Aghor Tantra

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30/09/2021

निम्न नौ आदतों में सुधार से जीवन में आने वाले परिवर्तन
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१)
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अगर आपको कहीं पर भी थूकने की आदत है तो यह निश्चित है
कि आपको यश, सम्मान अगर मुश्किल से मिल भी जाता है तो कभी टिकेगा ही नहीं . wash basin में ही यह काम कर आया करें ! यश,मान-सम्मान में अभिवृध्दि होगी।
२)
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जिन लोगों को अपनी जूठी थाली या बर्तन वहीं उसी जगह पर छोड़ने की आदत होती है उनको सफलता कभी भी स्थायी रूप से नहीं मिलती.!
बहुत मेहनत करनी पड़ती है और ऐसे लोग अच्छा नाम नहीं कमा पाते.! अगर आप अपने जूठे बर्तनों को उठाकर उनकी सही जगह पर रख आते हैं तो चन्द्रमा और शनि का आप सम्मान करते हैं ! इससे मानसिक शांति बढ़ कर अड़चनें दूर होती हैं।
३)
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जब भी हमारे घर पर कोई भी बाहर से आये, चाहे मेहमान हो या कोई काम करने वाला, उसे स्वच्छ पानी ज़रुर पिलाएं !
ऐसा करने से हम राहु का सम्मान करते हैं.!
जो लोग बाहर से आने वाले लोगों को हमेशा स्वच्छ पानी पिलाते हैं उनके घर में कभी भी राहु का दुष्प्रभाव नहीं पड़ता.! अचानक आ पड़ने वाले कष्ट-संकट नहीं आते।
४)
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घर के पौधे आपके अपने परिवार के सदस्यों जैसे ही होते हैं, उन्हें भी प्यार और थोड़ी देखभाल की जरुरत होती है.!
जिस घर में सुबह-शाम पौधों को पानी दिया जाता है तो हम बुध, सूर्य और चन्द्रमा का सम्मान करते हुए परेशानियों का डटकर सामना कर पाने का सामर्थ्य आ पाता है ! परेशानियां दूर होकर सुकून आता है।
जो लोग नियमित रूप से पौधों को पानी देते हैं, उन लोगों को depression, anxiety जैसी परेशानियाँ नहीं पकड़ पातीं.!
५)🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺
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जो लोग बाहर से आकर अपने चप्पल, जूते, मोज़े इधर-उधर फैंक देते हैं, उन्हें उनके शत्रु बड़ा परेशान करते हैं.!
इससे बचने के लिए अपने चप्पल-जूते करीने से लगाकर रखें, आपकी प्रतिष्ठा बनी रहेगी।
६)
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उन लोगों का राहु और शनि खराब होगा, जो लोग जब भी अपना बिस्तर छोड़ेंगे तो उनका बिस्तर हमेशा फैला हुआ होगा, सिलवटें ज्यादा होंगी, चादर कहीं, तकिया कहीं, कम्बल कहीं ?
उसपर ऐसे लोग अपने पुराने पहने हुए कपडे़ तक फैला कर रखते हैं ! ऐसे लोगों की पूरी दिनचर्या कभी भी व्यवस्थित नहीं रहती, जिसकी वजह से वे खुद भी परेशान रहते हैं और दूसरों को भी परेशान करते हैं.!
इससे बचने के लिए उठते ही स्वयं अपना बिस्तर समेट दें.! जीवन आश्चर्यजनक रूप से सुंदर होता चला जायेगा।
७)
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पैरों की सफाई पर हम लोगों को हर वक्त ख़ास ध्यान देना चाहिए, जो कि हम में से बहुत सारे लोग भूल जाते हैं ! नहाते समय अपने पैरों को अच्छी तरह से धोयें, कभी भी बाहर से आयें तो पांच मिनट रुक कर मुँह और पैर धोयें.!
आप खुद यह पाएंगे कि आपका चिड़चिड़ापन कम होगा, दिमाग की शक्ति बढे़गी और क्रोध
धीरे-धीरे कम होने लगेगा.! आनंद बढ़ेगा।
८)🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺
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रोज़ खाली हाथ घर लौटने पर धीरे-धीरे उस घर से लक्ष्मी चली जाती है और उस घर के सदस्यों में नकारात्मक या निराशा के भाव आने लगते हैं.!
इसके विपरीत घर लौटते समय कुछ न कुछ वस्तु लेकर आएं तो उससे घर में बरकत बनी रहती है.!
उस घर में लक्ष्मी का वास होता जाता है.! हर रोज घर में कुछ न कुछ लेकर आना वृद्धि का सूचक माना गया है.!
ऐसे घर में सुख, समृद्धि और धन हमेशा बढ़ता जाता है और घर में रहने वाले सदस्यों की भी तरक्की होती है.!

