JPRC Neuro Spine Centre

JPRC Neuro Spine Centre A TEAM OF QUALIFIED PAIN PHYSICIANS& NEUROSURGEON WHO ARE TRAINED ABROAD& INDIA,WITH SERVING ATTITUDE TO HUMANITIES. BEST INTERVENTIONAL PAIN CLINIC IN JAIPUR.

JPRC is interventional pain mangement clinic,headed by dr Sanjay Sharma interventional pain physician and dr lalit bhardwaj neurosurgeon ,who believe to avoid conventional spine surgery and perform minimal invasive pain and spine intervention (MIPSI). NO NEED OF OPEN SURGERY
NO HOSPITAL STAY
NO GEN ANESTHESIA
JUST A DAY CARE CENTER FOR AMBULATORY SURGERY
DO YOU HAVE???????????????????//////
BACK PAIN
NECK PAIN SHOULDER PAIN
KNEE PAIN
PLANNING FOR OPEN SURGERY
STOP*STOP*STOP

 #रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन (RFA) – ट्राइजेमिनल न्यूरेल्जिया मेंडॉ संजय शर्मा (  Pain Physician) के clinical experience ...
02/01/2026

#रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन (RFA) – ट्राइजेमिनल न्यूरेल्जिया में
डॉ संजय शर्मा ( Pain Physician) के clinical experience व observations ( Neuro Spine Centre, Jaipur) के आधार इस प्रकार हैं:
🔍 #डॉसंजयशर्मा का प्रमुख ऑब्ज़र्वेशन
1️⃣ RFA अत्यंत प्रभावी है – सही मरीज चयन में
Classic neuralgia (electric shock-like pain) में
V2 / V3 division के दर्द में परिणाम सबसे अच्छे
MRI normal हो या vascular loop हो — clinical correlation सबसे ज़रूरी
2️⃣ MRI में loop होने पर भी RFA सफल
MRI में compression दिखे या न दिखे
अगर pain distribution classical है → RFA से 80–90% तक तुरंत राहत
(surgery) के लिए unsuitable या unwilling मरीजों में RFA first-line minimally invasive विकल्प
3️⃣ Immediate pain relief – diagnostic confirmation
table पर ही pain relief
यह confirm करता है कि targeted trigeminal division सही है या नहीं
4️⃣ Controlled lesion = safety
Temperature-controlled RFA (60–75°C)
testing के बाद lesion
Facial numbness को minimal और acceptable स्तर पर रखा जा सकता है
5️⃣ Elderly व high-risk patients में विशेष लाभ
60+ age, cardiac/medical comorbidities
General anesthesia की ज़रूरत नहीं
-care procedure
6️⃣ Repeatable procedure
अगर 2–4 साल बाद pain recur हो
को सुरक्षित रूप से दोहराया जा सकता है
7️⃣ Atypical / constant burning pain में सीमित लाभ
Continuous pain (Type-2 TN)
Post-herpetic neuralgia
➡️ इन मामलों में response अपेक्षाकृत कम

📌 डॉ संजय शर्मा का Practical Clinical Conclusion
“MRI से कारण समझना ज़रूरी है,
लेकिन #ट्राइजेमिनल #न्यूरेल्जिया में इलाज का फैसला
मरीज के pain pattern और clinical response पर होना चाहिए।
RFA किन मरीजों में सबसे उपयुक्त?

✔️ सालों साल आपके फिजिशियन द्वारा केवल दवाइयों से ईलाज करते हुए कंट्रोल न होने वाला दर्द
✔️ Elderly या surgery avoid करने वाले मरीज
✔️ V2 / V3 predominant pain
✔️ Severe, disabling facial pain
यदि आप चाहें तो मैं यह भी बता सकता हूँ:
🔹 RFA vs MVD vs तुलना
🔹 RFA के बाद numbness कितना normal है
🔹 RFA के बाद recurrence rate व long-term results


#बेस्टपेनफिजिशियन

जब हमें शरीर के अंदर की जांच करानी होती है, तो  #डॉक्टर अक्सर  -ray,   Scan या   की सलाह देते हैं। हालाँकि ये तीनों शरीर...
01/01/2026

