Raajeshwar Adiley

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ज्योतिष एक ऐसा विज्ञान है जो हमारे नकारात्मक मनोभावों को सकारात्मक मनोभावों में बदलता हैं।
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26/01/2026
10/01/2026

जन्म कुंडली में जहां हम पंचम भाव से संतान, शिक्षा, कला, खेल, मनोरंजन, का विचार करते हैं। इसी पंचम भाव से हम पूर्व जन्म के पाप के पाप पुण्य कर्म का भी विचार करते हैं, प्रेमी , प्रेमिका का भी विचार करते हैं। पंचम भाव से अपने इष्ट देव कभी विचार करते हैं। इसी पंचम भाव से हम पेट, लिवर, पित्ताशय, बदहजमी, प्लीहा, ऊपरी और मध्य पीठ, रीड की हड्डी, महिलाओं के गर्भाशय का भी विचार किया जाता है। अतः इनसे संबंधित आपके मन में कोई भी विचार आते हैं तो पंचम भाव को देखें।
लीवर के संबंध में विचार करना है तो पंचम भाव के साथ गुरु को देखें।
पित्ताशय के संबंध में विचार करना है तो पंचम भाव के साथ बुध को देखें।
प्लीहा का विचार करना है तो शनि बृहस्पति और राहु को देखें।
गर्भाशय का विचार करना है तो पंचम सप्तम भाव के साथ शुक्र और चंद्रमा को भी देखें।
पेट का विचार करना है तो बृहस्पति को देखें।
रीड की हड्डी के बारे में विचार करना है तो पंचम भाव अष्टम भाव के साथ शनि मंगल सूर्य केतु को भी देखें।
✍️राजेश्वर आदिले

10/01/2026

विवाह
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आजकल विवाह के लिए मुख्य रूप से s4 को देखा जाता है। आप कहेंगे भाई s4 क्या होता है। तो चलिए आदिले जी आपको बताते हैं s4 क्या होता है।
प्रथम s- शिक्षा
द्वितीय, s - सौंदर्य
तृतीय, s - स्टेटस
चतुर्थ, s - सर्विस
इसके साथ और भी कई चीजों को देखा जाता है लेकिन हमें लगता है कि यही महत्वपूर्ण चीज हैं, जिसे आज के जमाने में देखा जाता है।
आदिले जी के अनुसार यदि विवाह में आने वाली समस्याओं को देखें तो
पहले नंबर में आता है कि रिश्ता ही नहीं आता।
दूसरे नंबर में आता है कि रिश्ता तो आता है परंतु सही रिश्ता नहीं आता।
तीसरे नंबर में आता है सही रिश्ता तो आता है परंतु हम डिसाइड नहीं कर पाते।
और चौथे नंबर में आता है सब कुछ तय हो जाता है परंतु फिर भी शादी नहीं हो पाता।
यदि आपके साथ ऐसी समस्या है और आप पहले प्रकार के समस्या से गुजर रहे हैं तो अपनी सामाजिक दायरे को बढ़ाएं। आदिले जी कहते हैं कि शादी, त्यौहार, सामाजिक कार्यक्रम, छठी, मृत्यु जैसे कार्यक्रमों में पूरे परिवार के साथ आना-जाना करें। इससे वहां आपके लड़के को या आपकी लड़की को समाज के लोग, आपके रिश्तेदार लोग देखेंगे जिससे रिश्ते मिलने में सुगमता होगा।
यदि आप दूसरे प्रकार की समस्या से गुजर रहे हैं। जिसके कारण आपके पास सही रिश्ते नहीं आते तो मेट्रोमोनियल या फिर ऐसे लोगों से संपर्क करें जिस प्रकार के स्टेटस/आवश्यकता है के साथ जो लोग आपको जोड़ने में सहायक हो जिसके माध्यम से आपको अपने पसंद के अनुसार रिश्ते मिलने में आसानी हो।
यदि आप तीसरे प्रकार की समस्या से गुजर रहे हैं जिसके कारण आप निर्णय नहीं ले पाते कि किसका चुनाव करें और इसी आपाधापी भी में रिश्ते हाथ से निकल जाते हैं। तो आप किसी ऐसे व्यक्ति का सहयोग ले जो सही सलाह देता हो। और उसके बातों का आप अक्षर सा पालन करें।
यदि आपको चौथी प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है तो आप उन कारणों को ढूंढें जिसके कारण आपके बच्चों का शादी से होते होते रुक जाता है। और कुछ समस्याओं का निराकरण कर दें। ऐसी स्थिति में मध्यस्थों की विशेष भूमिका होता है।
हमारे समाज में देखा जाए तो सर्विस वाले और वह भी अपने स्तर के सर्विस वालों की कमी के कारण लड़कियों की उम्र बहुत ज्यादा बढ़ते जा रहा है।
आदिले जी कहते हैं की ज्यादातर माता-पिता अपने स्टेटस के अनुसार वर ढूंढने की कोशिश करते हैं। परंतु उन्हें अपने स्टेटस के अनुसार रिस्ते नहीं मिलते तो बेटियों की उम्र बढ़ने लग जाता है।
जरा सोचे आप आज से 25 साल पुर्व आपके स्टेटस क्या था। उस समय आप कितना कमा लेते थे। निश्चित ही धीरे-धीरे आपका स्टेटस बड़ा है।
यदि योग्य वर दिखता है तो स्टेटस या सर्विस के पीछे ना भागे। सही समय पर सही चुनाव कर ले ताकि बाद में आपको सिर्फ समझौता ही ना करना पड़े।
दक्षिण भारत में अब बहुत बदलाव आ गया है क्योंकि वह इस समस्याओं से हमसे पहले जूझ चुके हैं, ऐसे ही कई ऐसी जातियां हैं जो इस प्रकार की समस्याओं से पहले ही सामना कर चुके हैं। और वह यह समझ चुके हैं कि सभी को सर्वगुण संपन्न नहीं मिल पाता। कहीं ना कहीं समझौता करना पड़ता है। जिसके कारण एक उच्च पढ़ी-लिखी लड़की का भी विवाह यदि सभ्य एवं संस्कारी परिवार से रिश्ता आता है। जहां लगता है कि उनकी बेटी खुश रहेगी तो विवाह कर देते हैं। ऐसे ही और भी मामले देखने जा रहे हैं। जहां उच्च शिक्षित पढ़ी-लिखी लड़की सर्विस वाली अपने से कमतर या तो सर्विस में है या तो बेरोजगार है ऐसे लड़कों से भी प्रेम विवाह कर लेती है।
लड़के भी सौंदर्य के पीछे ना भागे। स्टेटस को ज्यादा महत्व न दे। अपने ही अनुरूप सर्विस वाली को ज्यादा महत्व न दें। यदि सुयोग्य कन्या दिखती है तो गरीब परिवार की ही क्यों ना रहे तो विवाह करने से पीछे ना रहे।
अतः समय की मांग को समझें और जिद में ना बैठे रहे।
क्योंकि समय निकालने के बाद कुछ भी नहीं बचता सिर्फ हाथ मलते रहना पड़ता है।
✍️ Raajeshwar Adiley
10/1/2024
9:05Am

