17/03/2026
मुझसे बातें करते हुए इतना क्यूं शर्माती हो
सीरियस बातों पर भी मुस्कुरा जाती हो
इतना तो प्यार करता हूं फिर भी नखरे दिखाती हो
कितना कुछ है कहने को मगर कुछ बोलती नहीं हो बहुत कुछ छिपाती हो
सारी बातें जानते हुए भी अनजान सी बन जाती हो
अपने पास बुलाता हूं जब तो इतना क्यूं घबराती हो
मैं इतनी तारीफें करता हूं तुम्हारी इसलिए मन ही मन इतराती हो
अपना हाथ पकड़ने नहीं देती बस अपनी जुल्फों से खेलने लग जाती हो
मैं तुम्हें छुप छुप कर देखता हूं
और तुम मुझे देखकर छुप जाती हो
2 मिनट में आती हूं कहकर कितना इंतजार करवाती हो
जाना होता है जब कहीं घूमने तैयार होने में घंटों लगाती हो
पुछता हुं जब भी कुछ आज नहीं कल बताऊंगी कहकर बात को घूमा जाती हो
मैं हो जाऊं अगर गुस्सा कभी तो मनाने की जगह पर उल्टा मुझ पर ही गुस्सा हो जाती हो
चली जाऊंगी छोड़कर तुम्हें ऐसी धमकियों से डराती हो
आती मेरे कंधे तक भी नहीं लेकिन सिर पर मेरे चढ़ी रहती हो
जब तुम्हें कुछ चाहिए होता है तुम बड़े अच्छे हो बोलकर अपनी सारी बातें मनवाती हो
कितना प्यार करता हूं तुमसे फिर मुझे इतना क्यूं सताती हो
इतना कुछ लिखता हूं तुम्हारे लिए सब कुछ इग्नोर मार जाती हो
जानती हो सब कुछ की मैं तुम्हारा दीवाना हूं फिर भी चुप रहकर मुझको तड़पाती हो
अपने ये होंठ खोलो ना
प्लीज़ तुम भी मेरे लिए कुछ बोलो ना...!!