जब हमें शरीर के अंदर की जांच करानी होती है, तो #डॉक्टर अक्सर -ray, Scan या की सलाह देते हैं। हालाँकि ये तीनों शरीर के अंदर की तस्वीरें लेते हैं, लेकिन इनके काम करने का तरीका और उपयोग काफी अलग हैं।
यहाँ इनके बीच के मुख्य अंतर आसान भाषा में दिए गए हैं:

1. एक्स-रे ( -ray)
यह सबसे बुनियादी और पुरानी तकनीक है। इसमें बहुत कम मात्रा में #रेडिएशन का उपयोग किया जाता है।
किसके लिए अच्छा है: #हड्डियों के टूटने ( ) या फेफड़ों के इन्फेक्शन (जैसे निमोनिया) की जांच के लिए।
फायदे: यह बहुत सस्ता है और इसमें सिर्फ कुछ सेकंड का समय लगता है।
नुकसान: इससे #मांसपेशियों या #नसों ( Tissues) की जानकारी नहीं मिलती।

2. सीटी स्कैन ( Scan)
इसे 'एडवांस्ड एक्स-रे' मान सकते हैं। यह एक्स-रे की कई छवियों को मिलाकर शरीर की 3D या क्रॉस-सेक्शनल फोटो बनाता है।
किसके लिए अच्छा है: आंतरिक चोट ( Bleeding), #ट्यूमर, #किडनी स्टोन और जटिल हड्डियों की #चोट के लिए।
फायदे: यह बहुत तेज़ होता है (1-5 मिनट), इसलिए इमरजेंसी (जैस #एक्सीडेंट) में सबसे पहले किया जाता है।
नुकसान: इसमें एक्स-रे के मुकाबले रेडिएशन की मात्रा ज्यादा होती है।

3. एमआरआई ( )
यह सबसे एडवांस तकनीक है। इसमें रेडिएशन नहीं होता, बल्कि यह शक्तिशाली चुंबक (Magnets) और रेडियो तरंगों का उपयोग करती है।
किसके लिए अच्छा है: दिमाग ( ), #रीढ़ की हड्डी ( ), #नसों (Nerves) और #मांसपेशियों (Muscles) की बारीक जांच के लिए।

फायदे: यह शरीर के कोमल अंगों ( Tissues) की सबसे साफ़ तस्वीर देता है।
नुकसान: यह महंगा है, इसमें ज्यादा समय (15-60 मिनट) लगता है, और मशीन का शोर काफी तेज होता है।

(नोट: जिनके शरीर में #पेसमेकर या मेटल इम्प्लांट है, वे MRI नहीं करवा सकते)।कुछ #मेटल रेसिस्टेंट mri मशीन से आप को यदि कोई #इंप्लांट लगा हुआ है तो आप अपनी एमआरआई करवा सकते हो!!!

#मांसपेशियों #डॉक्टर #रीढ़ #इंप्लांट #एक्सीडेंट #पेसमेकर #मेटल
#स्पाइन #न्यूरो

31/12/2025



#ग्रीटिंग

31/12/2025
आप भी नया साल मनाने जा रहे हो??सच्चाई तो यही हैं!!!!
30/12/2025

आप भी नया साल मनाने जा रहे हो??
सच्चाई तो यही हैं!!!!

क्रॉनिक पेन (Chronic Pain - जो दर्द 3 से 6 महीने या उससे अधिक समय तक रहता है) के इलाज में दर्द निवारक दवाएँ ( )  and    ...
29/12/2025

क्रॉनिक पेन (Chronic Pain - जो दर्द 3 से 6 महीने या उससे अधिक समय तक रहता है) के इलाज में दर्द निवारक दवाएँ ( ) and एक महत्वपूर्ण लेकिन सीमित भूमिका निभाती हैं।

#क्रॉनिक पेन, #एक्यूट पेन (जैसे चोट लगने पर होने वाला दर्द) से अलग होता है। इसलिए, इसका इलाज केवल 'दर्द की गोली' खानेऔर #एक्सरसाइज से संभव नहीं होता। यहाँ इसके सार्थक होने और सीमाओं का विस्तृत विवरण दिया गया है:
1. ©©दवाएँ कब और कितनी सार्थक हैं?
क्रॉनिक पेन में दवाओं का मुख्य उद्देश्य दर्द को पूरी तरह 'खत्म' करना नहीं, बल्कि उसे 'प्रबंधित' (Manage) करना होता है ताकि मरीज अपनी दिनचर्या जारी रख सके।
* NSAIDs©©©© (जैसे इबुप्रोफेन, डिक्लोफेनाक):
* उपयोग: ये दवाएँ गठिया ( ) या मांसपेशियों के दर्द में सूजन कम करने के लिए प्रभावी हैं।
* सीमा: लंबे समय तक इनका उपयोग पेट, किडनी और हृदय पर बुरा असर डाल सकता है।

