05/02/2026
माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा की संवेदनशी पहल से शुरू हुई रामाश्रय वार्ड पहल आज प्रदेश के बुजुर्गों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा और सम्मानजनक उपचार का मजबूत आधार बन चुकी है। चिकित्सा मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के मार्गदर्शन और निरंतर निगरानी में 14 मार्च 2024 से प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में प्रारंभ किए गए विशेष जीरियाट्रिक वार्ड एवं क्लिनिक अब तक करीब 32 लाख वृद्धजनों के लिए सहारा और विश्वास का केंद्र बने हैं।
“ना चक्कर, ना इलाज की चिंता” — अब बुजुर्गों को बार-बार अस्पताल के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। चिकित्सा मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के निर्देशानुसार बेड पर ही जांच, सैम्पल संग्रह और रिपोर्ट उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, जिससे उन्हें सहज, सुरक्षित और सम्मानपूर्ण उपचार मिल रहा है।
आंकड़े स्वयं सफलता की कहानी कह रहे हैं — लगभग 30 लाख वृद्धजनों ने ओपीडी सेवाओं का लाभ लिया, करीब 2 लाख को आईपीडी सेवाएं मिलीं, 18 लाख से अधिक लैब टेस्ट किए गए, 44 हजार से अधिक रोगियों को फिजियोथैरेपी सुविधा दी गई तथा 8 हजार से अधिक वृद्धजनों को उच्च स्तरीय उपचार हेतु रैफर किया गया।
प्रत्येक रामाश्रय वार्ड में 10 फाउलर बेड, नर्सिंग अलार्म सिस्टम, महिला-पुरुष हेतु पृथक शौचालय, ग्रेब-बार जैसी सहायक सुविधाएं तथा आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित फिजियोथैरेपी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। चिकित्सा मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के नेतृत्व में समर्पित नोडल अधिकारी, नर्सिंग स्टाफ और विशेष व्यवस्थाएं इस पहल को प्रभावी रूप से संचालित कर रही हैं, जिससे यह योजना बुजुर्गों के लिए गरिमा और सेवा का प्रतीक बन गई है।
रामाश्रय वार्ड केवल एक स्वास्थ्य योजना नहीं, बल्कि बुजुर्गों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व का जीवंत उदाहरण है। “जब नीति में करुणा जुड़ती है, तो उसका लाभ समाज के सबसे अनुभवी वर्ग तक सम्मान के साथ पहुंचता है।”
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