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28/12/2025


अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं या pre diabetic stage में हैं तो आपको ये जरूर देखना चाहिए।

क्या डायबिटीज जड़ से खत्म हो सकता है?
हां जी बिल्कुल हो सकता है।
कुछ specific conditions होती हैं जिन conditions में diabetes जड़ से खत्म हो सकता है।

और क्या pre diabetic stage से diabetes की stage तक जाने से रोक जा सकता है? बिल्कुल रोका सकता है।

वो कौन सी conditions हैं, ये जानने के पहले कुछ fatcs जानते हैं जो कि एक diabetes या pre diabetic मरीजों को जानना बहुत आवश्यक है।

क्या आप जानते है कि इंडिया में 11% लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं। और लगभग 15% लोग pre diabetic stage में हैं जो कि आगे जाके diabetes में convert होने वाले हैं।

डायबिटीज क्यों होती है, इसके लक्षण क्या क्या हैं, blood test क्या हैं जिनसे डायबिटीज का पता लगता है, ये सब बातें आपको पता ही होंगी।

Diabetes में genetic factor के साथ साथ environmental factor बड़ा role play करता है। Environmental factors मतलब गलत खान पान और गलत जीवन शैली।

गलत खान-पान जो डायबिटीज को प्रमोट करते हैं, आप vedeo pause करके देख सकते हैं -
• नए चावल ज्यादा खाना
• घी ज्यादा खाना
• उरद की दाल का अधिक सेवन
• जलीय जंतुओं का मांस अधिक खाना
• चावल का आटा का अधिक खाना
• खीर अधिक खाना
• मिठाई अधिक खाना
• आवश्यकता से अधिक खाना खाना
• दिन भर कुछ न कुछ खाते पीते रहना
• रात में देर से खान खाना
• खाना खाके तुरंत सो जाना
• High ग्लाइसेमिक index वाला खाना खाना
• दही, चावल, कच्चा खाना, अधपका खाना खाना, अंकुरित अनाज या दाल, आदि का अधिक सेवन

जब गलत खाने के साथ-साथ व्यक्ति का जीवन शैली भी गलत होता है तो डायबिटीज होने के chances बढ़ जाते हैं, गलत जीवन शैली जैसे कि -
• व्यायाम का बिल्कुल न करना या पर्याप्त मात्रा में व्यायाम न करना
• शराब का ज्यादा उपयोग करना
• दिन में सोना
• आवश्यकता से अधिक चिंता करना
• मोटापा

डायबिटीज के मरीजों में क्या क्या लक्षण आते हैं, आप vedeo pause करके देख सकते हैं -
• बार बार पेशाब के लिए जाना, पेशाब में चींटियां लगना
• प्यास ज्यादा लगना
• भूख ज्यादा लगना
• मुंह का स्वाद मीठा रहना
• कमजोरी लगना
• तंद्रा/ नींद सी भरी रहना

डायबिटीज के मरीजों में क्या क्या complecations हो सकते है?
• अगर डायबिटीज के मरीजों में शुगर लेवल को अच्छे से कंट्रोल में न रखा जाय तो आगे जाकर उनमें
आंख (ratinolathy),
किडनी (nephropathy),
नस से संबंधित (neuropathy),
न भरने वाले घाव (diabetic foot),
यौन समस्याएं (sexual dysfunction)
आदि गंभीर बीमारियां हो जाती हैं।

अब जानते हैं कि डायबिटीज या प्री डायबिटीज के मरीजों को क्या खाना चाहिए और क्या नहीं -

भुना हुआ खाना डायबिटीज के मरीजों के लिए सबसे अच्छा होता है। जैस भुने हुए जो, बाजरा, चना, लाई, मखाना आदि। आप कुछ भी खा रहे हों अगर उसे भून के लेंगे तो आपके लिए बेहतर होगा।

