13/11/2025
#क्या_आपको_खाना_पच_नहीं_रहा_? जानिए बदहज़मी के घरेलू इलाज!
✅कभी पेट भारी-भारी लगे,
✅डकारें आती रहें,
✅ऐसा लगे कि खाना गले तक अटका हुआ है? ✅अगर हां, तो समझ लीजिए
👉आपको बदहज़मी (Indigestion) ने पकड़ लिया है।
✍️यह मामूली लगने वाली समस्या असल में शरीर की पाचन प्रणाली के असंतुलन का संकेत है।
👉आइए समझते हैं कि बदहज़मी क्या है, इसके कारण क्या हैं और कैसे कुछ आसान घरेलू उपायों से इसे मिनटों में ठीक किया जा सकता है।
#आयुर्वेद में बदहज़मी को #अजीर्ण कहा गया है। जब पाचन अग्नि (Digestive Fire) कमजोर पड़ जाती है और खाया हुआ भोजन ठीक से नहीं पचता, तो यह बदहज़मी के रूप में दिखाई देता है।
✅इससे पेट में भारीपन, गैस, डकार, जी मिचलाना, या कभी-कभी सिरदर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
#आयुर्वेद के अनुसार, यह ोष (अधपचा हुआ भोजन जो विष में बदल जाता है) का लक्षण है, जो आगे चलकर अन्य बीमारियों की जड़ बनता है।
मुख्य कारण क्या हैं?
✅जल्दी-जल्दी या देर से खाना पाचन तंत्र को भ्रमित कर देता है।
✅तला-भुना, अत्यधिक मसालेदार भोजन पाचन अग्नि को कमजोर करता है।
✅रात में देर से खाना मिलता। पेट को आराम का समय नहीं
✅तनाव और चिंता सीधे पाचन पर असर डालते हैं।
✅कम पानी पीना या अधिक ठंडा पानी पीना अग्नि को मंद करता है।
#जल्दी_राहत_पाने_के_घरेलू_उपायः
जब पेट में गैस, भारीपन या जलन महसूस हो, तो इन आयुर्वेदिक उपायों से राहत मिल सकती है।
✅अजवाइन + काला नमक
1 चम्मच अजवाइन और चुटकीभर काला नमक मिलाकर गुनगुने पानी से खाएं। यह गैस, डकार और पेट के भारीपन को तुरंत कम करता है। अजवाइन में थाइमोल नामक तत्व होता है जो पेट के एंजाइम्स को सक्रिय करता है।
✅नींबू + अदरक
1 चम्मच अदरक का रस, आधा नींबू का रस और चुटकीभर सेंधा नमक मिलाकर भोजन से पहले लें। यह पाचन रसों को सक्रिय करता है और बदहज़मी से बचाता है। नींबू की अम्लीय प्रकृति भोजन को तोड़ने में मदद करती है जबकि अदरक अग्नि को तेज करता है।
✅हरड़ (Haritaki)
आयुर्वेद की पाचन मित्र रात को सोने से पहले 2 ग्राम हरड़ चूर्ण और गुड़,गुनगुने पानी से लें। यह पाचन को ठीक कर आम दोष को बाहर निकालती है।
#हरड़ को #आयुर्वेद में "अभय" कहा गया है क्योंकि यह पेट के हर रोग से बचाती है।
✅पुदीना + तुलसी
5-6 तुलसी के पत्ते और कुछ पुदीने के पत्ते पानी में उबालें गुनगुना रहने पर स्वाद के लिए थोड़ा शहद मिलाएं। यह पेट की जलन, भारीपन और मरोड़ को शांत करता है। तुलसी वात-कफ संतुलित करती है, जबकि पुदीना ठंडक और ताजगी देता है।
✅हींग + जल
चुटकीभर हींग को गुनगुने पानी में घोलकर पिएं। हींग एक प्राकृतिक एंटीस्पास्मोडिक है जो गैस और अपच को तुरंत खत्म करता है। दादी-नानी का यह उपाय आज भी पेट दर्द में सबसे असरदार माना जाता है।
✅छाछ + भुना जीरा
भोजन के बाद छाछ में भुना जीरा और काला नमक डालकर पिएं। यह बदहज़मी ही नहीं, बल्कि एसिडिटी को भी तुरंत कम करता है। छाछ में प्रोबायोटिक्स होते हैं जो पेट के अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाते हैं।
(अतिरिक्त उपायः)
✅भोजन के बाद 100 कदम चलना पाचन को सक्रिय रखता है।
✅भोजन के बीच में पानी न पीना, बल्कि भोजन के 30 मिनट बाद लें।
✅भोजन करते समय मन शांत रखें, मोबाइल या टीवी से दूर रहें।
✅रात का खाना हल्का और जल्दी खाएं।
✅दिन की शुरुआत गुनगुने पानी से करें, इससे पाचन अग्नि तेज होती है।
🌿आयुर्वेद क्या कहता है?🌿
आयुर्वेद के अनुसार, बदहज़मी शरीर के तीन दोषों- वात, पित्त और कफ - के असंतुलन से होती है। इसका स्थायी इलाज केवल लक्षणों को दबाने से नहीं, बल्कि अग्नि (Digestive Fire) को संतुलित करने से होता है। इसके लिए सुबह-सुबह हल्का गुनगुना पानी पीना, हफ्ते में एक दिन त्रिफला चूर्ण लेना और मौसम के अनुसार भोजन करना सबसे प्रभावी माना गया