९)
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जूठन बिल्कुल न छोड़ें । ठान लें । एकदम तय कर लें। पैसों की कभी कमी नहीं होगी।
अन्यथा नौ के नौ गृहों के खराब होने का खतरा सदैव मंडराता रहेगा। कभी कुछ कभी कुछ । करने के काम पड़े रह जायेंगे और समय व पैसा कहां जायेगा पता ही नहीं चलेगा।🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺
🙏
अच्छी बातें बाँटने से दोगुनी तो होती ही हैं
- अच्छी बातों का महत्त्व समझने वालों में आपकी इज़्जत भी बढ़ती है।

धन्यवाद !

पौरुष शक्ति बढ़ाने के लिए पहना जाता है ये पत्थर, बढ़ने लगता है आकर्षण..... अनेक परेशानियों से निपटने के लिए ज्योतिष विज्ञा...
15/09/2021

पौरुष शक्ति बढ़ाने के लिए पहना जाता है ये पत्थर, बढ़ने लगता है आकर्षण.....

अनेक परेशानियों से निपटने के लिए ज्योतिष विज्ञान सबसे अधिक शुद्ध रत्नों को अहमिय देता है। ये रत्न किसी चमत्कारी इलाज की तरह काम करते हैं, बशर्ते ये शुद्ध होने चाहिए।

रत्न महंगा है या सस्ता इस से फर्क नहीं पड़ता, लेकिन जरूरत के हिसाब से सही पॉवर और वजन वाला रत्न अगर पहना जाए तो यह रिजल्ट देकर ही रहता है,

कम से कम उसे कोई बड़ी शारीरिक परेशानी नहीं है। वे लोग जिन्हें कोई शारीरिक पीड़ा है, वे भी अपने इस दुर्भाग्य को ज्योतिष रत्नों की मदद से सौभाग्य में बदल सकते हैं।

आज हम ऐसे ऐसे रत्न के बारे में बताने जा रहे जिसे पौरुष बढ़ाने वाला माना गया है।

आइए जानते हैं कौन सा है वो रत्न… कहरूवा रत्न

लाल, पीला या सफेद रंग का कहरूवा वनस्पति जाति का उपरत्न है। इसे तृणमणि, कर्पूर, वृक्षनिर्यासमणि, तृणाकर्ष या अंग्रेजी में अम्बेर भी कहा जाता है।

यह रत्न बेहद चमकदार, लेकिन वजन में हल्का होता है। यह रत्न अधिकांशतः बाल्टिक सागर में, इटली और रोमानिया में पाया जाता है।

कहरूवा रत्न के लाभ …,
कहरूवा को धारण करने से व्यक्ति की पौरूष शक्ति में वृद्धि होती है। यह उपरत्न एक प्रकार का वीर्य वर्धक है। इसके अलावा दिल के रोगी भी पहन सकते हैं।

यह उपरत्न ख्रून, पेट व आंतों की कमजोरी दूर करता है। त्वचा संबंधित रोगों को ठीक करके घाव शीघ्रता से भरता है। इसे पहनने से व्यक्तित्व का आकर्षण भी बढ़ता है।

कैसे पहने ....,
कहरूवा को अंगूठी में या फिर किसी भी प्रकार के आभूषण में जरूरत के अनुसार जड़वाकर पहन सकते हैं।