* ©©©©नर्व पेन की दवाएँ ( / ):
* सार्थकता: क्रॉनिक पेन अक्सर नर्वस सिस्टम की समस्या बन जाता है (जैसे #साइटिका या #फाइब्रोमाइल्जिया)। ऐसे में साधारण पेनकिलर काम नहीं करते। यहाँ डॉ. गैबापेंटिन ( ) या प्रीगाबालिन ( ) जैसी दवाएँ देते हैं जो नसों की संवेदनशीलता को कम करती हैं। यह बहुत सार्थक सिद्ध होती हैं।
®®®®लेकिन लम्बे समय के बाद ये दवाये भी असर नही देतीं हैं और डॉक्टर केवल दवाओं को बदल बदल कर प्रयोग करते रहते हैं !

* Opioids ¢¢¢¢(जैसे #ट्रामाडोल, #मॉर्फिन):
*™ चेतावनी: ये बहुत शक्तिशाली होते हैं लेकिन क्रॉनिक पेन के लिए अब इन्हें कम से कम इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।
* §§§§§ #जोखिम§§§:
इनसे शरीर को आदत ( ) लग सकती है और समय के साथ इनका असर कम होने लगता है (Tolerance) हो जाती है।

2. दर्द निवारक दवाओं की #सीमाएँ (Limitations)

केवल दवाओं पर निर्भर रहना क्रॉनिक पेन में सार्थक नहीं है क्योंकि:
* जड़ पर असर नहीं: (दवाएँ अक्सर केवल लक्षण (Symptom) को #दबाती हैं), दर्द के मूल कारण को ठीक नहीं करतीं।
* #टॉलरेंस (Tolerance): लंबे समय तक एक ही दवा खाने से शरीर उसका आदी हो जाता है, और दर्द कम करने के लिए आपको ज्यादा डोज़ की जरूरत पड़ने लगती है।
* #साइड इफेक्ट्स: एसिडिटी, कब्ज, नींद आना, और अंग क्षति (Organ damage) का खतरा हमेशा बना रहता है।
* #रिबाउंड पेन: कभी-कभी दवा का असर खत्म होने पर दर्द पहले से ज्यादा महसूस होता है।

3. सही दृष्टिकोण: मल्टीमॉडल थेरेपी (Multimodal Therapy)
मेडिकल साइंस अब मानता है कि क्रॉनिक पेन के लिए 'इंटिग्रेटेड #इंटरवेंशनल पेन मेडिसिन “मॉडल सबसे ज्यादा सार्थक है। इसमें दवाएँ केवल एक हिस्सा हैं:
* #दवाएँ (Medication): दर्द को 30-40% कम करने के लिए, ताकि आप व्यायाम कर सकें।
* #एक्सरसाइज़ : मांसपेशियों को मजबूत करने और लचीलापन लाने के लिए। यह सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
* मनोवैज्ञानिक सहयोग ( ): क्रॉनिक पेन अक्सर डिप्रेशन और चिंता लाता है, जो दर्द को और बढ़ाता है। कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) दर्द सहने की क्षमता बढ़ाती है।
* #जीवनशैली: सही खान-पान (Anti-inflammatory diet), नींद और वजन नियंत्रण।
* #इंटरवेंशनल #पेनमेडिसिन - इसमें एक क्वालिफ़ाइड पेनमेडिसिन #डॉक्टर आपके केस को डिटेल में क्लीनिकल एग्ज़ामिनेशन करने के बाद सम्बंधित जांच रिर्पोट का पूरा विष्लेषण करता है और उसके आधार पर #नॉनसर्जिकल मिनिमल इनवेसिव तकनीक से सुरक्षित इलाज़ करता है