अगर आप regularly चावल ले रहे हैं तो आपको सादा चावल नहीं लेना चाहिए, आपको सिर्फ सेला चावल ही खाना चाहिए। Normal चावल मतलब धान से directly ही चावल निकालना, जबकि सेला चावल के लिए पहले धन को 2 बार गरम पानी में उबाला जाता है फिर चावल निकाला जाता है, इसे सेला चावल कहते है, 1121-गैलेक्सी, या हरि पत्ती सेला चावल नाम से ये आपको मार्केट में मिल जाएगा। ये चावल sugar level को उतना नहीं बढ़ता है जितना कि सादा चावल।

गेहूं के आटे के साथ multigrain आटा मिला के रोटी बनाए, ये आपके लिए बेहतर रहेगा।

Millets या श्री धान्य आपके लिए बहुत ही अच्छे हैं, जैसे सवा, कोदो, रागी वगैरा; इनको अपने खाने में जरूर add करें।

मीठा, दही, पनीर, कच्चा खाना (मतलब फल या सलाद), अधपका खाना, बासी खाना, ज्यादा तरल खाना, पानी जरूरत से ज्यादा पीना ये सब आपके लिए बहुत ही नुकसान दायक हैं। अगर आप ये सब लेते हैं तो आज ही बंद करें।

ऐसी बहुत सारी बातें हैं डायबिटीज के मरीजों को पता नहीं होती और वो जीवन भर गलत खाते पीते रहते हैं और परेशान रहते हैं।

डायबिटीज के मरीजों को कई बार सलाह दी जाती है कि उन्हें हर 3 घंटे कुछ न कुछ खाना चाहिए, तो आयुर्वेद के हिसाब से ये बहुत ही गलत है, ayurved के अनुसार डायबिटीज के मरीजों को (जो कफ़ज अवस्था में है या डायबिटीज को हुए 8-10 साल से कम हुआ है) 2 या 3 बार ही खाना चाहिए और इनके बीच में कुछ और नहीं लेना चाहिए। इसलिए अगर आपकी ये आदत है कि हर 3-4 घंटे में कुछ न कुछ ले रहे है तो ये आदत बदलिए, नहीं तो शुगर लेवल तो आपका maintain रहेगा लेकिन जो स्रोतों अवरोध (blocking of channel, जो कि सभी डायबिटीज के मरीजों में होता है) हुआ है वो कभी सही नहीं हो पाएगा, और आपका शरीर और ज्यादा week होता जाएगा और दवाइयों पर आपकी dependency और बढ़ती जाएगी। 2 full meal के बीच कम से कम 6 घंटे का gap रखें।

अब जानते हैं कि आयुर्वेद में इलाज क्या है ?
• आयुर्वेद द्वारा Diabetes का बेहतर इलाज किया जा सकता है।
• आयुर्वेदिक दवाइयां न केवल Sugar level को अच्छे से control करती हे बल्कि शरीर को ताकत भी देती है और भविष्य में होने वाले complecations से बचाती है।

आयुर्वेदिक उपचार में इन तरीकों से इलाज किया जाता है
• खाने की दवाई
• पंचकर्म थैरेपी
• व्यायाम, योग आसन
• डाइट प्लान

दवाइयां
• प्रत्येक व्यक्ति की प्रकृति, रोग की अवस्था और जटिलता के आधार पर दवाइयां दी जाती हैं, कुछ उदाहरण जैसे पटोलकटुरोहनियादी कषाय, कतकखादिरादी कषाय, निषाकतकादी कषाय, चंद्रप्रभा वटी, वसंतकुसुमाकर रस आदि।
• दवाइयां अवस्था के अनुसार अलग-अलग मरीजों में अलग अलग होती हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सक के परामर्श से ही ये दवाइयां ली जानी चाहिए। आयुर्वेदिक दवाइयों का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता

