Saubhagya

Saubhagya Vaidic Consultation

Vaidic Consultation is an ancient Indian Spritual Science which has ability to protect from typical deseases & harmful planetary effects.This is a divine Spritual Power bless to some Saubhagya person by Almighty Lord to serve effected people.Our Org. serve people & help them to cure themselves by easy vaidic treatments.By this spritual powers one can open the door of FORTUNE which lead to SAUBHAGYA

19/05/2020
✨ अक्षयतृतीयाया: हार्दा: शुभकामना:। ✨ 🌼🚩🌼वैशाखमासस्य शुक्लपक्षस्य तृतीयायां तिथौ एतत् पर्व (अक्षयतृतीया) आचर्यते । अक्षय...
26/04/2020

✨ अक्षयतृतीयाया: हार्दा: शुभकामना:। ✨ 🌼🚩🌼
वैशाखमासस्य शुक्लपक्षस्य तृतीयायां तिथौ एतत् पर्व (अक्षयतृतीया) आचर्यते । अक्षयतृतीयादिनं सर्वेषाम् अपि कार्यक्रमाणाम् अत्यन्तं प्रशस्तं दिनम् । भविष्यपुराणे श्रीकृष्णः एव अस्य दिनस्य असाधारणं महत्त्वं वर्णितवान् अस्ति । 🌸🌸 www.bhagwatbhakti.com

✨ भगवान प्रत्येक जीव में वास करते हैं यह पूर्णतः सत्य हैं , विचार करने का विषय यह हैं कि श्रीप्रभु किस प्रकार और कहाँ वा...
24/03/2020

✨ भगवान प्रत्येक जीव में वास करते हैं यह पूर्णतः सत्य हैं , विचार करने का विषय यह हैं कि श्रीप्रभु किस प्रकार और कहाँ वास करते हैं ? उत्तर यह हैं कि जिस प्रकार सुगंध एक पुष्प में वास करती हैं ठीक उसी प्रकार भगवान प्रत्येक जीव में वास करते हैं । अब प्रश्न यह कि भगवान का प्रकट दर्शन क्यों नहीं होता ? जब भौतिक रूप से इस संसार मे पुष्प की सुगंध का दर्शन नहीं किया जा सकता परंतु अपनी नासिका द्वारा पुष्प की सुगंध का अनुभव किया जा सकता हैं , इसी प्रकार जीव अपनी आंतरिक शक्तियों को स्वकेन्द्रित कर श्रीप्रभु के स्वयं में होने का दिव्य अनुभव प्राप्त कर सकता हैं । हाँ यह संभव हैं , इसमें किसी भी प्रकार का संशय नहीं हैं । भारत के प्राचीनतम सनातन वैदिक विज्ञान के अनुसार ईश्वर के होने का अनुभव करना , प्रकट श्रीदर्शन करना सहज भी हैं और कठिन भी हैं । कठिन इसलिए हैं कि सामान्यता जीव का मन मोहन की माया के वशीभूत स्वयं हो जाता हैं जो स्वाभाविक हैं , कारण यह हैं कि जिस माया का मायापति स्वयं हमारे अंदर सहज रूप से वास कर रहा हैं , तो उसकी ही रची माया से स्नेह होना स्वाभाविक हैं । अब मोहन की माया से अनुरक्त होकर मोहन से मोह लगाना अत्यंत दुष्कर सा प्रतीत होता हैं , यह असंभव सा लक्ष्य सुयोग्य गुरु के सानिध्य और आशीष से प्राप्त किया जा सकता हैं , परंतु सुयोग्य गुरु की प्राप्ति इस कलियुग में सौभाग्य से होती हैं , तो करना क्या चाहिये ..... राधे - राधे रटना चाहिये ..... ठीक शुक ( तोते ) की तरह ...... प्रेम से बोलिये ..... जय जय श्रीराधे ।। जय जय श्रीराधे ।। जय जय श्रीराधे ।। http://www.bhagwatbhakti.com 🌸🌸🚩🌸🌸 ✨

✨ आज का दिन मेरे जीवन मे बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि आज के दिन ही मेरे जीवन मे वर्षों पहले मेरे गोविंद की श्रीकृपा बरसी ...
17/02/2020