इस उपरत्न का कितना वजन हो और कितने पॉवर वाला कहरूवा पहनना है इसके बारे में ज्योतिषी से सलाह अवश्य ले लें।

किस तरह करें पहचान....
कहरूवा लाल, पीला, सफेद रंग में पाया जाता है। इसे जब हथेलियों के बीच में रखकर रगड़ा जाता है तो कपूर जैसी गंध आती है।

अगर बाल या रेशे पर इससे स्पर्श करवाया जाता है तो यह चुंबक की भांति उन्हें अपनी ओर खींच लेता है।

यदि इसे आग के समीप रखा जाए तो मोम की तरह गंध छोड़ता हुआ जलने लग जाता है।

अगर इन तीनों प्रयोगों को करने पर आपको सही रिजल्ट मिल रहा है तो समझ जाएं कि आपके द्वारा खरीदा गया कहरूवा सही और शुद्ध है।

यह रत्न काफी लोगों पर प्रयोग किया हुआ है। सौ परसेंट लाभ लिया हुआ रत्ना है आप भी यदि इस तरह की समस्याओं में फंसे हुए हैं

तो आप ओरिजिनल साधना सिद्ध किया हुआ रखना हम से प्राप्त करके आप धारण करें। निश्चित ही लाभ होगा। यह हमारा वादा है। और अधिक जानकारी। के लिए संपर्क करें

संपर्क सूत्र -first wts details 6377625948
रत्न शुल्क 2900 ₹

17/07/2021

बहुत सारे लोगों के मन में यह भ्रम है कि भस्मासुर से भगवान शिव को बचाने के लिए भगवान विष्णु मोहिनी रूप धारण किए थे.... अगर भगवान विष्णु भस्मासुर से भगवान शिव को ना बचाते तो.... भगवान शिव का क्या होता ..?क्या भगवान शिव अपने वरदान के कारण मारे जाते.....

और भगवान विष्णु के इतने नाम होने के पश्चात भी पुंडरीकाक्ष नाम को किसी भी अनुष्ठान पूजन आराधना या साधना से पूर्व स्मरण क्यों किया जाता है..??
शिव आज भी गुरु हैं-दिव्यधाम