#निष्कर्ष
दर्द निवारक दवाएँ क्रॉनिक पेन के इलाज में पूरी तरह सार्थक नहीं हैं यदि वे एकमात्र इलाज हैं।
वे एक 'पुल' (Bridge) की तरह काम करती हैं—वे आपको इतना आराम देती हैं कि आप #एक्सरसाइज और #जीवनशैली में बदलाव कर सकें, जो कि असली इलाज है।

> ©©©©©महत्वपूर्ण सलाह©©©: क्रॉनिक पेन के लिए कभी भी अपनी मर्जी से (Self-medication) दवा न लें। साथ ही कोई #थेरेपी टाइप इलाज लेने से पहले उसे किसी #पेनस्पेशलिस्ट डॉक्टर से सलाह लें जो दवाओं के साथ-साथ अन्य नॉन सर्जीकल इलाज़ का भी सुझाव दें।
>
®®क्या आप जानना चाहेंगे ??कि क्रॉनिक पेन को मैनेज करने के लिए बिना दवाओं के (नॉन-मेडिकल और नॉन सर्जिकल) कौन से तरीके सबसे प्रभावी हैं?
अधिक जानकारी के लिए अपने पेन स्पेशलिस्ट डॉक्टर से संपर्क करें!!!

#पेनफिजिशियन

 #हर्नियेटेड न्यूक्लियस पल्पोसस (HNP) क्या स्लिप डिस्क है?यहां बताया गया है कि न्यूक्लियस पल्पोसस कैसे हर्नियेट होता है ...
28/12/2025

#हर्नियेटेड न्यूक्लियस पल्पोसस (HNP)
क्या स्लिप डिस्क है?

यहां बताया गया है कि न्यूक्लियस पल्पोसस कैसे हर्नियेट होता है और आपकी नसों को कैसे प्रभावित करता है।

1. एनाटॉमी: "जेली डोनट"
हर स्पाइनल डिस्क के दो मुख्य भाग होते हैं:
* #एनुलस फाइब्रोसस: मजबूत कोलेजन फाइबर से बनी सख्त, टायर जैसी बाहरी रिंग।
* न्यूक्लियस #पल्पोसस: नरम, जेल जैसा केंद्र ("जेली") जो शॉक एब्जॉर्प्शन और लचीलापन प्रदान करता है।

2. हर्निएशन प्रक्रिया
हर्निएशन आमतौर पर कोई एक घटना नहीं होती, बल्कि टूट-फूट की एक प्रक्रिया है:
* #डिजनरेशन: समय के साथ (या चोट के कारण), बाहरी एनुलस डिहाइड्रेटेड हो जाता है और उसमें छोटी दरारें या फिशर बन जाते हैं।
* #दबाव: शारीरिक तनाव—जैसे भारी वस्तुएं उठाना, मुड़ना, या यहां तक कि छींकना—डिस्क के अंदरूनी दबाव को बढ़ाता है।
* #एक्सट्रूज़न: इस दबाव में, नरम न्यूक्लियस पल्पोसस #एनुलस में एक दरार से बाहर निकल जाता है। यही " #हर्निएशन" है।
3. यह स्पाइनल रूट(नस )को कैसे दबाता है
एक बार जब #न्यूक्लियस सामग्री डिस्क से बाहर निकल जाती है, तो यह #स्पाइनल कैनाल में प्रवेश करती है। यह दो अलग-अलग तरीकों से परेशानी पैदा करती है:
A. मैकेनिकल #कम्प्रेशन (" ")
स्पाइनल कैनाल और वे छेद जहां से नसें बाहर निकलती हैं (फोरामिना) बहुत तंग होते हैं। जब #हर्नियेटेड डिस्क इस जगह में उभरती है, तो यह शारीरिक रूप से नस की जड़ को "पिंच या दबा देती है। यह मैकेनिकल दबाव नस की सही ढंग से इलेक्ट्रिकल सिग्नल भेजने की क्षमता को बाधित करता है।
B. केमिकल सूजन (" #जलन")
यह अक्सर अधिक #दर्दनाक हिस्सा होता है। #न्यूक्लियस पल्पोसस में सूजन वाले प्रोटीन (जैसे -α और इंटरल्यूकिन) होते हैं जो आमतौर पर डिस्क के अंदर छिपे होते हैं। जब ये #लीक होकर नस की जड़ को छूते हैं, तो ये केमिकल इरिटेंट की तरह काम करते हैं, जिससे नस में गंभीर #सूजन और #हाइपरसेंसिटिविटी हो जाती है।

