15/11/2022
Written by # Sandeep Jorar #💐💐
मेरे नाक में पड़ी नथनी,
अगर तुम्हें मेरा श्रृंगार लगे;
तो तुम मेरी आँखों में उतरने की कोशिश करना.
जो तुम महसूस कर सको...
तुम्हें अहसास होगा
ये कैसा श्रृंगार?
तुम जान जाओगे
कि ये पुरुष प्रधान समाज का
नारी को वश में रखने का
कोई सरल तरीका होगा.
जो तुम मेरी पनीली आँखों के दर्द को समझ सको
जो तुम मेरे चेहरे की झुर्रियों में झांक सको
जो तुम मेरे होठों की मुस्कान से आगे जा सको
तुम देखोगे ....
एक बियाबां में अपनी पहचान तलाश करती
एक औरत.
तुम फिर,
मुझे दोबारा देखना...
एक बार फिर से
नये नजरिये से.
तुम देखोगे
कि कोई गाय जंजीर के सहारे
खूंटे से बंधी हो जैसे.
संदीप स्वार्थी