✨ आज का दिन मेरे जीवन मे बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि आज के दिन ही मेरे जीवन मे वर्षों पहले मेरे गोविंद की श्रीकृपा बरसी थी ..... जो निरंतर आज भी बरस रहीं हैं । उन्हीं पलों का स्मरण करते हुए कहता हूँ .... हे गोविंद ! आपकी कृपा रूपी स्नेह का वर्णन किन शब्दों से करूँ ! ....जीता हूँ तुम्हें देखकर .... मरता हूँ तुम्हीं पर .... तुम हो जहाँ .... राघव मेरे .... दुनियाँ हैं मेरी वहीं पर .... एक तेरे भरोसे पे ..... चल दिया मैं भगवतभक्ति पथ पर ..... उम्र यूँ ही गुजर जाये ..... तेरे संग गुजर जाये ..... प्रेम से कहता हूँ .... जय जय सीताराम ।। ✨🙏✨ 🌞😊 ✨ 🌸🌸 http://www.bhagwatbhakti.com

✨भारत की प्राचीनतम दिव्य विद्या वैदिक ज्योतिष स्वयं में इतनी शशक्त हैं जिसके अलौकिक ज्ञान से बहुत कुछ जाना जा सकता हैं ,...
11/02/2020

✨भारत की प्राचीनतम दिव्य विद्या वैदिक ज्योतिष स्वयं में इतनी शशक्त हैं जिसके अलौकिक ज्ञान से बहुत कुछ जाना जा सकता हैं , परंतु इसको जानने वाले दैवज्ञ दुर्लभ हो गए हैं। जीवन मे घटने वाली प्रत्येक घटना हमे बीते हुए समय और आने वाले समय के विषय मे स्पष्ट इंगित करती है परंतु अज्ञानतावश अज्ञानी मोहवश इसे समझ नहीं पाते हैं। त्रेता युग में घटी एक घटना आज भी बहुत महत्वपूर्ण हैं ... जब श्रीराम दूत हनुमानजी माँ सीता की सुधि जानने के लिए लंका में प्रवेश करते हैं तो द्वार पर लंकिनी द्वारा रोके जाने पर उसे अपनी मुष्टिका से प्रहार करते हैं जिसके परिणामस्वरूप लंकिनी के मुख से रुधिर की धारा फूट पड़ती हैं और वह कह उठती हैं .... तात मोर अति पुण्य बहूता। देखेउँ नयन राम कर दूता ।। आध्यात्मिक भावार्थ यह हैं कि उसे इस घटना से अपने जीवन मे बीत चुके समय मे ब्रह्माजी द्वारा दिये वरदान का स्मरण हो आया , वर्तमान में श्रीराम दूत का दर्शन पाया , और भविष्य में होने वाली घटना ( श्रीराम द्वारा लंका विजय और श्रीविभीषन जी का लंकाधिपति बनना ) स्पष्ट रूप से दिखी जो श्रीप्रभु कृपा से ही संभव हैं। प्रेम से कहिये ..... जय जय सीताराम ।। ✨🌸🌸 ✨ http://www.bhagwatbhakti.com ✨🌸🌸🌼🌼🌸🌸 ✨

✨ To make your dreams come true consult to Vaidic Astrologer , Numerologer , Tarot-Reader  & Vaastu Expert : Acharya See...
04/02/2020

✨ To make your dreams come true consult to Vaidic Astrologer , Numerologer , Tarot-Reader & Vaastu Expert : Acharya Seemesh Dixit in New Delhi on 22-02-2020 & in Mumbai from 23-02-2020 to 26-02-2020 , Book ur prior appointment now ..On 09807941451 , 09389060681 "Nakshatrashala" offers the following specialised consultation in it's world class facility with positive effects. ✨ Horoscope Analysis with Vaidic Astrolgical predictions( Our Vaidic Expert consultation @ 1100/- per horoscope ) ✨ Gemological suggestion as remedical solution ✨ Palmistry for present & future aspects ✨ Signature Analysis for perfect professional & personal benefits ✨ Vastu Consultation for Home /Vilas/Office / Factory etc. ( Residential & Commercials ) ✨Vaastu Consultation for Residential @ 11000/- & Commercial @ 21000/- ✨Note : 25% concession to our members only ) ✨Tarot-Reading for magical change in Life ✨ Healing therapy ✨ Crystal Therapy ✨ Yoga & Meditational workshop ✨ Pachgavya & Panchkarma Treatments for chronical diseases .✨ Note : All the consultation are available on prior appointment only . For more details log on to our world wide weblink : http://www.nakshatrashala.com mail us on : seemeshdixit@gmail.com

Vaidic Science is a spiritual science blessed by almighty Lord Godhead. All the planets, nakshatras, stars & heavenly bodies well governed by supreme athorities Godhead. No one can able to spiritulate the power of spiritual science without blessing of Godhead. Almighty choose the suitable person its...