4. #लक्षण क्यों होते हैं
आप जो खास लक्षण महसूस करते हैं, वे इस बात पर निर्भर करते हैं कि कौन सी नस "चुटकी" और "जलन" का शिकार हो रही है।

| लक्षण |
यह क्यों होता है |
तेज/फैलने वाला #दर्द | #दबाव या #सूजन वाली नस, दिमाग को "झूठे" दर्द के सिग्नल भेजती है। पैर में जब ये झुनझुनी पहुंचती है तो, इसे आम भाषा में #साइटिका के नाम से जाना जाता है।

| #सुन्नपन / #झुनझुनी | #दबाव त्वचा से दिमाग तक आने वाले सेंसरी सिग्नल को (बदल)ब्लॉक कर देता है।
| #मांसपेशियों में कमजोरी या "दबाव" ,दिमाग से (सिग्नल )कमांड को मांसपेशियों तक पहुंचने से रोकता है।
#रिफ्लेक्सिस(झटके )में कमी | रिफ्लेक्स आर्क (जैसे घुटने का झटका) दबी हुई नस के रास्ते से बाधित होता है।

> ध्यान दें: क्योंकि रीढ़ की हड्डी में नसें शरीर के खास हिस्सों ( #डर्मेटोम) से "जुड़ी" होती हैं, इसलिए डॉक्टर अक्सर सिर्फ़ यह देखकर बता सकते हैं कि आपको सुन्नपन या कमजोरी कहाँ महसूस हो रही है, और कौन सी डिस्क हर्निएटेड है।

❓ पीठ दर्द क्यों होता है?क्या यह सिर्फ़ उम्र बढ़ने की वजह से होता है?👉 जवाब: नहीं!पीठ दर्द सिर्फ़ उम्र की वजह से नहीं हो...
28/12/2025

❓ पीठ दर्द क्यों होता है?
क्या यह सिर्फ़ उम्र बढ़ने की वजह से होता है?

👉 जवाब: नहीं!
पीठ दर्द सिर्फ़ उम्र की वजह से नहीं होता।
आजकल, युवा लोग भी पीठ दर्द से परेशान हैं।

🔴 पीठ दर्द के आम कारण:
• गलत पोस्चर (मोबाइल/लैपटॉप का इस्तेमाल)
• लंबे समय तक बैठना
• भारी वज़न उठाना
• एक्सरसाइज़ या स्ट्रेचिंग की कमी
• स्लिप डिस्क (L4-L5, L5-S1)
• साइटिका और नस दबना
• तनाव और मोटापा

👨‍⚕️ डॉ. संजय शर्मा – JPRC न्यूरो स्पाइन सेंटर, जयपुर
कहते हैं:
“पीठ दर्द को नज़रअंदाज़ करना सबसे बड़ी गलती है।
सही समय पर जांच और सही इलाज से,
अक्सर सर्जरी से बचा जा सकता है।”

✅ पीठ दर्द से बचने के टिप्स:

✔ सीधा पोस्चर बनाए रखें
✔ हर 30-40 मिनट में ब्रेक लें
✔ रोज़ाना स्ट्रेचिंग/वॉकिंग करें
✔ गलत तरीके से भारी वज़न न उठाएं
✔ अगर दर्द हो तो इलाज में देरी न करें

💉 एडवांस्ड नॉन-सर्जिकल MIPSI ट्रीटमेंट
✔ कोई सर्जरी नहीं
✔ कोई टांके नहीं
✔ तेज़ी से रिकवरी

📞 अपॉइंटमेंट: 9799088887 | 9770551901
📍 JPRC न्यूरो स्पाइन सेंटर, जयपुर

कैलशियम और मैग्नीशियम हमारे माँस पेशियों के दर्द को  कैसे नियंत्रित करते हैं ? #कैल्शियम (Calcium) और मैग्नीशियम ( ) हमा...
28/12/2025

कैलशियम और मैग्नीशियम हमारे माँस पेशियों के दर्द को कैसे नियंत्रित करते हैं ?

