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🌿 Aayushmaan KANCHNAR GUGGULप्राचीन आयुर्वेदिक ज्ञान पर आधारित आधुनिक समाधानआयुर्वेद में कंचनार गुग्गुल का उल्लेख सदियों...
04/02/2026

🌿 Aayushmaan KANCHNAR GUGGUL
प्राचीन आयुर्वेदिक ज्ञान पर आधारित आधुनिक समाधान
आयुर्वेद में कंचनार गुग्गुल का उल्लेख सदियों से
👉 थायरॉइड असंतुलन
👉 ग्रंथियों की सूजन
👉 लिम्फेटिक कंजेशन
👉 हार्मोनल समस्याओं
में सहायक औषधि के रूप में मिलता है।
🔬 इसमें शामिल प्रमुख आयुर्वेदिक घटक:
🌿 Kanchanar – ग्रंथियों और थायरॉइड सपोर्ट
🔥 Guggulu – सूजन कम करने व मेटाबॉलिज़्म में सहायक
🍃 Triphala – डिटॉक्स व पाचन सुधार
🌶️ Trikatu – औषधि के अवशोषण को बढ़ाता है
🌱 Varuna, Elaichi, Dalchini, Tejpatta – हार्मोनल व पाचन संतुलन
🧈 Desi Ghee – औषधीय गुणों को शरीर में गहराई तक पहुँचाने में सहायक
✨ संभावित लाभ:
✔️ स्वस्थ थायरॉइड फ़ंक्शन को सपोर्ट
✔️ ग्रंथियों की सूजन व गाँठों में सहायक
✔️ PCOS, Fibroids व हार्मोनल असंतुलन में उपयोगी
✔️ लिम्फेटिक क्लींजिंग व डिटॉक्स सपोर्ट
🌿 Pure Promise:
🚫 No Chemicals | 🚫 No Preservatives
🌱 100% Natural | 100% Ayurvedic | 100% Vegetarian
💰 कीमत: ₹365
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📌 यह उत्पाद आयुर्वेदिक सिद्धांतों पर आधारित है। उपयोग से पूर्व चिकित्सक की सलाह लें।




शरीर को दे चंद्रमा जैसी चमक और बल — सम्पूर्ण स्वास्थ्य का वैदिक रक्षक।📜 आयुर्वेद के मानक ग्रंथ 'शार्ंगधर संहिता' (मध्यम ...
02/02/2026

शरीर को दे चंद्रमा जैसी चमक और बल — सम्पूर्ण स्वास्थ्य का वैदिक रक्षक।
📜 आयुर्वेद के मानक ग्रंथ 'शार्ंगधर संहिता' (मध्यम खंड, अध्याय 7) में चंद्रप्रभा वटी का विस्तृत वर्णन मिलता है।
अर्थ: 'चंद्र' का अर्थ है चंद्रमा और 'प्रभा' का अर्थ है कांति (Glow)।
ऋषियों का कथन: प्राचीन वैद्यों का मानना था कि जिस प्रकार चंद्रमा अपनी शीतलता और प्रकाश से अंधकार को दूर करता है, उसी प्रकार यह औषधि शरीर के भीतर की अशुद्धियों (Toxins/Ama) को दूर कर शरीर को कांतिवान, बलवान और युवा बनाती है।
🌿 घटकों (Ingredients) का गहरा वैज्ञानिक व आयुर्वेदिक विश्लेषण
Aayushmaan Chandraprabha में 40 से अधिक जड़ी-बूटियों और भस्मों का एक दुर्लभ और सटीक मिश्रण है। इसे हम 4 मुख्य स्तंभों में विभाजित कर सकते हैं:
1. मुख्य शक्ति (The Powerhouses)
शुद्ध शिलाजीत (Shilajit): इसे आयुर्वेद में 'योगवाही' कहा गया है। यह जिस भी औषधि के साथ मिलता है, उसकी शक्ति को 100 गुना बढ़ा देता है। यह कोशिकाओं (Cells) को फिर से जीवंत (Rejuvenate) करता है और 'प्रमेह' (Diabetes/Urinary disorders) का सबसे बड़ा शत्रु है।
गुग्गुल (Guggul): यह 'त्रिदोष नाशक' है। विशेषकर वात रोगों (Vata Disorders) जैसे जोड़ों का दर्द, सूजन और शरीर में जमी अतिरिक्त चर्बी (Meda Dhatu) को खुरच कर बाहर निकालने में सक्षम है।
2. दीपन और पाचन (Digestive Fire Igniters)
त्रिकटु (सौंठ, काली मिर्च, पीपल) & चित्रक मूल: आयुर्वेद कहता है, "रोगा: सर्वे अपि मंदाग्नौ" (सभी रोग पेट की अग्नि मंद होने से होते हैं)। ये जड़ी-बूटियां आपके मेटाबॉलिज्म (जठराग्नि) को इतना तेज कर देती हैं कि भोजन सही से पचता है और 'आम' (Toxins) नहीं बनता।
गजपीपल, चव्य, पिपलामूल: ये आंतों की गहराई से सफाई करते हैं और गैस या ब्लोटिंग को खत्म करते हैं।
3. धातु वर्धक और रक्त शोधक (Blood Purifiers & Strength Builders)
लौह भस्म (Iron Ash): यह शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ाती है और 'पांडु रोग' (Anemia) को दूर करती है।
स्वर्ण माक्षिक भस्म: यह रक्त की गर्मी (Pitta) को शांत करती है, जिससे यूरिन में जलन और त्वचा रोगों में लाभ मिलता है।
त्रिफला (हरड़, बहेड़ा, आंवला): यह शरीर का सबसे उत्तम Detoxifier है, जो लिवर और किडनी को स्वस्थ रखता है।
4. मूत्रवह स्रोतस रक्षक (Urinary System Guardians)
गोखरू (Gokhru) & वरुण (Varuna): ये किडनी की कार्यक्षमता बढ़ाते हैं और यूरिक एसिड (Uric Acid) को फिल्टर करके बाहर निकालते हैं।
वचा, नागरमोथा, देवदारु: ये नसों की कमजोरी दूर करते हैं और मानसिक तनाव कम करते हैं।
💪 Aayushmaan Chandraprabha ही क्यों? (Benefits Analysis)
बाजार में कई चंद्रप्रभा उपलब्ध हैं, लेकिन लाभकारी की Aayushmaan Chandraprabha शास्त्रों में वर्णित 'भावना द्रव्य' की विधि से तैयार की गई है, जिससे इसकी पोटेंसी (Potency) कई गुना बढ़ जाती है।
यूरिक एसिड और गठिया (Uric Acid & Arthritis): यह शरीर में जमा यूरिक एसिड क्रिस्टल्स को तोड़ती है, जिससे घुटनों का दर्द और सूजन कम होती है।
हार्मोनल संतुलन (Hormonal Balance): चाहे महिलाओं में PCOD/PCOS की समस्या हो या पुरुषों में प्रोस्टेट या पौरुष शक्ति (Vitality) की कमी—यह दोनों के लिए एक टॉनिक है।
यूरिन इन्फेक्शन (UTI): बार-बार पेशाब आना, जलन होना या रुक-रुक कर आना—इन सभी 'मूत्रकृच्छ' रोगों में यह रामबाण है।
ऊर्जा और स्टैमिना: यह केवल बीमारी की दवा नहीं है, यह एक डेली हेल्थ सप्लीमेंट है जो थकान को मिटाता है।
📢
"हजारों साल पुराना वैदिक फार्मूला, जो आज की लाइफस्टाइल बीमारियों का 'वन-शॉट' इलाज है!"