वो ही करता है और वो ही करवाता हैऐ बंदे तू क्यों इतना इतराता हैएक भी सांस नहीं है तेरे बस की वो ही जगाता है और वो ही सुला...
03/02/2020

वो ही करता है और वो ही करवाता है
ऐ बंदे तू क्यों इतना इतराता है
एक भी सांस नहीं है तेरे बस की
वो ही जगाता है और वो ही सुलाता है
मेरा मानना है कि संपूर्ण प्रकृति सौन्दर्य से भरी पड़ी है |और सौन्दर्य कुछ भी नहीं बल्कि छिपा हुआ परमात्मा है |जब आप एक सुंदर मानवीय चेहरा देखते हैं, तो यह भगवान का चेहरा है | जब आप दो सुंदर आंखों में देखते हैं,तो आप भगवान के मंदिर में प्रवेश कर रहे हैं |
तुलसी इस संसार में, भांति भांति के लोग।
सबसे हस मिल बोलिए, नदी नाव संजोग॥
तुलसी या संसार में सबसे मिलिये धाय
ना जाने किस वेष में नारायन मिल जाय
तुलसी भरोसे राम के निर्भय है कर सोय
अनहोनी होनी नहीं होनी है सो होय
*🌹 जय जय श्रीराधेकृष्ण 🌹*

राधे श्यामा राधे श्यामा श्यामा श्यामा राधे राधे

सम्पूर्ण प्रकृति नित्य परिवर्तनशील हैं , जो पूर्णतः सत्य हैं । परिवर्तन प्रकृति के मूल में हैं जिसे हम जितना शीघ्र समझ ल...
31/01/2020

सम्पूर्ण प्रकृति नित्य परिवर्तनशील हैं , जो पूर्णतः सत्य हैं । परिवर्तन प्रकृति के मूल में हैं जिसे हम जितना शीघ्र समझ लेंते हैं उतना ही उत्तम रहता हैं। अनेक भगवतभक्तों ने मुझसे प्रश्न किया कि आपके भौतिक चित्र सोशल मीडिया में अधिक नहीं दिखते और न आपकी कोई सेल्फी दिखती हैं , इसके उत्तर हेतु आपको अपने जीवन का एक स्मरण बताता हूँ , संभवता आपके जीवन मे भी कुछ परिवर्तन आ जायें। ईश्वर की कृपा से उत्तम कुल का एक संस्कारित द्विज बालक विज्ञान का विद्वान छात्र अपनी विद्वता के मद में चूर विज्ञान के क्षेष्ठतं पद पर पहुँचने के लिए प्रयत्नशील रहता हैं तभी श्रीभगवत्कृपा से एक श्रेष्ठ आध्यात्मिक गुरु का सानिध्य पाता हैं । जीवन के रहस्यों को जानने की उत्कंठा उसे गोविंद की तरफ प्रेरित कर देती हैं। जीवन मे आये इस परिवर्तन से अनभिघ्य वह सहज ही गोविंद से स्नेह की डोर जोड़ बैठता हैं और आप विश्वास करें या न करें , इसे आप कोई दैववीय कृपा कहें या श्रीगुरु कृपा परंतु मैं तो इसे मेरे गोविंद की श्रीकृपा मानता हूँ जिन्होंने मेरे स्नेह को डोर अपनी प्रीत की डोर से स्वयं ही सहज रूप से बांध दी । इसका प्रभाव यह हुआ कि विज्ञान के तर्क-कुतर्क करने वाला छात्र वैदिक विज्ञान का दैवज्ञ बन गया। अब तो जीवन मे वह सब दिखने लगा जो कल्पना से भी परे था , तभी अचानक आएं परिवर्तन का कारण जानने के अभिलाषा से गोविंद देव के मंदिर गया वहाँ किसी ने मेरा एक चित्र गोविंद संग लिया जिसे देखकर मन का भ्रम मिट सा गया और मन मे सिर्फ एक ही विचार आया ..... कौन जाने किस धरा पे..... मेरे गोविंद का घर होगा । जिसकी रचना इतनी सुंदर ..... वह कितना सुंदर होगा .... वह कितना सुंदर होगा ।। जय जय श्रीराधे ।। www.bhagwatbhakti.com

जय हो बसंत कुञ्ज बिहारी .... राधे श्याम श्यामा श्याम । जय हो सीमेश्वर मन मनुहारी राधे श्याम श्यामा श्याम ।। जय जय श्रीरा...
30/01/2020