#कैल्शियम (Calcium) और मैग्नीशियम ( ) हमारी मांसपेशियों के काम करने के तरीके में एक टीम की तरह काम करते हैं। अगर इसे सरल भाषा में समझा जाए, तो इनका रिश्ता एक "स्विच" (Switch) जैसा होता है।
मांसपेशियों के दर्द और #ऐंठन ( ) में इनकी भूमिका इस प्रकार है:

1. यह कैसे काम करते हैं? (ऑन और ऑफ स्विच)
#मांसपेशियों की सही हरकत के लिए इन दोनों खनिजों (minerals) का संतुलन बहुत जरूरी है:
* कैल्शियम (Calcium) - "On" स्विच:
जब आपके दिमाग से मांसपेशी को हिलने का संकेत मिलता है, तो कैल्शियम मांसपेशी की कोशिकाओं (cells) में प्रवेश करता है। यह मांसपेशियों को सिकुड़ने (Contract) का आदेश देता है। बिना कैल्शियम के, आप अपनी मुट्ठी भी नहीं भींच सकते।

* मैग्नीशियम (Magnesium) - "Off" स्विच:
जब काम हो जाता है, तो मैग्नीशियम की बारी आती है। यह कैल्शियम को बाहर धकेलने या उसे ब्लॉक करने का काम करता है, ताकि मांसपेशी आराम (Relax) कर सके और अपनी पुरानी अवस्था में लौट सके।

2. #दर्द और #ऐंठन (Cramps) क्यों होते हैं?
दर्द अक्सर तब होता है जब यह "स्विच" खराब हो जाता है या इन दोनों का संतुलन बिगड़ जाता है:

* मैग्नीशियम की कमी (Magnesium Deficiency):
अगर आपके शरीर में मैग्नीशियम कम है, तो कैल्शियम मांसपेशी के अंदर ही रह जाता है। इसका मतलब है कि मांसपेशी लगातार सिकुड़ी रह जाती है और पूरी तरह से #रिलैक्स नहीं हो पाती।
* नतीजा: इसी वजह से आपको ऐंठन (Cramps), जकड़न ( ), और मांसपेशियों में मरोड़ महसूस होती है।

* कैल्शियम का असंतुलन:
हालांकि कैल्शियम सिकुड़ने के लिए जरूरी है, लेकिन खून में कैल्शियम की कमी (Hypocalcemia) से भी दर्द होता है। जब खून में कैल्शियम कम होता है, तो हमारी नसें (nerves) बहुत ज्यादा संवेदनशील (hyperexcitable) हो जाती हैं और मांसपेशियों को बिना जरूरत के सिकुड़ने का संकेत भेजने लगती हैं।

* नतीजा: इससे अनियंत्रित फड़कन और #दर्दनाक ऐंठन होती है, जिसे 'टिटैनी' (Tetany) कहते हैं।

3. इन्हें संतुलित कैसे रखें? (Food Sources)
दर्द से बचने के लिए अपनी डाइट में इन दोनों को शामिल करना जरूरी है:
| पोषक तत्व | मुख्य स्रोत (Dietary Sources) |

( #कैल्शियम | दूध, दही, पनीर, रागी (Ragi), बादाम, और हरी पत्तेदार सब्जियां)

( #मैग्नीशियम | केला, कद्दू के बीज (Pumpkin seeds), पालक, डार्क चॉकलेट, और काजू)

सारांश (Summary)
अगर आपको अक्सर मांसपेशियों में दर्द या ऐंठन होती है, तो यह हो सकता है कि आपके शरीर में मैग्नीशियम की कमी हो, जो मांसपेशियों को "आराम" नहीं करने दे रही है, या कैल्शियम का असंतुलन हो जो #नसों को गलत संकेत दे रहा है।
क्या आप चाहेंगे कि मैं आपको मांसपेशियों के दर्द को कम करने के लिए कुछ आसान #घरेलू उपाय या स्ट्रेचिंग #एक्सरसाइज (Stretching Exercises) या मैडिकल ट्रीटमेंट बतायें?