क्या आप जानते हैं? हमारे ऋषियों ने हजारों साल पहले ही जान लिया था कि भविष्य में मनुष्य को 'बैठे रहने' (Sedentary Lifestyle) से बीमारियां होंगी। इसीलिए उन्होंने रचना की चंद्रप्रभा वटी की। 🌕
Aayushmaan Chandraprabha में मौजूद शिलाजीत और गुग्गुल का शक्तिशाली संगम आपके शरीर की 'सर्विसिंग' करता है।
✅ किडनी डिटॉक्स: यूरिक एसिड बाहर, किडनी स्वस्थ।
✅ ज्वाइंट केयर: घुटनों के दर्द में राहत।
✅ सुपर एनर्जी: दिन भर एक्टिव रहें।

आयुष्मान महानारायण तेल — वेद, विज्ञान और आरोग्य का अद्भुत संगम"शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्"(शरीर ही सभी कर्तव्यों को पूरा ...
01/02/2026

आयुष्मान महानारायण तेल — वेद, विज्ञान और आरोग्य का अद्भुत संगम
"शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्"
(शरीर ही सभी कर्तव्यों को पूरा करने का मुख्य साधन है - कालिदास/उपनिषद सार)
जब शरीर के जोड़ और मांसपेशियां साथ छोड़ने लगें, तो जीवन की गति थम सी जाती है। ऐसे में आधुनिक विज्ञान जहां केवल दर्द को दबाने (Painkillers) की बात करता है, वहां लाभकारी आपके लिए लाया है प्राचीन ऋषियों का आशीर्वाद — आयुष्मान महानारायण तेल।
आइए, भैषज्य रत्नावली के 'वातव्याधि अधिकार' अध्याय और चरक संहिता के सूत्रों का गहराई से अध्ययन करें और जानें कि यह तेल वास्तव में एक चमत्कार क्यों है।
🏺 1. निर्माण विधि: तेलपाक और सेसा विधि का रहस्य
बाजार में मिलने वाले साधारण तेलों और आयुष्मान महानारायण तेल में सबसे बड़ा अंतर इसकी निर्माण प्रक्रिया है। इसे 'मूर्छित तिल तेल' (Murchhit Til Tel) के आधार पर तैयार किया जाता है।
* मूर्च्छना संस्कार: प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, कच्चे तिल के तेल में 'आम दोष' (कच्चापन) होता है जो रोम छिद्रों को ब्लॉक कर सकता है। हमारी विधि में तेल को पहले जड़ी-बूटियों के साथ संस्कारित (Purified) किया जाता है, जिससे इसकी त्वचा में समाने की क्षमता (Absorption Rate) 100 गुना बढ़ जाती है।
* क्षीर पाक (दूध का प्रयोग): इस तेल में शतावरी रस और दूध का प्रयोग किया गया है। आयुर्वेद में दूध को 'जीवनिये' माना गया है, जो वात के रूखेपन (Dryness) को खत्म कर नसों को 'स्नेहन' (Lubrication) देता है।
🌿 2. घटक द्रव्यों (Ingredients) की वैज्ञानिक और शास्त्रीय मीमांसा
इस तेल में 50 से अधिक दुर्लभ जड़ी-बूटियों का समावेश है। आइए प्रमुख घटकों को वेदों की दृष्टि से देखें:
अ. दशमूल (The 10 Roots of Vitality)
(बेल छाल, सोना पाठा, गंभारी, पाटला, अरणी, शालपर्णी, पृश्निपर्णी, बृहती, कंटकारी, गोखरू)
* शास्त्र मत: चरक संहिता में 'दशमूल' को "त्रिदोष शामक" और विशेष रूप से "शोथहर" (सूजन नाशक) कहा गया है।
* कार्य: यह न केवल दर्द खींचता है, बल्कि ऑस्टियोआर्थराइटिस (Osteoarthritis) में घिसी हुई कार्टिलेज के आसपास की सूजन को कम करता है।