जय हो बसंत कुञ्ज बिहारी .... राधे श्याम श्यामा श्याम । जय हो सीमेश्वर मन मनुहारी राधे श्याम श्यामा श्याम ।। जय जय श्रीराधेकृष्ण ।। www.bhagwatbhakti.com

श्रीमद्भगवतगीता में वर्णित श्रीमद्भगवतभक्ति का दिव्य ज्ञान मनुष्य को देवतुल्य बनाने में सक्षम हैं , अपनी बात की सार्थकता...
22/01/2020

श्रीमद्भगवतगीता में वर्णित श्रीमद्भगवतभक्ति का दिव्य ज्ञान मनुष्य को देवतुल्य बनाने में सक्षम हैं , अपनी बात की सार्थकता सिद्ध करने हेतु आपको एक सत्य घटना बताता हूँ ..... भारत के दक्षिण में स्थित चेन्नई में समुद्र के किनारे एक सज्जन धोती कुर्ता में भगवद गीता पढ़ रहे थे।। तभी वहां एक लड़का आया और बोला कि आज साइंस का जमाना है....फिर भी आप लोग ऐसी किताबे पढ़ते हो...देखिए जमाना चांद पर पहुंच गया है...और आप लोग ये गीता रामायण पर ही अटके हुए हो.....

उन सज्जन ने लड़के से पूंछा की "तुम गीता के बारे में क्या जानते हो" www.bhagwatbhakti.com
वो लड़का जोश में आकर बोला-- अरे बकवास....मैं विक्रम साराभाई रीसर्च संस्थान का छात्र हूँ...I m a scientist....ये गीता तो हमारे आगे ....$$

वो सज्जन हसने लगे....तभी दो बड़ी बड़ी गाड़िया वहां आयी...एक गाड़ी से कुछ ब्लैक कमांडो निकले....और एक गाड़ी से एक सैनिक।सैनिक ने पीछे का गेट खोला तो वो सज्जन पुरुष चुपचाप गाड़ी में जाकर बैठ गए...

लड़का ये सब देखकर हक्का बक्का था।। उसने दौड़कर उनसे पूंछा----सर....सर आप कौन है ?

वो सज्जन बोले---तुम जिस विक्रम साराभाई रिसर्च इंस्टीट्यूट में पढ़ते हो मैं वही विक्रम साराभाई हूँ.....

लड़के को 440 वाट का झटका लगा।

इसी भगवद गीता को पढ़कर डॉ अब्दुल कलाम ने आजीवन मांस न खाने की प्रतिज्ञा कर ली थी.... तदन्तर भारत के सर्वोच्च पद पर आसीन हुये ।

गीता एक महाविज्ञान है.....गर्व कीजिये अपनी प्राचीनतम भारतीय सनातन वैदिक संस्कृति पर जो सम्पूर्ण विश्व मे सर्वश्रेष्ठ हैं। प्रेम से कहिये ..... जय जय श्रीराधेकृष्ण ।। www.bhagwatbhakti.com

जब हम निरंतर भगवान को प्रसन्न करने और उनकी सेवा का चयन करते हैं, तो वे हमें भगवतभक्ति के दिव्य पथ द्वारा आध्यात्मिक रूप ...
19/01/2020

जब हम निरंतर भगवान को प्रसन्न करने और उनकी सेवा का चयन करते हैं, तो वे हमें भगवतभक्ति के दिव्य पथ द्वारा आध्यात्मिक रूप से आगे बढ़ने के लिए अधिकाधिक सुविधाएं और मार्गदर्शन देकर पारस्परिक आदान प्रदान करते हैं। श्रीभगवान की प्राप्ति का सुगम मार्ग हैं - भगवतभक्ति । इस दिव्य पथ पर श्रीहरि नाम संकीर्तन करते हुए अग्रसर होते हुए श्रीमहाप्रभु की श्रीकृपा प्राप्त होने पर अलौकिक ब्रह्म के दर्शन सुगमता से होते हैं । जय जय श्रीराधेकृष्ण ।। http://www.bhagwatbhakti.com

People will call us both good or bad. But we shall have to work like lions keeping the ideal before us. Swami Vivekanand...
13/01/2020

People will call us both good or bad. But we shall have to work like lions keeping the ideal before us. Swami Vivekananda ji. My great tribute to the great son of Maa Bhaarti .. Jai HIND www.bhagwatbhakti.com

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