चलिए आज लोगों के मन का यह भ्रम भी हम दूर कर देते हैं... एक बार दैत्य दानव तथा असुरों की पीड़ा से संतप्त होकर सभी देवी देवता भगवान विष्णु के शरणागत हुए । दैत्य दानव तथा असुरों के नाश के लिए वह सब मिलकर भगवान विष्णु को प्रार्थना करने लगे । देवी देवताओं की आर्त नाद को श्रवण करके भगवान विष्णु ने जाकर दानवों का शहर करने लगे । पर दैत्य दानव तथा सूर असुर गुरु शुक्राचार्य के सायता से भगवान विष्णु की हर बाण को वस्त्र तथा शस्त्र को निष्फल करने लगे । तब भगवान विष्णु ने चिंतित हो पड़े तथा... एक अमोघ शक्ति संपन्न अस्त्र प्राप्ति हेतु केदार क्षेत्र में जाकर भगवान शिव की तपस्या करने लगे । प्रतिदिन भगवान विष्णु 1008 नील कमल के पुष्प भगवान शिव के 1/1 नाम मुख में धारण पूर्वक भगवान शिव की शिवलिंग पर अर्पित करने लगे । इस प्रकार कालांतर पर्यंत भगवान विष्णु भगवान शिव का तपस्या करते करते उनका आराधना करते करते स्वयं तपोमूर्ति बन गए । उनका तप: उर्जा के कारण पूरे ब्रह्मांड पिघलने लगा । तब एक दिन भगवान शिव उनके ऊपर प्रसन्न हो गए और भगवान विष्णु को परीक्षा करने के लिए उन्होंने भगवान विष्णु के द्वारा लाई गई 1008 नीलकमल से एक नीलकमल को छिपा डाली । भगवान विष्णु भगवान शिव के सहस्रनाम से शिवलिंग पर पुष्प अर्चन करने लगे ...। जब भगवान विष्णु ने शिव सहस्त्रनाम के जरिए शिवलिंग के ऊपर 1007 नीलकमल चढ़ा चुके थे उनको परीषेष बाला नीलकमल नहीं मिला । भगवान विष्णु मन ही मन सोचने लगे आज 1 दिन के लिए मेरा पूरे पुण्य फल में नष्ट होने नहीं दूंगा । मैं कहीं से भी नीलकमल लाऊंगा । फिर भगवान विष्णु मन ही मन सोचने लगे... की वास्तव में परम ब्रह्म के द्वारा दी गई दो आंखें भी नीलकमल ही है क्योंकि यह दोनों आंख हमेशा परमेश्वर के श्री चरणों में लगा रहता है.... भगवान नारायण ने यह सोचकर अपने दोनों आंखों में से एक आंख को निकाल लीए... और भगवान शिव को बोले हे परमात्मा... आज भ्रम के कारण में 1008 नीलकमल के जगह 1007 नीलकमल लाया था उसी 1008 नंबर वाला नीलकमल की परिपूर्ति हेतु.. मैं अपना कमल(पद्म) स्वरूप आंख को आपको अर्पित कर रहा हूं 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻 । भगवान विष्णु के दृढतम भक्ति को देखकर भगवान शिव प्रसन्न हो गए । और उन्होंने बोले... हे विष्णु मैं तुम्हारी भक्ति में आती से प्रसन्न हूं वरदान देने से पूर्व में अपनी तरफ से आपको एक वरदान देता हूं ... । आप आज 1008 नीलकमल की परीपूर्ति हेतु... स्वयं अपना एक आंख निकाल कर मुझे अर्पित कर दीए.... आपकी इस भक्ति भाव अपने में अतिसय प्रसन्न हूं... आप अपने आखं को पद्म स्वरूप में मुझे अर्पित की.... और पद्म का अन्य नाम पुंडरीक होता है... और तुम तुम्हारे आंख को पुंडरीक की भांति मेरे शिवलिंग पर अर्पित किए हो... इसीलिए मैं स्वयं आज आपको एक अति सुंदर नाम प्रदान करता हूं ।
"""""आज से आप का एक नाम पुंडरीकाक्ष होगा"""""""
शिव भक्ति के जरिए तुम जितने भी तप: शक्ति अर्जित किए हो.... उन तप: शक्ति के बल पर मैं तुम्हें तुम्हारे इच्छा अनुसार वर प्रदान करूंगा । पर आपका जो बाकी का शिव भक्ति संपन्न तप: ऊर्जा ब्रह्मांड को दहन करने में लगा है... वह सारी शिव भक्ति संपन्न तप: उर्जा को... मैं तुम्हारी """पुंडरीकाक्ष"""नाम में समाहित करता हूं । इसलिए जो कोई भी प्राणी चाहें वह कितना बड़ा पाप क्यों ना किया हो जब आपके इस चरित्र को स्मरण करके या फिर श्रवण करके पुंडरीकाक्ष नाम को.... सूची अवस्था में हो या असूची अवस्था में हो स्मरण करेगा उसका बाह्य अभ्यंतर सभी प्रकार के पाप राशि नष्ट हो जाएगा 👍👍👍 ।
👉ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा।
यः स्मरेत्पुंडरीकाक्षं स बाह्याभ्यंतरः शुचिः॥

