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परसुराम जयतिं कि हार्दिक शुभकामनाए
14/05/2021

परसुराम जयतिं कि हार्दिक शुभकामनाए

01/05/2021
हनुमान जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं।ज्योतिष-उर्जा
27/04/2021

हनुमान जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं।ज्योतिष-उर्जा

12/04/2021

13अप्रैल ,मंगलवार प्रथम नवरात्र माँ शैल पुत्री ,घट स्थापना मुहुर्त-प्रातः10:15मिनट के पुर्व ही कर लेना है। आज के दिन देवी की उपासना से सूर्य भी मजबूत होता है।आज लाल फल और फूल माता को अर्पित करें। भोग में देशी घी गाय का अर्पित करें।जय माता दी🙏🙏🙏।ज्योतिष-उर्जा।🙏🙏🙏🙏🙏

चंद्र शनि युति ज्योतिष के अनुसार किसी भी जातक की कुंडली में शनि और चंद्र ग्रह की युति को अच्छा नहीं माना जाता है। इसे वि...
06/02/2021

चंद्र शनि युति

ज्योतिष के अनुसार किसी भी जातक की कुंडली में शनि और चंद्र ग्रह की युति को अच्छा नहीं माना जाता है। इसे विष योग कहा जाता है। कहते हैं कि जिस भी जातक की कुंडली में यह योग होता है वह जिंदगीभर कई प्राकर विष के समान कठिनाइयों का सामना करता है। पूर्ण विष योग माता को भी पीड़ित करता है। आओ जानते हैं कि यह युति क्या है, इसका असर क्या है और क्या है इसके निदान के उपाय।


सकारात्मक पक्ष : कहते हैं कि इस युति में व्यक्ति न्यायप्रिय, मेहनती, ईमानदार होता है। इस युति के चलते व्यक्ति में वैराग्य भाव का जन्म भी होता है।

कैसे बनता है विष योग :
1.चंद्र और शनि किसी भी भाव में इकट्ठा बैठे हो तो विष योग बनता है।

2. गोचर में जब शनि चंद्र के ऊपर से या जब चंद्र शनि के ऊपर से निकलता है तब विष योग बनता है। जब भी चंद्रमा गोचर में शनि अथवा राहु की राशि में आता है विष योग बनता है।

3. कुछ ज्योतिष विद्वान मानते हैं कि युति के अलावा शनि की चंद्र पर दृष्टि से भी विष योग बनता है।
4. कर्क राशि में शनि पुष्य नक्षत्र में हो और चंद्रमा मकर राशि में श्रवण नक्षत्र में हो अथवा चन्द्र और शनि विपरीत स्थिति में हों और दोनों अपने-अपने स्थान से एक दूसरे को देख रहे हों तो तब भी विष योग बनता है।
5. यदि 8वें स्थान पर राहु मौजूद हो और शनि मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक लग्न में हो तो भी विष योग बनता है।
6.शनि की दशा और चंद्र का प्रत्यंतर हो अथवा चंद्र की दशा हो एवं शनि का प्रत्यंतर हो तो भी विष योग बनता है।

तब नहीं बनता है विष योग :
1. यदि कुंडली में शनि कमजोर है और चंद्र बलवान है तो विष योग का असर कम होता है।
2. युति में डिग्री देखी जाती है। यदि वह डिग्री या अंश अनुसार एक दूसरे से 12 अंश दूर है तो यह योग नहीं बनेगा।
3. लग्न की कुंडली में ये योग किस भाव में बन रहा है यह भी देखा जाता है। जैसे मेष लग्न की कुंडली में युति हो तो ये योग असर दिखाएगा। क्योंकि शनि मेष राशि में नीच का होता है, लेकिन यही युति यदि दसवें भाव में हो तो इसका असरदार नहीं होगा, क्योंकि शनि अपनी ही राशि में होगा और चन्द्र अपने चतुर्थ भाव को देख रहा होगा।
4. चाहे कोई भी लग्न हो यदि 6, 8 या 12वें भाव में ये योग बन रहा है तो लागू होता है।

ग्रहण दोष लगाता है जीवन पर ग्रहण  मनुष्य के जीवन में आने वाले सुख-दुख, लाभ-हानि, यश-अपयश, रोग, ये सब ग्रह नक्षत्रों की च...
01/02/2021

ग्रहण दोष लगाता है जीवन पर ग्रहण


मनुष्य के जीवन में आने वाले सुख-दुख, लाभ-हानि, यश-अपयश, रोग, ये सब ग्रह नक्षत्रों की चाल और गति पर निर्भर करते हैं। कई बार कड़ी मेहनत करने के बाद भी मनुष्य को जीवन में हानि ही मिलती रहती है, जबकि कई लोगों को थोड़ी से मेहनत के बाद मनचाहा परिणाम मिलता है। ज्योतिष शास्त्र में नौ ग्रहों के माध्यम से जीवन में आने वाली अच्छी-बुरी घटनाओं का आकलन किया जाता है।

ज्योतिष में ऐसे अनेक योगों का विस्तार से वर्णन मिलता है जो यदि किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली में हो तो बुरे प्रभाव दिखाते हैं। इन्हीं में से एक है ग्रहण दोष। ग्रहण दोष एक अशुभ योग है जो जिस कुंडली में होता है उस व्यक्ति का जीवन कष्टप्रद हो जाता है। उसके जीवन में न तो तरक्की होती है और न आर्थिक परेशानियों से उबर पाता है। अज्ञानतावश उस व्यक्ति का पूरा जीवन संकटग्रस्त बीतता है। यदि योग्य ज्योतिष के पास जाकर ग्रहण दोष का निवारण करवा लिया जाए तो परेशानियां काफी हद तक कम हो जाती है।

ग्रहण दोष क्या होता है
ज्योतिष शास्त्र में ग्रहण दोष की विस्तृत परिभाषा दी गई है। उसके अनुसार जब किसी जन्मांगचक्र यानी लग्न कुंडली के द्वादश भावों में से किसी एक भाव में सूर्य या चंद्र के साथ राहु या केतु में से कोई एक ग्रह बैठा हो तो ग्रहण दोष बनता है। इसके अलावा यदि सूर्य या चंद्रमा के घर में राहु-केतु में से कोई एक ग्रह मौजूद हो तो यह ग्रहण दोष कहलाता है। ग्रहण दोष जिस भाव में बनता है उस भाव से संबंधित परिणामों पर यह अशुभ प्रभाव डालता है। उदाहरण के तौर पर यदि देखा जाए तो द्वितीय भाव धन स्थान कहलाता है। यदि इस भाव में ग्रहण दोष लगता है तो व्यक्ति जीवनभर आर्थिक परेशानियों से जूझता रहता है। एक संकट टलते ही दूसरा आ जाता है। कार्य-व्यवसाय ठीक से नहीं चलता। नौकरी में बार-बार बदलाव होता है। धन की बचत नहीं हो पाती। आर्थिक कार्य होते-होते रूक जाते हैं।

ग्रहण दोष के लक्षण और प्रभाव
ग्रहण दोष मुख्यतः सूर्य या चंद्र के साथ राहु या केतु की उपस्थिति के कारण बनता है। जिस प्रकार सूर्य या चंद्र ग्रहण होने पर अंधकार सा छा जाता है, उसी तरह कुंडली में ग्रहण दोष लगने पर जीवन में आर्थिक, सामाजिक, पारिवारिक, नौकरी में प्रमोशन, व्यापार में लाभ जैसी स्थितियों पर भी ग्रहण लग जाता है। व्यक्ति की तरक्की बाधित हो जाती है।

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