With Kisse aur Kahaniyaan – I just got recognised as one of their top fans! 🎉
27/12/2025

With Kisse aur Kahaniyaan – I just got recognised as one of their top fans! 🎉

विवाह में विलंब 6
26/12/2025

विवाह में विलंब 6

अभी कुछ दिन पहले एक केस सुनने को मिला। जिसमें प्रेमी ने मधुर संबंध के कारण दो करोड़ लुटा दिया। यदि इस बात को हम ज्योतिष ...
14/12/2025

अभी कुछ दिन पहले एक केस सुनने को मिला। जिसमें प्रेमी ने मधुर संबंध के कारण दो करोड़ लुटा दिया।
यदि इस बात को हम ज्योतिष के दृष्टिकोण से देखते हैं तो पंचम भाव प्रेम का होता है। शुक्र प्रेम का नैसर्गिक कारक होता है। छठवां भाव रोग, ऋण, शत्रु का स्थान है। पंचम भाव से छठा भाव दूसरा भाव होने के कारण प्रेमिका का धन स्थान है। अष्टम भाव गुप्त स्थान है जहां से आकस्मिक परिवर्तन को देखते हैं। यदि अष्टम भाव शुभ ग्रहों के प्रभाव में हो तो जातक को अचानक धन लाभ प्राप्त होता है। लेकिन यही अष्टम भाव यदि पापी ग्रहों के प्रभाव में है तो अचानक से धन हानि भी होता है। पंचम भाव से अष्टम भाव चतुर्थ भाव होता है। अर्थात इस भाव से हम प्रेमिका के घर और वाहन का विचार करते हैं। जबकि द्वादश भाव हमारे खर्च एवं सैया सुख ( प्रेमिका से फिजिकल रिलेशन) का होता है। पंचम भाव से यह द्वादश भाव पंचम भाव का अष्टम भाव होता है। अर्थात अचानक धन लाभ या धन हानि, गुप्त और छिपी हुई चीज़ों से होता है, जिसमें गुप्त संबंध, रहस्य, असामाजिक कार्य, दूसरों के गहरे राज़ और जीवन के अप्रत्याशित पहलू शामिल होते हैं।
चंद्र मंगल , शुक्र और पंचमेश का जब इन भावों से संबंध होता है तो जातक को प्रेम संबंधों में धन हानि का सामना करना पड़ता है।
जैसे कि मान ले मिथुन लग्न की कुंडली है पंचम भाव का स्वामी शुक्र होता है यह शुक्र छठे भाव में हो तो जातक अपनी प्रेमिका को अपार धन लूटता है। उसकी शोक को पूरा करने के लिए कर्ज भी लेता है। यह कह सकते हैं कि जातक अपनी प्रेमिका को आर्थिक रूप से मदद करता है। जिससे प्रेमिका के बैंक बैलेंस बढ़ते हैं। ऐसे कुंडली वाले जातक के साथ उनकी प्रेमिका सिर्फ आर्थिक उन्नति के लिए संबंध बनाती है। जब इस पंचमेश के साथ आठवें भाव के स्वामी का संबंध बनता है। तो जातक को प्रेम संबंधों के कारण बदनामी का भी सामना करना पड़ता है। इस स्थिति में बीमारी या कर्ज के दलदल में भी फस जाता है।
✍️ Raajeshwar Adiley

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