Devdaksh Astrology

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हमारे अनुभवी ज्योतिषाचार्य ग्रहों की चाल और कुंडली के विश्लेषण द्वारा आपके भविष्य की दिशा दिखाते हैं। From our beginnings as a free online astrologer consultation platform to launching our premium consultations in 2020, we’ve tried to stay true to our core beliefe PURE VEDIC KNOWLEDGE and to deliver an exceptional experience for our subscribers. We truly believe in the transformative power of Vedic Astrology and Vastu and their ability to simplify human life, inspire people everywhere. At Devdaksh Astrology, we're excited to start a dialogue, learn about your concerns and solve the smallest to the biggest problem in the human life. Today we provide the most authentic astrological remedies in the line of service.

23/02/2026
जब आपकी कुंडली में सूर्य और बुध एक साथ होते हैं, तब बनता है बुध आदित्य योग। बुध आदित्य योग में जातक अत्यंत साहसी, निडर त...
18/02/2026

जब आपकी कुंडली में सूर्य और बुध एक साथ होते हैं, तब बनता है बुध आदित्य योग। बुध आदित्य योग में जातक अत्यंत साहसी, निडर तथा वाकपटु होता है। सूर्य कारक होते हैं साहस के, सत्ता के लोगों पर अपना प्रभाव छोड़ने के तथा लोगों के बीच अपनी इमेज बनाने के लिए। सूर्य की स्थिति बहुत अधिक आवश्यक होती है कि सूर्य आपकी कुंडली में अच्छी स्थिति में हो। बुध कारक होते हैं आपकी वाणी के, आपकी बुद्धि के, आपका विवेक के और आपके बोलने के तरीके के। समय-समय पर आप चतुराई से अपने कार्य को आगे बढ़ा सके, यह सब बिना बुध के संभव नहीं हो सकता है। यदि बुध जातक की कुंडली में अच्छे हो तो जातक एक अच्छा सलाहकार, एक अच्छा तर्कवादी तथा साथ ही साथ एक अच्छा सहायक भी सिद्ध होता है। क्योंकि बुध राजकुमार है, राजकुमार होने के कारण राजा नहीं, राजा का मुख्य सहायक। जब यह दोनों ग्रह एक साथ आते हैं तब दोनों ग्रहों के गुणधर्म एक साथ होने के कारण इसे बुध आदित्य योग कहते हैं। बुध आदित्य योग मुख्य रूप से सूर्य और बुध की राशियों में बनता है। अन्य राशियों में इसका प्रभाव उतना अधिक नहीं होता है जितना सूर्य और बुध की राशियों में होता है। सबसे अधिक प्रभाव इसका कन्या राशि में होता है क्योंकि कन्या बुध की उच्च की राशि है और सूर्य के दूसरे भाव में पड़ती है, जहां पर यह योग बहुत अधिक फलदाई होता है।




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जब राहु और शनि एक साथ होते हैं तब कुंडली में नन्दी योग बनता है, जिसे हम शापित दोष भी कह सकते हैं। शनि कर्म हैं जो श्रम, ...
05/02/2026

जब राहु और शनि एक साथ होते हैं तब कुंडली में नन्दी योग बनता है, जिसे हम शापित दोष भी कह सकते हैं। शनि कर्म हैं जो श्रम, परिश्रम और मेहनत परिश्रमी व्यक्तियों से जुड़े होते हैं। जो अपने परिश्रम के बल पर सफलता अर्जित करते हैं और निरंतर परिश्रम करते रहते हैं। शनि लोहा, जमीन के अंदर से निकली हुई चीजों और खनिज के कारक होते हैं। राहु आसानी से सफलता देने वाले और बहुत अधिक मेहनत पर भी असफलता प्रदान करने वाले ग्रह होते हैं और राहु नेगेटिव एनर्जी के भी कारक होते हैं। जब शनि और राहु साथ होते हैं तब ऐसे जातक मेहनत तो करते हैं किंतु उनकी मेहनत कई बार गलत दिशा में होती है। कई बार कुछ समय तक वह एक ही क्षेत्र में बहुत समय तक मेहनत करके परिश्रम करके सफलता अर्जित करने का प्रयास करते हैं किंतु बीच में ही छोड़ देते हैं। जिसके कारण फिर से उन्हें प्रारंभ से ही शुरुआत करनी पड़ती है। जिसके कारण लोग असफल होते हैं। राहु अर्श से फर्श तक और फर्श से अर्श तक ले जाने वाले ग्रह हैं और जब भी शनि के साथ पहुंचते हैं तो व्यक्ति की मेहनत का मूल्य न के बराबर हो जाता है। उसकी मेहनत कई बार व्यर्थ हो जाती है। 🤔💭👀💫🔥
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S k Pandey










जब राहु और गुरु एक साथ होते हैं, तो गुरु चांडाल दोष बनता है। बृहस्पति जीवन में सफलता, पिता, भाग्य, धर्म और प्रारब्ध को द...
04/02/2026