इसके पश्चात भगवान विष्णु ने साष्टांग प्रणिपात करके भगवान शिव को यह वरदान मांगे की हे भगवान... मैं मेरे लिए कुछ नहीं मांग रहा हूं... दैत्य दानव तथा असुरों की पीड़ा से देवस्थली कांप रहाहै । प्रभु हमारे ऊपर कृपा कीजिए... और दया पूर्वक एक ऐसा अमोघ अस्त्र मुझे प्रदान करें जिसका काट किसी के पास भी ना हो वह अमोघ हो... । भगवान शिव भगवान विष्णु जी की बच्चन को सुनकर प्रसन्न हो गए और उन्हें सुदर्शन चक्र प्रदान किये ...., और बोले... 👉हे विष्णु यहां सुदर्शन चक्र अमोघ है
। जाओ इसके सहायता से अधर्मीदानवों दैत्यों तथा असुरों का वध करो ।
पर भगवान विष्णु बोले हे भगवान शिव यह अस्त्र अमोघ है या नहीं... मैं कैसे पता करूं और किसके ऊपर इसका में प्रयोग करूं....। हे प्रभु भगवान शिव क्या मैं आपके ऊपर यह अमोघ अस्त्र प्रयोग कर सकता हूं...??? परमेश्वर शिव बोले 👉हां... आप निश्चिंत होकर यह मेरे ऊपर प्रयोग करें....। अव भगवान विष्णु बह दिव्य सुदर्शन चक्र को... भगवान शिव के ऊपर छोड़ दीए । और भगवान शिव तीन खंड में विभक्त होगये.... । यह सब देख कर भगवान विष्णु कहां पर हो उठे और रोने लगे वह मन ही मन दुखी हो गए कि वह अपना ही स्ट का बध कर दी...
पर अकस्मात आकाशवाणी हुई 👉""हे विष्णु संसार में ऐसा कोई अस्त्र नहीं है शस्त्र नहीं है... अभीश्राप नहीं है.. और वरदान नहीं है जो मेरा अंत कर पाए । मैं जेष्ठ भी हूं.. मध्यम भी हूं और कनिष्ठ भी मैं ही हूं....... मैं पूर्व में भी था और अंत में भी रहूंगा । बुध अर्थात ज्ञानी व्यक्ति मुझे ही इस प्रकार जानते हैं । इसलिए मेरा तीन खंड में विभक्त हो ना या एक लीला है ताकि मैं मेरे वरदान का मान रखना चाहता था । और मेरा इस लीला के लिए आज से मेरा एक नाम होगा 👉 "त्र्यंबक"अर्थात जो तीनों कालों में.. स्थित हैं

""ॐ नमो ज्येष्ठाय च कनिष्ठाय च नमः पूर्वजाय चापरजाय च| नमो मध्यमाय चापगल्भाय च नमो जघन्याय च बुधन्याय च||""

अब आते हैं मूल प्रश्न के पास । भगवान विष्णु किस को बचाने आए थे भगवान शिव को....???? इसका उत्तर है नहीं क्योंकि यदि भस्मासुर भगवान शिव के मस्तक पर हाथ दे देता तो भगवान शिव अपने वरदान के रक्षा के कारण अपने बीमर्ष शक्ति के जरिए... अपने आप को " निराकार सुन्य परम ब्रह्म" कर देते । और इसके उपरांत ब्रह्मा विष्णु इंद्र संपूर्ण देवलोक के साथ-साथ यक्ष रक्ष गंधर्व किन्नर... तथा संपूर्ण 14 कोटी ब्रम्हांड उस "निराकार सुन्य परम ब्रह्म" में समाहित हो जाता । पर अंत में भगवान शिव उनकी विमर्श शक्ति के साथ महाप्रलय तांडव नृत्य रचित जिसका वर्णन योग वशिष्ठ रामायण में मिलता है । और उसके पश्चात पून: सृष्टि का सृजन होता । और फिर एक नई कल्पनव का प्रारंभ होता है । पर भगवान विष्णु पालनहार होने हेतु यह नहीं चाहते थे कि अकाल में ही एक कल्प विलीन हो जाए... सिर्फ इसी कारण भगवान विष्णु शिव की रक्षा के लिए नहीं अपितु सृष्टि की रक्षा के लिए भस्मासुर के पास गए थे । और बहुत लोग यह कहते हैं कि भस्मासुर जब भगवान शिव को दौड़ाने लगा तो भगवान शिव दौड़ने लगे... तब यहां पर... मैं उन सभी लोगों को यह कह देना चाहता हूं कि भगवान शिव को दौड़ने का कोई आवश्यकता नहीं है.... भगवान शिव यदि चाहते तो वहां से अदृश्य हो पाते... क्योंकि वह संसार के सार भूत हैं । और उनका नाम निशान तक भस्मासुर नहीं प्राप्त कर पाता । पर जो यह सोचते हैं कि भगवान शिव दौड़ने लगे.... तो मैं उनको उनकी भाषा में जवाब दे रहा हूं भगवान शिव अगर दौड़ने लगे थे तो... अपने लिए नहीं क्योंकि मैं इसका प्रमाण ऊपर दिया हूं.... वह केवल ही केवल सृष्टि रक्षा के लिए दौड़े थे ताकि यदि उनके मस्तक पर भस्मासुर हाथ दे दिया... तो उनको... अपना वरदान का मान रखना पड़ेगा और अपने आप को अपना मूल तत्व"निराकार सुन्य परम ब्रह्म"होना होगा । और जब हो निराकार सुन्य परम ब्रह्म" हो जाएंगे.... तब ब्रह्मा विष्णु इंद्र संपूर्ण देवलोक के साथ-साथ यक्ष रक्ष गंधर्व किन्नर... तथा संपूर्ण 14 कोटी ब्रम्हांड उस "निराकार सुन्य परम ब्रह्म" में समाहित हो जाएगा । और फिर से भगवान शिव अपने निराकार सुन्य परम ब्रह्म स्वरूप में अपनी बीमर्ष सक्ति के साथ मिलत होकर... एक नए कल्प का प्रारंभ करना होगा.... और अकाल में इस वर्तमान की कल्प नष्ट हो जाएगा...। भगवान शिव यह सब सोचकर दौड़े था