पंचकर्म थैरेपी
• पंचकर्म थैरेपी में मुख्यतः वमन थैरेपी का प्रयोग किया जाता है, यह थैरेपी डायबिटीज के मरीजों में अत्यंत उपयोगी है। डायबिटीज के नए मरीजों में कई बार यह थैरेपी डायबिटीज को जड़ से भी खत्म कर देती है।
• डायबिटीज के मरीजों को साल में वसंत ऋतु में एक बार वमन अवश्य ही लेना चाहिए।

डाइट प्लान
• डायबिटीज के मरीजों में खाने का समय निश्चित रखना बहुत ही आवश्यक है। उन्हें एक नियत समय पर ही खाना खाना चाहिए।
• शारीरिक अवस्था एवं रोग अवस्था के अनुसार डॉक्टर द्वारा प्रत्येक मरीज को personalised diet plan दिया जाता है।

व्यायाम
• डायबिटीज के मरीजों को प्रतिदिन कम से कम 30 मिनिट तक व्यायाम करना चाहिए।
• जिन्हें व्यायाम की आदत नहीं है ऐसे मरीजों को धीरे-धीरे करके व्यायाम का समय बढ़ाना चाहिए, एकदम से बहुत सारा व्यायाम नहीं करना चाहिए।
• जिन्हें व्यायाम की आदत नहीं है ऐसे लोगों को पहले 1 महीने प्रतिदिन सबेरे 20-30 मिनिट पैदल चलना चाहिए।
• जब शरीर को आदत पड़ जाय फिर brisk walk (थोड़ा तेज चलना) करना चाहिए।
• 15 दिन brisk walk करने के बाद हल्के फुल्के व्यायाम प्रारंभ करने चाहिए।
• कुछ योग आसन जैसे पश्चिमोत्तानासन, पाद हस्तासन, पवनमुक्तासन आदि डायबिटीज में बहुत लाभदायक हैं।
• डॉक्टर द्वारा कब कैसा व्यायाम करना चाहिए ये मरीज की अवस्थानुसार बताया जाता है।

डायबिटीज के मरीज अगर आयुर्वेद को डॉक्टर की सलाह से सही से follow करे तो उनमें Sugar level भी maintain रहता है, और उनको आगे के के complecations आने की संभावना भी कम हो जाती है।

अब जानते हैं कि किस प्रकार का डायबिटीज जड़ से खत्म हो सकता है....
जब डायबिटीज को हुए 1 साल से कम समय हुआ हो, डायबिटीज के सारे लक्षण नहीं आए हो या कोई complication नहीं आए हों और मरीज का शारीरिक बल और मानसिक बल अच्छा हो, तो ऐसे मरीज अगर आयुर्वेद डॉक्टर द्वारा दिए उपचार को सही से follow करते है तो उनका डायबिटीज जड़ से खत्म होने की संभावना बहुत अधिक रहती है।

ऐसे मरीजों को वमन पंचकर्म थैरेपी दी जाती है, साथ में आयुर्वेदिक दवाइयां दी जाती है और खान पान एवं व्यायाम के बारे में personalised और detailed advice दिया जाता है, जिनको follow करके वो डायबिटीज से छुटकारा पा सकते हैं।

यदि आपका डायबिटीज 1 साल से ज्यादा हो गया तो जड़ से खत्म होने की संभावना बहुत कम हो जाती है, ऐसे में आयुर्वेद दवाइयों द्वारा आपके शुगर लेवल को अच्छे से कंट्रोल किया जा सकता है, आगे होने वाले कॉम्प्लिकेशन रोके जा सकते है और एक बेहतर स्वस्थ दिया जा सकता है।

अगर आप प्री डायबिटीक के स्टेज में हैं तो भी वमन पंचकर्म थैरेपी और आयुर्वेदिक दवाइयों द्वारा आपको डायबिटीज की स्टेज तक जाने से रोक सकते हैं।

आपको डायबिटीज से संबंधित खान पान या उपचार संबंधी कोई doubt हो तो कमेंट करके बता सकते है।

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🩺 मधुमेह (Diabetes Mellitus) -