ब. अष्टवर्ग के प्रतिनिधि (Rare Vitality Herbs)
(जीव, ऋषभक, मेदा, महामेदा, काकोली, क्षीर काकोली, ऋद्धि, वृद्धि)
* महत्व: ये जड़ी-बूटियां अब अत्यंत दुर्लभ हैं और हिमालय की ऊंचाइयों पर पाई जाती हैं। प्राचीन काल में इनका उपयोग राजा-महाराजा 'कायाकल्प' (Rejuvenation) के लिए करते थे।
* कार्य: ये मांसपेशियों (Muscles) और स्नायु (Ligaments) को टूटने से बचाती हैं और उन्हें पुनर्जीवित (Regenerate) करती हैं।
स. शक्तिशाली वात नाशक (The Pain Destroyers)
* रास्ना (Rasna): आयुर्वेद में कहा गया है — "रास्ना वातहराणाम" (रास्ना सभी वात रोगों की सर्वश्रेष्ठ औषधि है)। यह सायटिका और कमर दर्द का काल है।
* अश्वगंधा (Ashwagandha): इसका अर्थ है 'घोड़े जैसी गंध और ताकत'। यह नसों (Nervous System) को ताकत देता है, जिससे सुन्नपन (Numbness) और कंपवात (Parkinson's symptoms) में लाभ मिलता है।
* बला (Bala): जैसा नाम, वैसा काम। यह शरीर को 'बल' प्रदान करता है और लकवा (Paralysis) जैसे गंभीर रोगों में मांसपेशियों में जान फूंकने का काम करता है।
द. सुगंध और संचारक (Aromatics & Bio-enhancers)
* कर्पूर, केसर, अगर और जटामांसी: ये केवल सुगंध नहीं देते। ये 'योगीवाही' हैं, यानी ये तेल को त्वचा की 7 परतों के भीतर ले जाकर मज्जा धातु (Bone Marrow) तक औषधि का प्रभाव पहुंचाते हैं।
🧘‍♂️ 3. यह तेल कैसे काम करता है? (Mechanism of Action)
जब आप आयुष्मान महानारायण तेल की मालिश करते हैं, तो यह केवल त्वचा पर नहीं रहता।
* अवशोषण: यह त्वचा के रोम कूपों (Bhrajaka Pitta) द्वारा सोखा जाता है।
* वायु शमन: यह बढ़ी हुई 'वायु' (जो दर्द का मुख्य कारण है) को शांत करता है।
* स्नेहन: यह जोड़ों के बीच सूख चुके द्रव्य (Synovial Fluid) की कमी को पूरा करने में मदद करता है, जिससे 'कट-कट' की आवाज और घर्षण बंद होता है।
🏆 4. लाभकारी का वादा (Our Commitment)
लाभकारी के निर्माता निर्देशक प्रवीण पंडित जी का मानना है कि "शुद्धता ही सबसे बड़ी सेवा है।"
लाभकारी हाइब्रिड कॉमर्स पर उपलब्ध यह तेल सिंथेटिक मिनरल ऑयल से मुक्त है। यह वही तेल है जिसका वर्णन महाभारत काल में योद्धाओं के घाव और थकान मिटाने के लिए किया जाता था।
किसके लिए लाभकारी?
✅ घुटनों और जोड़ों के पुराने दर्द के लिए।
✅ लकवा (Paralysis) और फालिज के रोगियों के लिए।
✅ जिम जाने वाले युवाओं की Muscle Recovery के लिए।
✅ कंप्यूटर पर काम करने वालों की गर्दन (Cervical) दर्द के लिए।
🛒 स्वास्थ्य ही असली धन है। आज ही आर्डर करें!
कीमत: ₹350 (100 ML)
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📜 महायोगराज गुग्गुल: वेदों का विज्ञान और ऋषियों का प्रसाद​प्राचीन संहिताओं से आधुनिक 'लाभकारी' जीवन तक की यात्रा​आयुर्वे...
31/01/2026