घृतात् परं मण्डमिवातिसूक्ष्मं
ज्ञात्वा शिवं सर्वभूतेषु गृढम् ।
विश्वस्यैकं परिवेष्टितारं
ज्ञात्वा देवं मुच्यते सर्वपाशैः

🌹शिव आज भी गुरु हैं-दिव्यधाम

17/07/2021

*👇👇"ग्रहों को active करने वाली कुछ बातें"👇👇*

सुबह "ब्रह्म मुहूर्त" में उठे
निम्नलिखित कार्य करे उस दिन के लिए आप के सभी ग्रह अनुकूल हो जायेंगे और दिन भर एक दिव्य शक्ति की अनुभूति होती रहेगी

सुबह उठ कर सबसे पहले अपने "माँ बाबू जी " के चरण सपर्श करे उस दिन के लिए "सूर्य चन्द्र" बहुत ही शुभ फल देंगे रोजाना शुभ फल चाहते हो तो रोज यह कार्य जरूर करें
|
एक गिलास गर्म पानी पियें जल(चन्द्र) का यह प्रवाह आपके शरीर की सारी नसों को खोल देगा
|
दांत साफ़ करके घर से निकल कर सैर करने जाए और घास पर नंगे पाँव चले इससे आप का "बुध" बलवान होगा
|
सैर पर आप अपनी पत्नी को भी ले जाएँ "पत्नी" साथ होगी तो सुबह की सैर का "लुत्फ़" ही कुछ और होगा (थोडा सा रोमानी हो जाए )दिन भर स्फूर्ति रहेगी तो "शुक्र" का रोमांस भी आप के साथ होगा
|
घर से जब चले तो साथ में कुछ खाने का सामान "Bread" वगैरह लेकर जाएँ कई बार रास्ते में आवारा "कुत्ते" मिलतें है उन्हें Bread खाने को दे जिससे आप का "केतु" भी अनुकूल होगा क्योंकि "कुत्ता जाति को माना गया है दरवेश ,इसकी प्रार्थना करती प्रभु के घर प्रवेश "
|
पन्द्रह बीस मिनट कसरत करें, जिम जाते हैं तो आप का "मंगल" आप को चुस्त दरुस्त रखेगा
|
नहाने से पहले सरसों के तेल की मालिश करें "शनि" की कमी भी दूर हो जायेगी
|
नहाने के बाद श्रद्धा अनुसार पूजा पाठ से "गुरु" भी active हो जायेंगे
|
भगवान् सूर्य को जल दे "राहू" के दोष भी शांत होते हैं
|
आज कल गर्मियाँ हैं गली मोहल्ले में सुबह सफाई कर्मचारी झाड़ू लगाने आता है उसे ठंडा पानी पिलाए या कुछ खिला दे "राहू" की आशीष भी मिल जायेगी
|
अगर आप यह प्रतिदिन "नियम" से करेंगे तो जीवन में एक "अनुशासन" आएगा तो समझ ले "सूर्य" भी अनुकूल हो गया क्योंकि वक़्त की पाबंदी सीखनी है तो "सूर्य" से सीखें,सूर्य सभी ग्रहों के दोषों को हर लेता है।

