22/12/2019
प्राचीनसमय से ही मानव के मस्तिष्क में प्रकृति के गूढ़ रहस्यों को समझकर अपने भविष्य को जान लेने की लालसा रही है, इसी लालसा ने ज्योतिष विद्या को जन्म दिया अंक ज्योतिष को प्राचीन काल से ही भविष्य देखने के लिए प्रयोग में लाया जाता रहा है, संख्याओं का प्रत्येक व्यक्ति के जीवन पर बड़ा गहरा प्रभाव पड़ता है, आज के समय में अंक ज्योतिष महत्व तो अचानक से और भी ज़्यादा हो गया है, अंक शास्त्र को भविष्य देखने की सबसे सटीक विद्या बताया जाता है, नम्बरों का हमारे जीवन पर विशेष प्रभाव पड़ता है। नंबरों के हिसाब से व्यक्ति के स्वभाव और हाव-भाव में परिवर्तन होते हैं
मानव ने ग्रहों की चालों का सूक्ष्म अध्ययन कर भौतिक और मानव जीवन में घटित होने वाली घटनाओं पर, उनके प्रभाव को जानने का यत्न किया। इसी क्रम में उसने अनुभव किया कि ग्रहों के साथ-साथ अंक भी जीवन की घटनाओं को प्रभावित करते हैं।
अंकों के रहस्य और शक्ति को जानने का प्रयास हजारों वर्षों से होता रहा है, जिनको अंक ज्योतिष में मूलांक कहते हैं। इनको जन्म के आधार पर 1 से लेकर 9 तक माना जाता है, अंक ज्योतिष में प्रत्येक अंक का एक प्रतिनिधि ग्रह माना गया है, जिसका संबंधित अंक वाले व्यक्ति के संपूर्ण जीवन पर प्रभाव रहता है
अंक शास्त्र में प्रत्येक अंक वाले व्यक्ति की सफलता के लिए कुछ उपाय बताए गए हैं। यदि अपने अंक के अनुसार उपाय किये जाएँ तो निश्चित रूप से प्रत्येक कार्य में सफलता मिलेगी,
संयुक्त अंक या भाग्य अंक का खेल मानव जीवन में कैसे होता है, यह एक दिलचस्प कड़ी है ज्योतिष-विद्या की, संयुक्त का अर्थ होता है संयोग अर्थात जोड़ना, जन्म की अंग्रेजी तारीख, जन्म का अंग्रेजी महीना और अंग्रेजी सन् तीनों की विविध संख्याओं को जोड़कर संयुक्त अंक या भाग्यांक बनाया जाता है।
मान लीजिए किसी व्यक्ति का जन्म 08 जून 1991 को हुआ-
तारीख = 08 = 8
महीना = 6
सन् = 1991 = 1+9+9+1 = 20
इन तीनों को जोड़ने से (8+6+20), 34 संख्या आई। अब 3+4 को जोड़कर सूक्ष्म संख्या 7 निकाल ली, यानी भाग्यांक 7 हूआ, इस अंक का बहुत महत्व है इसलिए इसे भाग्य का चमत्कारिक अंक भी कहते हैं।
भाग्यांक 1 के लिए भाग्यशाली वर्ष वही सिद्ध होंगे जिनका योग 1 होता है या फिर मित्र अंकों से संबंधित वर्ष भी बेहतर सिद्ध होंगे, जैसे 1 भाग्यांक के लिए सन् 2008, 2017 और 2026 उत्तम सिद्ध होंगे और उसके मित्र अंक 3, 5, 7 सहायक सिद्ध होंगे।
1 का मित्र अंक 3, 5, 7 है, 2 का मित्र अंक 4 और 8 है, 3 का मित्र अंक 1, 5, 7, 6, 9 है, 4 का मित्र अंक 2 और 8 है, 5 का मित्र अंक 1, 3, 7 और 10 है, 6 का मित्र अंक 3 और 9 है, 7 का मित्र अंक 1, 3 तथा 5 है, 8 का मित्र अंक 2 और 4 है, 9 का मित्र अंक 3 और 6 है, यानी कुल भाग्यांक 9 हुए और सभी अंकों को जोड़कर 1 से 9 संख्या का सूक्ष्म अंक निकाल लिया जाता है,
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Astrologer Pawan Sharma
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