📜 महायोगराज गुग्गुल: वेदों का विज्ञान और ऋषियों का प्रसाद
​प्राचीन संहिताओं से आधुनिक 'लाभकारी' जीवन तक की यात्रा
​आयुर्वेद में 'वात व्याधि' (Neurological & Joint Disorders) के लिए यदि कोई औषधि "महाराजा" कहलाने योग्य है, तो वह निस्संदेह महायोगराज गुग्गुल है। 'आयुष्मान' (Aayushmaan) ब्रांड के तहत हम उसी शास्त्रीय शुद्धता को आपके घर तक ला रहे हैं।
​आइये, इस दिव्य औषधि के गर्भ में उतरते हैं और जानते हैं कि ऋषियों ने इसमें किन-किन शक्तियों का समावेश किया है।
​🏛️ 1. शास्त्र सम्मत प्रमाण (The Ancient Reference)
​महायोगराज गुग्गुल का मूल वर्णन हमें 'शारंगधर संहिता' (मध्यम खण्ड) और 'भैषज्य रत्नावली' में मिलता है।
साधारण योगराज गुग्गुल और महायोगराज गुग्गुल में आकाश-पाताल का अंतर है। जहाँ योगराज गुग्गुल केवल जड़ी-बूटियों का मिश्रण है, वहीं 'महा' (Maha) शब्द इसे तब मिलता है जब इसमें स्वर्ण, रौप्य, लौह, अभ्रक जैसी दिव्य भस्में (Calcined Minerals) मिलाई जाती हैं। यह इसे केवल दर्द निवारक नहीं, बल्कि एक 'रसायन' (Rejuvenator) बनाता है।
​🌿 2. घटक द्रव्य विश्लेषण (Deep Ingredient Analysis)
​Aayushmaan Mahayograj Guggul में 30 से अधिक दुर्लभ तत्व हैं। प्राचीन ग्रंथों के अनुसार हम इन्हें 4 शक्तिशाली श्रेणियों (Matrix) में बांटकर समझ सकते हैं:
​A. मुख्य आधार (The Base): गुग्गुल (Commiphora Mukul)
​यह इस योग का 'हीरो' है। आयुर्वेद में गुग्गुल को 'योगवाही' कहा गया है।
​कार्य: योगवाही का अर्थ है वह द्रव्य जो अन्य औषधियों को अपने साथ लेकर शरीर के सूक्ष्मतम स्रोतों (Deep Tissues) तक पहुंचाता है। यह वात और कफ का सबसे बड़ा शत्रु है। यह जोड़ों के बीच जमा 'आम' (Toxins) को खुरच कर बाहर निकालता है।
​B. दीपन-पाचन कॉम्प्लेक्स (The Metabolic Fire Starters)
​प्राचीन सिद्धांत: "सर्वे रोगाः अपि मंदाग्नौ" (सभी रोग मंद अग्नि के कारण होते हैं)।
इसलिए इसमें सुंठी (सौंठ), पिप्पली, पिप्पली मूल, चव्य, चित्रक मूल, हींग, अजवाइन, जीरा, काला जीरा और नागरमोथा शामिल हैं।
​वैज्ञानिक कार्य: ये जड़ी-बूटियाँ आपकी जठराग्नि (Metabolism) को प्रज्वलित करती हैं। जब तक पेट में भोजन सही से नहीं पचेगा, तब तक जोड़ों का दर्द ठीक नहीं हो सकता।
​C. भस्म शक्ति (The Nano-Medicine of Ancient India)
​यही वह श्रेणी है जो इसे साधारण गुग्गुल से 'महायोगराज' बनाती है। इसमें शामिल हैं:
​वंग भस्म (Tin Calx): नसों की कमजोरी और जननांगों (Reproductive organs) को शक्ति देती है।
​लौह भस्म (Iron Calx): रक्ताल्पता (Anemia) दूर कर शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ाती है।
​अभ्रक भस्म (Mica Calx): यह 'सहस्त्रपुटी' होती है। यह कोशिकाओं (Cells) को पुनर्जीवित (Regenerate) करने की क्षमता रखती है। जीर्ण रोगों (Chronic diseases) में यह अमृत समान है।
​रौप्य (रजत) भस्म (Silver Calx): वात वाहिनी नाड़ियों (Nerves) को ठंडक और ताकत देती है।
​रस सिन्दूर (Mercury Sulphide compound): यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immunity) को बूस्ट करता है और दवा को शरीर में तेजी से फैलाता है।
​मंडूर भस्म: लीवर को डिटॉक्स करती है।
​D. वात शामक एवं डिटॉक्स समूह (The Vata Pacifiers)
​त्रिफला (हरड़, बहेड़ा, आंवला): शरीर का शोधन (Detox) करता है।
​दशमूल: दस जड़ों का यह समूह वात दोष को शांत करने के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
​गिलोय (Amrita): यह यूरिक एसिड (Uric Acid) को कम करती है, जो गाउट (Gout) का मुख्य कारण है।
​रास्ना, गोक्षुर, बच: सूजन और जकड़न को कम करते हैं।
​⚙️ 3. कार्य प्रणाली (Mode of Action)
​ऋषि वाग्भट और चरक के अनुसार, वात व्याधि (जैसे गठिया/Arthritis) का मुख्य कारण है- वायु का मार्ग अवरुद्ध होना।
​भेदन (Pe*******on): गुग्गुल और भस्में शरीर के सूक्ष्म चैनलों (Srotas) में घुसती हैं।
​आम पाचन (Detoxification): पाचन औषधियां विषाक्त पदार्थों (Toxins) को जलाती हैं।
​पोषण (Nourishment): भस्में हड्डियों (Asthi Dhatu) और मज्जा (Majja Dhatu) को पोषण देकर उन्हें वज्र जैसा मजबूत बनाती हैं।
​✨ निष्कर्ष: लाभकारी का वचन
​बाजार में मिलने वाले सामान्य गुग्गुल में अक्सर भस्मों की मात्रा कम कर दी जाती है क्योंकि वे महंगी होती हैं। लेकिन Labhkari.com पर उपलब्ध Aayushmaan Mahayograj Guggul में शास्त्रों में लिखित हर भस्म और जड़ी-बूटी का सटीक संतुलन है।
​यह केवल घुटनों के दर्द की दवा नहीं है; यह फाइब्रोमायल्जिया (Fibromyalgia), पैरालिसिस (Paralysis), साइटिका (Sciatica) और यहाँ तक कि बांझपन (Infertility) में भी सहायक औषधि (Co-prescription) के रूप में कार्य करती है।
​"प्राचीन ज्ञान, आधुनिक विज्ञान, यही है लाभकारी की पहचान।"
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29/01/2026
🇮🇳 गणतंत्र दिवस की गौरवमयी बेला पर: आइए, अपनी जड़ों से जुड़ें और भारत को बनाएँ 'आत्मनिर्भर' व 'लाभकारी'! 🌿💻आज जब हमारा त...
26/01/2026

