारियों से भी बचाता है।
चैत्र के महीने में नित्य नीम की 4 – 5 कोमल पत्तियों का उपयोग भी करना चाहिए इससे आप इस महीने के सभी दोषों से बच सकते है।
नीम की पतियों को चबाने से शरीर में स्थित दोष शरीर से हटते है।

🟡वैशाख (अप्रैल – मई)-
वैशाख महीने में गर्मी की शुरुआत हो जाती है।
बेल पत्र का इस्तेमाल इस महीने में अवश्य करना चाहिए जो आपको स्वस्थ रखेगा।
वैशाख के महीने में तेल का उपयोग बिल्कुल न करे क्योकि इससे आपका शरीर अस्वस्थ हो सकता है।

🟠ज्येष्ठ (मई-जून) –
भारत में इस महीने में सबसे अधिक गर्मी होती है।
ज्येष्ठ के महीने में दोपहर में सोना स्वास्थ्य वर्द्धक होता है , ठंडी छाछ , लस्सी, ज्यूस और अधिक से अधिक पानी का सेवन करें।
बासी खाना, गरिष्ठ भोजन एवं गर्म चीजो का सेवन न करे। इनके प्रयोग से आपका शरीर रोग ग्रस्त हो सकता है।

🔴अषाढ़ (जून-जुलाई) – आषाढ़ के महीने में आम , पुराने गेंहू, सत्तु , जौ, भात, खीर, ठन्डे पदार्थ , ककड़ी, पलवल, करेला, बथुआ आदि का उपयोग करे व आषाढ़ के महीने में भी गर्म प्रकृति की चीजों का प्रयोग करना आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

🟢श्रावण (जूलाई-अगस्त) –
श्रावण के महीने में हरड का इस्तेमाल करना चाहिए।
श्रावण में हरी सब्जियों का त्याग करे एव दूध का इस्तेमाल भी कम करे। भोजन की मात्रा भी कम ले – पुराने चावल, पुराने गेंहू, खिचड़ी, दही एवं हलके सुपाच्य भोजन को अपनाएं।

🔵भाद्रपद (अगस्त-सितम्बर) –
इस महीने में हलके सुपाच्य भोजन का इस्तेमाल कर वर्षा का मौसम् होने के कारण आपकी जठराग्नि भी मंद होती है इसलिए भोजन सुपाच्य ग्रहण करे।
इस महीने में चित्रक औषधि का सेवन करना चाहिए।

🟣आश्विन (सितम्बर-अक्टूबर) –
इस महीने में दूध , घी, गुड़ , नारियल, मुन्नका, गोभी आदि का सेवन कर सकते है।
ये गरिष्ठ भोजन है लेकिन फिर भी इस महीने में पच जाते है क्योकि इस महीने में हमारी जठराग्नि तेज होती है।

🟤कार्तिक (अक्टूबर-नवम्बर) –
कार्तिक महीने में गरम दूध, गुड, घी, शक्कर, मुली आदि का उपयोग करे।
ठंडे पेय पदार्थो का प्रयोग छोड़ दे।
छाछ, लस्सी, ठंडा दही, ठंडा फ्रूट ज्यूस आदि का सेवन न करे , इनसे आपके स्वास्थ्य को हानि हो सकती है।

🟢अगहन (नवम्बर-दिसम्बर) –
इस महीने में ठंडी और अधिक गरम वस्तुओ का प्रयोग न करे।

🟡पौष (दिसम्बर-जनवरी) –
इस ऋतु में दूध, खोया एवं खोये से बने पदार्थ, गौंद के लाडू, गुड़, तिल, घी, आलू, आंवला आदि का प्रयोग करे, ये पदार्थ आपके शरीर को स्वास्थ्य देंगे।
ठन्डे पदार्थ, पुराना अन्न, मोठ, कटु और रुक्ष भोजन का उपयोग न करे।

⚪माघ (जनवरी-फ़रवरी) –
इस महीने में भी आप गरम और गरिष्ठ भोजन का इस्तेमाल कर सकते है।
घी, नए अन्न, गौंद के लड्डू आदि का प्रयोग कर सकते है।

🔵फाल्गुन (फरवरी-मार्च) –
इस महीने में गुड का उपयोग करे। सुबह के समय योग एवं स्नान का नियम बना ले।
चने का उपयोग न करे।

28/02/2024
25/01/2024

रजस्वला चर्या को आचरण करने व अन्य १० बालिका व महिला को बताने के लिए सभी रुग्णाओं का उत्साहित प्रतिसाद -


आयुर्वेद विश्व की प्राचीनतम चिकित्सा पद्धति में से एक है। आचार्य चरक के अनुसार उसके दो प्रयोजन है।
(1) स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना।
(2) रोगी को रोगमुक्त करना।

अर्थात् आयुर्वेद ने 50% महत्व संरक्षणात्मक (preventive) पक्ष को दिया है।

हम सभी जानते है कि स्त्री परिवार, समाज व राष्ट्र की धूरी है। महिला के स्वास्थ्य का सीधा असर संतान के जीवन व व्याधिक्षमत्व (रोगप्रतिकारक शक्ति) पर पडता है। इसलिए बालिका व महिला का स्वास्थ्य अच्छा रहना नितान्त आवश्यक है।

बालिकाओं व महिलाओं के लिए आयुर्वेद में बहुत अच्छा वर्णन किया गया है। उसमें से एक है- रजस्वलाचर्या।

रजस्वलाचर्या अर्थात् माहवारी के प्रथम तीन दिन में सामान्य रुप से लिए जानेवाले आहार को छोडकर सिर्फ़ घी के साथ शालि चावल या दूध में पकाये हुए जौ के दलिये को ग्रहण किया जायें। जिसे "हविष्य" शब्द से वर्णित किया गया है।