आधिक जानकारी के लिए आप अपनी समस्या के बारे में विस्तार से जान लें JPRC Neuro Spine Centre
9929105199
097990 88887
#दर्द
#कैल्शियम #मांसपेशियों #ऐंठन #नसों #एक्सरसाइज #पैन

 #ट्राइजेमिनल  #न्यूरेल्जिया का बिना ऑपरेशन का पेन मैनेजमेंट डॉ. संजय शर्मा (Dr. Sanjay Sharma) जयपुर के एक प्रसिद्ध इंट...
27/12/2025

#ट्राइजेमिनल #न्यूरेल्जिया का बिना ऑपरेशन का पेन मैनेजमेंट

डॉ. संजय शर्मा (Dr. Sanjay Sharma) जयपुर के एक प्रसिद्ध इंटरवेंशनल पेन फिजिशियन (Interventional Pain Physician) हैं, जो विशेष रूप से JPRC न्यूरो स्पाइन सेंटर (JPRC Neuro Spine Centre) में अपनी सेवाएँ देते हैं। वे ट्राइजेमिनल न्यूरेल्जिया ( Neuralgia) जैसी जटिल स्थितियों के लिए बिना सर्जरी वाले आधुनिक इलाज के लिए जाने जाते हैं।

उनके द्वारा किए जाने वाले ट्राइजेमिनल #न्यूरेल्जिया के इलाज की मुख्य जानकारी नीचे दी गई है:
1. आधुनिक इलाज की तकनीकें (Treatment Techniques)
डॉ. संजय शर्मा इस बीमारी के लिए "मिनिमली इनवेसिव" ( Invasive) तकनीकों का उपयोग करते हैं, जिनमें चीर-फाड़ की आवश्यकता नहीं होती:
* #रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन ( Ablation - ): इसमें रेडियोफ्रीक्वेंसी तरंगों का उपयोग करके उस विशिष्ट नस (Trigeminal Nerve) के दर्द के संकेतों को ब्लॉक कर दिया जाता है जो चेहरे में तेज दर्द पैदा कर रही है।
* गासेरियन गैंग्लियन ब्लॉक ( Ganglion Block): यह एक सटीक इंजेक्शन प्रक्रिया है जो दर्द के मुख्य केंद्र पर काम करती है।
* #न्यूरोस्टिमुलेशन ( ): कुछ मामलों में नसों को शांत करने के लिए इलेक्ट्रिक करंट का भी उपयोग किया जाता है।

2. डॉ. संजय शर्मा के बारे में (Doctor's Profile)
* अनुभव: उन्हें पेन मैनेजमेंट और स्पाइन केयर में 25 से अधिक वर्षों का अनुभव है।
* विशेषज्ञता: वे इंटरवेंशनल पेन मैनेजमेंट में फेलोशिप (FIPM) प्राप्त हैं और बिना सर्जरी के पुराने दर्द (Chronic Pain) को ठीक करने के विशेषज्ञ माने जाते हैं।

3. क्लिनिक का पता और संपर्क (Location & Contact)
डॉ. संजय शर्मा मुख्य रूप से JPRC न्यूरो स्पाइन सेंटर में बैठते हैं:
* पता: 1, शॉपिंग सेंटर, सेठी कॉलोनी, नियर ट्रांसपोर्ट नगर बस स्टैंड/गुरुद्वारा मोड, जयपुर, राजस्थान - 302004।
* समय: आमतौर पर सोमवार से शनिवार (सुबह 10:00 से शाम 5:00 बजे तक)।
* संपर्क नंबर: आप अपॉइंटमेंट के लिए 9799088887 या 9929105199 पर संपर्क कर सकते हैं।

ट्राइजेमिनल न्यूरेल्जिया क्या है?
यह #चेहरे की नस ( Nerve) की एक समस्या है जिसमें चेहरे के एक हिस्से में बिजली के झटके जैसा या बहुत तेज चुभन वाला दर्द महसूस होता है। यह अक्सर ब्रश करते, चेहरा धोते या खाना खाते समय शुरू हो जाता है।

क्या आप चाहते हैं कि मैं इस बीमारी के लक्षणों या डॉ. शर्मा के क्लिनिक के लिए ऑनलाइन अपॉइंटमेंट बुक करने की प्रक्रिया ?




#ट्राइजेमिनल


#दर्दसेआराम #दर्दमुक्तजीवन #दर्दसेराहत

26/12/2025

❓ Back Pain kis wajah se hota hai?
Kya ye sirf age badhne ki wajah se hota hai?

👉 Jawab: Nahi!
Back pain sirf age ki wajah se nahi hota.
Aaj ke time me young log bhi back pain se pareshaan hain.