🇮🇳 गणतंत्र दिवस की गौरवमयी बेला पर: आइए, अपनी जड़ों से जुड़ें और भारत को बनाएँ 'आत्मनिर्भर' व 'लाभकारी'! 🌿💻
आज जब हमारा तिरंगा आसमान में शान से लहरा रहा है, तो यह केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि एक संकल्प है। 75+ वर्षों की इस यात्रा में हमने दुनिया को अपनी ताकत दिखाई है। लेकिन सच्चा गणतंत्र तब सार्थक होगा जब भारत न केवल सीमाओं पर सुरक्षित हो, बल्कि आर्थिक रूप से भी स्वतंत्र और सशक्त हो।
आज का दिन उस 'स्वदेशी' की लौ को फिर से जलाने का है, जिसने कभी स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई थी। आज वही लौ 'वोकल फॉर लोकल' बनकर हमारे और आपके बीच जल रही है।
हजारों वर्षों से भारत 'सोने की चिड़िया' और 'विश्वगुरु' रहा है। क्यों? क्योंकि हमारी जीवनशैली प्रकृति के अनुकूल थी। आयुर्वेद केवल चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने का विज्ञान है।
हमारे ऋषियों ने जो ज्ञान दिया, वह आज पूरी दुनिया अपना रही है। चाहे वह योग हो, प्राकृतिक खेती हो, या हथकरघा उद्योग—हमारी सांस्कृतिक विरासत में ही स्वास्थ्य और समृद्धि के बीज छिपे हैं। Labhkari.com उसी प्राचीन ज्ञान को आधुनिक भारत की 'लाभकारी' सोच के साथ पुनर्जीवित कर रहा है।
हम 21वीं सदी के भारत हैं। हमें अपनी 'जड़ों' (Roots) को नहीं भूलना है, लेकिन हमें अपनी 'उड़ान' (Wings) को भी नहीं रोकना है।
Labhkari.com इसी विजन का परिणाम है। यह एक हाइब्रिड कॉमर्स प्लेटफॉर्म है जो 'डिजिटल इंडिया' की शक्ति का उपयोग कर हमारे स्थानीय व्यापारियों, कारीगरों और स्वदेशी निर्माताओं को एक ग्लोबल मंच प्रदान करता है।
हमारा मिशन क्या है?
🌿 आयुर्वेद और वेलनेस: शुद्ध, सात्विक और स्वदेशी उत्पादों को घर-घर पहुँचाना।
🤝 वोकल फॉर लोकल: आपके द्वारा खरीदा गया हर एक प्रोडक्ट सीधे किसी भारतीय परिवार की मुस्कान का कारण बनता है।
💻 तकनीकी क्रांति: छोटे व्यापारियों को ऑनलाइन लाकर उन्हें बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों के मुकाबले खड़ा करना।
इस गणतंत्र दिवस, केवल ध्वजारोहण तक सीमित न रहें। अपनी खरीददारी की आदतों में देशभक्ति लाएं। जब आप विदेशी ब्रांड्स की चमक के बजाय स्वदेशी की शुद्धता चुनते हैं, तो देश का पैसा देश में रहता है।
आइये, Labhkari.com के साथ जुड़कर आत्मनिर्भर भारत की नींव को मजबूत करें। क्योंकि जब व्यापार स्वदेशी होगा, तभी परिणाम 'लाभकारी' होगा!
✨ "देश की मिट्टी से, देश के लोगों के लिए।" ✨
सभी देशवासियों को Labhkari.com परिवार की ओर से 77वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ! जय हिन्द! 🇮🇳
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"संविधान ने हमें अधिकार दिए, और हमारे कर्म उन्हें अर्थ देते हैं।"आज के इस पावन दिन पर, Labhkari.com पूरे देश के परिवारों...
26/01/2026

"संविधान ने हमें अधिकार दिए, और हमारे कर्म उन्हें अर्थ देते हैं।"
आज के इस पावन दिन पर, Labhkari.com पूरे देश के परिवारों, किसानों, उद्यमियों और हमारे हर साथी बिज़नेस पार्टनर को नमन करता है। 26 जनवरी सिर्फ एक तिथि नहीं — यह हमारे संवैधानिक आदर्शों का उत्सव है: समानता, स्वतंत्रता, सामाजिक न्याय और राष्ट्र के प्रति अटूट ज़िम्मेदारी।
हमारा विश्वास है कि सच्ची प्रगति तभी संभव है जब परंपरा और आधुनिकता साथ मिलकर काम करें — और यही Labhkari का मिशन है। हम परंपरागत भारतीय मूल्य (किसान, परिवार, आयुर्वेदिक ज्ञान) को आधुनिक तकनीक और हाइब्रिड कॉमर्स के साथ जोड़कर हर घर तक आत्मनिर्भरता और सम्मान पहुंचाना चाहते हैं।

संविधान ने हमें न केवल अधिकार दिए, बल्कि कर्तव्य भी सिखाया — समाज के लिए योगदान, ईमानदारी और पारदर्शिता।
हर नागरिक, चाहे वह खेतों में काम करने वाला किसान हो, या छोटे शहर का उद्यमी, राष्ट्र की उन्नति का सहायक है।
Labhkari के माध्यम से हम ऐसे व्यवसायिक अवसर देते हैं जो बिना प्रारम्भिक लागत के लोगों को जोड़ते हैं — ताकि हर सक्षम हाथ अपने परिवार और समाज के लिए स्थायी आय और गरिमा ला सके।

हम अपने सभी साथी व्यवसायियों, ग्राहक और शुभचिंतकों से यह वादा करते हैं:
पारदर्शिता, गुणात्मकता और समुदाय-केंद्रित विकास को सर्वोपरि रखना।
पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक टेक्नोलॉजी का समन्वय कर अधिक से अधिक परिवारों तक सशक्त अवसर पहुँचाना।
किसानों और छोटे निर्माताओं को सीधा मंच देना — ताकि उनकी मेहनत का पूरा फल उन्हें मिले।