27/06/2021
More details 6377625948
01/06/2021

More details 6377625948

आकस्मिक धन प्राप्ति शिवलिंग लाॅकेट(राहु, केतु दोष, शेयर बाजार और मार्केटिंग के व्यवसाय के लिए )इस शिवलिंग की शक्ति राहु ...
27/05/2021

आकस्मिक धन प्राप्ति शिवलिंग लाॅकेट(राहु, केतु दोष, शेयर बाजार और मार्केटिंग के व्यवसाय के लिए )
इस शिवलिंग की शक्ति राहु और केतु को नियंत्रित करती है इस शिवलिंग को तारा तारिणी शिवलिंग कहा जाता है तारा महाविद्या जिन्हें तंत्र की लक्ष्मी भी कहा जाता है और नरमदेश्वर शिवलिंग के संगम से बना है, उसे पहनने से आपकी बौद्धिक क्षमता का विकास होगा और आप अपने व्यापार के लिए सही निर्णय ले पाएंगे।जो भी कोई नया व्यापार करना चाहता है, प्रॉपर्टी या शेयर मार्किट में धन लगाना चाहता है, या धन कमाना चाहता है, इस शिवलिंग में राहु और केतु का महाबल होता है, ये शिवलिंग किसी भी कंगाल को मालामाल बना सकता है। इस शिवलिंग में माँ तारा और भगवान शिव का शक्ति अंश होता है, जो अचानक धन लाभ का मार्ग खोलता है।
प्राप्त करने के लिये अपनी फोटो, नाम और जन्म तिथि भेज कर सम्पर्क करें 6377625948

तारा तारिणी शिवलिंग तारा तारिणी शिवलिंग जो तारा महाविद्या जिन्हें तंत्र की लक्ष्मी भी कहा जाता है और नरमदेश्वर शिवलिंग  ...
26/05/2021

तारा तारिणी शिवलिंग

तारा तारिणी शिवलिंग जो तारा महाविद्या जिन्हें तंत्र की लक्ष्मी भी कहा जाता है और नरमदेश्वर शिवलिंग के संगम से बना है, उसे पहनने से आपकी बौद्धिक क्षमता का विकास होगा और आप अपने व्यापार के लिए सही निर्णय ले पाएंगे।

जो भी कोई नया व्यापार करना चाहता है, प्रॉपर्टी या शेयर मार्किट में धन लगाना चाहता है, या धन कमाना चाहता है, वो इस तारा तारिणी शिवलिंग को जरूर धारण करें।

जो लोग व्यापार करते हैं, या उस क्षेत्र से जुड़े हैं उन लोगो के लिए यह तारा तारिणी शिवलिंग किसी वरदान से कम नहीं है।

इस शिवलिंग में राहु और केतु का महाबल होता है, ये शिवलिंग किसी भी कंगाल को मालामाल बना सकता है।

राहु और केतु को माँ तारा नियंत्रित करती है और इस शिवलिंग में माँ तारा और भगवान शिव का शक्ति अंश होता है, जो अचानक धन लाभ का मार्ग खोलता है।

प्राप्त करने के लिये अपनी फोटो, नाम और जन्म तिथि भेज कर सम्पर्क करें 6377625948

Dhumak prayog sadhana jyest amavsya on 10th june
25/05/2021

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