यानि हम जौ या लाल चावल या देशी चावल या बिना पोलिश किये चावल को घी, दूध व धागामिश्री - किसी के भी साथ-साथ खा सकते है।
जैसे
- चावल और घी,
- चावल, घी और धागामिश्री,
- जौ के दलिया की खीर,
- जौ का दलिया, घी और धागामिश्री
- जौ की रोटी पर अच्छी तरह घी लगाकर दूध से।

मीठे फल ले सकते है।
जौ की रोटी या दलिया बिना घी न खाएं।

इस समय दौरान नमक, खट्टा, तीखा खाना वर्ज्य बताया गया है।

यह आयुर्वेद का preventive aspect है। मगर इसे प्रत्येक बालिका व महिला, जो रजस्वला होती है, वह पालना कर सकती हैं।

२ महत्वपूर्ण बिंदु -

- नियमित रूप से १२-५० तक की वय में रजस्वला चर्या का पालन करें।
- अन्य १० महिलाओं को भी इस विषय में बताकर जागरूक करें।

पोषण और कायाकल्प के लिए शीतकालीन आयुर्वेदिक अनुष्ठान-आहार और त्वचा देखभाल युक्तियाँ🌿🌿🌿🌿🌿🌿जैसे ही आप गहरी सांस लेते हैं, ...
29/12/2023

पोषण और कायाकल्प के लिए शीतकालीन आयुर्वेदिक अनुष्ठान-आहार और त्वचा देखभाल युक्तियाँ
🌿🌿🌿🌿🌿🌿

जैसे ही आप गहरी सांस लेते हैं, ठंडी हवा को अपने शरीर से प्रवाहित होने दें, जो आपको सारी नकारात्मकता से मुक्त कर देगी और आपकी आत्मा को शांत और सकारात्मक ऊर्जा से भर देगी। नए साल के लिए कुछ आसान युक्तियों के साथ अपने शरीर को पुनर्जीवित और पुनर्जीवित करने का समय आ गया है, जिन्हें आसानी से अपनी दैनिक शीतकालीन दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है।

1)जल्दी सोना जल्दी उठना-
ठंड का मौसम अक्सर सुस्ती को आमंत्रित करता है जो आपके शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। खुद को सक्रिय रखने का सबसे अच्छा तरीका है सूरज के साथ उठना और सूरज की कोमल किरणों को अपनी गर्मी से अपने शरीर को पोषण देने देना। रक्त परिसंचरण को बढ़ावा देने के लिए अपनी सुबह की शुरुआत शांति चर्या काढ़ा और योगासन से करें।

2)अभ्यंग और शिरो अभ्यंग-
सर्दी के मौसम में हमारी त्वचा और बाल रूखे हो जाते हैं। हवा में शुष्कता है जो आपकी त्वचा की चिकनी, कोमल और चमकदार गुणवत्ता को छीन लेती है। इसलिए, आयुर्वेद में चर्या संपूर्ण कॉम्बो के साथ अभ्यंग या गर्म तेल की मालिश करने की सलाह दी जाती है जिसमें केशर, अनंतमूल, शतावरी आदि जैसी कुछ सबसे फायदेमंद जड़ी-बूटियाँ शामिल हैं।

3)मौसमी खाद्य पदार्थों से अपने शरीर को पोषण दें- हेमंत ऋतु के दौरान अग्नि अपने सबसे मजबूत स्तर पर होती है, जिससे आपको सामान्य से अधिक भूख लगती है। अपने शीतकालीन आहार में दाल, अनाज, सूप, सूखे मेवे और मसाले और काली मिर्च, इलायची, दालचीनी, हल्दी या लौंग जैसे समृद्ध और भारी खाद्य पदार्थों को शामिल करना सुनिश्चित करें।

4)अपने आहार में पर्याप्त घी शामिल करें-
घी स्वस्थ वसा और ओमेगा 3 फैटी एसिड का एक शानदार स्रोत है, जो आपको ठंड के मौसम में गर्म रखने और ऊर्जा प्रदान करने में मदद करता है। घी की प्रचुरता भोजन में संतुष्टि की भावना जोड़ती है, और आपके स्वास्थ्य को बनाए रखने और पोषण देने में योगदान देती है।

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हेमन्त ऋतुचर्या के सिद्धांतों और सावधान प्रथाओं का पालन करके, आप अपनी शीतकालीन दिनचर्या में संतुलन और जीवन शक्ति को आमंत्रित करते हैं। आयुर्वेद के ज्ञान को अपनाएं, और मौसम की शांति आपको स्वस्थता की ओर ले जाए।

22/11/2023
🫒🫒🫒🫒🫒🫒🫒आंवला का वृक्ष एक वृक्ष नहीं बल्किसंजीवनी है ,सेहत का खजाना हैंl🫒🫒🫒🫒🫒🫒🫒*आंवला को संस्कृत में अमलाकी कहा जाता है, ...
21/11/2023

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आंवला का वृक्ष एक वृक्ष नहीं बल्कि
संजीवनी है ,
सेहत का खजाना हैंl
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*आंवला को संस्कृत में अमलाकी कहा जाता है, जिसका अर्थ है "जीवन का अमृत"*

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आंवला में मौजूद तत्व इम्यूनिटी को बढ़ावा देने, पाचन को दुरुस्त करने, मेटाबॉलिज़म और आंत की सेहत को सुधारने का काम करता है।
आंवला विटामिन-सी, फाइबर और खनीज जैसे एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है।

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आंवला नवमी (आज) से च्यवनप्राश शुरू कीजिए।ऊर्जा बनी रहेगी।।
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137-138 Nirman Nagar, Kings Road, Shanti Nagar
Jaipur
302019

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Tuesday 4pm - 6pm
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