लक्षण और देर से होने वाले दुष्प्रभाव -

I. मधुमेह के सामान्य लक्षण (शुरुआती अवस्था में): -

1. बार-बार पेशाब आना (Polyuria)

2. बहुत प्यास लगना (Polydipsia)

3. बार-बार भूख लगना (Polyphagia)

4. वज़न का बिना कारण कम होना

5. कमज़ोरी या थकान महसूस होना

6. आंखों से धुंधला दिखाई देना

7. घाव का देर से भरना

8. त्वचा, मूत्र मार्ग, मुँह या जननांगों में बार-बार संक्रमण होना

9. हाथ-पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन

----------------------------------------------------------------

II. देर से या अनियंत्रित मधुमेह के दुष्प्रभाव: -

A. तात्कालिक (Acute) जटिलताएँ:

1. डायबिटिक कीटोएसिडोसिस (DKA) – ज़्यादातर टाइप-1 में
2. हाइपरऑस्मोलर अवस्था (HHS) – ज़्यादातर टाइप-2 में

3. हाइपोग्लाइसीमिया (लो शुगर) – ज़्यादा दवा या इंसुलिन से

B. दीर्घकालीन (Chronic) जटिलताएँ:

1. सूक्ष्म रक्तवाहिनी (Microvascular) दुष्प्रभाव:

• रेटिनोपैथी: आँख की रेटिना को नुकसान → दृष्टि कमजोर

• नेफ्रोपैथी: किडनी को नुकसान → पेशाब में प्रोटीन → किडनी फेल

• न्यूरोपैथी: नसों को नुकसान → झुनझुनी, सुन्नपन, पैर के घाव

2. बड़ी रक्तवाहिनी (Macrovascular) दुष्प्रभाव:

• हृदय रोग (CAD): दिल का दौरा

• मस्तिष्क रोग (Stroke): लकवा या बेहोशी

• पैरों की धमनियों में रोग (PAD): खून की कमी → गैंग्रीन

3. अन्य जटिलताएँ:

• पैरों में घाव या संक्रमण (Diabetic Foot)

• त्वचा के रोग – रूखापन, फोड़े-फुंसी, संक्रमण

• यौन समस्या – पुरुषों में नपुंसकता, महिलाओं में मासिक गड़बड़ी

----------------------------------------------------------------

III. बचाव और नियंत्रण के उपाय: -

• नियमित ब्लड शुगर जाँच कराएँ

• संतुलित आहार लें (कम चीनी, ज़्यादा फाइबर)

• नियमित व्यायाम करें

• डॉक्टर की सलाह से दवा लें

• आंख, किडनी और पैर की जाँच समय-समय पर कराएँ

----------------------------------------------------------------

आयुर्वेद उपचार से लाभ -

आयुर्वेद उपचार द्वारा शुरुआती अवस्था में प्रमेह के पूरी तरह सही होने की संभावना अधिक रहती है।

यदि प्रमेह को 1 साल से ज्यादा हो चुका है तो यह जड़ से तो नहीं जा सकता लेकिन आयुर्वेद उपचार द्वारा sugar level अच्छे से नियंत्रित किया जा सकता है एवं आगे होने वाले complications से बचाया जा सकता है - वो भी बिना किसी side-effect के।

वमन पंचकर्म थैरेपी - प्रमेह के प्रत्येक रोगी को हर साल वसंत के महीने (February- March) में वमन थैरेपी अवश्य लेनी चाहिए।

आयुर्वेदिक औषधियां हमेशा आयुर्वेदिक डॉक्टर के सलाह अनुसार ही लें क्यूंकि सभी प्रमेह रोगियों में इलाज एक जैसा नहीं होता, हर व्यक्ति की प्रकृति एवं रोग की अवस्था के अनुसार दवाइयां अलग अलग होती हैं।

आयुर्वेद उपचार से आप डायबिटीज के complications जैसे Retinopathy, Neuropathy, Nephropathy से बच सकते हैं, और अगर ये complications आ चुके हैं तब भी इनसे छुटकारा पाया जा सकता है।

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