🔴 Back Pain ke common reasons:
• Galat posture (mobile / laptop use)
• Lambe time tak baithna
• Heavy weight uthana
• Exercise ya stretching na karna
• Slip Disc (L4-L5, L5-S1)
• Sciatica aur nerve compression
• Stress aur obesity

👨‍⚕️ Dr. Sanjay Sharma – JPRC Neuro Spine Centre, Jaipur
kehte hain:
“Back pain ko ignore karna sabse badi galti hoti hai.
Time par diagnosis aur right treatment se
surgery ki zarurat bhi nahi padti.”

✅ Back Pain se bachne ke tips (Prevention):

✔ Seedha posture rakhein
✔ Har 30–40 min me break lein
✔ Daily stretching / walk karein
✔ Heavy weight galat tareeke se na uthayein
✔ Pain ho to delay na karein

💉 Advanced Non-Surgical MIPSI Treatment
✔ No Surgery
✔ No Stitches
✔ Fast Recovery

📞 Appointment: 9799088887 | 9770551901
📍 JPRC Neuro Spine Centre, Jaipur

जयपुर स्थित डॉ. संजय शर्मा मुख्य रूप से अपनी "बिना सर्जरी (Non-surgical)" और "इंटरवेंशनल (Interventional)" तकनीकों के मा...
25/12/2025

जयपुर स्थित डॉ. संजय शर्मा मुख्य रूप से अपनी "बिना सर्जरी (Non-surgical)" और "इंटरवेंशनल (Interventional)" तकनीकों के माध्यम से पुराने और जटिल दर्द को ठीक करने के लिए जाने जाते हैं। वह जयपुर पेन रिलीफ सेंटर (JPRC) और न्यूरो स्पाइन सेंटर से जुड़े हैं।

दर्द प्रबंधन (Pain Management) के क्षेत्र में उनकी प्रसिद्धि के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

1. सर्जरी के बिना रीढ़ की हड्डी का इलाज (Non-Surgical Spine Treatment)
डॉ. शर्मा विशेष रूप से उन मरीजों के बीच लोकप्रिय हैं जिन्हें रीढ़ की हड्डी की सर्जरी (Spine Surgery) की सलाह दी गई होती है। वह MIPSI (Minimal Invasive Pain and Spine Intervention) तकनीक का उपयोग करते हैं, जिससे बिना बड़े ऑपरेशन के 'स्लिप डिस्क' (Slip Disc) और साइटिका (Sciatica) जैसी समस्याओं का इलाज संभव हो पाता है।

2. एडवांस्ड इंटरवेंशनल तकनीकें (Advanced Interventional Techniques)
वह दर्द के मूल कारण को निशाना बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हैं, जिनमें शामिल हैं:
* Radiofrequency Ablation (RFA): नसों के दर्द को कम करने के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी तरंगों का उपयोग।
* Ozone Nucleolysis: स्लिप डिस्क के इलाज के लिए ओजोन गैस का इंजेक्शन।
* Vertebroplasty: रीढ़ की हड्डी के फ्रैक्चर को ठीक करने की प्रक्रिया।
* Nerve Blocks: पुराने दर्द को रोकने के लिए नसों में सटीक इंजेक्शन।

3. विशेषज्ञता (Expertise)
वे एक एनेस्थिसियोलॉजिस्ट (Anesthesiologist) और दर्द विशेषज्ञ (इंटरवेंशनल स्पाइन एंड पेन मैनेजमेंट )हैं!
जिन्होंने दर्द प्रबंधन में विशेष फैलोशिप (FIPM- Fellowship in Interventional Pain management ) प्राप्त की है। वे World Institute of Pain (USA) और International Association for the Study of Pain , ISSP , transworld pain society जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संगठनों के सदस्य भी हैं।
4. जटिल दर्द का समाधान
वे केवल पीठ दर्द ही नहीं, बल्कि माइग्रेन (Migraine), ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया (Trigeminal Neuralgia), कैंसर का दर्द (Cancer Pain), और जोड़ों के दर्द (Joint Pain) का भी इलाज करते हैं।
संक्षेप में, डॉ. संजय शर्मा को इसलिए जाना जाता है क्योंकि वह मरीजों को 'ओपन सर्जरी' से बचाने और कम से कम चीर-फाड़ (Minimally Invasive) वाली विधियों से दर्द से राहत दिलाने में विशेषज्ञता रखते हैं।

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