जब राहु और गुरु एक साथ होते हैं, तो गुरु चांडाल दोष बनता है। बृहस्पति जीवन में सफलता, पिता, भाग्य, धर्म और प्रारब्ध को दर्शाता है। यह हमारे संस्कार और आदरणीय लोगों के साथ हमारे व्यवहार को भी दर्शाता है। जब राहु और बृहस्पति एक साथ होते हैं, तो बृहस्पति पीड़ित होते हैं और जातक को कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इस स्थिति में, जातक के बृहस्पति पीड़ित होने से उनसे संबंधित लोगों के साथ संबंध अच्छे नहीं रह पाते हैं। उनके द्वारा दी गई सलाह भी जातक को अच्छी नहीं लगती है। कई बार, राहु और बृहस्पति के एक साथ होने से जातक को पेट से संबंधित गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
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यदि आपकी जन्म कुंडली में भी आपका वर्ण शूद्र है l
03/02/2026

यदि आपकी जन्म कुंडली में भी आपका वर्ण शूद्र है l

कुंडली में जब राहु और बुध एक साथ होते हैं, तब जड़ दोष बनता है। बुध बुद्धि के कारक हैं और राहु किसी भी चीज को आकस्मिक लाभ...
31/01/2026

कुंडली में जब राहु और बुध एक साथ होते हैं, तब जड़ दोष बनता है। बुध बुद्धि के कारक हैं और राहु किसी भी चीज को आकस्मिक लाभ या हानि प्रदान करने वाले ग्रह हैं। बुध का स्वभाव राजकुमार जैसा होता है, जो बच्चों जैसा होता है। कई बार पुत्र से संबंधित जातक निर्णय लेने में बहुत जल्दबाजी कर जाते हैं, किंतु ऐसे जातक तर्कशील जरूर होते हैं और अपनी बुद्धि और विवेक के द्वारा ही सफलता प्राप्त करते हैं। मगर जब राहु के प्रभाव में बुध होता है, तो कई बार उनके निर्णय ऐसे होते हैं जो कि उनके लिए समस्यादायक हो जाते हैं। बुध और राहु की युति जातक को मानसिक रूप से पीड़ित करती है और उनके हुआ, बहन, भाई, भतीजी, मामा, मौसी के संबंधों में भी मतभेद होता है ।
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 #राहु+ #बुध  #जड़दोषराहु और बुध जब एक साथ होते हैं तो जड़ दोष बनता है। राहु अस्थिरता के कारक हैं और बुद्ध बुद्धि, विवेक...
25/01/2026

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राहु और बुध जब एक साथ होते हैं तो जड़ दोष बनता है। राहु अस्थिरता के कारक हैं और बुद्ध बुद्धि, विवेक, तर्क, कथा और चातुर्य के कारक हैं। जब राहु और बुद्ध एक ही भाव में बैठते हैं, तो उस भाव और बुद्ध की राशियों वाले भावों में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। क्योंकि बुद्ध के साथ जैसे हीरा होता है, बुद्ध पीड़ित होते हैं। जैसे एक छोटे से बच्चे की संगत यदि अच्छे व्यक्तियों से न हो और गलत व्यक्ति से हो जाए, तो उस बच्चे का स्वभाव भी उन्हीं की तरह परिवर्तित होने लगता है। उसी प्रकार बुद्ध जिस ग्रह के साथ बैठते हैं, उस ग्रह के जैसा फल करने लगते हैं। जब बुद्ध और राहु एक साथ बैठते हैं, तो जातक कई बार अपने विवेक से फैसला नहीं ले पाता और शिक्षा, व्यापार, संबंधों में खास तौर से ननिहाल पक्ष में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। कई बार ये संबंध टूट भी जाते हैं। यदि नवमांश में भी दोनों ग्रहों की एक साथ युति हो, तो स्थिति और ज्यादा खराब हो जाती है। राहु के कारण बुद्ध पीड़ित होते हैं और बुद्ध से संबंधित संबंध पीड़ित होते हैं। साथ ही साथ नाक, कान, गले की समस्या भी होती है और माइग्रेन की समस्या भी हो सकती है।












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राहु और चंद्रमा एक साथ एक ही राशि में होने पर ग्रहण दोष बनता है। इससे उत्पन्न जातक मानसिक रोगी, अनिद्रा की समस्या से ग्र...
24/01/2026

राहु और चंद्रमा एक साथ एक ही राशि में होने पर ग्रहण दोष बनता है। इससे उत्पन्न जातक मानसिक रोगी, अनिद्रा की समस्या से ग्रस्त और निर्णय लेने में असमर्थ होते हैं। ऐसे जातकों को समाज में सम्मान नहीं मिलता और उनके मन में हमेशा यह डर बना रहता है कि लोग उनके बारे में बुरा तो नहीं सोच रहे। राहु की नकारात्मक ऊर्जा और चंद्रमा की शांत प्रकृति के कारण जातक को मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। राहु और चंद्रमा की दशाओं में यह समस्या बढ़ जाती है और माता का स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है। #राहु #चंद्रमा #ग्रहणदोष

21/01/2026

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