लाभकारी (Labhkari.com) की ओर से:
आज हम उस संविधान को सलाम करते हैं जिसने हमें अधिकार दिए और मार्ग दिखाया। आइए—एक साथ — परंपरा की ताकत और नए युग की तकनीक का संगम बनाकर रोजगार, सम्मान और आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखें।
हमारे साथ जुड़ें, अपने परिवार और समुदाय की शक्ति बनें, और चलें उस रास्ते पर जहाँ हर हाथ को काम, हर मन को गर्व और हर घर को समृद्धि मिले।
गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ। जय हिन्द। 🇮🇳

#गणतंत्र_दिवस
#लाभकारी

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24/01/2026

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'Aayushmaan Arshnashi' साधारण चूर्ण या गोली नहीं है। बोतल पर स्पष्ट लिखा है—(Arsh Kuthar Ras B.R.)। आयुर्वेद में 'B.R.' ...
24/01/2026

'Aayushmaan Arshnashi' साधारण चूर्ण या गोली नहीं है। बोतल पर स्पष्ट लिखा है—(Arsh Kuthar Ras B.R.)। आयुर्वेद में 'B.R.' का अर्थ है 'भैषज्य रत्नावली' (Bhaishajya Ratnavali), जो औषधियों का एक प्रामाणिक प्राचीन ग्रंथ है। इसका नाम ही 'अर्श कुठार' है, जिसका शाब्दिक अर्थ है—"बवासीर (अर्श) रूपी वृक्ष को जड़ से काटने वाली कुल्हाड़ी (कुठार)।"
​आइये, हमारे प्राचीन ऋषियों (जैसे महर्षि चरक, सुश्रुत और वाग्भट्ट) के ज्ञान के प्रकाश में इसके एक-एक घटक (Ingredient) का 'पोस्टमार्टम' करते हैं:
​🌿 1. रस औषधियाँ (खनिज और भस्म) – शक्ति का आधार
​यह उत्पाद 'रसशास्त्र' (Alchemy) के सिद्धांतों पर बना है, जहाँ धातुओं को शोधित कर 'भस्म' बनाया जाता है ताकि वे शरीर में तुरंत घुल जाएं।
​शुद्ध पारद (Purified Mercury) और शुद्ध गंधक (Purified Sulphur):
​शास्त्रीय महत्व: जब इन दोनों को मिलाया जाता है, तो 'कज्जली' बनती है। आयुर्वेद के अनुसार, कज्जली 'योगवाही' होती है, यानी यह जिस भी जड़ी-बूटी के साथ मिलती है, उसकी शक्ति को 100 गुना बढ़ा देती है और उसे कोशिकाओं (Cells) के भीतर तक ले जाती है।
​लौह भस्म (Iron Bhasma):
​ऋषि ज्ञान: बवासीर में अक्सर खून गिरता है जिससे रोगी को 'पांडु' (Anemia) हो जाता है। लौह भस्म न केवल खून की कमी को पूरा करती है, बल्कि आंतों (Intestines) को बल प्रदान करती है (Balya)।
​अभ्रक भस्म (Mica Ash):
​शास्त्रीय महत्व: यह एक शक्तिशाली 'रसायन' है। यह डैमेज हुए ऊतकों (Tissues) की मरम्मत (Repair) करती है। पुरानी से पुरानी बवासीर में जो नसों में कमजोरी आ जाती है, अभ्रक भस्म उसे पुनर्जीवित करती है।
​🔥 2. दीपन-पाचन वर्ग (पाचन अग्नि को जगाने वाले)
​महर्षि चरक कहते हैं: "रोगाः सर्वे अपि मन्देग्नौ" (सभी रोग पेट की अग्नि मंद पड़ने से होते हैं)। बवासीर का मुख्य कारण कब्ज और खराब पाचन है।
​चित्रक (Plumbago zeylanica):
​यह आयुर्वेद की सबसे शक्तिशाली 'अग्नि-दीपक' जड़ी-बूटी है। यह आंतों में जमे हुए पुराने मल (आम) को जलाकर बाहर निकालती है और अर्श (Piles) के मस्सों को सुखाने में मदद करती है।
​मरिच (Kali Mirch/Black Pepper):
​यह 'स्रोत शोधक' है। यानी यह शरीर की बारीक से बारीक नसों (Micro-channels) को साफ करती है, ताकि दवा का असर मस्सों तक पहुँच सके।
​बेल (Bilva):
​बेल फल आंतों के लिए 'ग्राही' होता है। यह मल को बांधता है लेकिन उसे कठोर नहीं होने देता, जिससे मल त्यागते समय दर्द नहीं होता।
​⚡ 3. तीक्ष्ण और क्षारीय द्रव्य (मस्सों को गलाने वाले)
​यह इस फॉर्मूले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है जो इसे सर्जरी का विकल्प बनाता है।
​स्नुही क्षीर (Latex of Euphorbia neriifolia):
​प्राचीन रहस्य: सुश्रुत संहिता में 'क्षार सूत्र' (Kshara Sutra) चिकित्सा का वर्णन है, जिसमें स्नुही के दूध का प्रयोग मस्सों को काटने/गलाने के लिए किया जाता है। Arshnashi में इस दूध की भावना (Bhavana - processing) दी गई है। यह बिना सर्जरी के मस्सों को सिकोड़ने (Shrink) का काम करता है।
​टंकण भस्म (Borax) और यवक्षार (Barley Alkali):
​ये दोनों 'क्षारीय' (Alkaline) प्रकृति के होते हैं। बवासीर के मस्से अम्लीय (Acidic) वातावरण में पनपते हैं। क्षार उस एसिड को न्यूट्रल करता है और मस्सों का आकार छोटा करता है।
​शुद्ध वत्सनाभ (Purified Aconitum Ferox):
​आयुर्वेद में इसे 'महारस' कहा गया है। शुद्ध होने के बाद यह एक अद्भुत Painkiller (वेदना-हर) बन जाता है। बवासीर की असहनीय पीड़ा और सूजन को यह तुरंत शांत करता है।
​🐂 4. भावना द्रव्य (Processing Agent)
​गोमूत्र (Cow Urine):
​इस दवा को बनाने की प्रक्रिया में जड़ी-बूटियों को गोमूत्र में घोटा जाता है। प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, गोमूत्र शरीर से 'कफ' और 'वात' दोष को बाहर निकालता है और आंतों में हुए इन्फेक्शन या कृमि (Worms) को खत्म करता है।
​📜 निष्कर्ष: यह कैसे काम करता है? (Mode of Action)
​Arshnashi (अर्श कुठार रस) त्रिदोष सिद्धांत पर काम करता है:
​वात शमन: दर्द और कब्ज को खत्म करता है।
​पित्त संतुलन: जलन और रक्तस्राव (Bleeding) को रोकता है।
​कफ छेदन: स्नुही और गोमूत्र की मदद से बढ़े हुए मांस (मस्सों) को काटकर/गलाकर छोटा करता है।
​Labhkari Aayushmaan ARSHNASHI:
बाजार में मिलने वाले सामान्य चूर्ण सिर्फ पेट साफ करते हैं, लेकिन Aayushmaan Arshnashi एक 'शास्त्रीय औषधि' है जो बीमारी की जड़ (Root Cause) पर प्रहार करती है। यह हमारे 'लाभकारी हाइब्रिड कॉमर्स' के उस वादे को पूरा करता है जहाँ हम अपने ग्राहकों को केवल बेस्ट और प्रामाणिक उत्पाद ही देते हैं।

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बाजार में मिलने वाले चूर्ण सिर्फ पेट साफ़ करते हैं, लेकिन Aayushmaan Arshnashi (अर्श कुठार रस) मस्सों को सुखाता है और पाचन तंत्र को नया जीवन देता है।
यह हमारे ऋषियों का हज़ारों साल पुराना विज्ञान है, जो अब Labhkari के भरोसे के साथ आपके पास है।
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ज्ञान और तकनीक का संगम ही सफलता की कुंजी है। बसंत पंचमी की शुभकामनाएँ🎉  प्रिय लाभकारी लीडर्स, ​आज बसंत पंचमी के पावन अवस...
23/01/2026

ज्ञान और तकनीक का संगम ही सफलता की कुंजी है। बसंत पंचमी की शुभकामनाएँ🎉 प्रिय लाभकारी लीडर्स, ​आज बसंत पंचमी के पावन अवसर पर, हम ज्ञान की देवी माँ सरस्वती को नमन करते हैं। एक लीडर के रूप में, हमारा सबसे बड़ा हथियार 'सही ज्ञान' और 'सही दिशा' है।
​लाभकारी हाइब्रिड कॉमर्स में, हम सिर्फ प्रोडक्ट्स नहीं पहुँचा रहे, बल्कि हम एक 'स्मार्ट फिजीकल (Phygital)' क्रांति का नेतृत्व कर रहे हैं। आज के दिन संकल्प लें कि हम अपने बेहतरीन आयुर्वेदिक, एग्रीकल्चर और होम केयर प्रोडक्ट्स के ज्ञान को जन-जन तक पहुँचाएंगे।
​जैसे वसंत प्रकृति में नए रंग भरता है, आइए हम अपनी मेहनत और स्मार्ट रणनीतियों से अपने बिजनेस और अपनी टीम के जीवन में सफलता के नए रंग भरें।
​सीखते रहें, सिखाते रहें और आगे बढ़ते रहें।
​लाभकारी परिवार की तरफ से आपको बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएँ!

🌿 Aayushmaan Medo Mukta: प्राचीन ऋषियों का 'मेदोहर' विज्ञान"स्थौल्यं कार्श्यं वरं स्थौल्यं, न हि स्थूलस्य भेषजम्।"(अर्था...
21/01/2026

🌿 Aayushmaan Medo Mukta: प्राचीन ऋषियों का 'मेदोहर' विज्ञान
"स्थौल्यं कार्श्यं वरं स्थौल्यं, न हि स्थूलस्य भेषजम्।"
(अर्थात: अत्यधिक मोटापे से तो पतला होना बेहतर है, क्योंकि मोटापे को ठीक करना कठिन है - लेकिन असंभव नहीं, यदि सही जड़ी-बूटियों का प्रयोग हो।)
Aayushmaan Medo Mukta आयुर्वेद के प्रसिद्ध शास्त्रीय योग "नवक गुग्गुलु" (Navaka Guggulu) के सिद्धांतों से प्रेरित है, जिसका वर्णन 'भैषज्य रत्नावली' और 'चक्रदत्त' जैसे प्रामाणिक ग्रंथों के 'मेदोरोग अधिकार' (मोटापा उपचार अध्याय) में मिलता है। यह फॉर्मूलेशन शरीर की 'जठराग्नि' (Digestive Fire) को प्रज्वलित कर जिद्दी चर्बी (मेद धातु) को पिघलाने का कार्य करता है।

📜 1. मुख्य घटक और उनका शास्त्रीय विश्लेषण (Ingredients & Ancient Wisdom)
इस उत्पाद का हर एक घटक एक विशेष उद्देश्य (Prayojan) के साथ चुना गया है। इसे हम 'त्रिदोष सिद्धांत' के माध्यम से समझते हैं:

A. महाौषधि: शुद्ध गुग्गुलु (Shudh Guggulu - 249.30 mg)
शास्त्रीय नाम: Commiphora mukul
आयुर्वेद महत्व: 'सुश्रुत संहिता' में गुग्गुलु को सबसे शक्तिशाली 'लेखनीय' (Scraping agent) द्रव्य माना गया है। 'लेखनीय' का अर्थ है वह जो शरीर के अंदर जमी हुई अतिरिक्त चर्बी और गन्दगी को खुरच कर बाहर निकाल दे।
कार्य: यह मेद (Fat) और कफ को कम करता है और धमनियों (Arteries) को साफ करता है।

B. त्रिकटु (Trikatu - The Metabolic Igniter)
(सोंठ, काली मिर्च, पिप्पली - 27.7 mg प्रत्येक)
ऋषि ज्ञान: महर्षि चरक इसे 'दीपन-पाचन' कहते हैं।
कार्य: यह शरीर की 'अग्नि' को बढ़ाता है। आयुर्वेद कहता है, "अग्नि मांद्य ही सभी रोगों की जड़ है।" त्रिकटु मेटाबॉलिज्म (Metabolism) को इतना तेज कर देता है कि शरीर में 'आम' (Toxins) जमा नहीं हो पाता और पहले से जमा फैट बर्न होने लगता है।
योगवाही गुण: यह अन्य औषधियों को शरीर की कोशिकाओं (Cells) तक तेज़ी से पहुँचाने का काम करता है।

C. त्रिफला (Triphala - The Detoxifier)
(हरीतकी, विभितकी, आमलकी - 27.7 mg प्रत्येक)
प्राचीन संदर्भ: इसे 'रसायन' कहा गया है जो शरीर का कायाकल्प करता है।
कार्य: वजन घटाते समय शरीर में जो विषैले पदार्थ (Free radicals) निकलते हैं, त्रिफला उन्हें बाहर निकालता है (Detox)। यह आँतों की सफाई (Colon cleanse) करता है, जिससे पाचन तंत्र नया जैसा हो जाता है।

D. चित्रकमूल और वायविडंग (The Fat Burners)
(27.7 mg प्रत्येक)
चित्रक (Chitrak): इसका नाम ही 'अग्नि' है। यह लिवर को सक्रिय करता है और फैट मेटाबॉलिज्म को सुधरता है।
विडंग (Vidang): सुश्रुत संहिता में इसे कृमिघ्न और मेदोहर बताया गया है। यह पेट के कीड़ों को मारता है और 'झूठी भूख' (False hunger/Cravings) को नियंत्रित करता है।

E. नागरमोथा (Mustak)
(27.7 mg)
कार्य: यह शरीर से अतिरिक्त जल (Water Retention) को सोखता है। अक्सर मोटापे का कारण सिर्फ फैट नहीं, बल्कि शरीर में जमा गंदा पानी (कफ द्रव) भी होता है, जिसे यह जड़ी-बूटी सुखा देती है।

⚙️ 2. यह शरीर में काम कैसे करता है? (Mode of Action - Samprapti Vighatan)
आयुर्वेद के अनुसार, मोटापा (Sthaulya) तब होता है जब शरीर में 'मेद धातु' (Adipose Tissue) तो बढ़ती है, लेकिन बाकी धातुएं (हड्डी, मज्जा, शुक्र) कुपोषित रह जाती हैं। इसका कारण है 'स्रोतोरोध' (Blocked Channels)।
Medo Mukta की 3-चरणीय प्रक्रिया:
अग्नि दीपन (Ignition): त्रिकटु और चित्रक आपकी पाचन अग्नि को तेज करते हैं।
आम पाचन (Detox): यह शरीर में जमे हुए कच्चे भोजन (Toxins) को पचाता है।
स्रोतोशोधन और लेखन (Clearing & Scraping): गुग्गुलु और त्रिफला शरीर के सूक्ष्म चैनलों (Micro-channels) को खोलते हैं, जमी हुई चर्बी को खुरचते हैं और उसे ऊर्जा में बदल देते हैं।

🌟 3. लाभकारी (Why Aayushmaan Medo Mukta?)
बाज़ार में कई फैट बर्नर हैं, लेकिन Aayushmaan Medo Mukta खास क्यों है?
संतुलन (Balance): एलोपैथिक दवाएं भूख मारती हैं या मेटाबॉलिज्म को कृत्रिम रूप से बढ़ाती हैं जिससे घबराहट होती है। मेदो मुक्ता प्राकृतिक 'अग्नि' को संतुलित करती है।
शुद्धता का प्रमाण: इसमें 'शुद्ध गुग्गुलु' का उपयोग किया गया है। आयुर्वेद में यदि गुग्गुलु का शोधन (Purification) सही न हो, तो वह नुकसान कर सकता है। Aayushmaan ब्रांड सुनिश्चित करता है कि गुग्गुलु पूर्णतः शोधित और सुरक्षित है।
कोई साइड इफेक्ट नहीं: यह न केवल वजन कम करता है, बल्कि कोलेस्ट्रॉल (Lipid Profile) को भी ठीक करता है और जोड़ों के दर्द (जो अक्सर मोटापे के कारण होता है) में भी राहत देता है।

📝 4. सेवन विधि (ऋषि निर्देशानुसार)
मात्रा: 1-2 गोली, दिन में दो बार।
अनुपान (Vehicle): गुनगुने पानी (Lukewarm Water) के साथ।
विशेष टिप: यदि इसे गुनगुने पानी में थोड़ा शहद मिलाकर लिया जाए, तो इसका 'कफ-नाशक' प्रभाव दोगुना हो जाता है (इसे 'लेखन बस्ती' का सिद्धांत कहा जाता है)।

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